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Tuesday, March 28, 2017

समय समय की बात है जब 200 रुपये में थी दाल तो भैंसे, मुर्गे और बकरे से भी स्वादिष्ट लगती थी?

समय समय की बात है जब 200 रुपये में थी दाल तो भैंसे, मुर्गे और बकरे से भी स्वादिष्ट लगती थी?

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नई दिल्ली, 28 मार्च: उत्तर प्रदेश में जब से अवैध बूचडखानों पर कार्यवाही शुरू हुई है भैंसे के गोस्त की कमी हो गयी है, अब मुसलामानों को भैंसे का गोस्त खाने को नहीं मिल रहा है तो यह बहुत स्वादिष्ट लगने लगा है, मीडिया के लोग भी टुंडे कबाब ना मिलने का रोना रो रहे हैं, मीडिया वालों को भी टुंडे कबाब बहुत स्वादिष्ट लगने लगा है। 
वैसे आपको बता दें, लोगों को जो चीजें नहीं मिलती वही स्वादिष्ट लगने लगती हैं, अगर आपको याद हो, जब दाल की कीमतें 200 रुपये तक पहुंची थीं तो यही दालें लोगों को टुंडे कबाब, भैंसे, मुर्गे और बकरे के गोस्त से भी अधिक स्वादिष्ट लगती थीं, जिस पार्टी में दाल परोसी जाती थी तो लोग भैंसे, बकरे और मुर्गे को छोड़कर दाल पर टूट पड़ते थे लेकिन जब से दाल की कीमतें मोदी सरकार ने 70 रुपये कर दी हैं लोगों को फिर से भैंसा, बकरा और मुर्गा स्वादिष्ट लगने लगा है। 

जब से दाल की कीमतें 70 रुपये हुई हैं, ना तो दालें किसी को स्वादिस्ट लग रही हैं, ना ही मीडिया में इसकी चर्चा हो रही है, जब दाल की कीमतें 200 रुपये हुई थीं तो यही मीडिया के लोग कहते थे कि दाल गरीबों का भोजन है, दाल में प्रोटीन मिलता है, मोदी सरकार ने दाल रूपए में कर दी है, हाय हाय हाय हाय। 

अब दाल की कीमतें गिर गयी हैं, हर गरीब को दाल मिल रही है तो मीडिया वालों ने टुंडे कबाबी का रोना शुरू कर दिया है, अब भैंसा इन्हें अधिक स्वादिस्ट लगने लगा है। पहले एक हफ्ते दाल नहीं मिलती थी, जो लोग रोजाना मीट-मुर्गा खाते थे उनकी जीभ दाल के लिए मचलने लगती थी, अब रोजाना दाल मिल रही है तो लोगों की जीभ मीट-मुर्गे के लिए मचल रहे है, मतलब जीभ में ही दोष है, इसको जो चीजें नहीं मिलती उसके लिए मचलने लगती है, जीभ को जो चीजें नहीं मिलती उसी के लिए ये मचलने लगती है।

कहने का मतलब ये है कि जरूरी नहीं है कि मीट, मुर्गा या भैंसा ही लोगों को स्वादिष्ट लगता है, दाल उससे भी अधिक स्वादिस्ट लग सकती है जब इसकी कीमतें भैंसे, बकरे और मुर्गे से अधिक कर दी जाय। 
हिंदुस्तान के नववर्ष पर मोदी ने देशवासियों को दी बधाई

हिंदुस्तान के नववर्ष पर मोदी ने देशवासियों को दी बधाई

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New Delhi, 28 March: भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज हिंदुस्तान के नववर्ष पर देशवासियों को बधाई दी है, आज से ही नवरात्रि का पर्व भी शुरू हो रहा है इसलिए उन्होंने नवरात्रि की भी बधाई दी है, उन्होंने ट्वीट करके कहा - 
जानकारी के लिए बता दें कि अंग्रेजों के आने से पहले भारत का नया साल 28 मार्च से शुरू होता था, लेकिन अंग्रेजों ने भारत पर कब्ज़ा करने के बाद यहं पर 1 जनवरी से अपना नववर्ष मनाना शुरू कर दिया था, धीरे धीरे भारत के लोग भी अपना नववर्ष भूलते गए और अंग्रेजों का नव वर्ष मनाने लगे लेकिन अब फिर से लोग जाग रहे हैं और हिंदुस्तान का नववर्ष मनाने लगे हैं। 
यह नोटबंदी की नहीं बल्कि दानवीकरण की जीत है: सिब्बल

यह नोटबंदी की नहीं बल्कि दानवीकरण की जीत है: सिब्बल

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नई दिल्ली, 27 मार्च: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए सोमवार को कहा कि यह नोटबंदी की जीत नहीं बल्कि दानवीकरण की जीत है। सिब्बल ने हाल ही में देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के संदर्भ में यह बात कही।

राज्यसभा में वित्त विधेयक-2017 पर चर्चा के दौरान सिब्बल ने कहा, "यह सोचना गलत है कि नोटबंदी की जीत हुई है। यह दानवीकरण की जीत है।"

सिब्बल ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जेटली ने यह कहकर देश की जनता का अनुचित तरीके से अनादर किया है कि वे कर चोरी करते हैं।

सिब्बल ने कहा, "वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में बहुत ही भावुक अपील की थी और वास्तव में देश की आम जनता से कहा कि वे सभी बेईमान हैं, क्योंकि वे कर नहीं चुकाते। जेटली ने कहा कि 125 करोड़ की आबादी में सिर्फ 3.17 करोड़ लोग कर चुकाते हैं।"

सिब्बल ने कहा, "लेकिन अगर आप विश्लेषण करें तो पाएंगे कि इस देश में सिर्फ तीन करोड़ लोग ही कर चुकाने की हालत में हैं। और आप कह रहे हैं कि देश की जनता बेईमान है, क्योंकि वे कर नहीं चुकाते और इसलिए आपने देश को इस भयानक स्थिति में डाला।"

पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचानक 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोटों को अवैध घोषित कर दिया था, जिसे उन्होंने काले धन के खिलाफ लड़ाई बताया था।

वित्त विधेयक के कई प्रावधानों की कड़ी आलोचना करते हुए सिब्बल ने उन्हें पूंजीवाद को बढ़ावा देने वाला, देश की संघीय संरचना को कमजोर करने वाला, सरकार को जनता की जासूसी करने की इजाजत देने वाला और कारोबार जगत में भय का माहौल बनाने वाला बताया।

सिब्बल ने कहा कि इस विधेयक के जरिए राजनीतिक दलों को उद्योग जगत से मिलने वाले चंदे की सीमा हटाया जा रहा है और नए प्रावधानों के तहत चंदा देने वालों की पहचान उजागर करने की भी जरूरत नहीं होगी।

उन्होंने कहा, "किसी कंपनी की कुल आय का 7.5 फीसदी चंदा देने की सीमा हटायी जा रही है। अब तो कंपनी के हिस्सेदार भी नहीं जान सकेंगे कि किस पार्टी को चंदा दिया गया।"

आधार कार्ड को अधिकतर जन कल्याण की योजनाओं में अनिवार्य किए जाने पर सिब्बल ने कहा कि आधार को सिर्फ जन वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए लाया गया था, लेकिन मौजूदा सरकार इसका उपयोग आम जनता की जासूसी करने में कर रही है।

Monday, March 27, 2017

बहुत होशियार हैं मोदी, दिल्ली के बजाय दूसरे शहरों में करा रहे हैं बड़े सम्मलेन, 1 तीर 2 निशाने?

बहुत होशियार हैं मोदी, दिल्ली के बजाय दूसरे शहरों में करा रहे हैं बड़े सम्मलेन, 1 तीर 2 निशाने?

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नई दिल्ली, 26 मार्च: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस वक्त एक तीर से दो दो शिकार कर रहे हैं, बड़े बड़े सम्मलेन दिल्ली से बाहर करा रहे हैं ताकि छोटे शहरों का भी विकास हो सके, बड़े बड़े सम्मलेन होने पर सम्मेलन स्थल, उसके आस पास के रोड और अन्य सुविधाओं के लिए करोड़ों रुपये का खर्च आता है, दिल्ली में इस वक्त आम आदमी पार्टी की सरकार है, केजरीवाल से मोदी की बनती नहीं है, अगर बड़े बड़े सम्मलेन दिल्ली में होंगे तो मोदी सरकार को दिल्ली की सड़कें बनाने के लिए केजरीवाल सरकार को पैसा देना पड़ेगा, अरबों खरबों रुपये जब दिल्ली में खर्च होंगे तो कमाई केजरीवाल की होगी, इसका क्रेडिट भी केजरीवाल मार ले जाएंगे इसलिए मोदी दिल्ली में कोई सम्मलेन करवा ही नहीं रहे हैं। 

अब बड़े बड़े सम्मलेन गोवा, चंडीगढ़ और वाराणसी में हो रहे हैं ताकि इन शहरों का विकास हो सके साथ ही टूरिज्म का बढ़ावा हो सके, इसी महीने में G-20 फ्रेमवर्क कार्य समूह की मीटिंग दिल्ली में होने वाली थी उसे शिफ्ट करके वाराणसी में अरेंज कर दिया गया, अगर दिल्ली में मीटिंग होती तो समेल्लन स्थल और आस पास के रोड बनाने, व्यवस्था खड़ी करने, इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने आदि के लिए मोदी सरकार केजरीवाल को पैसे देती, मोदी को इसका क्रेडिट भी नहीं मिलता, अब यही सम्मलेन वाराणसी में होगा तो केंद्र सरकार के पैसे से वाराणसी में रोड बनेंगे, कई अन्य चीजें बनेंगी, साफ़-सफाई होगी, इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण होगा, टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा, कई देशों से करीब 100 बड़े बड़े नेता आयेंगे, उनके इंतजाम में वाराणसी में अरबों रुपये खर्च करने पड़ेंगे, वाराणसी को आर्थिक लाभ होगा साथ ही विकास होगा। 

ऐसा करके मोदी एक तीर से तो शिकार कर रहे हैं, पहला तो केजरीवाल को सबक सिखा रहे हैं और दूसरा इस पैसे को दिल्ली में ना खर्च करके छोटे शहरों में खर्च कर रहे हैं और अब इन शहरों का भी विकास करा रहे हैं, आप खुद ही सोच लीजिये, अगर अरबों रुपये दिल्ली में खर्च होते तो दिल्ली यानी केजरीवाल सरकार को लाभ होगा, अगर यही अरबों रुपये वाराणसी में खर्च होंगे तो बीजेपी सरकार और मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को लाभ होगा। 

28-29 मार्च को वाराणसी में होगी G-20 कार्य समूह की बैठक

जी-20 फ्रेमवर्क कार्य समूह की दो दिवसीय तीसरी बैठक 28 और 29 मार्च को वाराणसी में आयोजित की जा रही है। वित्त मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि जी-20 फ्रेमवर्क कार्य समूह की बैठक आर्थिक मामले विभाग, वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा संयुक्त रूप से 28 और 29 मार्च को वाराणसी में आयोजित की जा रही है। 

जर्मनी की अध्यक्षता वाले जी-20 कार्य समूह की पहली दो बैठकें पिछले वर्ष दिसम्बर में बर्लिन और इस वर्ष फरवरी में रियाद में आयोजित की गई थी। 

कार्य समूह की 2009 में स्थापना के बाद से यह चौथा अवसर है, जब भारत इस बैठक की मेजबानी कर रहा है। इससे पहले भारत ने नीमराणा, राजस्थान (2012 में मैक्सिको की अध्यक्षता में), गोवा (2014 में जी-20 आस्ट्रेलिया की अध्यक्षता में) और केरल (2015 में जी-20 तुर्की की अध्यक्षता में) में जी-20 एफडब्ल्यूजी की बैठकों की मेजबानी की थी। 

वाराणसी में होने वाली जी-20 कार्य समूह की बैठक में वर्तमान वैश्विक आर्थिक स्थिति और विकास संबंधी महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करने के लिए इस संगठन के देशों द्वारा अपनाए जाने वाले नीति-विकल्पों पर विचार किया जाएगा। 

इस बैठक में एक महत्वपूर्ण मुद्दा जी-20 की समावेशी विकास कार्यसूची पर विचार करने संबंधी है। इसमें एक फ्रेमवर्क तैयार करने का प्रयास किया जाएगा, जो प्रत्येक राष्ट्र विषयक समावेशी विकास नीतियां तैयार करने में देशों की मदद कर सके।

जी-20 19 देशों और यूरोपीय संघ का समूह है, जो वैश्विक आर्थिक मुद्दों और अन्य महत्वपूर्ण विकास चुनौतियों पर विचार करता है। जी-20 फ्रेमवर्क कार्य समूह जी-20 समूह के बुनियादी कार्य समूहों में से एक है।

Sunday, March 26, 2017

अगर नकद भुगतान बंद कर दे तो हर भारतीय कालेधन के खिलाफ लड़ाई में हमारा साथ दे सकता है: PM MODI

अगर नकद भुगतान बंद कर दे तो हर भारतीय कालेधन के खिलाफ लड़ाई में हमारा साथ दे सकता है: PM MODI

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नई दिल्ली, 26 मार्च: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में देश को संबोधित करते हुए डिजिटल भुगतान के लिए जनता का आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री मोदी ने याद दिलाया कि कालेधन के खिलाफ लड़ाई ख़त्म नहीं हुई है, कालेधन की समस्या तब तक रहेगी जब तक कैश में भुगतान होता रहेगा क्योंकि धन-माफिया कैश को इकठ्ठा करके तिजोरियों में भर लेंगे या उसे बिस्तर के नीचे दबा देंगे।

मोदी ने कहा कि कालेधन के खिलाफ लड़ाई में हर भारतीय हमारा साथ दे सकता है बस एक बार तय कर ले कि अब केवल कैशलेस भुगतान करना है, अगर देशवासी ये काम करना शुरू कर देंगे तो कालेधन की समस्या ख़त्म हो जाएगी क्योंकि कैश ख़त्म तो कालाधन भी ख़त्म। 

मोदी ने कहा कि दृढ़ संकल्प के जरिए भारत में एक साल की जगह केवल आगामी छह महीने में ही 2.5 करोड़ डिजिटल लेनदेन का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकजा है।

मोदी ने कहा, "मैं डिजिटल लेनदेन करने के लिए नागरिकों का आभार व्यक्त करता हूं। हर नागरिक नकद लेनदेन के स्थान पर डिजिटल भुगतान का विकल्प चुनकर काले धन के खिलाफ लड़ाई में एक वीर सिपाही बन सकता है।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि नोटबंदी के बाद डिजिटल लेनदेन में भारी इजाफा हुआ है।

उन्होंने कहा, "लॉन्च किए जाने के दो महीने के भीतर ही भीम एप के 1.5 करोड़ डाउनलोड हुए। यह सराहनीय है। अगर 125 करोड़ नागरिक संकल्प कर लें, तो हमें 2.5 करोड़ डिजिटल लेनेदेन के लिए एक साल का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, हम छह महीने के भीतर ही यह लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं।"

'न्यू इंडिया' 125 करोड़ भारतवासियों का सपना : मोदी


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 125 करोड़ भारतवासी चाहते हैं कि भारत में बदलाव आए। उन्होंने कहा कि 'न्यू इंडिया' कोई सरकारी योजना नहीं है, यह 125 करोड़ भारतीयों का सपना है। पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की जीत के बाद अपने पहले 'मन की बात' कार्यक्रम में मोदी ने कहा कि हर भारतीय नागरिक के छोटे-छोटे और मजबूत कदमों से एक नए और बदले हुए भारत की कल्पना को साकार किया जा सकता है।

मोदी ने कहा, "हम 21वीं सदी में हैं और कोई भारतीय नहीं है जो भारत में बदलाव नहीं लाना चाहता। 'न्यू इंडिया' न ही कोई सरकारी योजना है और न ही यह किसी राजनीतिक दल का घोषणापत्र है। यह 125 करोड़ भारतीयों की इच्छा है कि देश में बदलाव आए।"

उन्होंने कहा, "सब कुछ बजट या सरकारी धन से ही नहीं जुड़ा। अगर हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी और अपना दायित्व निभाने का संकल्प ले, तो उसका एक नए और बदले हुए भारत का सपना आसानी से पूरा हो सकता है।"

प्रधानमंत्री ने कहा, "अगर हम समाज की ओर देखें तो कई लोग हैं, जो अपने तरीके से समाज की सेवा कर रहे हैं। कुछ लोग अस्पतालों में मरीजों की सेवा कर रहे है, कुछ स्वेच्छा से रक्तदान कर रहे हैं और कुछ गरीबों को खाना खिला रहे हैं।"

मोदी ने कहा, "अगर हर नागरिक संकल्प ले कि मैं यातायात के नियमों का पालन करूंगा, सप्ताह में एक बार पेट्रोल या डीजल का उपयोग नहीं करूंगा और अधिक जिम्मेदार बनूंगा और अगर हम कदम दर कदम ये सब करें तो हम एक नए भारत का अपना सपना साकार कर सकते हैं।"