कश्मीर में बात नहीं महाराज शिवाजी बनकर देशद्रोहियों को निपटाने की जरूरत है: मनोहर पर्रिकर

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पणजी, 15 अप्रैल: भारत के पूर्व रक्षा मंत्री और गोवा के वर्तमान मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर ने खुलासा किया है कि केंद्र में काम करने में उन्हें मजा नहीं आया क्योंकि यहाँ पर कई मुद्दे ऐसे थे जिसके लिए खुलकर एक्शन लेने की जरूरत थी जिसमें कश्मीर भी एक मसला था जो काफी जटिल था, उन्होंने कहा कि कश्मीर मसले को हल करना आसान नहीं है और एक दीर्घकालिक नीति बनाकर ही इस मसले को सुलझाया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि मैं शिवाजी महाराज को अपना आदर्श मानता हूँ और उन्हीं के जैसा बनना चाहता हूँ, उनके जैसा बनने का मतलब है उन्हीं के जैसे काम करना, कश्मीर मसले पर भी एक नीति बनाकर उन्हीं के जैसे काम करने की जरूरत थी लेकिन मुझपर इतना दबाव था कि मैं शिवाजी की तरह काम नहीं कर पाया, यही वजह थी कि मुझे वापस गोवा लौटने का विचार आया. उन्होंने इशारों इशारों में कहा कि कश्मीर के देशद्रोहियों को एक नीति बनाकर निपटाने की जरूरत है लेकिन मैं ऐसा नहीं कर पाया.

उन्होंने कहा कि नई दिल्ली में रहना उनकी आदत में नहीं है, दिल्ली मेरी जगह नहीं है। यह ऐसी जगह नहीं है जिसका मुझे आदत हो जाए। वहां मेरे ऊपर बहुत ज्यादा दबाव था।”

पर्रिकर ने कहा कि मीडिया में चर्चा से उद्देश्यों के क्रियान्वयन में गड़बड़ी आती है।

उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि कुछ चीजों में चर्चा कम से कम होनी चाहिए और एक्शन चाहिए। चर्चा से इसमें गड़बड़ी आ सकती है।”

कश्मीर मुद्दे को हल करने के बारे में कुछ सवाल पूछे जाने पर उन्होंने मीडिया के बारे में कहा, “क्या आप चाहते हैं कि यह चीज घटित हो या आप इस चीज को खबर बनाना चाहते हैं?”

उन्होंने कहा कि चर्चा से बहुत से विचार सामने आते हैं, जो निर्णय लेने में बाधा साबित हो सकते हैं।

पर्रिकर ने कहा, “अगर आप चाहते हैं कि यह काम हो तो आप इस पर खबरों में बहुत ज्यादा चर्चा मत करें। जब चर्चा की जाती है तो एक व्यक्ति एक बात कहता है जबकि कोई दूसरा व्यक्ति दूसरी बात कहता है।”

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