कुमार विश्वास को कवि अमित शर्मा ने किया इनकार, मैं अन्ना के आन्दोलन में नहीं आ सकता क्योंकि?

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नई दिल्ली, 26 मार्च: धरनागुरु अन्ना हजारे दिल्ली में मोदी सरकार के खिलाफ आन्दोलन कर रहे हैं. आज आन्दोलन का चौथा दिन है और इसकी धार पहले दिन से ही कुंद पड़ी है, इस आन्दोलन में कुमार विश्वास, योगेन्द्र सिंह और प्रशांत भूषण मैनेज कर रहे हैं लेकिन युवाओं ने आन्दोलन से दूरी बना रखी है. आन्दोलन में भीड़ लाने के लिए कुमार विश्वास ने युवा राष्ट्रवादी कवि अमित शर्मा से संपर्क किया और उन्हें आन्दोलन में आने का न्योता दिया लेकिन कवि अमित शर्मा ने अन्ना के आन्दोलन में आने से इनकार कर दिया और उनसे माफी मांग ली. अपनी जवाब में अमित शर्मा ने कुमार विश्वास का नाम तो नहीं लिखा है लेकिन हमारा दावा है कि उन्होंने कुमार विश्वास को ही जवाब दिया है क्योंकि दोनों ही कवि हैं और अमित शर्मा कुमार विश्वास को अपना बड़ा भाई मानते हैं और उनका सम्मान करते हैं लेकिन देश और धर्म के लिए किसी से समझौता नहीं करते.

क्या कहा अमित शर्मा ने

India Against corruption में मुख्य भूमिका निभाने वाले मेरे बड़े भैया (नाम नही लिखूँगा) के बहुत सारे फोन और मेसेज मुझे मिल रहे है, भैया बोल रहे है कि अमित आंदोलन को आपकी जरुरत है आप अन्ना जी के मंच पर आकर उसे संचालित करने का कार्य करे। भैया क्षमा माँगते हुए कहना चाहता हूँ अब मुझे किसी भी आंदोलन पर विश्वास नही रहा। मैंने अन्ना जी का साथ उनके गाँव से लेकर जंतर मंतर और रामलीला मैदान तक निभाया। हम सब तिहाड़ जेल के बाहर तब तक खड़े रहे जब तक अन्ना जी को मुक्त नही कर दिया।

अमित शर्मा ने आगे लिखा – जंतर मंतर पर अरविंद एंड पार्टी तो मंच के पीछे बने टाट में सो जाती थी, मैं अख़बार बिछाकर सड़क पर सोता था। भैया आप समझते होंगे एक अच्छे घर के लड़के को रात भर बाहर रहने के लिए किस तरह घरवालों को समझाना पड़ता होगा और कितने झूठ के हिमालय खड़े करने पड़ते होंगे। पूरे आंदोलन के दौरान दिल्ली पुलिस ने लाठी द्वारा हमारा कई बार नागरिक अभिनंदन किया था। आँसू गैस और पानी हमारे ऊपर ऐसे चढ़ाया जाता था जैसे दिल्ली पुलिस बहुत बड़ी शिव भक्त है और आधुनिक महादेव हम ही है.

अमित शर्मा ने यह भी बताया कि – मैं आपके आदेश पर आर. के. पुरम में भी एक विष कन्या का प्रचार करने आया था। इतना इसलिए सहन किया कि अन्ना जी के सागर मंथन से कोई कामधेनु, सुरभि या कल्पवृक्ष निकलेंगे। पर क्या करे अन्ना मंथन से तो गिरगिट, क़व्वा, अफ़लातून और निरा विष ही बाहर आया और ये आम जनता इस नमूने के विष को रोज पी रही है और इंसान होकर भी जी रही है। अन्ना जी ने आंदोलन से पहले मीडिया में “मोदी मुक्त भारत” का सपना बताया। भैया हम “मोदी मुक्त भारत” नही “मोदी युक्त भारत” चाहते है। हमारी मोदी जी से असहमति रहती है लेकिन धर्म का विकल्प भी वो ही है। अगर अन्ना जी, भ्रष्टाचार, जनसंख्या वृद्धि या किसी और समस्या की मुक्ति की बात करते तो हमें भी खुशी होती और देश- धर्म के लिए हम किसी के भी खिलाफ जा सकते है। भैया आज इस पोस्ट के माध्यम से मैं आपसे क्षमा माँग रहा हूँ। लगातार यात्रा में हूँ इसलिए फोन नही उठा पाया। आशा है आप छोटे भाई की मजबूरी को समझेंगे और पहले की तरह प्यार बनाए रखेंगे। हर हर महादेव.