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Nov 16, 2017

दीपिका से बोला राजपूत, हम स्त्रियों पर हाथ नहीं उठाते लेकिन लक्ष्मण ने काटी थी सूर्पनखा की नाक

दीपिका से बोला राजपूत, हम स्त्रियों पर हाथ नहीं उठाते लेकिन लक्ष्मण ने काटी थी सूर्पनखा की नाक

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नई दिल्ली: पद्मावती फिल्म में महारानी पद्मावती का रोल करके और घूमर गाने पर डांस करके दीपिका पादुकोण बुरी तरह से फंस गयी हैं, उन्होंने कई बार विरोध करने वालों को फटकार लगाने की कोशिश की जिसकी वजह से वह लोगों की नजरों में आ गयीं, कल बीजेपी नेता सुब्रमनियम स्वामी ने दीपिका पादुकोण की डीएनए एनालिसिस करते हुए इन्हें गैर-हिन्दुस्तानी बता दिया था, उन्होंने कहा था कि दीपिका पादुकोण हिन्दुस्तानी नहीं हैं, वह डच नागरिक हैं, ऐसे में वह राजपूत महिलाओं का स्वाभिमान समझ सकती हैं.

आज करणी सेना के अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने एक वीडियो जारी करके कहा है कि राजपूत महिलाओं पर कभी हाँथ नहीं उठाते लेकिन दीपिका याद रखें लक्ष्मण जी से सूर्पनखा के साथ क्या किया था। एक तरह से महिपाल सिंह चेतावनी दे रहे हैं कि अगर पद्मावती के समर्थन में दीपिका पादुकोण ने चपड़ चपड़ करने की कोशिश की तो उनका भी हाल सूर्पनखा जैसा हो सकता है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अब करणी सेना के पूरी तरह से पाद्मावती के विरोध में आ चुके हैं, लोगों ने 1 दिसम्बर को भारत बंद का ऐलान किया है जिसे देखते हुए पद्मावती के फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली की सुरक्षा बढ़ा दी गयी है.

Nov 13, 2017

राजपूत करणी सेना के चीफ बोले, ऐसे नहीं मानेगा भंसाली, इसको सिखाएंगे असली मजा तभी सुधरेगा

राजपूत करणी सेना के चीफ बोले, ऐसे नहीं मानेगा भंसाली, इसको सिखाएंगे असली मजा तभी सुधरेगा

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नई दिल्ली: फिल्म पद्मावती को लेकर देश भर में कल हिन्दू संगठनों ने प्रदर्शन किया। गुजरात के सूरत और मध्य प्रदेश के रतलाम में इन प्रदर्शनों में लाखों लोगों ने हिस्सा लिया। रतलाम में जातिगत आरक्षण के खिलाफ भी प्रदर्शन किया गया जहां करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष और साध्वी देवा ठाकुर ने लोगों को सम्बोधित किया। 

मंच से करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखदेेव सिंह गोगामड़ी ने संजय लीला भंसाली को भी चेतावनी दी कि पद्मावती में विवादित दृश्य व गाने नहीं हटाए तो राजस्थान में हुआ हमला ट्रेलर था और अब सीधे मजा चखा देंगे। रैली में भारी भीड़ देख कई वक्ताओं ने मंच से संजय लीला भंसाली को चेतावनी दी और कहा कि इतिहास से छेड़छाड़ कर पैसे कमाने वाले फिल्म निर्माता अब बख्शे नहीं जाएंगे।

रैली में मौजूद साध्वी देवा ठाकुर ने कहा कि सरकार समाज में फूट डाल रही है। राजपूत समाज या हिंदू समाज में कोई गरीब पैदा नहीं होता। सरकारें केवल जाति के नाम पर लोगों को बाटंने का काम कर रही हैं। 

आरक्षण जाति के नाम पर नहीं बल्कि आर्थिक आधार पर होना चाहिए। अभी रतलाम में जुटे हैं आगे भोपाल और दिल्ली तक भी हुंकार भरेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जगह-जगह जाकर मन की बात करते हैं तो वे महाराणा प्रताप व राजपूत समाज के इतिहास के बारे में नहीं जानते। फिल्म पद्मावती पर प्रदेश में प्रतिबंध लगाने सहित अन्य मांग भी मंच से रखी गई।

Nov 10, 2017

मोबाइल के अंतिम 2 डिजिट पर भविष्यवाणी करते हैं ज्योतिष महारथी वशिष्ठ जी महाराज, पढ़ें कैसे

मोबाइल के अंतिम 2 डिजिट पर भविष्यवाणी करते हैं ज्योतिष महारथी वशिष्ठ जी महाराज, पढ़ें कैसे

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आपको जानकर आश्चर्य होगा की मोबाइल के अंतिम 2 डिजिट से भी भविष्य वाणी हो सकती है, किसी के विषय में 90% सटीक जानकरी दी जा सकती है, 13 वर्षो से इस विषय पर शोध करने वाले साबरमती गुरुकुल के वशिष्ठ जी महराज जो की एक ज्योतिष महारथी है, साथ ही भागवत कथाकार है, मूलतः वाराणसी के है, अभी ज्योतिष विभाग गुरुकुलम के मार्गदर्शक है। आपको बताते है, वरिष्ठ जी बताते हिं कि यदि आपके मोबाइल नम्बर के अंत में यह संख्या हो तो आपके साथ भविष्य में क्या क्या घटनाएं होने वाली हैं.

यदि आपके मोबाइल नम्बर के अंत में 61 है

तो आपका यह नंबर आपके स्वास्थ्य के लिए हो सकता है खतरनाक, साथ ही आपकी पारिवारिक स्थिति में भी समस्या पैदा कर सकता है, आप पुरुष है तो पत्नी के स्वास्थ्य पर बुरे प्रभाव दे सकता है, और साथ ही आपके गुप्त शारीरिक अंगो में रोग का कारण बन सकता है, जीवनी शक्ति में कमी थकावट और आलस्य भी अधिक दे सकता है, अतः इस नंबर से आपको सावधान रहना है, साथ ही मोबाइल नम्बर के विशेषज्ञ पंडित से इसकी सटीक जानकारी प्राप्त करके इसे बदलना चाहिए, किन्तु ध्यान रहे यह नम्बर आपके लिए कुछ मात्रा में मुसीबत से मुक्ति का साधन भी साबित हो सकता है, यानी ईश्वरीय शक्तियो का साथ मिल सकता है।

यदि मोबाइल नम्बर के अंत में 70 है

तो यह नम्बर आपको अत्यंत अस्थिर जीवन देता है, साथ ही जीवन को गोल गोल घुमाता है।
आप इस नम्बर के कारण उदार स्वाभाव के सरल व्यक्ति है, किन्तु शंकालु प्रवित्ति से बचे, विश्वास बढायें।

यदि आपके मोबाइल नम्बर के अंत में 88 है

तो यह नंबर अत्यंत दुर्भाग्य पूर्ण साबित हो सकता है साथ ही यह उदासी, निराशा व वैराग्य सूचक है. उस नंबर के धारक कभी कभी बहुत धनी हो सकते है लेकिन परेशानी दरिद्रों वाली ही रहेगी, यह नम्बर आर पार का नम्बर है, या तो बहुत धनी या दरिद्र पर सम्भावना अधिक परेशानियो का ही है, अतः ऐसे लोगो को अपने मार्गदर्शक से मिलकर इसका उपाय तो अवश्य ही करना चाहिए, इनके कार्यो में अनचाही बाधा एवं रुकावट, देर विलम्ब आना स्वाभाविक है। अतः अविलम्ब नम्बर बदलकर सही चुनाव कर अपना जीवन संवारे। शनि कवच और शिव उपासना ऐसे लोगो को अत्यंत जरुरी है।

यदि आपके मोबाइल नम्बर के अंत में 97 है

तो यह आपके लिए उत्साह और उमंग का नंबर है. आपको इस नम्बर से उत्थान प्राप्त हो सकता है, आपके जीवन को दिशा देने में यह नम्बर अत्यंत लाभकारी है, परन्तु ध्यान रहे यह नम्बर बहुत दिनों तक एक जगह आपको टिकने नही देगा, पतन भी करता है, विशेषतः स्वतः के क्रोध के कारण, आपको इस नम्बर की जाँच अपने जनमांको और नामांको तथा शारीरिक भाषा द्वारा अवशय करवानी चाहिए।

वशिष्ठ जी महराज (guruji09322320055@gmail.com)

Nov 3, 2017

 हिन्दूओं को आतंकवादी बोलने में फिल्मों के आतंकवादी प्रकाश राज ने किया कमल हसन का समर्थन

हिन्दूओं को आतंकवादी बोलने में फिल्मों के आतंकवादी प्रकाश राज ने किया कमल हसन का समर्थन

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हिन्दू धर्म को बदनाम करने की एक बार फिर से साजिश शुरू हो गयी है, आज तक भारत में ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया जिसमें किसी हिन्दू ने किसी दूसरे धर्म के लोगों को बिना गलती के सिर्फ धर्म देखकर मारा हो, इसके बावजूद भी कमल हसन ने कल हिन्दुओं को आतंकवादी बताया.

आज फिल्मों में आतंकवादियों का किरदार निभाने वाले फ़िल्मी आतंकवादी प्रकाश राज ने भी कमल हसन के सुर में सुर मिलाते हुए हिन्दुओं को आतंकवादी बताया.

प्रकाश राज ने ट्विटर पर लिखा - धर्म, संस्कृति और नैतिकता के नाम पर डर पैदा करना आतंक नहीं तो क्या है?

प्रकाश ने #justasking के जरिए लिखा है - यदि मेरे देश की सड़कों पर युवा जोड़ों को गाली देना और मारपीट करना आतंक नहीं है, यदि कानून अपने हाथ में लेना और गौ-हत्या के शक की बिनाह पर भीड़ का किसी को मारना आतंक नहीं है, यदि गालियों के साथ ट्रोल करना, धमकाना, मतभेद की छोटी सी भी आवाज को दबाना आतंक नहीं है तो फिर आतंक और क्या है.'

Nov 2, 2017

कमल हसन ने फिर छेड़ा हिन्दू आतंकवाद का मुद्दा, हिन्दुओं को भी बताया आतंकवादी, पढ़ें

कमल हसन ने फिर छेड़ा हिन्दू आतंकवाद का मुद्दा, हिन्दुओं को भी बताया आतंकवादी, पढ़ें

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कमल हसन 7 नवम्बर को अपने जन्मदिन पर राजनीति में उतरने की घोषणा कर चुके हैं, उन्होंने पहले ही साफ कर दिया है कि उनका रंग कुछ भी हो लेकिन भगवा नहीं होगा, मतलब भारतीय जनता पार्टी से नहीं जुड़ेंगे, आज उन्होंने हिन्दुओं को आतंकवादी बताकर साफ़ कर दिया है कि वह बीजेपी की विरोधी पार्टी में ही शामिल होंगे.

कमल हसन ने आज हिन्दुओं को आतंकवादी बताया, उन्होंने कहा कि हिन्दू राईट विंग संगठन यह दावा नहीं कर सकते कि हिन्दू आतंकवादी नहीं होते, अब उनके कैम्प में भी हिंसा फ़ैल रही है,आतंकवाद पनप रहा है. कमल हसन ने तमिल दैनिक अनंदा विकेतन में यह बयान दिया.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कमल हसन पहले से ही भगवा के खिलाफ हैं, अब उन्होंने हिन्दुओं को आतंकवादी बताकर यह भी साफ़ कर दिया है कि तमिलनाडु की राजनीति गरमाने वाली है, हो सकता है कि कांग्रेस या DMK पार्टी में शामिल हो जाँय या अपनी नयी पार्टी खड़ी करें, हाल ही में वे दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल से भी मिले थे और उनसे जल्द सफलता के सूत्र मांगे थे.

Oct 20, 2017

निजामुद्दीन दरगाह में भी धूम धूम से मनाई गयी दिवाली

निजामुद्दीन दरगाह में भी धूम धूम से मनाई गयी दिवाली

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दिल्ली की निजामुद्दीन दरगाह में भी दिवाली का त्यौहार बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया गया, दरगाह परिसर में कई जगह पर रंगोली बनायी गयी और दिए जलाए गए. इस मौके पर दर्जनों को इकठ्ठे और सैकड़ों दिए जलाकर दरगाह को रोशन किया.

आपको बता दें कि दिवाली हिदुस्तान के सबसे बड़ा त्यौहार है, हर बार निजामुद्दीन दरगाह गंगा जमुनी तहजीब पेश करते हुए दिवाली का त्यौहार मनाता है, इस बार भी यहाँ पर दिवाली मनायी गयी. इस अवसर पर मुस्लिम महिलाओं ने अपने हाथों से रंगोली बनायी और दीपक जलाए.

आपको बता दें कि भारत में सूफिज्म को मानने वाले मुस्लिम हर बार दीवाली का त्यौहार मनाते हैं, निजामुद्दीन दरगाह भी सूफिज्म के लिए जानी जाती है, यहाँ पर सभी धर्मों का सम्मान किया जाता है, कट्टरपंथ सोच का समर्थन नहीं किया जाता.

Oct 18, 2017

सुब्रमनियम स्वामी बोले, हम हिन्दुओं को बहुत गर्व है, आज श्रीराम के जैसे ही जगमग होगी अयोध्या

सुब्रमनियम स्वामी बोले, हम हिन्दुओं को बहुत गर्व है, आज श्रीराम के जैसे ही जगमग होगी अयोध्या

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आज अयोध्या जाएंगे. अयोध्या में आज एक विश्व रिकॉर्ड बनने जा रहा है, इस बार की दीवाली बेहद ख़ास रहने वाली है क्योंकि पहली बार यहाँ पर एक साथ 2 लाख दीयों को जलाया जाएगा. सरयू नदी का खूबसूरत नजारा अभी से लोगों को मनमोहित कर रहा है.

इस बार की दीवाली ठीक वैसी ही होने वाली है जैसी प्रभु श्री राम के अयोध्या लौटने पर मनायी गयी थी, जैसे उस समय शहर को दीपों की रौशनी से जगमग कर दिया गया था वैसे ही इस बार भी अयोध्या को 2 लाख दीयों से जगमग कर दिया जाएगा. जिस तरह यहाँ पर लाइटों से सजावट की गयी है उसे देखने के लिए लोग दूर दूर से पहुँच रहे हैं. यही नहीं विदेशी पर्यटक भी अयोध्या की भव्य दीवाली को देखने के लिए पहुँचने लगे हैं.

आप की जानकारी के लिए बता दें कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या में छोटी दिवाली के मौके पर श्री राम की नगरी अयोध्या पहुंचेंगे और दिवाली मनाएंगे. इस मौके पर राज्यपाल राम नाईक भी मौजूद रहेंगे. मुख्यमंत्री योगी और उनके सभी मंत्रियों के अलावा यहाँ पर करीब एक लाख साधू संत भी इकठ्ठे होंगे जिसके लिए कई तरह की ख़ास तैयारियां की गयी हैं. राम, लक्ष्मण और सीता को उड़नखटोले से अयोध्या लाया जाएगा और उनका पूजन भी किया जाएगा.

अयोध्या में ऐतिहासिक दिवाली की खबर से बीजेपी के दिग्गज नेता और राम मंदिर के योद्धा सुब्रमनियम स्वामी भी खुश हैं, उन्होंने ट्वीट करके कहा कि हम हिन्दू और ऐसे लोग जो अपने पूर्वजों को हिन्दू मानते हैं, बहुत खुश हैं क्योंकि आज अयोध्या वैसे ही रोशन होगी जैसे भगवान राम के समय में रोशन हुई थी.

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Oct 11, 2017

दिल्ली सरकार बढाती है 99.7 फ़ीसदी प्रदूषण, पटाखे करते हैं 0.3 फ़ीसदी प्रदूषण: चेतन भगत

दिल्ली सरकार बढाती है 99.7 फ़ीसदी प्रदूषण, पटाखे करते हैं 0.3 फ़ीसदी प्रदूषण: चेतन भगत

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चेतन भगत ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पटाखों के बैन को पूरी तरह से गलत बताया है और अपनी बात को साबित करने का प्रयास भी किया है. कल से ही उनके बयान पर बवाल मचा हुआ है, उन्होंने कल कहा था कि पटाखों पर बैन ठीक वैसा ही है जैसा बकरा-ईद पर बकरा काटने और क्रिसमस ट्री पर बैन लगाना. सुप्रीम कोर्ट को किसी भी त्यौहार पर बैन नहीं लगाना चाहिए क्योंकि बैन की प्रथा बहुत बुरी होती है. एक बार बैन लगना शुरू हो गया तो धीरे धीरे सभी चीजों पर बैन लगा दिया जाएगा और हमारे बच्चों का त्योहारों को लेकर क्रेज ख़त्म हो जाएगा.

चेतन भगत ने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि पटाखों से प्रदुषण होता है, दिल्ली इसलिए प्रदूषित है, मेरा कहना है कि दिल्ली पटाखों की वजह से प्रदूषित नहीं है, दिल्ली सरकार की बुरी नीतियों, बुरे प्रशासन, अन-चेक ग्रोथ, फक्ट्रियों के लाइसेंस के चेक ना होने, प्रदूषण को मॉनिटर ना करने और अन्य चीजों से है. दिल्ली इन सब वजहों से प्रदूषित है. इसके लिए दीवाली पर दोष देने के बजाय सरकारों को दोष क्यों नहीं दिया जाता है.

हम यह क्यों नहीं कहते कि हमने दिल्ली को ऐसा क्यों बनाया कि हमारे बच्चे सिर्फ दो घंटे पटाखे नहीं फोड़ सकते. दीवाली पर पटाखे फोड़ने से सिर्फ 0.3 परसेंट प्रदूषण बढ़ता है लेकिन साल भर 99.7 परसेंट प्रदूषण फैलाने वालों से क्यों सवाल नहीं पूछ जाता. पहले 99.7 प्रदूषण को रोकने का काम करो, पहले उस समस्या को रोको, पहले उन लोगों से सवाल पूछो. उनकी वजह से समस्या हो रही है. पटाखों की वजह से कोई समस्या नहीं होती क्योंकि उससे सिर्फ .2 फ़ीसदी प्रदूषण बढ़ता है, पटाखे जलाने वालों को हम गिल्टी क्यों फील कराते हैं.

99.7 परसेंट प्रदूषण सरकार की बुरी नीतियों की वजह से बढ़ रहा है लेकिन हम उन्हें दोष देने की हिम्मत नहीं जुटा पाते लेकिन सिर्फ 0.3 फ़ीसदी प्रदूषण के लिए हम अपने बच्चों की खुशियाँ छीनने के लिए तैयार हैं. सरकार को पहले से प्रदूषण कम करने का प्रयास करना चाहिए.

अगर पटाखों, रंगों पर बैन हो जाएगा तो त्योहारों को लेकर बच्चों का क्रेज ख़त्म हो जाएगा: चेतन भगत

अगर पटाखों, रंगों पर बैन हो जाएगा तो त्योहारों को लेकर बच्चों का क्रेज ख़त्म हो जाएगा: चेतन भगत

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चेतन भगत ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पटाखों के बैन को पूरी तरह से गलत बताया है और अपनी बात को साबित करने का प्रयास भी किया है. कल से ही उनके बयान पर बवाल मचा हुआ है, उन्होंने कल कहा था कि पटाखों पर बैन ठीक वैसा ही है जैसा बकरा-ईद पर बकरा काटने और क्रिसमस ट्री पर बैन लगाना. सुप्रीम कोर्ट को किसी भी त्यौहार पर बैन नहीं लगाना चाहिए क्योंकि बैन की प्रथा बहुत बुरी होती है. एक बार बैन लगना शुरू हो गया तो धीरे धीरे सभी चीजों पर बैन लगा दिया जाएगा और हमारे बच्चों का त्योहारों को लेकर क्रेज ख़त्म हो जाएगा.

चेतन भगत ने आज अपने बयान पर कायम रहते हुए बताया कि उनकी बात क्यों सही है, उन्होंने कहा कि मैं ना तो पटाखा उद्योग से हूँ और ना ही मुझे पटाखों को प्रमोट करने पर कोई पैसा मिल रहा है. मैंने सिर्फ अपना पक्ष रखा है, मैंने अपने विचार रखे हैं.

चेतन भगत ने कहा कि अगर कोई पटाखा मुक्त दीवाली मनाना चाहता है तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है उल्टा मैं उसका भी समर्थन करता हूँ और मैंने इसके लिए कैम्पेन भी किया है. 

चेतन भगत ने कहा कि यहाँ पर सिर्फ पटाखों का मुद्दा नहीं है, यहाँ पर मुदद है कि हम कई मुद्दों को कैसे डील करते हैं. 

पहली बात तो यह कि अगर हमें या आपको कुछ पसंद नहीं है तो उसे न्यायिक सिस्टम द्वारा बैन नहीं करना चाहिए. मेरे ख्याल से यह बहुत खतरनाक ट्रेंड होगा क्योंकि हो सकता है आज का बैन आपके फेवर में हो इसलिए आप बैन को सपोर्ट कर रहे होगे लेकिन अगर आप हमारी परम्पराओं, संस्कृति को बैन करने की प्रथा का समर्थन करोगे तो यह बहुत खतरनाक होगा, खासकर भारत के लिए. इसलिए मेरा मानना है कि किसी भी चीज पर बैन नहीं लगना चाहिए.

मुझे कोई आपत्ति नहीं है कि आप अपने पड़ोस की दीवारों पर पटाखा ना जलाने का पोस्टर लगा दो. लेकिन अगर पटाखों पर बैन लगता है तो इस पर डिबेट होना चाहिए. हमारी आपकी पसंद के आधार पर बैन नहीं लगना चाहिए. 

चेतन भगत ने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि पटाखों से प्रदुषण होता है, दिल्ली इसलिए प्रदूषित है, मेरा कहना है कि दिल्ली पटाखों की वजह से प्रदूषित नहीं है, दिल्ली बुरी नीतियों, बुरे प्रशासन, अन-चेक ग्रोथ, फक्ट्रियों के लाइसेंस के चेक ना होने, प्रदूषण को मॉनिटर ना करने और अन्य चीजों से है. दिल्ली इन सब वजहों से प्रदूषित है. इसके लिए दीवाली पर दोष देने के बजाय सरकारों को दोष क्यों नहीं दिया जाता है.

हम यह क्यों नहीं कहते कि हमने दिल्ली को ऐसा क्यों बनाया कि हमारे बच्चे सिर्फ दो घंटे पटाखे नहीं फोड़ सकते. दीवाली पर पटाखे फोड़ने से सिर्फ 0.2 परसेंट प्रदूषण बढ़ता है लेकिन साल भर 99.7 परसेंट प्रदूषण फैलाने वालों से क्यों सवाल नहीं पूछ जाता. पहले 99.7 प्रदूषण को रोकने का काम करो, पहले उस समस्या को रोको, पहले उन लोगों से सवाल पूछो. उनकी वजह से समस्या हो रही है. पटाखों की वजह से कोई समस्या नहीं होती क्योंकि उससे सिर्फ .2 फ़ीसदी प्रदूषण बढ़ता है, पटाखे जलाने वालों को हम गिल्टी क्यों फील कराते हैं.

उन्होने कहा कि कुछ लोग मुझे साम्प्रदाईक बता रहे हैं लेकिन अगर वे मेरी पुस्तकों को पढेंगे तो उनकी ग़लतफ़हमी दूर हो जाएगी, लेकिन मुझे लगता है कि इस तरह का बैन सिर्फ हिन्दू धर्म पर लग रहा है, जब दिवाली आती है तो पानी-रहित होली का कैम्पेन शुरू हो जाता है, जब जन्माष्टमी आती है तो गोविंदा पर बैन लगा दिया जाता है. कुछ लोग करवा चौथ पर भी बैन की मांग कर रहे हैं. मतलब सब कुछ हिन्दू त्योहारों पर ही बैन की बात हो रही है.

चेतन भगत ने कहा कि दिवाली भारतीय त्यौहार है, हिन्दुओं का सबसे बड़ा त्यौहार है. अगर भारत के लोग दीवाली नहीं मनाएंगे, त्यौहार को कौन सहेजेगा. आप खुद सोचिये जब बच्चों को दिवाली पर पटाखे नहीं मिलेंगे तो वे बोर हो जाएंगे, बच्चे आजकल वैसे भी फोन, एप, ऑनलाइन गेम्स में बिजी रहते हैं, वे साल भर पटाखे जलाने के लिए इन्तजार करते रहते हैं लेकिन जब उन्हें पटाखे नहीं मिलेंगे तो त्योहारों को लेकर उनका क्रेज ख़त्म हो जाएगा. 

बच्चों को होली पर रंगों से प्रेम होता है, पिचकारी से होली खेलते हैं, अगर होली पर रंगों पर बैन लग जाएगा और दिवाली पर पटाखों पर बैन लग जाएगा तो उनका क्रेज ख़त्म हो जाएगा, क्या आप अपने बच्चों की खुशियाँ छीनना चाहते हैं, त्योहारों को लेकर उनका उत्साह ख़त्म करना चाहते हैं, अगर वे यह सब नहीं करेंगे तो दिवाली से कैसे जुड़ेंगे. अगर हमारी यह पीढ़ी बड़ी होगी तो दिवाली से जुड़ नहीं पाएगी. क्या आप ऐसा चाहते हो. 99.7 परसेंट प्रदूषण सरकार की बुरी नीतियों की वजह से बढ़ रहा है लेकिन हम उन्हें दोष देने की हिम्मत नहीं जुटा पाते लेकिन सिर्फ 0.2 फ़ीसदी प्रदूषण के लिए हम अपने बच्चों की खुशियाँ छीनने के लिए तैयार हैं.

चेतन भगत ने कहा कि हमें हमारी संकृति और विरासत को सहेजे रखना है, कुछ लोग बहुत सिंपल दिखना चाहते हैं, बहुत कूल रहते हैं, पश्चिमी संस्कृति को फॉलो करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम उनकी बात मानने के लिए अपनी विरासत को ख़त्म कर दें. अगर हम अपने कल्चर को खो लेंगे तो पैसे बचाकर क्या करेंगे, जब खुशियाँ ही नहीं रहेंगी तो पैसे किस काम आएँगे. 

अगर मैं आपको कहूँ कि आप बहुत अमीर बन सकते हो लेकिन माँ से दूर होना पड़ेगा तो आप मेरी बात नहीं मानोगे. 

दोस्तों दिवाली मेरा सबसे पसंदीदा त्यौहार है और मुझे लगता है कि आपका भी होगा. प्रदूषण बड़ी समस्या है अगर आप पटाखे नहीं जलाना चाहते तो मत जलाइये, अगर आप प्रदूषण ख़त्म ही करना चाहते हो तो AC का इस्तेमाल बंद करो, कार का इस्तेमाल छोड़ दो इससे आप प्रदूषण कम करने में अधिक योगदान दे सकते हैं क्योंकि इन्हें आप साल भर इस्तेमाल करते हैं. 

मुझे लगता है कि दिवाली पर पटाखों पर बैन लगाकर सुप्रीम कोर्ट ने हद पार की है, ऐसा नहीं होना चाहिए था, सरकार अन्य उपाय कर सकती थी, सरकार अगर चाहती तो पांच जगह आतिशबाजी कार्यक्रम करती और लाखों लोग पटाखे जलाना छोड़कर उसे देखने जाते. लोगों को पटाखे देखने को भी मिल जाता और प्रदूषण भी कम फैलता. हम ऐसा क्यों नहीं करते, हम किसी को त्यौहार मनाने का दोष क्यों देते हैं. बैन लगाना गलत है, यह मेरा त्यौहार है, इसे मैं अपने ढंग से माना चाहता हूँ. किसी को दखल देने का कोई हक नहीं है.

Oct 10, 2017

सुप्रीम कोर्ट से बोले चेतन भगत, बैन लगाना है तो बकरा-ईद और क्रिसमस ट्री पर भी लगाओ, वर्ना

सुप्रीम कोर्ट से बोले चेतन भगत, बैन लगाना है तो बकरा-ईद और क्रिसमस ट्री पर भी लगाओ, वर्ना


आज सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और NCR में 30 सितम्बर तक पटाखों की विक्री पर रोक लगा दी. सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि दिवाली पर पटाखे जलाने से प्रदुषण होता है और लोगों का जीना मुश्किल हो जाता है, इसलिए हम देखना चाहते हैं कि पटाखे ना जलाने से दिल्ली में प्रदूषण फैलता है या नहीं.

मतलब सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ प्रैक्टिकल करने के लिए दिवाली पर पटाखे जलाने से रोक लगा दी. आपको बता दें कि जब बकरा ईद पर जानवरों का क़त्ल किया जाता है तो भी प्रदुषण फैलता है क्योंकि जानवरों के खून से नालियाँ-सीवर लाल हो जाते हैं, खून में बीमारी फ़ैल जाती है जिसकी वजह से पीने का पानी प्रदूषित हो जाता है.

यही सब देखकर मशहूर लेखक चेतन भगत ने आज सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर नाराजगी व्यक्त की. उन्होंने कहा कि दिवाली पर पटाखों पर बैन लगाना ठीक वैसा ही है जैसे कि क्रिसमस पर क्रिसमस ट्री और बकरा-ईद पर बकरों पर बैन लगाना. इसलिए बैन मत लगाइए, हमारी परंपरा का सम्मान कीजिये.

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Oct 7, 2017

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया द्वारकाधीश के दर्शन और परंपरागत पूजन, देखिये कुछ फोटो

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया द्वारकाधीश के दर्शन और परंपरागत पूजन, देखिये कुछ फोटो

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात की द्वारका नगरी में द्वारकाधीश मंदिर का दर्शन किया और भगवान द्वारकाधीश यानी भगवान कृष्ण की परंपरागत पूजा और अर्चना की. प्रधानमंत्री मोदी के साथ गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपानी, पूर्व मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल, उप-मुख्यमंत्री नितिन पटेल और केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी थे. 

प्रधानमंत्री मोदी के द्वारकाधीश मंदिर में दर्शन की कुछ फोटो 

मोदी ने मंदिर में पहुँचने पर वहां उपस्थित लोगों का अभिवादन किया.

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मोदी के लिए मंदिर में लाल दरी बिछाई गयी. मोदी लाल दरी पर चलते हुए मंदिर प्रांगण के अन्दर पहुंचे. मोदी का गीत संगीत और भजन गाकर स्वागत किया गया.

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मोदी मंदिर के अन्दर पहुंचे. बीजेपी के सभी बड़े नेता उनके साथ थे.

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मोदी ने द्वारकाधीश मंदिर के अन्दर पहुँचने पर भगवान और अन्य लोगों का हाथ जोड़कर अभिवादन किया.

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मोदी ने भगवान द्वारकाधीश को किया दोनों हाथ जोड़कर नमस्कार.

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मोदी ने भगवान द्वारकाधीश को किया दोनों हाथ जोड़कर नमस्कार. मंदिर के सभी पुजारी उनके पास पहुंचें.

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प्रधानमंत्री मोदी पूजा करने के लिए आसन पर बैठे. हाथों में लिए पुष्प.

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भगवान द्वारकाधीश की फोटो.

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प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसे की भगवान द्वारकाधीश की पूजा, मुख्यमंत्री विजय रुपानी और पूर्व मुख्यमंत्री आनंदीबेन उनके पीछे खड़ी हैं. मंदिर के पंडित नीचे बैठे हैं.

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मंदिर के पंडितों ने किया मंत्रोच्चार, भक्तिमय हुआ द्वारका मंदिर का माहौल.

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पान-फूल से की द्वारकाधीश की विधिवत पूजा.

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मंदिर के पंडितों ने मोदी को लगाया तिलक, दिया विजयी होने का आशीर्वाद.

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मंदिर के पंडितों ने मोदी को लगाया तिलक, दिया विजयी होने का आशीर्वाद, साथ में किया मंत्रोच्चार.

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प्रधानमंत्री मोदी ने सम्पन्न की भगवान द्वारकाधीश की पूजा अर्चना. जय द्वारकाधीश.

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मंडिर के पंडितों ने प्रधानमंत्री मोदी को भेंट की फोटो.

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मंदिर के पंडितों ने मोदी के सर पर लगाया द्वारकाधीश का मुकुट. मोदी ने सर झुकाकर लिया आशीर्वाद.

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पूजा ख़त्म करके मंदिर से बाहर निकले प्रधानमंत्री मोदी, लोगों से मिलाया हाथ.

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मोदी से हाथ मिलाने के लिए लोग हुए उतावले. मोदी भी लोगों से मिलकर हुए खुश.

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लोगों का उतावलापन देखते ही बनता था, एक साथ बढे कई कई हाँथ, मोदी ने भी नहीं किया किसी को मायूश.

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Oct 2, 2017

रोहिंग्या घुसपैठियों के लिए खुश खबरी, म्यांमार वापस लेने के लिए तैयार, तुरंत पहुंचें बॉर्डर पर

रोहिंग्या घुसपैठियों के लिए खुश खबरी, म्यांमार वापस लेने के लिए तैयार, तुरंत पहुंचें बॉर्डर पर

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भारत और बांग्लादेश में रह रहे लाखों रोहिंग्या शरणार्थियों और घुसपैठियों के लिए खुशखबरी है क्योंकि म्यांमार उन्हें एक बार फिर से वापस लेने के लिए तैयार हो गया है. ये लोग तुरंत बॉर्डर पर पहुंचें और अपने देश लौट जाँय. 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अब तक करीब पांच लाख रोहिंग्या शरणार्थी बांग्लादेश बॉर्डर पर पहुँच चुके हैं, इन लोगों को म्यांमार की सेना वापस इनके घरों पर पहुंचाएगी.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि म्यांमार ने पिछले महीनें रोहिंग्या लोगों पर सैनिक कार्यवाही की थी जिसके बाद इन लोगों में दहशत मच गयी थी. लाखों रोहिंग्या मुसलमान मारे जाने के डर से म्यांमार से भागकर भारत और बांग्लादेश आ गए थे. 

म्यांमार की इस कार्यवाही की पूरे विश्व में आलोचना हुई थी. म्यांमार की काउंसिलर ऑंग सुन सू ची के खिलाफ कई जगह प्रदर्शन हुए थे, उन्हें आतंकियों से भी बड़ा आतंकी बताया गया था, कई देशों में उनके नोबल पुरष्कार को भी छीनने की मांग की गयी थी. 

चौतरफा आलोचना के बाद आख़िरकार म्यांमार एक बार फिर से रोहिंग्या को वापस लेने को तैयार हो गया लेकिन रोहिंग्या लोगों को भी अपनी पुरानी हरकतें छोडनी पड़ेंगी. पूर्व उनके कई आतंकवादी संगठनों के साथ रिश्ते रहे हैं. उनपर दूसरे धर्म के लोगों के कत्लेआम का आरोप लगा था.
400 पर थे तो राम को नहीं मानते थे राहुल गाँधी, 44 पर आ गए तो पहुँच गए श्री राम की शरण में

400 पर थे तो राम को नहीं मानते थे राहुल गाँधी, 44 पर आ गए तो पहुँच गए श्री राम की शरण में

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कभी कांग्रेस पार्टी के लोकसभा में 400 से भी अधिक सांसद होते थे, बहुमत से कांग्रेस की सरकार बनती थी, उस समय राहुल गाँधी राम के अस्तित्व से साफ़ साफ़ इनकार करते थे, कांग्रेस पार्टी भी कई बार श्री राम को काल्पनिक और साम्प्रदाईक बता चुकी है, कांग्रेस का कोई भी नेता आज भी सार्वजनिक रूप से श्री राम का नाम नहीं लेता, उन्हें हमेशा डर लगा रहता है कि कहीं के धर्म के लोग उनके मुंह से जय श्री राम का नाम ना सुन लें और उनका वोट बैंक कम ना हो जाए लेकिन कांग्रेस की इस पालिसी की वजह से पिछले लोकसभा चुनाव में वह 44 सीटों पर आ गयी और पूरे देश से कांग्रेस का पत्ता साफ़ हो गया.

अब कई राज्यों से भी कांग्रेस साफ़ हो गयी है और कई राज्यों से जाने वाली है तो राहुल भी श्री राम की शरण में चले गए हैं. पहली बार राहुल गाँधी ने दशहरा का त्यौहार मनाया है और राम को तिलक लगाकर उनकी पूजा अर्चना की है. राहुल गाँधी ने धनुष तीर उठाकर रावण पर निशाना भी लगाया.

30 अक्टूबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में राहुल गाँधी भी दशहरा समारोह में शामिल हुए, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी उनके साथ थे, दोनों ने श्री राम को तिलक लगाया, उनकी आरती उतारी.

इसके अलावा राहुल गाँधी गुजरात में भी कई मंदिरों में गए थे और भक्तों की तरह पूजा अर्चना की थी. ऐसा लगता है कि राहुल गाँधी और कांग्रेस पार्टी अपने हार के कारणों को पहचान गयी है. उन्हें पता चल चुका है कि देशवासियों ने उन्हें क्यों साफ़ किया है. कांग्रेस समझ गयी है कि जो भी श्री राम का अपमान करता है देश की जनता उसे कड़ा सबक सिखाती है, राहुल गाँधी के पिताजी पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी स्वयं खुद को राम भक्त बताते थे और उनके ही कार्यकाल में अयोध्या में बाबरी विध्वंश हुआ था लेकिन कांग्रेस यह सब भूल गयी वोट बैंक को देखकर श्री राम को काल्पनिक बताने लगी लेकिन अब कांग्रेसियों का दिमाग खुलने लगा है और श्री राम की शरण में आने लगे हैं.
मुसलमानों ने धूम-धाम से मनाया मुहर्रम, यूपी, बिहार, राजस्थान में हिंसा, आगजनी, दंगा और पथराव

मुसलमानों ने धूम-धाम से मनाया मुहर्रम, यूपी, बिहार, राजस्थान में हिंसा, आगजनी, दंगा और पथराव

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कल मुसलमानों का मुहर्रम का त्यौहार था. पूरे देश में यह त्यौहार बहुत ही धूम-धाम से मनाया गया. इस मौके पर पूरे देश में ताजिया निकाली गयी. ताजियाँ में नाचते हुए मुसलमान लड़कों ने अपने शरीर को मार मर कर खून से लाल कर लिया. कई जगह खून से सड़कें लाल कर दी गयीं, इस मौके पर मुसलमान लड़कों ने अपने शरीर पर चाकू, कोड़े मारे, अपने शरीर से खूब खून निकाला. लोगों ने अपने ही खून से स्नान कर लिया.

मुहर्रम जुलूस के मौके पर यूपी, बिहार और राजस्थान में कई जगह हंगामा हुआ, दो गुटों में कई जगह भिडंत हुई, हिंसा, आगजनी और पुलिस पर पथराव किया गया. कई जगह पर कर्फ्यू लगाया गया, कई जगह अभी भी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं.

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में मुहर्रम के ताजिये के दौरान हिंसा देखने को मिली जिसके बाद वहां पर कर्फ्यू लगा दिया गया. अब कर्फ्यू हटा लिया गया है लेकिन जिले में धारा 144 लागू है.'

कानपुर के जूही थाना क्षेत्र में ताजिया जुलूस रोकने पर दो पक्ष आपस में भिड गए, दोनों पक्षों के बीच जमकर पत्थरबाजी हुई, इस दौरान सड़कों पर खड़ी कई गाड़ियों में आग लगा दी गयी. तनाव बढ़ता देखकर पुलिस पहुंची और भीड़ को कंट्रोल करने के लिए लाठीचार्ज किया. DM ने इस घटना की मजिस्ट्रेरियल जाँच के आदेश दे दिए हैं.

इसी तरह बिहार के आरा जिले में मूर्ति विसर्जन के दौरान दो पक्षों में झड़प हुई, मुसलमानों ने हिन्दुओं को मूर्ति विसर्जन से रोक दिया, इसके बाद भगदड़ जैसे हालात हुई लेकिन पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हालात संभाल लिया.

बाराबंकी और महोबा में भी असामाजिक तत्वों ने हंगामा करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी.

राजस्थान के प्रतापगढ़ में दो समुदायों के बीच झड़प और पत्थरबाजी हुई.

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Oct 1, 2017

चीन के शिनजियांग प्रांत में कुरान पर बैन, सबको कहा गया, थाने में जमा करो वर्ना भुगतो सजा

चीन के शिनजियांग प्रांत में कुरान पर बैन, सबको कहा गया, थाने में जमा करो वर्ना भुगतो सजा

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चीन के शिनजियांग प्रांत के उत्तर पश्चिमी भाग में जैसे जैसे मुस्लिमों की जनसँख्या बढती जा रही है वैसे वैसे चाइना की चिंता भी बढ़ती जा रही है, पहले बुरका पर बैन लगाया, फिर दाढ़ी पर बैन लगाया, हाल ही में बकरा-ईद पर बैन लगाया और अब कुरान और हदीस जैसी धार्मिक पुस्तकों पर भी बैन लगा दिया है. प्रशासन ने सभी मुस्लिमों को आदेश दिया है कि कुरान, हदीस सहित सभी इस्लामिक धार्मिक पुस्तकें पुलिस के पास जमा करा दें, अगर किसी के पास भी ऐसी पुस्तकें पायीं गयीं तो उन्हें कड़ी सजा मिलेगी. प्रशासन का मानना है कि कुरान ही सभी तरह के फसाद और जिहाद की जड़ है इसलिए इनपर बैन लगा दिया है.

चीन के अधिकारियों ने मुस्लिम नागरिकों के साथ साथ सभी मस्जिदों और इमामों को भी ऐसा करने का आदेश दिया है, वहां पर उइघुर, कजाख और किर्गीज मुसलमान रहते हैं, तीनों समुदायों से ऐसा करना को कहा गया है वरना सजा भुगतने को तैयार रहने को कहा गया है.

धार्मिक पुस्तकों के अलावा मुस्लिमों द्वारा इस्तेमाल की गयी विशेष चटाई पर भी बैन लगाया गया है, यह नियम लागू कर दिया गया है. पुस्तकों के अलावा इस्लामिक मून और स्टार सिम्बल वाली सभी चीजों पर बैन लगा दिया गया है.

इस मामले पर चाइना के अधिकारियों ने कहा कि हम सिर्फ पांच साल पहले छपी कुरान की पुस्तकों पर बैन लगा रहे हैं क्योंकि इसमें कट्टरपंथ सिखाया गया है जो आतंकवाद फैलने का मुख्य कारण है. यह नियम चीन के 'Three illegal and one item' कानून के तहत लगाया गया है.

इसके अलावा कजाख्स्तान से आने वाले सभी चीजों को बैन कर दिया गया है जिसमें कजाख भाषा में कुछ भी लिखा हो, यही नहीं अगर टी शर्त पर इस्लामिक स्टार भी बना होगा तो उस पर भी बैन है. नियम तोड़ने वाले ऐसे सभी लोगों की चाइना पुलिस जांच करेगी और उन्हें कड़ी सजा देगी.
लोग बोले, पापियों के विनाश के लिये हुआ है MODI का जन्म, तभी तो राम की तरह उनसे भी टूट गया धनुष

लोग बोले, पापियों के विनाश के लिये हुआ है MODI का जन्म, तभी तो राम की तरह उनसे भी टूट गया धनुष

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कल दिल्ली के लाल किला मैदान में दशहरा कार्यक्रम का आयोजन हुआ. यह आयोजन श्री धार्मिक रामलीला समिति द्वारा किया गया था जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू और पूर्ण प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी उपस्थित थे.

कल कार्यक्रम के दौरान एक अजीब घटना हुई, प्रधानमंत्री मोदी को रावण यानी पाप को ख़त्म करने के लिए धनुष तीर दिया गया. मोदी ने जैसे ही धनुष पर तीर चढ़ाया और पाप को ख़त्म करने की कोशिश की, उनके हाथों से धनुष टूट गया. यह धनुष ठीक वैसे ही टूटा जैसे सीता स्वयंवर में श्री राम में हाथों से परशुराम का धनुष टूट गया था.

अब सोशल मीडिया पर लोग इस घटना पर मिली जुली प्रतिक्रिया दे रहे हैं, कुछ लोग कह रहे हैं कि मोदी के हाथों से अपशकुन हुआ है तो कुछ लोग कह रहे हैं कि मोदीजी राम का अवतार हैं और इनका जन्म पापियों को ख़त्म करने के लिए हुआ है. लोगो ने कहा कि जैसे राम जी ने सीता स्वयंबर के समय धनुष उठाया था, तब राम जी के हाथ लगाते ही धनुष के दो टुकड़े हो गए थे, कल उसी तरह से मोदी के हाथों से धनुष टूट गया. ऐसा लगता है कि अब पापियों की शामत आने वाली है.

अब लोग मोदी को लेकर तरह तरह की बातें कर रहे हैं, कुछ लोग कह रहे हैं कि मोदी के हाथों से ही देश के पापियों, भ्रष्टाचारियों, आतंकवादियों, जिहादियों का सफाया होगा, जिस प्रकार से राम से राक्षसों का खात्मा करके राम-राज्य स्थापित किया था उसी प्रकार से मोदी भी पापियों को ख़त्म करके राम-राज्य की स्थापना करेंगे.
राष्ट्रपति राम ने सुनाई भगवान राम और गिलहरी की प्रेरणादायक कहानी, हर देशवासी को पढना चाहिए

राष्ट्रपति राम ने सुनाई भगवान राम और गिलहरी की प्रेरणादायक कहानी, हर देशवासी को पढना चाहिए

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कल दिल्ली के माधवदास पार्क में राम लीला कमेटी द्वारा दशहरा प्रोग्राम का आयोजन किया गया था जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी शामिल हुए.

इस अवसर पर लोगों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भगवान राम और गिलहरी की प्रेरणादायक कहानी सुनाई जिसे हर देशवासी को पढ़ना चाहिए और इससे प्रेरणा लेकर देश के निर्माण में योगदान देना चाहिए.

उन्होंने बताया - जिस समय रामसेतु का निर्माण कार्य चल रहा था, हनुमान जी के नेतृत्व में नल नील, जामवंत, वानर और उनके तमाम सहयोगी सब मिलकर पत्थरों को तोड़कर सेतु निर्माण के काम में लगे थे, उसी समय वहां पर कुछ गिलहरियाँ प्रभु राम के पास आती हैं और कहती हैं कि सेतु का निर्माण राष्ट्र का निर्माण है इसलिए हम सब गिलहरियाँ भी इसमें योगदान देना चाहती हैं.

गिलहरियों की बात सुनकर प्रभु राम बहुत प्रसन्न हुए और उन्होने सभी गिलहरियों को अनुमति दे दी. वे सभी गिलहरियाँ पत्थर के छोटे छोटे कणों को लेकर सेतु के निर्माण में अपना योगदान देने लगीं. लेकिन उसी समय हनुमान और उनके सभी सहयोगियों ने प्रभु राम से उनकी सहयोगियों की शिकायत करते हुए कहा कि प्रभु ये गिलहरियाँ सेतु निर्माण में सहायक नहीं बल्कि बाधक हैं, हमें हमेशा डर लगा रहता है कि कहीं ये हमारे पैरों के नीचे आकर कुचल ना जाँय, इनकी वजह से सेतु निर्माण के कार्य में विलम्ब हो रहा है.

इसके बाद प्रभु राम ने सभी गिलहरियों को पास बुलाकर कहा कि तुम लोग सेतु निर्माण के काम में क्यों लगे हो, इसके बाद गिलहरियों ने जवाब दिया, प्रभु, आपने ही सेतु निर्माण कार्य शुरू होने से पहले सभी वानरों को ये प्रेरणा दी थी कि ये सेतु का निर्माण राष्ट्र की अस्मिता और संरक्षण को बचाने का कार्य है इसीलिए ये सेतु का निर्माण भी राष्ट्र का निर्माण है, इसीलिए हम सभी ने निर्णय लिया कि हम भी इसमें छोटा सा योगदान देंगे. इसीलिए हम सब गिलहरियाँ अपनी जान को जोखिम में डालकर सेतु के निर्माण में हाथ बंटा रही हैं. ऐसा सटीक उत्तर सुनकर वहां खड़े सभी लोग स्तब्ध रह गए.

रामनाथ कोविंद ने कहा कि इस प्रंसग से हम सभी को यही सीख मिलती है कि कोई भी काम या कोई भी व्यक्ति छोटा नहीं होता है, यदि हम सभी लोग अपने हर काम और जिम्मेदारी को निष्ठा, ईमानदारी, प्रमाणिकता तथा इस बोध के साथ करें कि ये काम राष्ट्रहित के लिए है और प्रभु राम के जीवन आदर्शों के अनुरूप है तो मैं समझता हूँ कि हमारा हर काम राष्ट्र निर्माण में भूमिका अदा करेगा.

रामनाथ कोविंद ने अंत में कहा कि - आइये हम सब मिलकर राष्ट्र की प्रगति और विकास के लिए एकजुट होकर काम करें, तथा अस्वच्छता, भ्रष्टाचार, गरीबी, अशिक्षा और आतंकवाद जैसी बुराइयों पर विजय प्राप्त करें.
धनुष पर तीर तानकर मोदी ने मनमोहन सिंह की तरफ देखा तो डर गए मनमोहन सिंह, कि कहीं

धनुष पर तीर तानकर मोदी ने मनमोहन सिंह की तरफ देखा तो डर गए मनमोहन सिंह, कि कहीं

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कल दिल्ली के माधवदास पार्क में राम लीला कमेटी द्वारा दशहरा प्रोग्राम का आयोजन किया गया था जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी शामिल हुए. उनके साथ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी प्रोग्राम में शामिल हुए.

इस प्रोग्राम में प्रधानमंत्री मोदी और मनमोहन सिंह एक साथ खड़े थे. इससे पहले मोदी ने कार्यक्रम में आते ही मनमोहन सिंह से मुलाकत की और उनका अभिवादन किया क्योंकि मनमोहन सिंह मोदी से पहले कार्य्रकम में आ गए थे.
 
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कार्यक्रम के अंत में रावण को मारने के लिए मोदी को तीर कमान दिया गया. मोदी ने रावण को मारने के लिए तीर धनुष पर चढ़ाया. लेकिन इसके बाद मनमोहन सिंह की तरफ देखने लगे. मोदी शायद मनमोहन सिंह को इशारा कर रहे थे - चला दूँ क्या?

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मोदी को अपनी तरफ देखकर मनमोहन सिंह सहम गए, उन्होंने सोचा कि आज कहीं मेरा ही कल्याण ना हो जाए, लेकिन इसके बाद अजीब घटना हुई, धनुष तानते ही धनुष टूट गया. 

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इसके बाद मोदी ने हाथ से ही तीर फेंककर रावण को मार दिया. इसके बाद मनमोहन सिंह की भी जान में जान आयी. वैसे भी आजकल मोदी और मनमोहन सिंह के बीच में तनातनी चल रही है क्योंकि नोटबंदी और GST का मनमोहन सिंह ने ही कड़ा विरोध किया था.

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धानुष पर वाण लगाते ही टूट गया धनुष, पढ़ें फिर क्या किया मोदी ने, कैसे मारा रावण को

धानुष पर वाण लगाते ही टूट गया धनुष, पढ़ें फिर क्या किया मोदी ने, कैसे मारा रावण को

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कल दिल्ली के माधवदास पार्क में राम लीला कमेटी द्वारा दशहरा प्रोग्राम का आयोजन किया गया था जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी शामिल हुए. उनके साथ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू भी प्रोग्राम में शामिल हुए.

इस मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को शक्ति के प्रतीक के रूप में एक त्रिसूल भेंट किया गया. उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू को एक फरसा भेंट किया गया जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को तीर कमान भेंट किया गया.

प्रधानमंत्री मोदी को यह तीर कमान रावण को मारने के लिए दिया गया था लेकिन उन्होंने जैसे ही कमान में तीर को लगाकर रावण पर निशाना लगाया धनुष ही टूट गया, इसके बाद मोदी ने तीर चलाने की कोशिश की लेकिन जब धनुष ही टूट गया था तो तीर चलता कैसे.

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इसके बाद मोदी ने हाथ से ही तीर फेंक दिया. इस मौके पर मौजूद लोग हंसने लगे क्योंकि किसी को अंदाजा नहीं रहा होगा कि मोदी के धनुष पकड़ते ही और उसे रावण पर तानते ही धनुष टूट जाएगा.

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Sep 25, 2017

अगर गोडसे गाँधी को ना मारता तो आज ‘हर हिन्दू पढ़ता नमाज मक्का और मदीने में’: कमल आग्नेय

अगर गोडसे गाँधी को ना मारता तो आज ‘हर हिन्दू पढ़ता नमाज मक्का और मदीने में’: कमल आग्नेय

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युवा और उत्साह से भरे कवि कमल आग्नेय ने अपनी कविताओं से कवि जगत में तहलका मचा दिया है, हाल ही में उनकी एक कविता बहुत पॉपुलर हो रही है जिसमें उन्होंने गाँधी पर भी कटाक्ष किया है. कमल ने अपनी कविता में गोडसे द्वारा गाँधी की हत्या को जायज ठहराया है क्योंकि अगर गाँधी को ख़त्म ना किया जाता तो सभी हिन्दू आज मक्का-मदीने में नमाज पढ़ रहे होते क्योंकि गाँधी होते तो भारत में एक भी हिन्दू ना बचता, क्योंकि गांधीजी ने भारत के टुकड़े करवाए, अगर वे जिन्दा होते तो कई और टुकड़े हो जाते. यह बातें कमल ने अपनी इस कविता में कही हैं, आप भी पढ़ें - 

कमल आग्नेय की कविता

जिस धरती ने विश्व गुरु बन वशुधा का उद्धार किया
कालांतर में कुछ यवनों ने उसपर ही अधिकार किया
ब्रह्म सूत्र फेंके जाते थे लाल लाल अंगारों पर
जिसनें तिलक लगायी उसकी गर्दन थी तलवारों पर
यवनों से मुक्ति पायी तो यवनों पर अटक गए
जैसे आसमान से टपके और खजूर पर लटक गए
कारतूस में अंग्रेजों के द्वारा चर्बी भरने पर
भारत का सोया पौरुष जागा गौ-माता के मरने पर
महासमर का विगुल बजा, मंगल पाण्डेय की फांसी से
रणचंडी बनकर निकली लक्ष्मी बाई भी झाँसी से
मातृभूमि पर पुनः गुलामी का जब संकट गहराया
तब भारत का का बेटा अफ्रीका से घर वापस आया
सत्य अहिंसा का व्रत धारी, तीव्र वेग की आंधी था
आजादी का सपना पाले वह व्यक्ति महात्मा गाँधी था
गांधीजी तो गोरों से आजादी का दम भरते थे
इसीलिए शेखर, सुभाष भी उनका आदर करते थे
माना गांधीजी ने कष्ट सहे थे अपनी पूरी निष्ठा से
और भारत प्रख्यात हुआ है उनकी अमर प्रतिष्ठा से

सत्य अहिंसा कभी कभी अपनों पर ही ठन जाता है
घी और शहद अमृत हैं लेकिन मिलकर विष बन जाता है
गांधीजी को विश्वास नहीं था कभी क्रांति की पीढ़ी पर
धीरे धीरे बापू चढ़ गए अहंकार की सीढ़ी पर
तुष्टिकरण के खूनी खंजर घोंप रहे थे गांधीजी
अपने सारे निर्णय हमपर थोप रहे थे गांधीजी
महाक्रान्ति का हर नायक तो उनके लिए खिलौना था
उनके हठ के आगे जम्मू द्वीप हमारा बौना था
निरपेक्ष धर्म के प्याले ने विष पीना हमको सिखा दिया
दो चांटे खाकर बेशर्मी से जीना सिखा दिया
इसीलिए भारत अखंड, भारत अखंड का दौर गया
भारत से पंजाब, सिंध, रावलपिंडी, लाहौर गया

तब जाकर सफल हुए जालिम जिन्ना के मंसूबे
गांधीजी अपनी जिद में पूरे भारत को ले डूबे
भारत के इतिहासकार थे, चाटुकार दरबारों में
अपना सबकुछ बेच चुके थे नेहरु के परिवारों में
जब भारत को टुकड़े टुकड़े करने की तैयारी थी
तब नाथू ने गाँधी के सीने पर गोली मारी थी

ये स्वराज परिणाम नहीं है, गाँधी के आन्दोलन का
इन यज्ञों का हव्य बनाया शेखर ने पिस्टल गन का
लाल लहू से अमर फसल ये तब जाकर लहरायी है
7 लाख के प्राण गए तब जाकर आजादी पायी है
हिन्दू अरमानों की जलती एक चिता थे गांधीजी
कौरव का साथ निभाने वाले भीष्मपिता थे गाँधी जी

आप चाहते तो इरविन तक को झुका सकते थे,
भगत सिंह की फांसी दो पल में रुकवा सकते थे
इस माटी के तीन लाडले, लटक गए तब फंदों से
भारत माता हार गयी अपने घर के जयचंदों से

मंदिर में पढ़कर कुरान तुम विश्व विजेता बने रहे
ऐसा करके तुम मुस्लिम जन मानस के नेता बने रहे
एक नवल गौरव गढ़ने के हिम्मत तो करते बापू
मस्जिद में गीता पढने की हिम्मत करते बापूजी
गांधीजी का प्रेम अमर था, केवल चाँद सितारे से
उसका फल हम सबने पाया भारत के बंटवारे से
गाँधी जी ने नहरू को दे दी चाभी सत्ता की
लेकिन पीड़ा देख ना पाए, श्रीनगर कलकत्ता की,
रेलों में हिन्दू काट काटकर भेज रहे पाकिस्तानी
टोपी के लिए दुखी थे पर चोटी की एक नहीं मानी
सत्य अहिंसा का ये नाटक बस केवल हिन्दू पर था
उस दिन नाथू के महाक्रोध का पानी सर से ऊपर था
गया प्रार्थना सभा में गाँधी को करने अंतिम प्रणाम
ऐसी गोली मारी उनको याद आ गए श्री राम
जिनकी भूलों के कारण भारत के हिन्दू छले गए
वो बापू 'हे राम' बोलकर देवलोक को चले गए
नाथूराम ने अपनी मातृभूमि को सब कुछ अर्पण कर डाला
गाँधी का वध करके अपना आत्मसमर्पण कर डाला

आजादी के बंद रहस्यों का उद्यापन करना है
नाथू के इस अमर सत्य का अब सत्यापन करना है
मूक अहिंसा के कारण भारत का आँचल फट जाता
गाँधी जीवित होते तो फिर देश दोबारा बंट जाता

अरे अहिंसा के कारण सेना को विष चखवा दें क्या
या सीमा से सस्त्र हटाकर चरखें रखवा दें क्या
थक गये हैं हम प्रखर तथ्य की अर्थी को ढोते ढोते
कितना अच्छा होता जो नेताजी राष्ट्रपिता होते

धर्म परायणता का सिंधु घोर चरम पर आएगा
जन गण मन से अधिक प्रेम जब वंदे मातरम पर आएगा
उसी समय ये दुनिया हमको संप्रदायी बतलाती है
राष्ट्रभक्त की पराकाष्ठा राष्ट्रद्रोह हो जाती है
नाथू को फांसी पर लटकाकर गांधीजी को न्याय मिला
और मेरी भारत माँ को बंटवारे का अध्याय मिला
लेकिन जब जब कोई भीष्म कौरव का साथ निभाएगा
तब तब कोई अर्जुन उन पर रण में तीर चलाएगा

जिन्ना ने रेलों में भेजा था अंश हमारी बोटी का
नाथू ने सम्मान बचाया सबकी चन्दन चोटी का
अगर गोडसे की गोली उतरी ना होती सीने में 
हर हिन्दू पढ़ता नमाज फिर मक्का और मदीने में 


भारत की बिखरी भूमि अब तलक समाहित नहीं हुई

नाथू की रखी अस्थि अब तलक प्रवाहित नहीं हुई
उनकी अस्थि प्रतीक्षा करती सिंधु के पावन जल की
उसके लिए जरूरत हमको श्री राम के तन बल की
इससे पहले अस्थि कलश को सिंधु की लहरें सीचें
पूरा पाक समाहित कर लो भगवा झंडे के नीचे