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Nov 20, 2017

एक महीने पहले हुई थी शादी, पति ने फोन पर दे दिया तलाक, मुस्लिम महिला बोली 'अब मैं क्या करूँ'

एक महीने पहले हुई थी शादी, पति ने फोन पर दे दिया तलाक, मुस्लिम महिला बोली 'अब मैं क्या करूँ'

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक पर बैन लगा दिया है और भारत सरकार को जल्द ही इस पर कानून बनाने का भी आदेश दिया है इसके बावजूद भी गलत सोच वाले लोग सुप्रीम कोर्ट की बात मानने को तैयार नहीं हैं और शरियत कानून के अनुसार ही चल रहे हैं.

मुस्लिम समाज के लोग अभी भी अपनी बीवियों को तीन बार तलाक तलाक तलाक बोलकर छोड़ रहे हैं, ताजा खबर हैदराबाद से आयी है, रिपोर्ट के मुताबिक़ मुताबिक़ हैदराबाद में आथिया बेगम नाम की एक मुस्लिम महिला को उसके पति शेख सरदार मजहर ने फोन पर तलाक ने दिया है।

महिला बहुत दुखी है क्योंकि एक महीने पहले ही उसकी शेख से शादी हुई थी, 13 नवम्बर को उसनें अपनी नयी नवेली बीवी को तीन बार तलाक तलाक तलाक बोल दिया. शिकायत के बाद पुलिस ने शेख के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

Nov 15, 2017

दाऊद के होटल को शौचालय नहीं बनवा पाएंगे स्वामी चक्रपाणि, सपना रह गया अधूरा

दाऊद के होटल को शौचालय नहीं बनवा पाएंगे स्वामी चक्रपाणि, सपना रह गया अधूरा

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खतरनाक आतंकवादी दाऊद इब्राहिम को भारत सरकार ने भगोड़ा घोषित कर रखा हैं. 1993 के मुंबई बम धमाको का अंजाम करने के कुछ समय बाद ही वह भारत से भाग गया था, एक समय उसका मुंबई पर राज चलता था, मुंबई में हजारों करोड़ की संपत्ति का मालिक था लेकिन धीरे धीरे उसके गैंग को समाप्त कर दिया गया, सभी संपत्तियां ख़त्म होती गयीं और आज बची खुची संपत्ति भी नीलाम कर दी गयी.

हिन्दू महासभा के अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि दाऊद के होटल को खरीदना चाहते थे और उसपर लोगों के हल्का होने के लिए शौचालय बनाना चाहते थे, लेकिन उनका सपना पूरा नहीं हुआ क्योंकि नीलामी में बोली अधिक लगने के कारण वह उसका होटल रौनक नहीं खरीद सके. 

वह दाऊद के होटल को तोड़कर शौचालय बनाना चाहते थे. स्वामी चक्रपाणि के होटल को तोड़कर शौचालय बनाने के पीछे एक मकसद छुपा हुआ था. वह दाऊद को संदेश देना चाहते थे, जिस जमीन पर तुमने होटल बनाया, उस जमीन पर आज लोग शौच करते हैं, हल्के होते हैं. 

आपको बता दें कि स्वामी चक्रपाणि ने दिसंबर 2015 में दाऊद की हुंडई एसेंट कार 32,000 रुपये में खरीदी थी। इसके बाद में उन्होंने गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित अपने घर के बाहर आग लगा दी थी. इसके बाद उन्हें जान से मार देने की धमकी भी मिली थी. लेकिन फिर भी स्वामी चक्रपाणि ने दाऊद के होटल खरीद कर उसे तोड़ने की हिम्मत दिखाई.

Nov 14, 2017

मुर्गी का रेप करके बुरा फंसा पाकिस्तानी युवक, दर्द से तड़पकर मुर्गी की मौत, युवक गिरफ्तार

मुर्गी का रेप करके बुरा फंसा पाकिस्तानी युवक, दर्द से तड़पकर मुर्गी की मौत, युवक गिरफ्तार

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नई दिल्ली: पाकिस्तान से एक हैरान करने वाली खबर आयी है, वहां पर एक 14 साल के पाकिस्तानी युवक ने मुर्गी का ही रेप कर दिया, पुलिस के पास जैसे ही अपराध की शिकायत की गयी, युवक को गिरफ्तार कर लिया गया, यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है और पाकिस्तान की जमकर फजीहत भी हो रही है.

रिपोर्ट के मुताबिक़ 14 साल का आरोपी युवक पंजाब के हजीबाबाद के जलालाबाद का रहने वाला है, उसनें अपने पड़ोस में रहने वाले व्यक्ति की मुर्गी को अकेले में पकड़कर उसके साथ रेप की वारदात को अंजाम दिया जिसके बाद दर्द से तड़पकर मुर्गी की मौत हो गयी.

इस घटना के बाद मुर्गी के मालिक ने पुलिस में इसकी शिकायत की, युवक के खिलाप तुरंत ही मामला दर्ज करके उसे गिरफ्तार कर लिया गया.

Nov 10, 2017

शिक्षा खरीदने के लिए पागल हुए माँ-बाप, अंधी हुए सरकार, छात्र ने परीक्षा टलवाने के लिए किया क़त्ल

शिक्षा खरीदने के लिए पागल हुए माँ-बाप, अंधी हुए सरकार, छात्र ने परीक्षा टलवाने के लिए किया क़त्ल

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भारत में पिछले 15-20 सालों ने शिक्षा का व्यापार होने लगा लेकिन किसी ने इस व्यापार पर ध्यान नहीं दिया, अब तो शिक्षा के नाम पर बहुत बड़ा धंधा हो रहा है, अब बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल नहीं खोले जाते बल्कि धंधा करने और छात्रों के माँ-बाप को लूटने के लिए स्कूल खोले जाते हैं.

अब स्कूल ही कॉपी बेचते हैं, स्कूल ही किताबें बेचते हैं और स्कूल ही ड्रेस बेचते हैं, अब स्कूल वाले इसलिए नहीं लिखवाते कि इससे बच्चों का ज्ञान बढेगा बल्कि इसलिए लिखवाते हैं ताकि बच्चों की जल्दी से कॉपी-नोटबुक भरे और छात्र हमारी ही दुकान से फिर से कॉपी खरीदे. अब छात्रों से इसलिए नहीं लिखवाया जाता कि इससे छात्रों की लिखने की कला बढ़ेगी बल्कि इसलिए लिखवाया जाता है कि पेन जल्दी ख़त्म होगा तो बच्चे हमारी ही दुकान से पेन खरीदेंगे और ऊपरी कमाई होगी. अब स्कूल छात्रों को लूटने का केंद्र बन गए हैं.

छात्रों को लूटने के चक्कर में प्राइवेट स्कूल उन पर पढने, लिखने और परीक्षा देने का इतना दबाव बना देते हैं कि बच्चे मानसिक संतुलन खो बैठते हैं और कुछ बच्चों का मानसिक संतुलन इतना खराब हो जाता है कि वे परीक्षा टलवाने या रद्द करवाने के लिए अन्य किसी छात्र का क़त्ल तक कर देते हैं, गुरुग्राम के रेयान स्कूल में भी ऐसा ही हुआ है.

रेयान स्कूल के 11वीं के छात्र ने प्रद्युम्न की इसलिए हत्या कर दी ताकि परीक्षा रद्द हो जाए और उसे परीक्षा की तैयारी ना करनी पड़े. यही सोचकर उसनें प्रद्युम्न की हत्या कर दी लेकिन इससे प्रद्युम्न की जान तो चली गयी लेकिन उस छात्र की जिन्दगी भी खराब हो गयी.

यहाँ पर सवाल यह है कि सरकारों की नाक के नीचे इतना बड़ा धंधा हो रहा है, छात्रों पर इतना प्रेशर डाला जा रहा है, अपनी कॉपी, किताब, पेन, ड्रेस बेचने के लिए छात्रों को इस प्रकार से रगड़ा जा रहा है, इतना सब कुछ होने के बाद भी सरकारें ऑंखें बंद करके बैठी हैं.

सरकारों को सोचना चाहिए कि जब सरकारी स्कूलों में 4-5 साल में दाखिला होता है तो प्राइवेट स्कूलों में 2-3 सालों में ही एडमिशन क्यों हो जाता है, सरकारों को सोचना चाहिए कि जब सरकारी स्कूलों में Pre, LKG, UKG, नर्सरी शिक्षा नहीं दी जाती तो प्राइवेट स्कूलों में ऐसा क्यों हो रहा है. यह कम्पटीशन किस चीज के लिए हो रहा है, शिक्षा में असमानता क्यों पैदा की जा रही है, इसी की वजह से आज छात्र इतना परेशान हो गया कि बिना कसूर दूसरे छात्र की हत्या कर दी.

मेरे ख्याल से प्राइवेट स्कूलों का यह धंधा किसी आतंकवाद से कम नहीं है, यह शिक्षा का आतंकवाद है जो ना सिर्फ माँ-बाप को परेशान कर रहा है बल्कि छात्रों को भी मानसिक रोगी बना रहा है. आज माँ-बाप शिक्षा को खरीदने के लिए इतने पागल होने लगे हैं कि 2 साल में ही प्ले स्कूलों में डाल देते हैं, तीन साल में ही प्राइवेट स्कूलों में डाल देते हैं, उसका बचपन भी पूरा नहीं होने देते और उसके सर पर बोझ रख देते हैं. यह सब क्यों और किसके लिए हो रहा है. यह आतंकवाद इतना बढ़ गया है कि अब छात्रों में हिंसक भावना पैदा हो रही है. 

सरकारों को तुरंत ही जागना चाहिए और शिक्षा में असमानता ख़त्म करनी चाहिए, सभी प्राइवेट स्कूलों और सरकारी स्कूलों का पाठ्यक्रम समान करना चाहिए, LKG, UKG, का सिस्टम बंद करवाना चाहिए, एक निश्चित उम्र में पहली कक्षा में दाखिला होना चाहिए ताकि बच्चों का दिमाग पूर्ण रूम से विकसित हो सके. अगर ऐसा नहीं हुआ तो प्राइवेट स्कूलों की लूट के चक्कर में हमारे आधे बच्चे 12वीं पास करते करते मानसिक रोगी हो जाएंगे.

Nov 8, 2017

ERDO ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से की इलेक्ट्रो होमियोपैथी को मान्यता देने की मांग

ERDO ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से की इलेक्ट्रो होमियोपैथी को मान्यता देने की मांग

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नई दिल्ली: कई वर्षों से चली आ रही इलेक्ट्रो होमियोपैथी को मान्यता दिलाने की मांग को लेकर इलेक्ट्रो होम्योपैथिक रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन ऑफ़ इंडिया (ईआरडीओ) ने 7 नवंबर को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को प्रस्ताव सौंपा और जल्द से जल्द इसे स्वीकृत कराने की मांग भी की।

मंत्रालय को प्रस्ताव देते वक़्त उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, असम, पंजाब, दिल्ली, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, उड़ीसा, बंगाल, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, हरियाणा, और हिमाचल प्रदेश के प्रतिनिधि मौजूद थे। इस मांग व प्रस्ताव को लेकर इआरडीओ ने रायसीना रोड स्थित प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में एक प्रेस वार्ता का भी आयोजन किया। 

इस प्रेस वार्ता में मौजूद होमियोपैथी काउंसिल महाराष्ट्र के पूर्व अध्यक्ष डॉ. बाहुबली शाह ने इलेक्ट्रो होमियोपैथी की अहमियत और खूबियों का बखान किया साथ ही उन्‍होंने बताया कि इलेक्ट्रो होमियोपैथी सस्ती, सुलभ और हानिरहित चिकित्सा पद्धति है जिसे अपनाने की सख्‍त की जरुरत है। उन्होंने पत्रकार वार्ता में यह सवाल भी उठाया कि यूरोप के बहुसंख्यक देशों में इलेक्ट्रो होमियोपैथी चिकित्सा को अल्टरनेटिव सिस्टम ऑफ़ मेडिसिन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, तो हमारे देश में इलेक्ट्रो होमियोपैथी चिकित्सा को मान्यता मिलने में इतनी देरी क्यों की जा रही है। 

इस मौके पर इआरडीओ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. के.पी.एस चौहान ने कहा कि उनके संगठन ने मंत्रालय द्वारा दी गई सभी शर्तों को पूरा करते हुए प्रस्ताव को सौंपा है और वह भारत सरकार से अपेक्षा करते हैं कि एक निर्धारित समय तक इलेक्ट्रो होमियोपैथी को मान्यता प्रदान करते हुए इसके चिकित्सकों को उनके संवेधानिक अधिकार प्रदान किया जाए। 

डॉ चौहान ने आगे बताया कि इलेक्‍ट्रो होमियोपैथी चिकित्‍सा को सरकार द्वारा नियंत्रित न होने के कारण आज तक इस पद्धति की उन्‍नति नहीं हो पा रही है। इस मौके पर इआरडीओ के पैट्रन डॉ. जगदीप सिंह नारंग, उपाध्यक्ष सतीश जगदाले, महासचिव डॉ. अजित सिंह एवं सचिव डॉ. एस शर्मा भी मौजूद रहे। 

Oct 28, 2017

सुप्रीम कोर्ट ने दिया पतियों को झटका, पत्नियों को दिया बिना पूछे गर्भपात कराने का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने दिया पतियों को झटका, पत्नियों को दिया बिना पूछे गर्भपात कराने का अधिकार

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महिलाओं के गर्भपात मामले पर सुनवाई करते हुए आज सुप्रीम कोर्ट ने पतियों को जबरजस्त झटका दिया है, अब तक पत्नी को गर्भपात करवाने से पहले पति की अनुमति लेनी पड़ती थी लेकिन अब वे पति से बिना पूछे ही अपना गर्भपात करवा सकेंगी।

एक याचिका की सुनवाई करते हुए कहा कि किसी भी बालिग़ महिला को बच्चों के जन्म देने और गर्भपात कराने का फैसला लेने का अधिकार है, उन्हें इसके लिए किसी की अनुमति लेने की जरूरत नाहे है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पत्नी से अलग हो चुके एक पति ने सुप्रीम कोर्ट में शिकायत की थी कि उसकी पूर्व पत्नी, उसके पिता और भाइयों ने दो डॉक्टरों के जरिये उसका अवैध गर्भपात करवाया था, ऐसा करने से पहले उसकी अनुमति नहीं ली गयी.

इससे पहले यह मामला पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के समक्ष गया था, वहां पर भी यही फैसला सुनाया गया था, उसके बाद पीड़ित पति ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी उसकी याचिका को रिजेक्ट करके हाई कोर्ट के फैसले पर मुहर लगा दी.

Oct 15, 2017

युवाओं से बोले सुरेश रैना, आज का दर्द कल की ताकत है, हमेशा करेंगे एक्सरसाइज

युवाओं से बोले सुरेश रैना, आज का दर्द कल की ताकत है, हमेशा करेंगे एक्सरसाइज

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भारतीय क्रिकेट टीम एक खिलाडी आजकल जिम में ज्यादा ही पसीना बहा रहे हैं और चाहते हैं कि हमारे देश के युवा भी पसीना बहायें और निरंतर एक्सरसाइज करते रहें, वैसे हेल्थ एक्सपर्ट भी कहते हैं कि हम सभी को अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए, अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रतिदिन सैर, योग, व्यायम और पौष्टिक भोजन खाना चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार हम स्वस्थ रहते हैं तो हमारा शरीर और दिमाग तेजी से काम करता हैं, यही नहीं अच्छे स्वास्थय के जरिये हम अपने जीवन में सफलता भी हासिल कर सकते हैं क्योंकि सफलता की कुंजी अच्छा स्वस्थ्य भी होता है.

भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाडी सुरेश रैना अपने स्वास्थ्य पर खास ध्यान देते है, उनका कहना है कि वे अपनी सेहत से कभी समझौता नहीं करते. वे प्रतिदिन सुबह जल्दी उड़ते हैं, दौड़ के लिए जाते हैं, योग करते है और जिम में खूब पसीना बहाते हैं.

आज सुरेश रैना ने जिम में एक्सरसाइज करते हुए अपनी वीडियो पोस्ट की है, उन्होने वीडियो सन्देश में कहा - हम सभी को प्रतिदिन व्यायाम करना चाहिए. व्यायाम करने से शरीर को भले ही आज दर्द हो लेकिन यही दर्द कल हमारी ताकत बन जाता है, इसलिए एक्सरसाइज कभी नहीं छोड़ना चाहिए. आप भी देखें यह वीडियो.

लोगों को सुप्रीम कोर्ट के मी-लार्डों से होने लगी है नफरत, हर फैसला हिंदुस्तानियों के खिलाफ

लोगों को सुप्रीम कोर्ट के मी-लार्डों से होने लगी है नफरत, हर फैसला हिंदुस्तानियों के खिलाफ

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भारत के सुप्रीम कोर्ट के जजों द्वारा अजीब अजीब से फैसले दिए जा रहे हैं, कुछ दिन पहले दीवाली पर पटाखा बेचने पर रोक लगा दी गयी जिसकी वजह से हजारों व्यापारी बर्बाद होने वाले हैं, दो दिन पहले रोहिंग्या को भारत से भगाने पर रोक लगा दी, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक रोहिंग्या मामले की सुनवाई हो रही है तब तक रोहिंग्या को भारत से भगाया ना जाए, उनका ख्याल रखा जाए क्योंकि ये मानवता का सवाल है. उसके पहले दही हांडी पर 18 वर्ष से कम आयु के गोविन्दाओं के भाग लेने पर बैन लगा दिया था.

सुप्रीम कोर्ट के पास हर चीज के लिए समय है लेकिन इनके पास राम मंदिर मामले की सुनवाई के लिए समय नहीं है, जब भी कोर्ट में राम मंदिर मामले की फाइल जाती है उसे 2-4 महीनें के लिए आगे खिसका दिया जाता है. ऐसा लगता है कि सुप्रीम कोर्ट के जज किसी एजेंडे के तहत काम कर रहे हैं.

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ रोष प्रकट किया जा रहा है, लोगों को मीलार्ड शब्द से ही नफरत होने लगी है क्योंकि लोगों को लगने लगा है कि सुप्रीम कोर्ट हिन्दुओं के खिलाफ फैसले सुना रहा है और जान बूझकर उनके सब्र का इम्तिहान ले रहा है. कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट के जज कांग्रेसी मानसिकता वाले हैं और उन्हें कांग्रेस ने ही नियुक्त किया था इसलिए मी-लार्ड लोग कांग्रेस के इशारे पर काम कर रहे हैं.

Oct 14, 2017

रोहिंग्या जिहादियों को भगाकर म्यांमार बना कम भूखा देश, भारत बना सबसे अधिक भूखा देश, भुगतो अब

रोहिंग्या जिहादियों को भगाकर म्यांमार बना कम भूखा देश, भारत बना सबसे अधिक भूखा देश, भुगतो अब

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एक धर्म के लोग जिहाद करते हैं, जिस भी देश में रहते हैं वहां पर खूब आबादी बढ़ाते हैं, 10-10, 20-20 बच्चे पैदा कर लेते हैं ताकि उनकी जनसँख्या जल्दी से बढ़ जाए और उस देश पर उनका कब्ज़ा हो जाय, वर्मा यानी म्यांमार में रोहिंग्या भी यही काम कर रहे थे, ये लोग खूब आबादी बढ़ा रहे थे, जिहाद कर रहे थे, दूसरे धर्म के लोगों को मार मार कर जेमीन में दफना देते थे, ये लोग रखाइन राज्य को इस्लामिक स्टेट बनाना चाहते थे, ये लोग कई कई बच्चे पैदा कर रहे थे इसलिए म्यांमार में कुपोषण भी बढ़ रहा था जिसकी वजह से म्यांमार भूखा देश कहा जाता था लेकिन म्यांमार ने इन्हें भगाना शुरू कर दिया तो भूखों की लिस्ट में सुधार भी होता गया.

वर्तमान में भूखों की लिस्ट में म्यांमार ने काफी सुधार किया है, भूख कम करने में म्यांमार भारत से भी आगे निकल गया लेकिन भारत को इसका नुकसान भी उठाना पड़ा है, रोहिंग्या आकर भारत में बस गए तो भारत भी भूखा बन गया, इस वर्ष भारत भूखों की लिस्ट में 3 अंक और आगे हो गया है. सबसे अधिक भूखे देशों में भारत 100वें नंबर पर आ गया है.

कुछ लोग भारत को धर्मशाला बनाना चाहते हैं, कुछ राजनीतिक पार्टियाँ भी घुसपैठ को बढ़ावा दे रही हैं ताकि विदेश से घुसपैठिये भारत में आकर बस जाँय, जब ये घुसपैठिये भारत में भूखे प्यासे घूमेंगे, भीख मांगेंगे तो इससे भारत की दुनिया भारत में बदनामी भी होगी और दूसरे देश भारत को भूखा देश बताकर हमारे देश की हंसी भी उडाएंगे.

कांग्रेस पार्टी मोदी सरकार पर भूख बढ़ाने का आरोप भी लगा रही है और यह भी चाहती है कि रोहिंग्या भारत में ही रहें ताकि विदेशी संस्थाएं आकर उनके फोटो खींच खींच कर अपने देश में ले जाएं, भूखों की लिस्ट तैयार करें और उसमें भारत को सबसे पीछे कर दें ताकि कांग्रेस मोदी सरकार के खिलाफ भूख को मुद्दा बनाए जैसा कि राहुल गाँधी अभी भूख को मुद्दा बना रहे हैं.

भारत में कोई भी आदमी भूखा नहीं सोता, सबको अनाज मिल रहा है, सबको खाना भी मिल रहा है, हमारे देश में तो लाखों मंदिर और गुरुद्वारों में भी फ्री में खाना मिलता है, सबको खाना मिल रहा है लेकिन विदेशी संस्थाएं आकर शरणार्थियों के फोटो खींचकर ले जाती हैं और भारत को भूखा देश बता दिया जाता है. अब सरकार क्या करे, क्या दुनिया के सभी शरणार्थियों को भारत में रहें दिया जाए और उन्हें भोजन, पानी, शिक्षा और नौकरी देकर भारत के लोगों का हक उन्हें दे दिया जाए.

राहुल गाँधी ने किया भूख का जिक्र तो स्मृति ईरानी ने कहा - सब्र करो अभी तीन ही साल तो हुआ

राहुल गाँधी ने किया भूख का जिक्र तो स्मृति ईरानी ने कहा - सब्र करो अभी तीन ही साल तो हुआ

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ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत तीन स्थान नीचे चला गया है जिसे लेकर राहुल गाँधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने एक शेर के माध्यम से कहा - 'भूख है तो सब्र कर, रोटी नहीं तो क्या हुआ.. आजकल दिल्ली में है जेरे-बहस ये मुद्दआ।'
केंद्रीय दूर संचार मंत्री स्मृति ईरानी ने तुरंत राहुल गाँधी को जवाब दिया. उन्होंने कहा - ऐ सत्ता की भूख -सब्र कर, आँकड़े साथ नहीं तो क्या, खुदगर्जों को जमा कर, मुल्क की बदनामी का शोर तो मचा ही लेंगे.
आपको बता दें कि ग्लोबल हंगर इंडेक्स की रिपोर्ट जारी करने वाली संस्था IFPRI ने 2015 से भूख के आकलन का तरीका बदल दिया है जिसकी वजह से भारत इस लिस्ट में पीछे हो गया. 2014 में भारत 55वें स्थान पर था, 2015 में भारत 100 वें स्थान पर आ गया है हालाँकि वर्तमान समय में भारत में कुपोषण कम हुआ है. पहले वजन के आधार पर कुपोषण की रिपोर्ट तैयार की जाती थी लेकिन मोदी सरकार के आने के बाद थकान और शारीरिक उंचाई के आधार पर कुपोषण की रिपोर्ट तैयार की जाने लगी जिसकी वजह से भारत लिस्ट में पीछे होता गया.

वैसे अगर आंकड़ों पर ध्यान दिया जाए तो भात में वजन के आधार पर कुपोषण कम हुआ है, पहले जहाँ 16 फ़ीसदी बच्चे कुपोषण के शिकार थे वहीँ अब 14.5 फ़ीसदी बच्चे कुपोषण का शिकार हैं. खैर कांग्रेस को तो मुद्दा चाहिए, उन्हें रिपोर्ट और उसकी एनालिसिस के तरीके से क्या लेना.

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Source and Credit: http://www.business-standard.com, IFPRI Report 2017
पटाखों पर बैन से केजरीवाल सरकार को होगा कम से कम 200 करोड़ का नुकसान, GDP पर भी होगा असर

पटाखों पर बैन से केजरीवाल सरकार को होगा कम से कम 200 करोड़ का नुकसान, GDP पर भी होगा असर

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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में पटाखा विक्री पर बैन लगा दिया है लेकिन इसका सबसे अधिक नुकसान केजरीवाल सरकार को होने वाला है. दिल्ली में कम से कम 1000 करोड़ रुपये के पटाखे जलाए जाते हैं जिसकी वजह से केजरीवाल सरकार को GST के हिसाब से कम से कम 200 करोड़ रुपये की कमाई होती है लेकिन इस बार पटाखा व्यापारी पटाखा बेच ही नहीं पाएंगे तो केजरीवाल सरकार को टैक्स से होने वाली कमाई भी नहीं होगी.

खैर इसकी भी भरपायी दिल्ली की जनता को ही करनी पड़ेगी क्योंकि सरकारें हर नुकसान की भरपायी जनता से ही करती हैं, जब केजरीवाल सरकार को 200 करोड़ का नुकसान होगा तो इसकी भरपायी करने के लिए जनता के ऊपर टैक्स का भार लादा जाएगा या दिल्ली को विकास से हाथ धोना पड़ेगा.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सरकार की अधिकतर कमाई टैक्स से होती है, सिर्फ दिवाली के सीजन में सरकारें टैक्स से वर्ष भर का 40 परसेंट टैक्स कमा लेती हैं, दिवाली भारतीयों का सबसे बड़ा त्यौहार है, इस त्यौहार में लोग जमकर खर्चा करते हैं, जनता जितना अधिक खर्चा करती है, सरकार को उतनी अधिक कमाई होती है, जनता जितना अधिक पैसे बर्बाद करती है सरकार की झोली में उतने ही रुपये गिरते हैं, दिवाली पर सबसे अधिक कमाई पटाखों से होती है क्योंकि पटाखे खरीदकर जनता अपने पैसे उड़ाती है और ये पैसे सरकार की झोली में गिर जाते है, उदाहरण के लिए नोटबंदी के बाद जितने रुपये बैंकों में नहीं आये, वह सब केंद्र सरकार के हो गए.

आपको बता दें कि बैन की वजह से अब पटाखा व्यापारी चोरी-छिपे पटाखा बेचेंगे, मतलब बिल नहीं काटेंगे, अगर बिल नहीं काटेंगे तो दिल्ली सरकार को GST भी नहीं मिलेगा. सारा का सारा पैसा कालेधन में जाएगा, पटाखा व्यापारी चोरी से पटाखा बेचकर अपनी लागत वसूल करेंगे लेकिन सरकार को अपनी कमाई का हिसाब नहीं देंगे क्योंकि हिसाब देने, बिल काटने पर उन्हें सजा हो जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से सबसे अधिक नुकसान दिल्ली की जनता का होगा क्योंकि वे ना तो पटाखे जला पाएंगे, और पटाखा ना जलाने से हुए नुकसान की भरपायी भी उन्हें ही करनी पड़ेगी, क्योंकि केजरीवाल पेट्रोल-डीजल पर VAT बढ़ाकर 1 महीनें में नुकसान की भरपायी कर लेंगे लेकिन बोझ तो दिल्ली की जनता पर ही पड़ेगा.

देश की अर्थव्यवस्था को भी होगा नुकसान

जब जनता के पैसे नहीं खर्च होंगे तो देश की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान होगा क्योंकि सरकार की Indirect Tax से सर्वाधिक कमाई होती है, जब जनता पैसे खर्च करती है तो सरकार को Indirect TAX मिलता है और GDP बढ़ती है, लेकिन जब जनता पैसे खर्च नहीं करती तो उससे सरकार की कमाई भी घट जाती है जिसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. केंद्र सरकार इसकी भी भरपायी जनता से ही करती है, भारत में पेट्रोल और डीजल इसीलिए मंहगे हैं क्योंकि सरकार चाहती है कि जनता ज्यादा से ज्यादा पैसे खर्च करे. अगर पैसे घर में पड़े रहते हैं तो सरकार को नुकसान होता है, लेकिन जब पैसे चलते रहते हैं तो अर्थव्यवस्था दौड़ती है, GDP बढती है, केंद्र की कमाई होती है और उनके पास विकास के लिए पर्याप्त पैसा आता है लेकिन सुप्रीम कोर्ट के पटाखा बैन से देश की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ने की संभावना है.
तोप, मिसाइल, राइफल पर भी बैन लगा सकता है सुप्रीम कोर्ट, बॉर्डर पर चलेंगी प्लास्टिक की गोलियां

तोप, मिसाइल, राइफल पर भी बैन लगा सकता है सुप्रीम कोर्ट, बॉर्डर पर चलेंगी प्लास्टिक की गोलियां

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अगर पटाखों की वजह से प्रदूषण होता है तो बंदूकों से निकलने वाली गोलियों, तोप से निकलने वाले गोले और बारूद, मिसाइल और रॉकेट से निकलने वाले धुंवे से भी प्रदूषण फैलता है. अक्सर देखा जाता है कि बॉर्डर पर भारत और पाकिस्तान की गोलाबारी से पूरा क्षेत्र धुंवा धुंवा हो जाता है. भारत का सुप्रीम कोर्ट प्रदूषण को लेकर बहुत सख्त है इसलिए हो सकता है कि पटाखों की तरह ही बन्दूकों, गोलियों, आंसू गैस के गोलों, तोप के गोले, बारूद, मिसाइल, रॉकेट और अन्य हथियारों पर भी बैन लगा सकता है.

सुप्रीम कोर्ट के जज तर्क दे सकते हैं कि बन्दूकों, गोलियों, आंसू गैस के गोलों, तोप, गोले, बारूद, मिसाइल, रॉकेट से धुंवा और प्रदूषण फैलता है, इससे कश्मीर के लोगों को परेशान होती है, बच्चों का जीना मुश्किल हो जाता है, फेफड़ों की बीमारियाँ हो जाती हैं इसलिए अब बॉर्डर पर पाकिस्तानी सैनिकों पर प्लास्टिक की गोलियां दागी जाँय.

सुप्रीम कोर्ट कह सकता है कि अगर प्लास्टिक की गोलियां चलायी जाएंगी तो प्रदूषण कम होगा, बीमारियों से बचा जा सकेगा. इसलिए आगे से पाकिस्तानी सैनिकों पर प्लास्टिक या रबर की गोलियां चलायी जानी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह का तर्क देकर पटाखों पर बैन लगाया है उसी तरह से हथियारों पर भी बैन लगाया जा सकता है.

यही नहीं, कश्मीर में पत्थरबाजों को कण्ट्रोल करने के लिए उनपर आंसू गैस के गोले दागे जाते हैं जिसकी वजह से पूरे इलाके में धुंवा फ़ैल जाता है, इससे भी प्रदूषण होता है इसलिए सुप्रीम कोर्ट आदेश दे सकता है कि पत्थरबाजों पर आंसू गैस के गोले ना छोड़े जाँय, वर्ना प्रदूषण फ़ैल जाएगा.
सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर बैन लगाया तो यूनाइटेड हिन्दू फ्रंट ने उसके सामने ही फोड़ा पटाखा

सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर बैन लगाया तो यूनाइटेड हिन्दू फ्रंट ने उसके सामने ही फोड़ा पटाखा

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नई दिल्ली : हिन्दुओं के सबसे बड़े त्यौहार दीपावली के मौका पर पटाखों की बिक्री पर रोक लगाने के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के विरूद्ध यूनाईटेड हिन्दू फ्रंट (हिन्दू संगठनों क समूह) की ओर से आज जोरदार रोष प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व फ्रंट के अंर्तराष्ट्रीय महासचिव जय भगवान गोयल कर रहे थे। प्रदर्शनकारी हनुमान मंदिर निकट प्रगति मैदान मेट्रो स्टेशन पर एकत्रित हुए और सर्वोच्च न्यायालय की ओर नारे लगाते आगे बढ़े। इस प्रदर्शन में दिल्ली-एनसीआर के अनेक पटाखा विक्रेता भी शामिल हुए।

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प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए गोयल ने कहा कि हिन्दुस्थान में बहुसंख्यक हिन्दुओं के धार्मिक मामलों पर विभिन्न सरकारी एवं अर्धसरकारी अथरिटीज़ द्वारा हस्तक्षेप सहन नहीं किया जा सकता। दीपावली पर पटाखों को छोड़ने की सदियों पुरानी परम्परा को सर्वोच्च न्यायालय ने एकाएक रोक लगाकर जहां हिन्दुओं की आस्था पर ही नहीं कुठाराघात किया बल्कि लाखों-करोड़ो रूपए लगाकर दीपावली पर पटाखे बेचने वालों को भी सड़क पर ला खड़ा किया है। उन व्यापारियों का क्या दोष है जिन्होंने लाईसेंस लेकर पटाखे खरीदे हैं। अब उनके नुकसान की भरपाई कौन करेगा. गोयल ने प्रश्न किया कि क्या यहीं प्रतिबंध मुस्लमानों के त्यौहारों पर लगाने की जुर्रत कोई संस्थान कर सकता है। मात्र हिन्दुओं को ही बलि का बकरा बनाना समझ से परे है।

गोयल ने आगे कहा कि दीपावली पर हिन्दुओं द्वारा अपना पर्व मनाने पर एक ही दिन में प्रदूषण फैल जाएगा, यह तर्कसंगत नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय का स्पष्ट मंतव्य हिन्दुओं को नीचा दिखाना है, प्रदूषण तो मात्र बहाना है।

गोयल ने सर्वोच्च न्यायालय से अपील की कि हिंदू धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए पटाखों की  बिक्री पर लगाई रोक अविलम्ब वापिस ली जाए।

कार्यकर्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय के निकट पटाखे चलाकर पटाखों की बिक्री पर लगी रोक का खुला विरोध प्रकट भी किया। 

इस सन्दर्भ में एक ज्ञापन सुप्रीमकोर्ट के मुख्य न्यायधीश एवं राष्ट्रपति को भी दिया गया है जिसमें दीपावली जैसे महापर्व पर पटाखों की बिक्री पर लगी रोक पर पुर्नविचार करने का जोरदार आग्रह किया गया है।

प्रदर्शन में अनेक शीर्षस्थ हिन्दू नेता साधु महात्मा एवं मठाधीश भी सम्मिलित हुए। आज के प्रदर्शन में शामिल होने वाले पदाधिकारियों में सर्वश्री चंद्र प्रकाश कौशिक, महंत नवल किशोर दास, अनिल आर्य, मुकेश जैन, चौधरी ईश्वरपाल सिंह, धर्मेंद्र बेदी, जी.के.रात्रा, राहुल मनचंदा (शेरू), नत्थू राम, विनोद गुप्ता, जयप्रकाश बघेल, श्रीकांत यादव, जितेंद्र यादव, डॉ. महेंद्र सिंह, गंगा राम सैनी, बजरंग बहादुर मिश्रा, राजेश बहोत, सुबोध बिहारी, पूरन सिंह, विनोद जयसवाल, शंकर लाल अग्रवाल, श्रीमति सरोज शर्मा, श्रीमति पूजा शर्मा, सीमा यादव व करिश्मा के नाम उल्लेखनीय हैं जो अपने कार्यकार्ताओं के साथ आए थे।

Oct 13, 2017

लोग बोले, जब सुप्रीम कोर्ट ही चला रहा है देश तो केंद्र सरकार की क्या जरूरत, इस्तीफ़ा दो, घर बैठो

लोग बोले, जब सुप्रीम कोर्ट ही चला रहा है देश तो केंद्र सरकार की क्या जरूरत, इस्तीफ़ा दो, घर बैठो

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भारत के अधिकतर लोगों का सुप्रीम कोर्ट पर से भरोसा ख़त्म होता जा रहा है, सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार के हर फैसले में दखल दे रहा है, आज अवैध रोहिंग्या घुसपैठियों को भारत से भगाने पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी, एक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया कि जब तक सुनवाई पूरी ना हो जाए, किसी भी रोहिंग्या घुसपैठिये को भारत से भगाया ना जाए क्योंकि ये इन्सान हैं और इन्हें भगाना मानव अधिकारों के विपरीत है.

इस फैसले से देश के लोगों का भरोसा सुप्रीम कोर्ट पर से हट रहा है, ऐसा लग रहा है कि देश केंद्र सरकार नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट चला रहा है, केंद्र सरकार खुद से कोई निर्णय नहीं कर पा रही है.

अब लोगों कह कहना है कि जब इस देश में सारे फैसले कोर्ट को ही करने है जैसे के रोहिंग्या मुसलमान हिंदुस्तान में रहेंगे या नहीं रहेंगे, कश्मीर में सेना पैलेट गन चलाएगी या कोई और गन चलाएगी, दिवाली पर पटाखे चलाएंगे या नहीं चलाएंगे, मूर्ति विसर्जन होगा कि नहीं होगा, दही हांडी की ऊंचाई कितनी होगी, राम मंदिर बनेगा या नहीं बनेगा. अगर ये सभी फैसले सुप्रीम कोर्ट को ही करने हैं तो चुनाव कराने की क्या जरूरत है, सुप्रीम कोर्ट से ही पूछ लेना चाहिए कि देश का प्रधानमंत्री किसे बनाना चाहिए. 

लोग कह रहे हैं कि जब हर फैसला सुप्रीम कोर्ट को ही करना है तो  चुनी हुई सरकार की फिर क्या जरुरत है, सुप्रीम कोर्ट के जजों को ही यह देश भी चलाना चाहिए, प्रधानमंत्री सहित सभी मंत्री और राष्ट्रपति को अपने पद से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.
राम मंदिर पर रोक, रोहिंग्या को भगाने पर रोक, पटाखा जलाने पर रोक, सुप्रीम कोर्ट है या पाकिस्तान

राम मंदिर पर रोक, रोहिंग्या को भगाने पर रोक, पटाखा जलाने पर रोक, सुप्रीम कोर्ट है या पाकिस्तान

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कांग्रेस की 10 साल लगातार सरकार थी लेकिन उस समय सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस के किसी भी फैसल में चूं तक नहीं की, ऐसा इसलिए क्योंकि कांग्रेस ने अपनी पसंद के लोगों को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया था इसलिए वे चुपचाप पड़े रहते थे लेकिन जैसे ही देश में मोदी सरकार आयी, सुप्रीम कोर्ट के जज जाग उठे, मोदी सरकार के सभी फैसले में हस्तक्षेप करने लगे, वर्तमान में ऐसा लग रहा है कि देश मोदी सरकार नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट के जज चला रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट मोदी सरकार के हर फैसले में दखल दे रहा है, हर फैसले पर रोक लगा रहा है, हिन्दू समाज के सभी त्योहारों पर बैन लगा रहा है, पहले सुप्रीम कोर्ट ने जन्माष्टमी पर गोविंदा पर बैन लगाया और अब दीवाली पर पटाखा जलाने पर बैन लगा दिया.

आप खुद देखिये, भारत सरकार राम मंदिर बनाना चाहती है, देश के 80 फ़ीसदी हिन्दू भी अयोध्या में राम मंदिर चाहते हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट बार बार तारीख बढाकर सुनवाई टाल रहा है.

इसके बाद रोहिंग्या का मामला सामने आया, केंद्र सरकार ने साफ़ साफ़ कह दिया कि रोहिंग्या देश की शांति के लिए खतरा हैं, इनके आतंकियों से संबंध रहे हैं. ये लोग म्यांमार में भी आतंकी गतिविधियों में शामिल हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की बात नहीं मानी और आज तुगलकी फरमान देते हुए उन्हें भगाने पर रोक लगा दी. 

सुप्रीम कोर्ट ने आज के आदेश में केंद्र सरकार से कहा कि जब तक इस मामले की सुनवाई हो रही है तब तब उन्हें जबरजस्ती भगाया ना जाए क्योंकि अगर देश की सुरक्षा महत्वपूर्ण है तो मानव अधिकार भी महत्वपूर्ण हैं.

आपको पता ही है कि राम मंदिर मामले की 30 वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है लेकिन आज तक सुनवाई ही चल रही है, इसी तरह से रोहिंग्या मामले की सुनवाई होती तो आराम से 40-50 साल लग जाएंगे, मतलब अब रोहिंग्या 40-50 वर्षों तक भारत में रहेंगे, बच्चे पैदा करेंगे, जिहाद करेंगे, हिंसा और आतंकवाद करेंगे और सुप्रीम कोर्ट में तारीख पर तारीख चलती रहेगी.

अब आप देखिये, सुप्रीम कोर्ट ना तो राम मंदिर बनाने दे रहा है, ना रोहिंग्या को भगाने दे रहा है, ना हिन्दुओं को पटाखा जलाने दे रहा है, एक तरह से सुप्रीम कोर्ट भारत के लिए पाकिस्तान बन गया है, भारत की सरकार और हिंदुस्तान के नागरिकों को अपने हक के लिए सुप्रीम कोर्ट से ही लड़ना पड़ रहा है. यह बहुत ही खतरनाक ट्रेंड है देश के लिए.
रोहिंग्या के आने से हुआ भारत का बेड़ा गर्क, भूखों की लिस्ट में बांग्लादेश से भी पीछे हो गया

रोहिंग्या के आने से हुआ भारत का बेड़ा गर्क, भूखों की लिस्ट में बांग्लादेश से भी पीछे हो गया

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घुसपैठिये लोगों ने भारत में घुसकर भारत के बड़ा गर्क कर दिया है, भारत में हमेशा बांग्लादेश से घुसपैठिये आते रहते हैं, अब लाखों रोहिंग्या भी भारत में घुस आयें हैं और यहाँ पर भूखे प्यासे घूम रहे हैं. इन लोगों की वजह से भारत पूरे विश्व में बदनाम हो रहा है क्योंकि ग्लोबल हंगर इंडेक्स यानी भूखों की लिस्ट में भारत बांग्लादेश से भी पीछे हो गया है.

पिछले साल भूखों की लिस्ट में भारत 97वें स्थान पर था लेकिन इस वर्ष तीन स्थान पीछे खिसककर 100वें स्थान पर पहुँच गया. भारत इस लिस्ट में उत्तर कोरिया, बांग्लादेश और म्यांमार से भी पीछे हैं हालाँकि पाकिस्तान से आगे हैं जो भारत के लिए राहत की खबर है.

भूखों की लिस्ट जारी करने वाली संस्था इंटरनेशनल फ़ूड रिसर्च इंस्टिट्यूट (IFPRI) की रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत में भूख की वजह से कुपोषण बढ़ रहा है और इसकी दर इतनी गंभीर है कि सामाजिक क्षेत्र को इसपर ध्यान देना होगा.

आपको बता दें कि भूखे लोगों के 119 देशों में भारत का स्थान 100वां है, पाकिस्तान भारत से पीछे है. इस सूची में चीन 29वें, नेपाल 72वें, म्यांमार 77वें, श्रीलंका 84वें, बांग्लादेश 88वें, पाकिस्तान 106वें और अफ़ग़ानिस्तान 107वें स्थान पर हैं, भारत अपने पड़ोसी देशों में पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान को छोड़कर सबसे पीछे है.

Oct 12, 2017

इस वकीलों ने साबित किया, CBI कोर्ट के फैसले पर आँख मूंदकर भरोसा ना करें, गलत भी हो सकता है

इस वकीलों ने साबित किया, CBI कोर्ट के फैसले पर आँख मूंदकर भरोसा ना करें, गलत भी हो सकता है

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भारत के लोग CBI पर भरोसा करते हैं क्योंकि यह देश की सबसे बड़ी केंद्रीय जांच एजेंसी है, CBI द्वारा जांच किये गए केस के फैसले CBI कोर्ट सुनाती है इसलिए उन पर लोग आँख मूँद कर विश्वास करते हैं लेकिन आज दो वकीलों ने साबित कर दिया है कि CBI जांच भी गलत हो सकती है और CBI कोर्ट के फैसले भी गलत हो सकते हैं. ये वकील हैं तनवीर अहमद मेरे और दिलीप.

कुछ लोग यह भी मानते हैं कि CBI कोर्ट द्वारा सुनाये गए फैसले फाइनल होते हैं और इन्हें हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने से कोई फायदा नहीं होता, आज यह भी पता चल गया है कि CBI कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज दिया जा सकता है और उसमें फायदा भी होता है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले महीनें CBI कोर्ट ने सिर्फ दो महिलाओं की चिट्ठियों के आधार पर गुरमीत राम रहीम को रेप के दोष में 20 साल की सजा सुना दी, ना कोई पक्का गवाह है, ना महिलायें सामने आ रही हैं, ना उनका मेडिकल हुआ है और ना ही कोई ठोस सबूत है. सिर्फ दो चिट्ठियां हैं.

देश के लोगों ने CBI कोर्ट के फैसले पर आँख मूंदकर भरोसा कर लिया, लेकिन आज यूपी में भी ऐसा मामला सामने आया है जिससे साबित हो गया है कि CBI जांच भी गलत हो सकती है और CBI कोर्ट के फैसले भी गलत हो सकते हैं और उसके फैसले को चुनौती दी जा सकती है.

आपको बता दें कि अरुषी-हेमराज मर्डर केस' में आज इलाहबाद हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अरुषी के पिता राजेश तलवार और माता नुपुर तलवार को दोहरे हत्याकांड के दोष में गाजियाबाद की CBI कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जांच भी CBI ने की थी और चार्जशीट भी CBI ने दायर की थी लेकिन आज इलाहबाद हाई कोर्ट ने CBI कोर्ट के फैसले को बदलकर राजेश तलवार और नुपुर तलवार को बरी कर दिया. तलवार के वकीलों तनवीर अहमद मेरे और दिलीप ने CBI कोर्ट के फैसले और CBI की दलीलों को गलत आबित कर दिया और दोनों को बाइज्जत बरी करा दिया.

अगर राम रहीम भी आरुषी-हेमराज मर्डर केस को आधार बनाकर हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर करें तो उन्हें भी सभी आरोपों से बरी किया जा सकता है क्योंकि उनके खिलाफ भी कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं, उन्हें सिर्फ दो महिलाओं की चिट्ठियों के आधार पर 20 साल की सजा सुनाई गयी है. आज भी दोनों महिलायें छुपी हुई हैं.

आरुषी-हेमराज का कब हुआ था मर्डर

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 16 मई 2008 को 14 वर्षीय आरुषी तलवार की उसके बेडरूम में हत्या कर दी गयी थी. उसका गला रेत दिया गया था और सर पर गहरे घाव के निशान थे, पुलिस ने पहले उसके दोस्त हेमराज पर शक जताया था लेकिन दूसरे ही दिन उसकी लाश भी छत से बरामद हुई थी. 

पुलिस पहले से ही यह मानकर चल रही थी कि अरुषी के माता पिता ने ही उसकी हत्या की होगी, उन्होंने अपनी जांच में यही लिखा, बाद यह सीबीआई को इस केस जांच करने का आदेश दिया, उन्होंने भी अपनी जांच रिपोर्ट में दोनों को दोषी माना जिसके बाद गाजियाबाद की CBI कोर्ट ने दोनों को आजीवन कारवार की सजा सुना दी, दोनों को डासना जेल भेज दिया गया.

जेल में रहते हुए उन्होंने फिर से हाई कोर्ट में याचिका डाली, आज इस पर सुनवाई करते हुए दोनों को इस केस से बरी कर दिया गया.

Oct 11, 2017

चीन की कमाई करवाकर मी-लार्ड ने लगाया पटाखों पर बैन, बर्बाद तो भारतीय दुकानदार हो गए

चीन की कमाई करवाकर मी-लार्ड ने लगाया पटाखों पर बैन, बर्बाद तो भारतीय दुकानदार हो गए

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दिवाली से 10 दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली एनसीआर में पटाखा बेचने पर बैन लगा दिया लेकिन सोचने वाली बात ये है कि सुप्रीम कोर्ट ने चीन द्वारा भारत में पटाखा सप्लाई करने पर बैन नहीं लगाया और ना ही दुकानदारों के चीन के पटाखा खरीदने पर बैन लगाया, जब चीन ने पटाखे भारत में सप्लाई कर दिए, भारत के दुकानदारों से पैसे कमा लिए, चीन ने अपना खजाना भर लिया उसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पटाखा बेचने पर बैन लगाकर भारतीय दुकानदारों के पैर काट दिए.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दशहरा से पहले ही चीन से भारत में पटाखे आ जाते हैं, चीन दशहरा से पहले से ही पटाखों और अन्य सामानों से कमाई कर लेता है, दिवाली पर चीनी सामानों के बहिष्कार से चीन को कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि वह तो 6 महीनें पहले ही ये सब सामान भारत में सप्लाई कर देता है और पैसे कमा लेता है, बाद में चीनी सामानों, पटाखों, लाइटों और लड़ियों के बहिष्कार से सिर्फ भारतीय दुकानदार बर्बाद होते हैं क्योंकि वे तो पहले ही चीन को पैसा देकर सामान मांगा चुके होते हैं और अपनी दुकानों को सजा चुके होते हैं.

अगर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को पटाखे बेचने पर बैन लगाना था तो 6 महीनें पहले ही बैन लगा देते, हमारे देश के दुकानदार चाइना से कोई सामान खरीदते ही नहीं, अब तो चीन से सामान खरीद चुके हैं, पैसे चीन को दे चुके हैं, चीन की कमाई हो चुकी है, मी-लार्ड ने चीन की कमाई करवाकर पटाखा बेचने पर बैन लगा दिया.
सावधान, 18 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं के साथ SEX पर लगा बैन, लगेगी धारा 376, होगी सीधा जेल

सावधान, 18 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं के साथ SEX पर लगा बैन, लगेगी धारा 376, होगी सीधा जेल

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सेक्स रिलेशन पर आज सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा फैसला सुनाया है, अब से अगर किसी भी व्यक्ति ने 18 वर्ष से कम उम्र की किसी भी युवती के साथ सेक्स किया तो उसे रेप माना जाएगा और धारा 376 IPC के तहत जेल भेज दिया जाएगा. यह फैसला उन लोगों पर भी लागू होगा होगा जो 18 वर्ष से कम उम्र की पत्नी के साथ रिलेशन बनायेंगे. मतलब सुप्रीम कोर्ट ने 18 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं के साथ SEX को बैन कर दिया है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में बाल विवाह पर बैन है, बैन के मुताबिक़ 18 वर्ष से पहले ना तो शादी हो सकती है और ना ही SEX लेकिन कुछ धर्मों में अभी भी बाल विवाह की प्रथा चल रही है जिसे लेकर सुप्रीम कोर्ट गंभीर है, अब किसी भी धर्म के लोग हों, अगर 18 वर्ष से कम उम्र की महिला के साथ मर्जी से या जबरजस्ती SEX किया तो उसे रेप ही माना जाएगा.

आज सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में सुनवाई के बाद स्पष्ट निर्देश दिए कि 18 वर्ष से पहले किसी भी महिला के साथ शादी होती है तो उसे अवैध माना जाएगा और अगर शादी करके उसके साथ SEX किया गया तो उसे रेप माना जाएगा.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अब तक भारत में बाल विवाह पर तो बैन था लेकिन 18 वर्ष से पहले सेक्स पर बैन नहीं था लेकिन अब सेक्स पर भी बैन लगा दिया गया है. अब 18 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं को नाबालिक माना जाएगा और उनके साथ अगर किसी ने भी कुछ किया तो उसे रेप माना जाएगा.
आरएसएस के बारे में अज्ञान हैं राहुल गाँधी, बिना जानकारी के कुछ भी बोल देते हैं, पढ़ें सच

आरएसएस के बारे में अज्ञान हैं राहुल गाँधी, बिना जानकारी के कुछ भी बोल देते हैं, पढ़ें सच

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राहुल गाँधी भले ही भारत में रहते हैं और खुद को भारतीय बताते हैं लेकिन उन्हें भारत के बारे में बहुत कम ज्ञान है, जिसको कम ज्ञान होता है वह आजकल यूट्यूब पर वीडियो देखकर अपना ज्ञान बढ़ाता है लेकिन राहुल गाँधी शायद यूट्यूब पर वीडियो भी नहीं देखते. कल अगर वे यूट्यूब पर आरएसएस के बारे में वीडियो देख लेते तो शायद उनकी आज इतनी फजीहत ना होती.

कल राहुल गाँधी ने अपनी अज्ञानता का परिचय देते हुए कहा कि आरएसएस की शाखाओं में महिलाऐं नहीं जातीं, मैंने किसी भी महिला को शॉर्ट्स यानी छोटे कपड़े में संघ की शाखाओं में नहीं देखा है. उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से पूछा - मैंने तो नहीं देखा लेकिन क्या आपने देखा है.

राहुल गाँधी ने आगे कहा कि महिलाओं ने पता नहीं क्या अपराध किया है जिसकी वजह से आरएसएस वाले उन्हें अपनी शाखाओं में नहीं आने देते. कल राहुल गाँधी ने अज्ञानता की वजह से विल्कुल झूठ बोला इसलिए हमें सोचा कि उन्हें, उनके कांग्रेसी कार्यकर्ताओं और पूरे देशवासियों को बता दें कि महिलायें आरएसएस की शाखाओं में जाती हैं और पुरुषों के साथ युद्ध कला भी सीखती हैं, यही नहीं इन्हें इतना ट्रेंड कर दिया जाता है कि ये किसी भी बदमाश को ढेर कर सकती हैं.

राहुल गाँधी और समस्त कांग्रेसी ये दोनों वीडियो जरूर देखें और अपनी जानकारी बढाएं.