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Sep 14, 2017

इसलिए पलटवायी जाती हैं ट्रेनें ताकि लोग बोलें 'रेल तो संभल नहीं रही मोदी बुलेट ट्रेन ला रहा है'

इसलिए पलटवायी जाती हैं ट्रेनें ताकि लोग बोलें 'रेल तो संभल नहीं रही मोदी बुलेट ट्रेन ला रहा है'

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भारत में आज बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की शुरुआत हो गयी. भूमि पूजन ने बाद इस प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी गयी और काम की शुरुआत हो गयी. यह प्रोजेक्ट 2022 तक बनकर तैयार हो जाएगा और मुंबई से अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन दौड़ने लगेगी. यह प्रोजेक्ट 1.10 लाख करोड़ रुपये का है जिसमें 88 हजार करोड़ रुपये का लोन जापान ने 50 वर्ष के लिए सिर्फ 0.1 परसेंट व्याज पर दिया है, मतलब के तरह से बुलेट ट्रेन का प्रोजेक्ट भारत के लिए फ्री है.

अब आप सोचिये, हमारे देश में 2022 में बुलेट ट्रेन चल जाएगी और हम चीन, जापान, अमेरिका, इटली, जर्मनी, ब्रिटेन आदि देशों की बराबरी कर लेंगे, यह तो हमारे लिए ख़ुशी और गर्व की बात है, हर भारतवाशी को आज खुश होना चाहिए क्योंकि यह उनके सपनों का देश बन रहा है. अब बुलेट ट्रेन में बैठने के लिए हमें अमेरिका, जापान और चीन नहीं जाना पड़ेगा बल्कि भारत में ही हमें बुलेट ट्रेन में सफ़र का आनंद मिल जाएगा.

आज सभी भारतीयों को खुश होना चाहिए लेकिन कुछ लोगों को ख़ुशी नहीं है बल्कि जलन हो रही है, वे सोच रहे हैं कि अब मोदी और पॉपुलर हो जाएगा, अब 2019 का भी चुनाव जीत लेगा, गुजरात का भी चुनाव जीत लेगा क्योंकि गुजरात में ही बिलेट ट्रेन चलने वाली है. मतलब ये लोग दोनों हाथ मलकर छाती पीट रहे हैं.

आपको बता दें कि मोदी का बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट फेल करने के लिए भारत में ट्रेन एक्सीडेंट करवाया जा रहा है, पटरियों को काटकर ट्रेनों को पलटवाया जा रहा है ताकि विरोधी लोग कह सकें कि मोदी से रेल सो संभल नहीं रही है और ये बुलेट ट्रेन ला रहा है. हमारे देश के बहुत बड़े बड़े दुश्मन इस साजिश में शामिल हैं और विरोधी पार्टियों को मुद्दा देने के लिए ट्रेनों को पलटवाया जा रहा है.

मोदी का बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को फेल करने के लिए साजिश की जा रही है, साजिश करने वाले कहते होंगे कि चार पांच ट्रेनों को पलटवा दो ताकि मोदी का बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट फेल हो जाए क्योंकि जैसे ही ट्रेन एक्सीडेंट होते हैं विरोधी पार्टियाँ यही कहती हैं जो हम यहाँ पर कह रहे हैं. विरोधी नेता कहते हैं कि मोदी सरकार में ट्रेन एक्सीडेंट बढ़ गए हैं, ट्रेनें डेरेल हो रही हैं, यात्री सुरक्षित नहीं हैं, रेल तो संभल नहीं रही है मोदी बुलेट ट्रेन ला रहा है.

Aug 25, 2017

सुब्रमनियम स्वामी भी समझ गए राम रहीम के खिलाफ क्यों रची गयी साजिश, क्यों भेजा गया जेल: पढ़ें

सुब्रमनियम स्वामी भी समझ गए राम रहीम के खिलाफ क्यों रची गयी साजिश, क्यों भेजा गया जेल: पढ़ें

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बाबा राम रहीम के खिलाफ इतनी बड़ी साजिश रचकर उन्हें जेल भेजे जाने का खेल सुब्रमनियम स्वामी को भी समझ में आ गया है. स्वामी समझ गए हैं कि बाबा राम रहीम के खिलाफ क्यों साजिश रची गयी, किन लोगों ने उनके खिलाफ साजिश रची, किस मकसद से रची और अब बाबाओं को क्या करना चाहिए ताकि उनकी अस्मिता बची रहे.

आपको बता दें कि एक साध्वी ने 2002 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को अचानक चिट्ठी लिखकर बाबा राम रहीम पर रेप का आरोप लगा दिया था हालाँकि ना रेप की पुष्टि हुई और ना ही साध्वी का कुछ अता पता है. इस मामले की CBI जांच हुई और आज बाबा राम रहीम को सजा सुना दी गयी.

सुब्रमनियम स्वामी ने बाबा राम रहीम रेप मामले को साजिश माना है. आज उन्होने ट्विटर पर एक ट्वीट के जरिये समझाने की कोशिश की गयी है कि बाबा के साथ इतनी बड़ी साजिश क्यों की गयी है. सबसे पहले तो उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि - मरते हुए कांग्रेसियों के ट्वीट से समझा जा सकता है वे कितने खुश हो रहे हैं, वे ध्यान खींचने के लिए पागल हुए जा रहे हैं.

उन्होने दूसरे ट्वीट में कहा - साधुओं के लिए एक नया खतरा पैदा हो गया है. साधुओं को जेल भेजकर राजनेता और आश्रमिटीज आश्रम की संपत्ति पर कब्जा करना चाहते हैं. साधुओं को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर देना चाहिए. मतलब सुब्रमनियम स्वामी का मानना है कि बाबा राम रहीम की संपत्ति पर कब्ज़ा करने के लिए साजिश रची गयी है. ऐसे ही सभी साधुओं के साथ होने वाला है. साधुओं को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर देना चाहिए वरना नेता लोग उनकी जमीन-संपत्ति कब्जाने के लिए उन्हें जेल भेज देंगे.

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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सुब्रमनियम स्वामी की बात सच साबित हो रही है क्योंकि हरियाणा हाई कोर्ट ने उनकी संपत्ति जब्त करने के आदेश दिए हैं. इससे पहले भी हाई कोर्ट ने बाबा राम रहीम के भक्तों को भड़काने वाले आदेश दिए. हाई कोर्ट ने कहा कि अगर हथियार का इस्तेमाल करना है तो करो, सेना बुलानी है तो बुलाओ लेकिन किसी को छोड़ना मत.

Aug 23, 2017

सबसे ऊंचे पद पर बैठा व्यक्ति करता हैं ट्रिपल-तलाक, हलाला का समर्थन, तो अनपढ़ मुसलमान क्या करें

सबसे ऊंचे पद पर बैठा व्यक्ति करता हैं ट्रिपल-तलाक, हलाला का समर्थन, तो अनपढ़ मुसलमान क्या करें

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राष्ट्रपति भले ही देश की सबसे बड़ा पद होता है लेकिन संवैधानिक पद की सबसे ऊंची पोस्ट सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश की होती है. प्रधान न्यायाधीश ही राष्ट्रपति को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाते हैं. अब आप खुद सोचिये, अगर सबसे ऊंची पोस्ट पर बैठा व्यक्ति ही तीन तलाक और हलाला का समर्थन कर रहा है तो अनपढ़ और गरीब मुसलमानों की क्या गलती है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हर मुसलमान तीन तलाक और शरियत का समर्थन नहीं करता, पढ़े लिखे और सामाजिक लोग ना तो तीन तलाक का और ना ही शरियत का समर्थन करते हैं, लेकिन अनपढ़ और गरीब मुसलमानों को तीन तलाक़ और शरियत मानने के लिए मजबूर कर दिया जाता है क्योंकि मौलवी लोग उन्हें इन्हीं सब चीजों में फंसाकर लूटते रहते हैं.

अब आप सोचिये, पांच जजों की बेंच में से तीन जजों ने तीन तलाक के खिलाफ फैसला किया जबकि दो जजों ने तीन तलाक के हक में फैसला किया, सबसे हैरानी वाली बात तो ये थी कि तीन तलाक के हक में प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर भी थे. हालाँकि तीन जजों का बहुमत होने के नाते तीन तलाक को ख़त्म कर दिया गया लेकिन आप सोचिये, कट्टरपंथी और मौलवी लोग अब क्या करेंगे.

हम बताते हैं ये लोग क्या करेंगे. वे कहेंगे कि तीन तलाक में कोई बुराई नहीं है क्योंकि सबसे पढ़े लिखे और सबसे ऊंचे पद पर बैठने वाले भारत के प्रधान न्यायाधीश भी तीन तलाक को सही मानते हैं. उन्होने तीन तलाक के हक में फैसला दिया था लेकिन तीन लोग इसके खिलाफ थे इसलिए बात नहीं बनी. वे कहेंगे कि यार जब प्रधान न्यायाधीश तीन तलाक को सही मान सकते हैं तो हम और आप क्या चीज हैं.

मतलब प्रधान न्यायाधीश ने मुस्लिमों के अन्दर फूट डालने का काम किया है, उन्हें भड़काने का काम किया है, उन्हें कहने का मौका दे दिया, उन्हें सही साबित कर दिया है. आपको बता दें कि पांच जजों की बेंच में भारत के प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर भी शामिल थे और उन्होने तीन तलाक और हलाला का समर्थन किया था. मतलब प्रधान न्यायाधीश साहब चाहते थे कि मुस्लिम धर्म में तीन तलाक ऐसे ही चलता रहे और मुस्लिम महिलाओं का हलाला होता रहे.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पांच जजों की बेंच को प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर लीड कर रहे थे, अन्य जज थे - न्यायाधीश नरीमन, न्यायाधीश ललित, न्यायाधीश कुरियन, न्यायाधीश नजीर.

पहले तो प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर और जस्टिस नजीर ने तीन तलाक का समर्थन किया और इसे चलने देने का प्रस्ताव दिया लेकिन न्यायाधीश नरीमन, न्यायाधीश ललित, न्यायाधीश कुरियन ने प्रधान न्यायाधीश और नयायाधीश नजीर के प्रस्ताव का विरोध किया और तीन तलाक को असंवैधानिक बताते हुए इसे गैर-इस्लामिक भी बताया.

प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर ने इसके बाद भी अपनी पॉवर का इस्तेमाल करते हुए कई दांव-पेंच लगा ही दिए और इस मामले को 6 महीनें के लिए लटका दिया. उन्होंने धारा 142 के तहत अपनी ताकत का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार से 6 महीनें के भीतर कानून बनाने के लिए कहा जिसकी कोई जरूरत नहीं थी क्योंकि मुस्लिमों को मौजूदा कानून के अंतर्गत लाया जा सकता था लेकिन उन्हें तो दांव पेंच लगाना था. फैसला सुनाते हुए उन्होंने यह भी कहा कि तलाक-ए-बिददत संविधान की धारा 14, 15, 21 और 25 का उल्लंघन नहीं है.

Aug 22, 2017

शर्मनाक, भारत के प्रधान न्यायाधीश ने भी किया 3 तलाक और हलाला का समर्थन, 4 दिन में होंगे रिटायर

शर्मनाक, भारत के प्रधान न्यायाधीश ने भी किया 3 तलाक और हलाला का समर्थन, 4 दिन में होंगे रिटायर

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आज भले ही सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को अमान्य कर दिया है लेकिन एक बहुत ही शर्मनाक और हैरान कर देने वाली खबर आयी है. पांच जजों की बेंच में से तीन जजों ने तीन तलाक और हलाला का विरोध किया था जबकि दो जजों ने तीन तलाक और हलाला का समर्थन किया था, पहले तो लोगों ने सोचा कि हो सकता है मुस्लिम जजों ने ही तील तलाक का समर्थन किया हो लेकिन ऐसा नहीं था. पांच जजों की बेंच में भारत के प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर भी शामिल थे और उन्होने तीन तलाक और हलाला का समर्थन किया था. मतलब प्रधान न्यायाधीश साहब चाहते थे कि मुस्लिम धर्म में तीन तलाक ऐसे ही चलता रहे और मुस्लिम महिलाओं का हलाला होता रहे.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पांच जजों की बेंच को प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर लीड कर रहे थे, अन्य जज थे - न्यायाधीश नरीमन, न्यायाधीश ललित, न्यायाधीश कुरियन, न्यायाधीश नजीर.

पहले तो प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर और जस्टिस नजीर ने तीन तलाक का समर्थन किया और इसे चलने देने का प्रस्ताव दिया लेकिन न्यायाधीश नरीमन, न्यायाधीश ललित, न्यायाधीश कुरियन ने प्रधान न्यायाधीश और नयायाधीश नजीर के प्रस्ताव का विरोध किया और तीन तलाक को असंवैधानिक बताते हुए इसे गैर-इस्लामिक भी बताया.

कहने का मतलब ये है कि प्रधान न्यायाधीश ने तीन तलाक को बचाने के लिए पूरी ताकत लगा दी लेकिन उनकी पूरी कोशिश बेकार गयी क्योंकि उनके खिलाफ तीन जजों का बहुमत था. अंत में प्रधान न्यायाधीश को तीन तलाक को ख़त्म करने का आदेश देना ही पड़ा.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर इसी महीनें 26 अगस्त 2017 को रिटायर होने वाले हैं, उनकी रिटायरमेंट में सिर्फ 4 दिन बचे थे लेकिन वे मुस्लिम महिलाओं की जिन्दगी को चौपट करके जाना चाहते थे लेकिन उनकी कोशिश बेकार गयी और मुस्लिम महिलाओं की जिन्दगी बर्बाद होने से बच गयी.

प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर ने इसके बाद भी अपनी पॉवर का इस्तेमाल करते हुए कई दांव-पेंच लगा ही दिए और इस मामले को 6 महीनें के लिए लटका दिया. उन्होंने धारा 142 के तहत अपनी ताकत का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार से 6 महीनें के भीतर कानून बनाने के लिए कहा जिसकी कोई जरूरत नहीं थी क्योंकि मुस्लिमों को मौजूदा कानून के अंतर्गत लाया जा सकता था लेकिन उन्हें तो दांव पेंच लगाना था. फैसला सुनाते हुए उन्होंने यह भी कहा कि तलाक-ए-बिददत संविधान की धारा 14, 15, 21 और 25 का उल्लंघन नहीं है.

Aug 14, 2017

कई वर्षों बाद किसी राष्ट्रपति ने ID के भाषण में कहा ‘वन्दे मातरम’ नहीं की कट्टरपंथियों की परवाह

कई वर्षों बाद किसी राष्ट्रपति ने ID के भाषण में कहा ‘वन्दे मातरम’ नहीं की कट्टरपंथियों की परवाह

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भारतीय जनता पार्टी से राष्ट्रपति बनने का देश को यह फायदा मिला है कि अब राष्ट्रपति खुलेआम सीना ठोंककर वन्दे मातरम बोल सकते हैं. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज ऐसे ही किया. उन्होंने कट्टरपंथियों की परवाह ना करते हुए आज स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर दिए गए भाषण को वन्दे मातरम बोलकर समाप्त किया.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दर्जनों वर्षों बाद किसी राष्ट्रपति ने अपने भाषण में वन्दे मातरम बोला है वरना कांग्रेस के चुने राष्ट्रपति तो कट्टरपंथियों से इतना डरते थे कि वोट कटने के डर से वन्दे मातरम बोलते ही नहीं थे. यही नहीं ये लोग भारत माता की जय भी नहीं बोलते थे, ये हमेशा इस बात का ध्यान रखते थे कि कहीं कट्टरपंथी उनसे या उनकी पार्टी से नाराज ना हो जाएं और वोट ना कट जाए.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कट्टरपंथियों से डरकर कांग्रेस का भी कोई नेता भारत माता की जय, या वन्दे मातरम नहीं बोलते, राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी तो कभी ये सब बोलते ही नहीं, कट्टरपंथी भी केवल जय हिन्द बोलते हैं और राहुल-सोनिया भी केवल जय हिन्द बोलकर काम चला लेते हैं. इनके चुने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल और प्रणब मुख़र्जी भी जय हिन्द से काम चला लेते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है. अब रामनाथ कोविंद को कट्टरपंथियों की चिंता नहीं है इसलिए शान से वन्दे मातरम बोल सकते हैं और उन्होंने बोलकर दिखा भी दिया है.

वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अगर प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, सभी केंद्रीय मंत्री, सभी पार्टियों के अध्यक्ष, देश के सभी नेता भारत माता की जय और वन्दे मातरम बोलें तो कट्टरपंथियों की भी शायद आँखें खुल जाँय लेकिन विपक्षी नेता कट्टरपंथियों के डर से वन्दे मातरम नहीं बोलते इसलिए यह नारा विवादित बनता जा रहा है और विपक्षी पार्टियों के नेता इस नारे से परहेज करते जा रहे हैं, सिर्फ भारतीय जनता पार्टी के नेता वन्दे मातरम बोलते हैं. वन्दे मातरम हमारे देश का राष्ट्रीय गीत है इसके बावजूद भी कांग्रेस जैसी पार्टियाँ वन्दे मातरम् बोलने से डरती हैं वो भी इसलिए कि कहीं कट्टरपंथी इनसे नाराज ना हो जाँय और इनके वोट ना कट जाँय.
राहुल के जीजा ने कांग्रेस को मिट्टी में मिलाया, अब वाड्रा के जीजा कांग्रेस को करेंगे दफ़न: पढ़ें

राहुल के जीजा ने कांग्रेस को मिट्टी में मिलाया, अब वाड्रा के जीजा कांग्रेस को करेंगे दफ़न: पढ़ें

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अगर भ्रष्टाचार और घोटालों से मोदी सरकार दूर रहेगी तो कांग्रेस को ख़त्म करने के लिए बीजेपी को कुछ नहीं करना पड़ेगा क्योंकि कांग्रेस को ख़त्म करने के लिए राहुल, उनके जीजा रॉबर्ट वाड्रा और रॉबर्ट वाड्रा के जीजा तहसीन पूनावाला ही काफी हैं.

राहुल गाँधी पर सिर्फ नेशनल हेराल्ड घोटाले का आरोप है जिसमें उन्होने चालबाजी दिखाकर लगभग मुक्ति पा ली है क्योंकि हेराल्ड अखबार फिर से शुरू हो गया है. अब शायद राहुल गाँधी पर किसी भी भ्रष्टाचार का आरोप नहीं है लेकिन इससे कांग्रेस को कोई फायदा नहीं होगा.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि राहुल गाँधी के जीजा रॉबर्ट वाड्रा ने कांग्रेस को मिट्टी में मिलाया था क्योंकि पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने उनके जमीन घोटाले का मुद्दा जोर शोर से उठाया था, मोदी ने भाषणों में भी रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ जमकर भाषण दिया था जिसकी वजह से कांग्रेस को 2014 लोकसभा चुनाव में सिर्फ 44 सीटें मिली और एक तरह से कांग्रेस मिट्टी में मिल गयी.

कहने का मतलब ये है कि राहुल गाँधी के जीजा रॉबर्ट वाड्रा ने किसानों की जमीन छीनकर और उसे मंहगे दामों में बेचकर कांग्रेस को मिट्टी में मिला दिया लेकिन अब रॉबर्ट वाड्रा के जीजा तहसीन पूनावाला कांग्रेस को दफ़न करने के रास्ते पर चल पड़े हैं.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि तहसीन पूनावाला एक मुसलमान हैं लेकिन उन्होंने रॉबर्ट वाड्रा की चचेरी बहन मोनिका वाड्रा के साथ शादी की है. तहसीन पूनावाला युवा कांग्रेस के नेता हैं और देश के आजादी गैंग का खुलकर समर्थन करते हैं. उन्होंने JNU मुद्दे पर भी आजादी गैंग का खुलकर समर्थन किया था और राहुल गाँधी उन्हीं के कहने पर JNU गए थे और कई राज्यों से कांग्रेस को मुक्त कर दिया था क्योंकि आजादी गैंग का साथ देते देखकर यूपी और उत्तराखंड के लोगों ने कांग्रेस को राज्य से साफ़ कर दिया.

तहसीन पूनावाला अभी भी टीवी डिबेट शो में खुलकर अलगाववादियों का समर्थन करते हैं, हमेशा राष्ट्रवादी लोगों के साथ बहस करते हैं और उन्हें गलत साबित करने की कोशिश करते हैं, कई बार तो वे बड़ी रैंक पर काम करने वाले पूर्व फौजी अफसरों से भी बहस करते हैं. तहसीन पूनावाला को शायद पता नहीं है कि उनकी ये हरकतें देश के लोग देख रहे होते हैं और उन्हें कांग्रेस से नफरत हो जाती है. कई बार तो तहसीन पूनावाला हिन्दू धर्म के खिलाफ भी जमकर बोलते हैं जिसकी वजह से इन्हें कांग्रेस का सबसे बड़ा हिन्दू विरोधी चेहरा समझा जाता है. इनकी बातें सुनकर देश के हिन्दुओं को कांग्रेस से नफरत हो जाती है और उनके पास सिर्फ एक रास्ता बचता है और वो है Vote for BJP.

ताजा जानकारी के मुताबिक आज तहसीन पूनावाला गोरखपुर मेडिकल कालेज में हादसे के शिकार बच्चों के लिए आजादी सत्याग्रह मार्च निकालने जा रहे हैं। सिर्फ गोरखपुर मामले पर  ही नहीं मोब लांचिंग मामले के लिए भी ये सत्याग्रह होगा। 

Aug 11, 2017

कामचोरी, मौजमस्ती करने वाले BJP सांसदों के लिए बुरी खबर, 2019 में मोदी नहीं देंगे टिकट: पढ़ें

कामचोरी, मौजमस्ती करने वाले BJP सांसदों के लिए बुरी खबर, 2019 में मोदी नहीं देंगे टिकट: पढ़ें

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मोदी सरकार के कार्यकाल में अभी सिर्फ डेढ़ साल बचे हुए हैं.  उनके पास बहुत काम हैं, जनता के बीच जाने की जरूरत है, जनता को जागरूक करने और उन तक सरकारी योजनाओं को पहुंचाने की जरूरत है लेकिन उन्हें अपने ही सांसदों का सहयोग नहीं मिल रहा है. वे बार बार सांसदों को संसद आने का आदेश देते हैं लेकिन सैकड़ों सांसद उनकी बात मानते ही नहीं और अपनी मौजमस्ती में ब्यस्त रहते हैं. ये सांसद ना तो जनता के बीच जा रहे हैं और ना ही विकास का कोई काम कर रहे हैं.

आपको बता दें कि वर्तमान में कम से कम 200 बीजेपी सांसद ऐसे हैं जो सिर्फ मोदी के नाम पर चुनाव जीते हैं, इन सांसदों का कोई नाम भी नहीं जानता. मोदी ने सोचा था कि जब ये सांसद अच्छे काम करेंगे तो पब्लिक इन्हें खुद ही पहचान जाएगी और अगली बार उन्हें चुनाव जिताने में मेहनत नहीं करनी पड़ेगी लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा है. सांसद अपनी ही मौज मस्ती में ब्यस्त हैं, ये लोग सोच रहे हैं कि मोदी के नाम से फिर से चुनाव जीत जाएंगे.

ऐसे कामचोर बीजेपी सांसदों के लिए बुरी खबर है क्योंकि बीजेपी सभी सांसदों की रिपोर्ट तैयार कर रही है. मोदी ने ऐलान कर दिया है कि अगर उनकी बात नहीं मांगेंगे तो 2019 में ऐसे लोगों को देख लिया जाएगा, मतलब टिकट काट दिया जाएगा. मोदी ने यह भी कहा कि अब संसद में अमित शाह भी आ गए हैं इसलिए बीजेपी सांसदों की मौज मस्ती बंद हो जाएगी क्योंकि अमित शाह जो काम करते हैं दिल से करते हैं.
अगर यह विधायक BJP के बजाय कांग्रेस या अन्य पार्टी में होता तो बर्खास्त कर दिया जाता: पढ़ें क्यों

अगर यह विधायक BJP के बजाय कांग्रेस या अन्य पार्टी में होता तो बर्खास्त कर दिया जाता: पढ़ें क्यों

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आज हम आपको मिलवाने जा रहे हैं बीजेपी विधायक नलिन कोटाडिया से. नलिन कोटाडिया गुजरात के धारी से बीजेपी विधायक हैं लेकिन पिछले दो वर्षों से ये बीजेपी ने नाराज हैं. मतलब बीजेपी में रहकर ही बीजेपी से दुश्मनी ले रहे हैं. इन्होने पटेल आन्दोलन का भरपूर समर्थन किया और पार्टी के खिलाफ गए उसके बाद भी इनपर कोई एक्शन नहीं लिया गया. ये हमेशा पटेल आन्दोलन के खिलाफ सरकार की कार्यवाही की निंदा करते रहे, उसके बाद भी पार्टी ने इनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं किया.

हाल ही में जब राष्ट्रपति चुनाव हुए तो इन्होने कांग्रेस उम्मीदवार मीरा कुमार को वोट किया और उससे पहले प्रेस को बता दिया कि मैं रामनाथ कोविंद को वोट नहीं दूंगा क्योंकि बीजेपी सरकार ने 14 पाटीदारों की हत्या की है और मैं इससे नाराज हूँ. इन्होने मीरा कुमार को वोट दिया लेकिन पार्टी ने इनपर कोई एक्शन नहीं लिया.

जब हाल ही में गुजरात में राज्य सभा चुनाव हुए तो इन्होने पार्टी लाइन से हटकर कांग्रेस उम्मीदवार अहमद पटेल को वोट दे दिया और वोट देने के बाद फेसबुक पर पोस्ट लिखकर बता भी दिया कि उन्होंने बीजेपी को वोट क्यों नहीं दिया. उन्होने कहा कि मेरी अंतरात्मा की आवाज सुनकर मैंने बीजेपी को इसलिए वोट नहीं दिया क्योंकि बीजेपी सरकार ने पटेल आन्दोलन को बलपूर्वक दबाने की कोशिश की और 14 लोगों की हत्या की.

आपको बता दें कि अहमद पटेल मात्र आधे वोटों के अंतर से चुनाव जीते हैं, अगर नलिन कोटाडिया उन्हें वोट नहीं देते तो अहमद पटेल चुनाव ना जीतते लेकिन नलिन कोटडिया ने अपनी ही पार्टी को हराकर कांग्रेस के मनोबल को बढाने का काम किया उसके बाद भी इनपर कोई एक्शन नहीं लिया गया और ना ही किसी बीजेपी नेता ने इनके खिलाफ कोई बयान दिया.

कहने का मतलब ये है कि लगातार बीजेपी के खिलाफ जा रहे हैं, लगातार बीजेपी के खिलाफ मतदान कर रहे हैं उसके बावजूद भी इन्हें पार्टी से नहीं निकाला गया. अगर ये कांग्रेस या किसी अन्य पार्टी में होते तो अब तक इन्हें कबका निकाल दिया गया होता. हाल ही में जिन कांग्रेसियों ने बीजेपी को वोट दिया है उन्हें निकालने की कोशिश चल रही है, हाल ही में त्रिपुरा के 6 TMC विधायकों ने रामनाथ कोविंद को वोट दिया था तो उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया लेकिन बीजेपी में ऐसा कुछ नहीं होता. ऐसा लगता है कि सबसे मजबूत लोकतंत्र बीजेपी में ही है.

Aug 10, 2017

अगर मोदी भी हामिद अंसारी को VP बनाकर खिलाते काजू-बादाम तो मुस्लिम असुरक्षित ना होते: पढ़ें

अगर मोदी भी हामिद अंसारी को VP बनाकर खिलाते काजू-बादाम तो मुस्लिम असुरक्षित ना होते: पढ़ें

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उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी कल अपने पद से रिटायर हो रहे हैं लेकिन जाने से पहले उन्होंने एक अलग चर्चा छेड़कर भारत का राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है. कल उन्होंने राज्य सभा टीवी को इंटरव्यू देते हुए कहा था कि मौजूद समय में देश के मुस्लिम खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, मुस्लिमों में निराशा और घबराहट का माहौल है. भीड़ की हिंसा मुस्लिमों में डर पैदा कर रही है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हामिद अंसारी हमेशा अल्पसंख्यकों की राजनीति करते रहे लेकिन जब उन्हें कांग्रेस ने उप-राष्ट्रपति बना दिया तो उन्होंने मुस्लिमों के लिए बोलना बंद कर दिया, 10 साल तक कांग्रेस ने उन्हें उप-राष्ट्रपति बनाकर खूब काजू बादाम खिलाया और उनका मुंह बंद रखा.

अगर मोदी सरकार भी उन्हें उप-राष्ट्रपति बनाकर 10 साल तक काजू बादाम खिलाती रहती तो हामिद अंसारी उसी में मगन रहते और मुस्लिमों को असुरक्षित ना बताते लेकिन पद से उतरते ही हामिद अंसारी मुस्लिमों को असुरक्षित बताने लगे क्योंकि अब उन्हें काजू बादाम खाने को नहीं मिलेगा, अगर खाने का मन करेगा तो अपने पैसों से खरीदना पड़ेगा.

कहने का मतलब ये है कि कुल मिलाकर हामिद अंसारी कोई ना कोई राजनीतिक पद चाहते हैं इसीलिए सरकार को ब्लैकमेल करने के लिए साम्प्रदाईक बयान दे रहे हैं क्योंकि परेशान तो बंगाल के हिन्दू भी हैं, परेशान तो केरल के संघ कार्यकर्ता भी हैं, परेशान तो कश्मीर के हिन्दू भी हैं लेकिन हामिद अंसारी ने कभी उनके बारे में बात नहीं की, उन्हें सिर्फ मुसलमानों की परेशानी दिख रही है क्योंकि वो सिर्फ मुसलमान हैं.

Aug 9, 2017

अहमद पटेल की जीत से बहुत दुखी हैं राहुल गाँधी, ना बधाई दी और ना ही बाहर निकले: पढ़ें क्यों

अहमद पटेल की जीत से बहुत दुखी हैं राहुल गाँधी, ना बधाई दी और ना ही बाहर निकले: पढ़ें क्यों

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कल अहमद पटेल के राज्य सभा चुनाव जीतने के बाद लगभग सभी कांग्रेसी नेताओं ने बधाई दी लेकिन सबसे बड़े कांग्रेसी नेता राहुल गाँधी ने उन्हें बधाई नहीं दी, उन्होंने ना तो ट्विटर पर बधाई दी और ना ही अब तक मीडिया के सामने आकर कोई बयान दिया. यही नहीं आज संसद में भी वे नहीं दिखे, ऐसा लग रहा है कि अहमद पटेल की जीत के बाद राहुल गाँधी बहुत दुखी हैं और इसी दुःख में उन्होंने खुद को घर के अन्दर बंद कर रखा है.

राहुल गाँधी शायद इसलिए अहमद पटेल की जीत से दुखी हैं क्योंकि अहमद पटेल कांग्रेस के मुख्य रणनीतिकार हैं और राहुल गाँधी को भी उनके इशारों पर नाचना पड़ता है. अगर अहमद पटेल राज्य सभा चुनाव हार जाते तो उनका राजनीतिक कद छोटा हो जाता और राहुल गाँधी को उनकी सुननी नहीं पड़ती लेकिन ऐसा नहीं हुआ और लड़ते मरते अहमद पटेल ने चुनाव जीत ही लिया.

राहुल गाँधी कांग्रेस की हर जीत पर बधाई देते हैं और धमाकेदार बयान देते हैं लेकिन कल से वे मीडिया के सामने नहीं आये, यही नहीं राहुल गाँधी ने आज तक अहमद पटेल के बारे में कुछ नहीं बोला है और ना ही उनका जिक्र किया है. कल उनकी जीत पर उन्होंने बधाई भी नहीं दी जबकि कांग्रेसी ऐसे खुश हो रहे हैं कि जैसे अहमद पटेल ने प्रधानमंत्री का चुनाव जीत लिया है.

आप खुद राहुल गाँधी का ट्वीट देख लीजिये और अहमद पटेल का ट्विटर पेज देख लीजिये, अहमद पटेल को बधाइयों का तांता लगा हुआ है जबकि राहुल गाँधी ने उनका जिक्र ही नहीं किया है. ऐसा नहीं है कि राहुल गाँधी ट्विटर से दूर हैं, उन्होंने आज भी दो ट्वीट किये हैं लेकिन उन्होंने अहमद पटेल को बधाई नहीं दी है.

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BJP के खिलाफ तुरंत एक्शन लेता है चुनाव आयोग, AAP के 21 विधायकों पर फैसला ही नहीं ले पा रहा

BJP के खिलाफ तुरंत एक्शन लेता है चुनाव आयोग, AAP के 21 विधायकों पर फैसला ही नहीं ले पा रहा

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2017 विधानसभा के बाद आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी सहित कई राजनीतिक पार्टियों ने चुनाव आयोग पर मोदी सरकार का एजेंट बनकर EVM टेम्परिंग का आरोप लगाया था, ये बहुत ही गंभीर आरोप था लेकिन चुनाव आयोग खामोश रहा क्योंकि इन आरोपों से चुनाव आयोग की कम बल्कि मोदी सरकार और बीजेपी वालों की अधिक बदनामी होती थी, चुनाव आयोग ने उन राजनीतिक पार्टियों पर कोई एक्शन नहीं लिया जबकि ये लोग चुनाव आयोग का अपमान करते रहे.

जब राष्ट्रपति चुनाव का दिन आया तो उसके एक ही दिन पहले चुनाव आयोग ने बीजेपी विधायक नरोत्तम मिश्रा को तीन वर्षों के लिए सस्पेंड कर दिया ताकि वे राष्ट्रपति चुनाव में वोट ना दे सकें, कल गुजरात में राज्य सभा चुनाव हुआ तो कांग्रेस की मांग पर चुनाव आयोग ने बीजेपी के दो वोटों को रद्द कर दिया जिसकी वजह से बीजेपी की हार हो गयी और कांग्रेस उम्मीदवार अहमद पटेल चुनाव जीत गए.

देखने में आ रहा है कि चुनाव आयोग बीजेपी के खिलाफ तुरंत ही एक्शन ले रहा है जबकि अन्य राजनीतिक पार्टियों पर कोई एक्शन नहीं लेता, बीजेपी वालों ने भी कल कांग्रेस के एक विधायक का वोट रद्द करने की मांग की थी लेकिन चुनाव आयोग ने बीजेपी वालों की बात नहीं मानी जबकि ऐसे ही मामले में कांग्रेस की बात मानकर बीजेपी के दो वोटों को रद्द कर दिया.

यही नहीं, AAP के 21 विधायकों को संसदीय सचिव बनाने के मामले में भी चुनाव आयोग कोई एक्शन नहीं ले पा रहा है जबकि बीजेपी के खिलाफ तुरंत एक्शन ले लिया जाता है, अगर ऐसा काम बीजेपी वालों ने किया होता तो शायद चुनाव आयोग अब तक सभी को बर्खास्त कर चुका होता जैसा उन्होंने नरोत्तम मिश्रा को किया है.

अब तक कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियाँ चुनाव आयोग पर मोदी और बीजेपी एजेंट होने का आरोप लगाती थीं, स्वयं कांग्रेस चुनाव आयोग पर ऐसे आरोप लगाती थी और हाल ही में उन्होंने मोदी के साथ मिलकर EVM टेम्परिंग के भी आरोप लगाए थे लेकिन आज चुनाव आयोग ने साबित कर दिया है कि वो ना तो बीजेपी का एजेंट है और ना मोदी का. वहां पर सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस की सुनी जाती है और बीजेपी की तो सुनी ही नहीं जाती.

Jul 26, 2017

वन्दे मातरम के फैसल से खुश हुए लोग, बोले 'ऐसे ही जजों से कराओ राम मंदिर केस का फैसला'

वन्दे मातरम के फैसल से खुश हुए लोग, बोले 'ऐसे ही जजों से कराओ राम मंदिर केस का फैसला'

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कल मद्रास हाई कोर्ट ने जबरजस्त फैसला सुनाते हुए कहा था कि सभी देशवासियों को हप्ते में एक बार वन्दे मातरम गाना चाहिए, यह एक अच्छा विचार है और इसे अपमाने में किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए, मद्रास हाई कोर्ट के इस फैसले का कई मुस्लिम संगठनों से विरोध किया जबकि भारतीय जनता पार्टी ने तारीफ की थी.

अब सोशल मीडिया पर भी ये फैसला सुनाने वाले जजों की तारीफ हो रही है, लोग कह रहे हैं कि ऐसे ही जजों से राम मदिर मामले की भी सुनवाई करवानी चाहिए. कई लोगों ने कहा कि इस फैसले से बीजेपी वाले ही नहीं बल्कि सब कोई खुश हैं. कई लोगों ने कहा कि जज ने विल्कुल सही फैसला सुनाया है और इसपर हम सबको गर्व होना चाहिए. कई लोगों ने यह फैसला सुनाने वाले जजों को सोल्युट किया है. देखिये लोग क्या कह रहे हैं -

टाइटल: मद्रास हाईकोर्ट के फैसले की बीजेपी ने की तारीफ, बहुत अच्छा

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Jul 25, 2017

मौलवी से बोले संबित पात्रा, तुमने तो मेरे सामने ही 20 बार वन्दे मातरम् बोल दिया, अब तो गए तुम

मौलवी से बोले संबित पात्रा, तुमने तो मेरे सामने ही 20 बार वन्दे मातरम् बोल दिया, अब तो गए तुम

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आज जी न्यूज़ टीवी के 'ताल ठोंक के' टीवी डिबेट शो में बीजेपी नेता संबित पात्रा ने मौलवी रशीद राशिदी को जमकर झाड़ दिया, मौलाना का कहना था कि वन्दे मातरम बोलने से इस्लाम धर्म नष्ट हो जाता है इसलिए हम वन्दे मातरम नहीं बोलेंगे. भारत के मुसलमान वन्दे मातरम नहीं बोलेंगे. दो मिनट के भाषण में उन्होंने कई बार वन्दे मातरम बोल दिया.

जब संबित पात्रा की बारी आयी तो उन्होंने मौलाना रशीद रशीदी का झाड़ दिया, उन्होंने कहा कि मौलाना कहते हैं कि वन्दे मातरम बोलने से इस्लाम खतरे में आ जाएगा लेकिन इन्होने मेरे सामने ही 20 बार वन्दे मातरम बोल दिया, इसका मतलब है कि ये अब मुस्लिम नहीं रहे, अब तो इनका इस्लाम धर्म ख़राब हो गया. उन्होंने कहा कि आप लोग इस्लाम को जितना कमजोर समझते हो दरअसल इस्लाम उतना कमजोर नहीं होगा.

उन्होंने कहा कि तुम लोग वन्दे मातरम नहीं सुनना चाहते अगर हम लोग आपकी तरह अजान सुनने से मना कर दें तो सोचो क्या होगा, हम आपकी अजान सुनते हैं फिर भी हमारा धर्म नष्ट नहीं होता लेकिन तुम्हार इस्लाम इतना कमजोर है कि वन्दे मातरम बोलने से नष्ट हो जाता है.

इस डिबेट शो में मौलाना राशिद ने कई विवादास्पद बयान दिए जिसकी वजह से रोहित सरदाना ने उन्हें फटकार लगाई और शो से बाहर जाने को कहा लेकिन बाद में मौलाना राशिद ने अपनी गलती मान ली जिसकी वजह से उन्हें शो में दोबारा शामिल कर लिया गया.

Jul 24, 2017

हथियारों की कमीं का मुद्दा उठाकर अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारेगी कांग्रेस: पढ़ें क्यों

हथियारों की कमीं का मुद्दा उठाकर अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारेगी कांग्रेस: पढ़ें क्यों

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दो दिन पहले CAG ने एक रिपोर्ट जारी की थी जिसमें कहा था कि भारत के पास सिर्फ 20 दिनों की युद्ध सामग्री है और कई तरह के हथियारों की कमीं है. कांग्रेस ने इसे मोदी सरकार के खिलाफ मुद्दा बना लिया है और अब राज्य सभा में भी इस मुद्दे को उठाने का फैसला किया है. कांग्रेसी सांसद रिपुन बोरा ने इस सम्बन्ध में स्थगन नोटिस दिया है.  

आपको बता दें युद्ध सामाग्री की कमीं का मुद्दा उठाकर कांग्रेस ने एक तरह से अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने का फैसला किया है क्योंकि कांग्रेस पार्टी को शान्ति पसंद पार्टी माना जाता है, कांग्रेस खुद भी अहिंसा की बात करती है, पाकिस्तान से दोस्ती की बात करती है, इनके नेता पाकिस्तान से मदद मांगने जाते हैं और अलगाववादियों के गले लगते है.

अब हथियारों की कमीं को मुद्दा बनाकर कांग्रेस ने साबित कर दिया है कि उसे भी युद्ध पसंद है. देशवासी कांग्रेस की हरकतों को देख रहे हैं. देश वासी समझ रहे हैं कि कांग्रेस हथियारों और गोला बारूद की खरीद क्यों करवाना चाहती है. देश वासी समझ रहे हैं कि कांग्रेस भारत का युद्ध भण्डार क्यों भरना चाहती है.

देश के लोग समझ रहे हैं कि कांग्रेस अब युद्ध चाहती है, अब मान लीजिये कल को भारत चाइना या भारत पाकिस्तान के बीच युद्ध हो गया तो कांग्रेस मोदी सरकार पर युद्ध थोपने का आरोप नहीं लगा पाएगी क्योंकि हथियार और युद्ध सामग्री तो कांग्रेस ही खरिदवाना चाहती है. अगर कल कांग्रेस मोदी सरकार पर युद्ध थोपने का आरोप लगाएगी तो मोदी सरकार कहेगी कि हम तो युद्ध नहीं करना चाहते थे इसीलिये हमने सिर्फ 20 दिन का युद्ध भण्डार रखा था लेकिन आपने युद्ध भण्डार में कमीं बताकर हमसे हथियार और गोला बारूद खरीदने पर मजबूर कर दिया. आपकी वजह से ही युद्ध हुआ है.

आपने पहले भी राहुल गाँधी के मुंह से युद्ध थोपने और खून की दलाली करने का बयान सुना है, ये लोग एक तरफ अहिंसा की बात करते हैं और दूसरी तरफ हथियार और गोला बारूद भी चाहते हैं. कांग्रेस अपनी ही चला में फंसने वाली है.

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Jul 23, 2017

वायरल खबर: कैंब्रिज, हार्वर्ड, ऑक्सफ़ोर्ड, IIM और IIT भूल जाओ, संघ का प्लेसमेंट सबसे बेस्ट

वायरल खबर: कैंब्रिज, हार्वर्ड, ऑक्सफ़ोर्ड, IIM और IIT भूल जाओ, संघ का प्लेसमेंट सबसे बेस्ट

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प्लेसमेंट के मामले में भारत में IIM और IIT की चर्चा होती थी, कहा जाता है कि IIT और IIM में पढ़े छात्रों को मोटी सैलरी पर नौकरी मिलती है, अगर विदेश की बात करें तो प्लेसमेंट के मामले में कैंब्रिज, हार्वर्ड और ऑक्सफ़ोर्ड की चर्चा होती है लेकिन सोशल मीडिया पर आजकल एक ऐसा मेसेज वायरल हो रहा है जिसने लोगों को सोचने के लिए मजबूर कर दिया है. जी हाँ अब संघ यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में प्लेसमेंट की चर्चा हो रही है, संघ में पढ़ें छात्रों की चर्चा हो रही है.

आपको बता दें कि प्लेसमेंट के मामले में संघ नंबर वन पर आ गया है, IIT और IIM में पढ़ें छात्र ज्यादा से ज्यादा किसी कंपनी के CEO बनते हैं या कोई अपनी कंपनी खोलकर बैठ जाता है लेकिन संघ में पढ़े छात्र मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति तक बनते हैं. आज भारत के आधे राज्यों के मुख्यमंत्री संघ से हैं, प्रधानमंत्री मोदी, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी संघ से हैं और उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू भी संघ से ही चुनकर आने वाले हैं.

आपको बता दें कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संघ से अपने कैरियर की शुरुआत की, उससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी संघ से निकले थे, लाल कृष्ण आडवानी भी संघ से निकले थे, वर्तमान में कई मुख्यमंत्री, कई केंद्रीय मंत्री भी संघ से ही निकले हैं. इसलिए सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है कि प्लेसमेंट के मामले में संघ ने बाजी मार ली है.
टमाटर मंहगा होते ही बंद हो गया किसान आन्दोलन, अब कौन फेंके 100 रुपये किलो वाला टमाटर

टमाटर मंहगा होते ही बंद हो गया किसान आन्दोलन, अब कौन फेंके 100 रुपये किलो वाला टमाटर

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पिछले दो महीनें से किसान फसलों के कम दाम को लेकर परेशान थे, सबसे अधिक टमाटर के दामों को लेकर परेशान थे, मंडियों में टमाटर 10-20 रुपये में बिक रहा था जबकि किसान को सिर्फ 2-5 रूपया मिल रहा था, गुस्से में किसानों ने ट्रक के ट्रक टमाटर बर्बाद कर दिए, सड़कों पर कुचल दिए, लेकिन जब से टमाटर 100 रुपये किलो हो गए हैं, किसान आन्दोलन भी बंद हो गया है, अब टमाटर इतना मंहगा हो गया है कि खाने को नहीं मिल रहा है, अब कौन खरीदे 100 रुपये किलो टमाटर.

किसान आन्दोलन के समय किसानों से सबसे अधिक कहर टमाटरों पर ढाया, ट्रक के ट्रक टमाटर बर्बाद कर दिए गए, सड़क पर टमाटरों को ऐसे कुचला गया जैसे कोई अपने दुश्मनों का सर कुचलता है, अब वही टमाटर खून के आंसू रुला रहा है, अब टमाटर खाने के लिए लोग तरस रहे हैं क्योंकि टमाटर का दाम 100 रुपये तक पहुँच चुका है और कहीं कहीं 120 रुपये में मिल रहा है.

ऐसा नहीं है कि टमाटर खाने के लिए आम लोग ही तरस रहे हैं, टमाटर खाने के लिए वे किसान भी तरस रहे हैं जिन्होंने टमाटरों को अपने पैरों से कुचला था, उनके साथ दुश्मनों से भी बुरा बर्ताव किया था. ट्रक के ट्रक टमाटर सड़कों पर बिखरे पड़े थे और किसान उसे अपने पैरों तले कुचल रहे थे.

एक बात और कहना चाहूँगा, टमाटर खाने के लिए आम लोगों और किसानों के अलावा उन राजनीतिक पार्टियों के लोग भी तरस रहे हैं जिन्होंने किसानों को भड़काकर ट्रक के ट्रक टमाटर बर्बाद करवाए थे, खुद अपने पैरों तले टमाटरों को कुचलते हुए फोटो खिंचवाया था और सोशल मीडिया पर पोस्ट करके शान बघारा था.

अगर आप ध्यान दें तो एक महीनें पहले टमाटर 10 रुपये में मिल रहा था, अचानक मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में किसान आन्दोलन शुरू हो गया, किसानों ने टमाटर बर्बाद कर दिए, जिन्होंने खेत में टमाटर बोये थे उन्होंने भी गुस्से में उखाड़ दिया, नतीजा यह हुआ कि टमाटरों की पैदावार कम हो गयी, अब टमाटर खाने के लिए वे लोग भी तरस रहे हैं और पूरे देश को भी तरसा रहे हैं.

इससे हमें यह सीख मिलती है कि फल, सब्जी और अनाज को कभी पैरों तले नहीं कुचलना चाहिए, आन्दोलन कीजिये लेकिन फलों-सब्जियों को बर्बाद नहीं करना चाहिए क्योंकि ये आपको कभी भी खून के आंसू रुला सकते हैं. कहते हैं कि अन्न भगवान के बराबर है, अगर अपने भगवान को कुचलोगे तो पछताओगे.
किसान आन्दोलन में खूब बर्बाद किये गए टमाटर, अब बिक रहे 100 रुपये किलो, अब कोई नहीं फेंक रहा

किसान आन्दोलन में खूब बर्बाद किये गए टमाटर, अब बिक रहे 100 रुपये किलो, अब कोई नहीं फेंक रहा

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किसान आन्दोलन के समय किसानों से सबसे अधिक कहर टमाटरों पर ढाया, ट्रक के ट्रक टमाटर बर्बाद कर दिए गए, सड़क पर टमाटरों को ऐसे कुचला गया जैसे कोई अपने दुश्मनों का सर कुचलता है, अब वही टमाटर खून के आंसू रुला रहा है, अब टमाटर खाने के लिए लोग तरस रहे हैं क्योंकि टमाटर का दाम 100 रुपये तक पहुँच चुका है और कहीं कहीं 120 रुपये में मिल रहा है.

ऐसा नहीं है कि टमाटर खाने के लिए आम लोग ही तरस रहे हैं, टमाटर खाने के लिए वे किसान भी तरस रहे हैं जिन्होंने टमाटरों को अपने पैरों से कुचला था, उनके साथ दुश्मनों से भी बुरा बर्ताव किया था. ट्रक के ट्रक टमाटर सड़कों पर बिखरे पड़े थे और किसान उसे अपने पैरों तले कुचल रहे थे.

एक बात और कहना चाहूँगा, टमाटर खाने के लिए आम लोगों और किसानों के अलावा उन राजनीतिक पार्टियों के लोग भी तरस रहे हैं जिन्होंने किसानों को भड़काकर ट्रक के ट्रक टमाटर बर्बाद करवाए थे, खुद अपने पैरों तले टमाटरों को कुचलते हुए फोटो खिंचवाया था और सोशल मीडिया पर पोस्ट करके शान बघारा था.

अगर आप ध्यान दें तो एक महीनें पहले टमाटर 10 रुपये में मिल रहा था, अचानक मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में किसान आन्दोलन शुरू हो गया, किसानों ने टमाटर बर्बाद कर दिए, जिन्होंने खेत में टमाटर बोये थे उन्होंने भी गुस्से में उखाड़ दिया, नतीजा यह हुआ कि टमाटरों की पैदावार कम हो गयी, अब टमाटर खाने के लिए वे लोग भी तरस रहे हैं और पूरे देश को भी तरसा रहे हैं.

इससे हमें यह सीख मिलती है कि फल, सब्जी और अनाज को कभी पैरों तले नहीं कुचलना चाहिए, आन्दोलन कीजिये लेकिन फलों-सब्जियों को बर्बाद नहीं करना चाहिए क्योंकि ये आपको कभी भी खून के आंसू रुला सकते हैं. कहते हैं कि अन्न भगवान के बराबर है, अगर अपने भगवान को कुचलोगे तो पछताओगे.
कांग्रेस चाहती है मोदी हथियार खरीदने में ख़त्म कर दें पैसा, ताकि बढ़ जाए मंहगाई और 2019 में ‘OUT’

कांग्रेस चाहती है मोदी हथियार खरीदने में ख़त्म कर दें पैसा, ताकि बढ़ जाए मंहगाई और 2019 में ‘OUT’

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मोदी सरकार को 2019 में हराने की बहुत बड़ी साजिश हो रही है, इस साजिश में कांग्रेस तो शामिल ही है, चीन पाकिस्तान भी शामिल हो गए हैं, इससे भी हैरानी की बात यह है कि भारत का  CAG भी इस साजिश में शामिल हो गया है क्योंकि आज CAG ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसमें बताया है कि भारत के पास सिर्फ 20 दिनों की युद्ध सामाग्री है, अब आप खुद सोचिये, मान लीजिये आपके सामने कोई दुश्मन खड़ा है, आपने उसके सीने पर अपनी बन्दूक तान रखी है, दुश्मन थर थर कांप रहा है, अचानक आपके ही घर का कोई आदमी आपसे यह बोल दे कि बन्दूक में गोली ही नहीं है, सोचिये उस वक्त क्या होगा, आपका दुश्मन आपको ख़त्म कर देगा क्योंकि उसे पता चल जाएगा कि आपकी बन्दूक में गोली नहीं है.

आप खुद सोचिये, भारत और चीन के बीच तनाव चल रहा है, चीन बार बार भारत को युद्ध की धमकी दे रहा है, भारत भी उसे जवाब दे रहा है, ऐसे संवेदनशील समय में हमारे देश के CAG ने एक रिपोर्ट जारी कर दी कि भारत के पास सिर्फ 20 दिनों की युद्ध सामाग्री है. सोचिये हमारे दुश्मन चीन और पाकिस्तान कितने खुश हो रहे होंगे, उन्हें हमारे घर का भेद पता चल गया है, हमारी संवैधानिक संस्था CAG ने हमारे घर का भेद चीन और पाकिस्तान को दिया है, हो सकता है कि दोनों मिलकर भारत के ऊपर यह सोचकर हमला कर दें कि इनके पास सिर्फ 20 दिनों की युद्ध सामग्री है.

अब आप सोच रहे होंगे कि CAG ने ऐसा क्यों किया, दरअसल यह सब कांग्रेस को 2019 में वापस लाने और मोदी सरकार को उखाड़ने के लिए किया गया है, CAG शशी कान्त शर्मा को कांग्रेस सरकार ने ही 2013 में नियुक्त किया था, इसीलिए उन्होंने कांग्रेस को राजनीतिक फायदा पहुंचाने के लिए यह रिपोर्ट जारी की है.

दरअसल कांग्रेस चाहती है कि मोदी सरकार युद्ध सामग्री खरीदने में सारा पैसा खर्च कर दें, जब पैसे खर्च हो जाएंगे तो विकास के लिए पैसे नहीं होंगे, अगर विकास के लिए पैसे नहीं होंगे तो मोदी सरकार मजबूर होकर टैक्स बढ़ाएगी, अगर टैक्स बढेगा तो मंहगाई बढ़ेगी, अगर मंहगाई बढ़ जाएगी तो कांग्रेस को मोदी सरकार के खिलाफ मुद्दा मिल जाएगा और 2019 में मोदी को आसानी से हराया जा सकेगा.

इसी साजिश की वजह से चीन बॉर्डर पर युद्ध की धमकी दे रहा है, CAG युद्ध सामग्री की कमी की रिपोर्ट जारी कर रहा है और कांग्रेस इसे राजनीतिक मुद्दा बना रही है.

आज CAG रिपोर्ट का हवाला देकर आज कांग्रेसी नेता आनंद शर्मा ने प्रधानमंत्री मोदी पर जमकर निशाना साधा है, उन्होंने कहा कि मोदीजी देश की रक्षा को लेकर गंभीर नहीं हैं, सेना के पास ना तो हथियार हैं, ना युद्ध सामग्री है और ना ही फुल टाइम रक्षा मंत्री.
20 दिन में 20 देशों को ख़त्म कर सकता है भारत, तो हथियारों की कमीं कैसे, CAG ने किया देश को बदनाम

20 दिन में 20 देशों को ख़त्म कर सकता है भारत, तो हथियारों की कमीं कैसे, CAG ने किया देश को बदनाम

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आज CAG ने एक रिपोर्ट जारी की जिसमें बताया गया है कि भारत के पास युद्ध सामग्री की कमीं है, भारी युद्ध की हालत में भारत के पास सिर्फ 20 दिनों की युद्ध सामग्री है. यह भी कहा गया कि युद्ध के लिए 150 हथियारों की जरूरत होती है लेकिन भारत के पास 60 हथियारों की कमीं है.

सोशल मीडिया पर CAG के इस रिपोर्ट की खूब बखिया उधेडी जा रही है, लोग कह रहे हैं कि अगर युद्ध हुआ तो भारत 10 दिन में ही चीन और पाकिस्तान को मिटाकर खुद भी मिट जाएगा, भारत के पास इतनी युद्ध सामग्री है जिसके जरिये 20 देशों को ख़त्म कर सकता है.

लोग कह रहे हैं कि जब भारत के पास 20 देशों को मिटाने की ताकत है तो हथियारों की कमीं कहाँ है, इतना बड़ा युद्ध होने की संभावना ही नहीं है और अगर हुआ तो भारत के साथ साथ चीन और पाकिस्तान का भी नामो निशान मिट जाएगा, भारत, चीन और पाकिस्तान के पास परमाणु बम हैं, बड़ी बड़ी मिसाइलें हैं, फाइटर प्लेन हैं. इतना सब कुछ होते हुए युद्ध भण्डार की कमीं कैसे हो गयी और अगर हो भी गयी तो 20 दिन के अन्दर हथियार खरीद लिए जाएंगे. आखिर पहले से एक साल का युद्ध भंडार क्यों इकठ्ठा किया जाए.

लोग समझ गए हैं कि CAG ने यह रिपोर्ट दुनिया में भारत को नीचा दिखाने और कांग्रेस पार्टी को मोदी सरकार के खिलाफ मुद्दा देने के लिए जारी की गयी है, वर्तनाम CAG को कांग्रेस सरकार ने ही नियुक्त किया था इसलिए उनकी चमचागिरी करने के लिए देश का सिर्फ नीचा किया गया है.
सिर्फ 20 दिन की युद्ध सामग्री है, CAG ने क्यों कहा ऐसा, देश के खिलाफ क्या हो रही साजिश: पढ़ें

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आज CAG शशी कान्त शर्मा ने एकाएक एक रिपोर्ट जारी कर दी जिसमें उन्होंने कहा कि भारतीय सेना के पास सिर्फ 20 दिनों की युद्ध सामग्री है. अब आप सोचिये, CAG की इस रिपोर्ट से किसका फायदा हुआ, जाहिर है कांग्रेस पार्टी का फायदा हुआ है, ऐसा इसलिए क्योंकि कांग्रेस को मोदी सरकार के खिलाफ बोलने का मौका मिल गया है. अब आप समझ गए होंगे कि CAG ने यह रिपोर्ट क्यों जारी की और बॉर्डर पर तनाव के समय यह रिपोर्ट मीडिया में कैसे लीक हो गयी.

आप को बता दें कि इस समय इस रिपोर्ट की जरूरत नहीं थी क्योंकि 20 दिन की रक्षा सामाग्री बहुत होती है, युद्ध शुरू होने पर हथियार और गोला बारूद किसी भी देश से खरीदा जा सकता हैं, सिर्फ एक हप्ते में युद्ध सामग्री खरीदकर उसका इस्तेमाल किया जा सकता है और करना भी चाहिए क्योंकि कोई भी देश एक साल के लिए युद्ध सामग्री और गोला बारूद का भण्डार करके नहीं रखता क्योंकि इसके लिए बहुत पैसा खर्च होता है और युद्ध ना होने की स्थिति में गोला बारूद खराब हो जाता है.

अब आप सोच रहे होंगे कि CAG ने इसी समय यह रिपोर्ट क्यों जारी की, दरअसल CAG शशी कान्त शर्मा को 2013 में कांग्रेस सरकार ने ही नियुक्त किया था, उसके पहले वे कांग्रेस सरकार में भारत के रक्षा सचिव थे. कांग्रेस की इतनी नजदीकी का लाभ तो उन्हें मिलना ही था, अब CAG शशी कान्त शर्मा ने जान बूझकर कांग्रेस को मोदी सरकार के खिलाफ मुद्दा देने के लिए हथियारों की कमीं की रिपोर्ट जारी कर दी और आज दिन भर अफजल गैंग और कांग्रेसियों ने मिलकर मोदी सरकार की जमकर बैंड बजाई. 

अब आप सिक्के का दूसरा पहलू समझिये, प्रधानमंत्री मोदी हाल ही में इजरायल गए थे, अगर वहां पर युद्ध सामग्री की खरीद पर कोई डील होती तो यही कांग्रेस और अफजल गैंग मीडिया वाले मोदी सरकार का यह कहकर जीना हराम कर देते कि यह सरकार पगला गयी है, युद्ध की तैयारी कर रही है, हथियार और गोला बारूद खरीदे जा रहे हैं, पड़ोसी देशों से दोस्ती करने के बजाय दुश्मनी की जा रही है. 

मतलब मोदी सरकार को हर तरफ से मार खानी है, अगर हथियार खरीदते हैं तो भी उन्हें बुरा कहा जाता है, अगर 1 साल के लिए युद्ध सामग्री खरीदकर रख दें तो भी उन्हें बुरा बताया जाएगा और अगर 20 दिन की युद्ध सामग्री है तो भी उन्हें बुरा भला कहा जा रहा है. आप को बता दें कि 20 दिन की युद्ध सामग्री बहुत होती है, अगर भारत चाहें तो हथियारों और मिसाइलों से सिर्फ 10 दिन में चीन और पाकिस्तान को ख़त्म कर सकता है.

क्या कहा था CAG ने

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आज CAG ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि युद्ध की हालत में भारत के पास सिर्फ 20 दिनों की युद्ध सामग्री है. भारतीय सेना के पास युद्ध सामग्री की भारी कमी है, 150 तरह के हथियारों में से 60 तरह के हथियारों की कमी है.