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Wednesday, January 18, 2017

भारत और विश्व को एक-दूसरे की जरूरत: PM MODI

भारत और विश्व को एक-दूसरे की जरूरत: PM MODI

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नई दिल्ली, 17 जनवरी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि विश्व को एक आगे बढ़ते भारत की उतनी ही जरूरत है, जितनी कि भारत को विश्व की। प्रधानमंत्री ने वैश्वीकरण के लक्ष्यों को चुनौती देने वाले 'स्थानीय संकीर्ण और संरक्षणवादी रवैए' के प्रति आगाह किया और कहा कि अराजक तत्व अस्थिरता, हिंसा और चरमपंथ को हवा दे रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने यह बात भारत के महत्वाकांक्षी भू-राजनैतिक सम्मेलन 'रायसीना डायलॉग' के द्वितीय संस्करण के उद्घाटन सत्र में कही।

प्रधानमंत्री ने एशिया-प्रशांत के लिए एक नए खुले और समावेशी सुरक्षा ढांचे की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि पाकिस्तान अगर भारत से बातचीत चाहता है तो उसे इसके लिए आतंकवाद से किनारा करना होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत में बदलाव वैश्विक संदर्भो से परे नहीं है। हमारी आर्थिक तरक्की, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, पूंजी, प्रौद्योगिकी, बाजार, संसाधन तक हमारी पहुंच और हमारे देश की सुरक्षा-ये सभी विश्व में होने वाले घटनाक्रम से अभिन्न रूप से जुड़े हुए हैं। लेकिन, यही बात पलटकर भी इतनी ही सही है। विश्व के लिए भी एक आगे बढ़ता हुआ भारत उतना ही जरूरी है, जितना विश्व भारत के लिए।"

मोदी ने कहा कि सुधार तब तक काफी नहीं है, जबतक कि वह अर्थव्यवस्था व समाज में बदलाव न करे।

उन्होंने कहा, "2014 में भारत के लोगों ने नई शुरुआत की। बदलाव के जनादेश के साथ एकमत से उन्होंने मुझे सरकार सौंपी। बदलाव केवल मनोभाव नहीं, बल्कि मानसिकता के लिए, बदलाव गहराई से उद्देश्यपूर्ण कार्रवाई के लिए, बदलाव साहसिक निर्णय लेने के लिए।"

मोदी ने कहा, "सुधार अकेले काफी नहीं है, जबतक कि वह अर्थव्यवस्था व समाज में बदलाव न करे।"

उन्होंने कहा, "रोजाना, मेरे काम की सूची इसी उत्प्रेरक से निर्देशित होती है कि सभी भारतीयों की सुरक्षा तथा समृद्धि के लिए भारत में बदलाव व सुधार करना है।"

प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान से कहा कि अगर वह भारत के साथ बातचीत चाहता है, तो उसे आतंकवाद से किनारा करना होगा।

'रायसीना डायलॉग' में मौजूद अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई, आस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री केविन रुड, कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर और अन्य हस्तियों की मौजूदगी में मोदी ने कहा, "भारत अकेले शांति के पथ पर नहीं चल सकता है। पाकिस्तान को भी शांति की राह अपनानी होगी। अगर पाकिस्तान, भारत के साथ बातचीत चाहता है, तो उसे आतंकवाद से किनारा करना होगा।"

प्रधानमंत्री ने चीन के संबंध में कहा कि यह कोई असामान्य बात नहीं है कि दो विशाल पड़ोसियों के बीच कुछ मतभेद हों। उन्होंने कहा कि वह और चीन के राष्ट्रपति इस बात पर सहमत हैं कि दोनों देशों को मिलकर आर्थिक व व्यापारिक सहयोग के विशाल क्षेत्र में कदम बढ़ाना होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और अमेरिका के संबंधों का हर स्तर पर विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा, "अमेरिका के साथ संबंधों में उठाए गए हमारे कदमों ने आर्थिक, व्यावसायिक, व्यापारिक, सुरक्षा जैसे तमाम क्षेत्रों को गति, महत्व और मजबूती प्रदान की है।"

मोदी ने कहा, "नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मेरी बातचीत हुई है। इसमें हमारे बीच यह सहमति बनी कि हम अपनी रणनीतिक साझेदारी में हासिल की गई इन उपलब्धियों को और मजबूत बनाएंगे।"

प्रधानमंत्री ने मध्य पूर्व के देशों, रूस, जापान और अन्य महत्वपूर्ण देशों के साथ भारत के रिश्तों के और बेहतर होने की बात कही।

'रायसीना डायलॉग' का आयोजन थिंकटैंक आब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन ने विदेश मंत्रालय के सहयोग से किया है।
अभी भी कांग्रेस को नहीं आई सद्बुद्धि, नोटबंदी के खिलाफ सभी RBI दफ्तरों का घेराव करेगी कांग्रेस

अभी भी कांग्रेस को नहीं आई सद्बुद्धि, नोटबंदी के खिलाफ सभी RBI दफ्तरों का घेराव करेगी कांग्रेस

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नई दिल्ली, 17 जनवरी: कांग्रेसी नेताओं का अभी भी दिमाग नहीं खुल रहा है, नोटबंदी के बाद कई राज्यों की जनता ने चुनावों में कांग्रेस को करारा सबक सिखाया है लेकिन इनको अब तक सद्बुद्धि नहीं आयी। अब कांग्रेस ने देश एक सभी बड़े शहरों के RBI दफ्तरों का घेराव करने का फैसला किया है। 

कांग्रेस नोटबंदी के खिलाफ विरोध जताने और देश के केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता खत्म किए जाने के खिलाफ बुधवार से दिल्ली में और देश के अन्य हिस्सों में स्थित भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 25 कार्यालयों का घेराव शुरू करेगी। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, "वक्त की जरूरत है कि रुपये की आपूर्ति पूरी तरह पुराने ढर्रे पर लौटे, नोटबंदी के बाद मची तबाही की जवाबदेही तय की जाए और देश के आम नागरिकों पर हाड़-तोड़ मेहनत कर कमाए गए रुपये अपने बैंक खातों से निकालने पर लगा प्रतिबंध हटाया जाए।"

उन्होंने कहा, "पीएमओ के आगे घुटने टेकने वाले आरबीआई का घेराव देश के विभिन्न हिस्सों में 18 से 23 जनवरी के बीच किया जाएगा।"

राष्ट्रीय राजधानी में इस घेराव का नेतृत्व वरिष्ठ कांग्रेस नेता आनंद शर्मा करेंगे, वहीं मुंबई में सुरजेवाला, कोलकाता में एन. संजीव रेड्डी, बेंगलुरू में पृथ्वीराज चव्हाण, चेन्नई में ऑस्कर फर्नाडीज, चंडीगढ़ में राजीव शुक्ला, देहरादून में कपिल सिब्बल, पणजी में के.सी. वेणुगोपाल, लखनऊ में शकील अहमद, जयपुर में गुरुदास कामत, अहमदाबाद में सुशील कुमार शिंदे और पटना में सलमान खुर्शीद घेराव का नेतृत्व करेंगे।

सुरजेवाला ने कहा, "मोदी सरकार और आरबीआई द्वारा आज (मंगलवार) एटीएम से रुपये निकालने पर लगा 24,000 रुपये प्रति सप्ताह का प्रतिबंध न हटाने का फैसला देशवासियों के साथ बेईमानी है।"

उन्होंने कहा, "रुपयों की आपूर्ति बहाल करने में अक्षमता के चलते देश की अर्थव्यवस्था पंगु हो गई है, हजारों लोगों की नौकरी चली गई है और दिन-ब-दिन लोगों का काम- धंधा चौपट हो रहा है।"

उन्होंने आगे कहा, "उर्जित पटेल के नेतृत्व में आरबीआई स्वतंत्र मुद्रा नियामक और आर्थिक वृद्धि में अहम योगदान देने वाले संस्थान की भूमिका न निभाकर सिर्फ किसी डाकघर जैसा रह गया है और सिर्फ मोदी सरकार से मिले आदेशों का पालन करने वाला पालतू बनकर रह गया है। यह देश के लिए शर्मनाक है।"

Tuesday, January 17, 2017

पढ़ें: कांग्रेस का चुनाव चिन्ह जब्त कराने बीजेपी नेता क्यों पहुंचे चुनाव आयोग के पास?

पढ़ें: कांग्रेस का चुनाव चिन्ह जब्त कराने बीजेपी नेता क्यों पहुंचे चुनाव आयोग के पास?

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नई दिल्ली, 17 जनवरी: कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को निर्वाचन आयोग से कांग्रेस का चुनाव चिह्न 'जब्त' करने की मांग की। उल्लेखनीय है कि राहुल ने हाल ही में कांग्रेस के चुनाव चिह्न की तुलना धार्मिक महापुरुषों से की थी।

पांच राज्यों में अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को निर्वाचन आयोग से राहुल गांधी द्वारा 11 जनवरी को दिल्ली में 'जन वेदना सम्मेलन' के दौरान दिए बयान की शिकायत की।

मुख्तार अब्बास नकवी और प्रकाश जावड़ेकर के नेतृत्व में निर्वाचन आयोग पहुंचे भाजपा प्रतिनिधिमंडल में पार्टी महासचिव अरुण सिंह सहित कई अन्य नेता शामिल थे।

नकवी ने पत्रकारों से कहा, "राहुल गांधी का बयान चुनाव से पहले सांप्रदायिक सद्भाव भंग करने की साजिश के अलावा और कुछ नहीं है। धार्मिक महापुरुषों से अपने चुनाव चिह्न की तुलना कर वह लोगों से कहना चाहते हैं कि कांग्रेस को वोट देकर वे अपने धर्म को वोट देंगे।"

उन्होंने कहा, "यह और कुछ नहीं, बल्कि धर्म के नाम पर वोट मांगना है। न सिर्फ यह गलत है, बल्कि आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन भी है। इसलिए हमने इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस का चुनाव चिह्न जब्त होना चाहिए।"

कांग्रेस पर सांप्रदायिक राजनीति करने का आरोप लगाते हुए नकवी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ उसके गठबंधन का उपहास भी उड़ाया।

उन्होंने कहा, "अब कांग्रेस ने चूंकि सपा से गठबंधन कर लिया है, तो उनका न्यूनतम साझा कार्यक्रम अब सांप्रदायिकता, भ्रष्टाचार और कुशासन होगा।"
अबकी बार हो जाइए तैयार, पहली बार 26 जनवरी की परेड में NSG कमांडों भी दिखाएंगे जौहर

अबकी बार हो जाइए तैयार, पहली बार 26 जनवरी की परेड में NSG कमांडों भी दिखाएंगे जौहर

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New Delhi, 17 January: NSG कमानों यानी ब्लैक कैट कमांडो के बारे में सभी लोगों ने सुना है लेकिन अभी तक सीधे सीधे किसी ने भी NSG कमांडों को नहीं देखा होगा, केवल आतंकवादी और देश एक दुश्मन ही NSG कमांडों और उनकी बहादुरी को देख पाते हैं लेकिन इनकी बदकिस्मती से ये लोग जिन्दा नहीं रह पाते। 

देशवासियों के लिए खुशखबरी है क्योंकि इस वर्ष पहली बार गणतंत्र दिवस की परेड में NSG कमांडों भी हिस्सा लेंगे और अपना जलवा दिखाएंगे। अब तक NSG का नाम सुनकर दुश्मनों की रूह काँप जाती है, देशवासियों में वीरता की अनुभूति होती है, इस बार गणतंत्र दिवस पर जब NSG कमांडों अपना करतब दिखाएँगे तो हो सकता है आप उनकी बहादुरी को देखकर दंग रह जाएं क्योंकि अब तक जो चीजें आप फिल्मों में देखते थे वही चीजें अपनी आँखों से देख पायेंगे। 

कहा जाता है कई NSG कमांडों इंसान के जिस्म में फौलाद लेकर चलते हैं, ये इतने ताकतवर होते हैं कि एक एक कमांडों 100 लोगों पर भारी पड़ते हैं। 

जानकारी एक मुताबिक राजपथ पर 140 कमांडों हिस्सा लेंगे, कमांडों होने की वजह से ये चलेंगे नहीं बल्कि दौड़चाल करेंगे। ये सभी कमांडो काउंटर टेरर टास्क फ़ोर्स के हैं इसलिए दौड़चाल के साथ NSG की दूसरी क्षमताओं का भी प्रदर्शन किया जाएगा। 

इस प्रदर्शन में आतंकवाद से लड़ाई में दक्षता के अलावा एंटी हाईजैकिंग ऑपरेशन और जैविक, रासायनिक और परमाणु खतरों से निपटने की क्षमताओं का प्रदर्शन भी शामिल है। 

अपने प्रतीक सुदर्शन चक्र की तरह ये कमांडो देश को आश्वासन भी देंगे कि जब तक वो हैं वे हर मुश्किल घड़ी से देशवासियों को बाहर निकाल लायेंगे क्योंकि ये मौत से डरते नहीं बल्कि मरने के लिए जीते हैं। 

Monday, January 16, 2017

खुशखबरी, अब ATM से निकालिए 10 हजार रुपये, RBI ने किया ऐलान

खुशखबरी, अब ATM से निकालिए 10 हजार रुपये, RBI ने किया ऐलान

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New Delhi, 16 January: कैश पर निर्भर लोगों के लिए खुशखबरी है क्योंकि RBI ने ATM से कैश निकालने की लिमिट बढाने का फैसला लिया है, अब बचत खाते वाले ग्राहक ATM से 10 हजार रुपये निकाल सकेंगे हालाँकि एक हप्ते में अभी भी केवल 24 हजार ही निकाल सकेंगे। जिसका मतलब है कि हप्ते में दो दिन ही 10 हजार रुपये निकाल सकेंगे अभी तक यह लिमिट 4500 रुपये थी।

इसके अलावा करंट अकाउंट से एक हप्ते में पैसे निकासी की सीमा 50 हजार से बढाकर 1 लाख रुपये कर दी गयी है।

RBI ने पाया है कि अब बैंकों में भीड़ ख़त्म हो गयी है और ATM में भी प्रॉपर कैश की सप्लाई की जा रही है इसलिए ATM से पैसे निकासी सीमा बढ़ा दी गयी। 
सुप्रीम कोर्ट ने सिख विरोधी दंगों पर केंद्र सरकार से मांगी स्थिति रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सिख विरोधी दंगों पर केंद्र सरकार से मांगी स्थिति रिपोर्ट

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नई दिल्ली, 16 जनवरी: सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को 1984 के सिख विरोधी दंगे मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) से स्थिति रिपोर्ट मांगी है। इस मामले की जांच के लिए 2014 में एसआईटी का गठन किया गया था।

न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति आर.बानूमती की खंडपीठ ने स्थिति रिपोर्ट मांगी। इस संदर्भ में याचिकाकर्ता एस. गुरलद सिंह कहलोन ने अदालत को बताया कि मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल पूरी तरह से असफल रहा।

केंद्र सरकार ने इससे पहले अदालत को बताया था कि कुल 221 मामलों में से 21 मामलों की जांच की गई।

अदालत ने मामले की सुनवाई 20 फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी है।
सिर्फ दो रुपये बाकी, मोदी सरकार कर लेगी कांग्रेस सरकार की बराबरी, पेट्रोल पहुंचा 71 पार

सिर्फ दो रुपये बाकी, मोदी सरकार कर लेगी कांग्रेस सरकार की बराबरी, पेट्रोल पहुंचा 71 पार

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नई दिल्ली, 16 जनवरी: मोदी सरकार जल्द ही पेट्रोल और डीजल के दामों में पूर्व कांग्रेस सरकार की बराबरी कर लेगी, पेट्रोल के दाम एक बार फिर से बढ़ चुके हैं, दिल्ली में अब पेट्रोल की कीमत 71.14 रुपये प्रति लीटर, कोलकाता में 73.66 रुपये प्रति लीटर, मुंबई में 77.96 लीटर प्रति लीटर और चेन्नई में 70.61 रुपये प्रति लीटर हो गई है।

मोदी सरकार पूर्व कांग्रेस सरकार से केवल 2 रुपये पीछे है और शायद अगली बार पेट्रोल के दामों में वृद्धि करके यह रिकॉर्ड छुवा जा सकता है। 

सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉपोर्रेशन (आईओसी) ने पेट्रोल की कीमतों में 42 पैसे प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 1.03 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है, जो सोमवार से प्रभावी हो गई। आईओसी ने बयान में कहा, "अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर को देखते हुए ये कीमतें तय की गई हैं।"

इस प्रकार दिल्ली में अब डीजल की कीमत 59.02 रुपये प्रति लीटर, कोलकाता में 61.27 रुपये प्रति लीटर, मुंबई में 64.89 रुपये प्रति लीटर और चेन्नई में 60.73 रुपये प्रति लीटर हो गई है।

Sunday, January 15, 2017

हम आरबीआई की स्वायत्तता, स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं : वित्त मंत्रालय

हम आरबीआई की स्वायत्तता, स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं : वित्त मंत्रालय

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नई दिल्ली, 14 जनवरी: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के कर्मचारी संघों द्वारा केंद्रीय बैंक के कामकाज में सरकार के कथित हस्तक्षेप के खिलाफ आवाज उठाने के एक दिन बाद वित्त मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि वह आरबीआई की स्वायत्तता और स्वतंत्रता का पूर्ण सम्मान करती है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया है, "यह स्पष्ट रूप से कहा जा रहा है कि सरकार आरबीआई की स्वायत्तता और स्वतंत्रता का पूर्ण सम्मान करती है।"

बयान में कहा गया है, "सरकार और आरबीआई के बीच जनहित के महत्व के मुद्दों पर कई बार सलाह-मशविरा किया जाता है, जहां ये विचार-विमर्श कानूनन अनिवार्य हैं, वहीं कई बार अनौपचारिक विचार-विमर्श भी किए जाते रहे हैं। कानूनन विचार-विमर्श के साथ परंपरागत तरीके से किए गए कानूनी रूप से गैर अनिवार्य विचार-विमर्श को आरबीआई की स्वायत्तता के उल्लंघन के रूप में नहीं लेना चाहिए।"

आरबीआई के कर्मचारियों ने शुक्रवार को आरबीआई के गर्वनर उर्जित पटेल को एक पत्र लिखकर केंद्र सरकार द्वारा उसकी स्वायत्तता में कथित दखल को लेकर चिंता जताई थी। 

इस पत्र में पूछा गया है कि जैसा कि हाल ही में मीडिया रपटों से जानकारी मिली है कि वित्तमंत्री ने एक संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी को करेंसी चेस्ट की निगरानी के लिए प्रतिनियुक्त किया है। क्या यह सच है?

पत्र में कहा गया है, "अगर यह सच है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है और आरबीआई की स्वायत्तता पर हमला है।"

कर्मचारी संघों ने आरोप लगाया है कि नोटबंदी के बाद आरबीआई की कुप्रंबधन की चौतरफा आलोचना हो रही है, जिससे इसकी छवि को ऐसा नुकसान पहुंचा है, जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती है।

अगर PM MODI बड़े ब्रांड हैं तो हिटलर और मुसोलिनी भी बड़े ब्रांड थे: राहुल गाँधी

अगर PM MODI बड़े ब्रांड हैं तो हिटलर और मुसोलिनी भी बड़े ब्रांड थे: राहुल गाँधी

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नई दिल्ली, 14 जनवरी: कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने महात्मा गांधी पर हरियाणा के मंत्री अनिल विज की टिप्पणियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर हमला बोलते हुए शनिवार को कहा कि हिटलर और मुसोलिनी भी बहुत बड़े ब्रांड थे। 

गांधी ने अपने आधिकारिक ट्विटर खाते पर विज के वीडियो के साथ जारी एक पोस्ट में कहा, "हिटलर और मुसोलिनी भी बहुत बड़े ब्रांड थे।"

हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को लेकर एक नया विवाद पैदा करते हुए शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महात्मा गांधी से बड़े ब्रांड हैं।

विज अपनी विवादास्पद टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अंबाला में मीडियाकर्मियों से कहा कि खादी ग्रामोद्योग आयोग के कैलेंडर पर महात्मा गांधी की फोटो की जगह मोदी का फोटो लगाए जाने के बाद अब नोटों पर से भी गांधी की फोटो हटाई जाएगी। 

विज ने कहा, "महात्मा गांधी का ऐसा नाम है, नोट के ऊपर चिपक गया जिस दिन से, नोट का अवमूल्यन हो गया। अच्छा किया है कि गांधी का हटा के मोदी का लगाया है। मोदी ज्यादा बेहतर ब्रांड नाम है और मोदी की फोटो लगने से खादी की 14 प्रतिशत बिक्री बढ़ी है।"

यह पूछे जाने पर कि मोदी सरकार द्वारा जारी किए गए नोटों पर भी महात्मा गांधी के छायाचित्र क्यों छापे जा रहे हैं? विज ने कहा, "हट जाएंगे धीरे धीरे।"

Saturday, January 14, 2017

5 दिन पहले सेना के जवान कहे जाते थे 'वीर, बहादुर, हट्टे कट्टे' अब कहे जा रहे 'कमजोर और भुक्खड़'

5 दिन पहले सेना के जवान कहे जाते थे 'वीर, बहादुर, हट्टे कट्टे' अब कहे जा रहे 'कमजोर और भुक्खड़'

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New Delhi, 14 January: आपको शायद पता होगा कि भारतीय जवानों की पहचान ही उनकी लम्बाई, चौड़ाई और ताकत के आधार पर की जाती है, दूर से ही पता चल जाता है कि ये युवक फौजी है इसका कारण यह है कि सेना में बढ़िया खाना दिया जाता है जिसे खाकर हमारे जवान हट्टे कट्टे बन जाते हैं और दूर से ही पहचान लिए जाते हैं, अब आप बताइये अगर सेना के जवानों को बढ़िया खाना ही नहीं दिया जाता तो वे इतने हट्टे कट्टे कैसे रहते हैं, आज तक शायद ही कोई सूखा जवान किसी ने देखा होगा। 

अब तक सेना के जवानों की पहचान लंबाई, चौड़ाई, ताकत और बहादुरी से होती थी लेकिन अब वह जवान भुक्खड़ हो गए हैं, पांच दिन से दुनिया भारत पर हंस रही है और कह रही है कि भारत में सेना के जवानों को बढ़िया खाना ही नहीं दिया जाता, अब हमारे जवान बहादुर से भुक्खड़ हो हो गए हैं। दुनिया भर में भारतीय सेना, CRPF और BSF की हंसी उड़ाई जा रही है। जिन बहादुर जवानों ने पाकिस्तान में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की थी उन्हें भुक्खड़ समझा जा रहा है। अगर उन्हें कहना ही नहीं दिया जाता तो सर्जिकल स्ट्राइक जैसे पराक्रम का काम कैसे कर रहे हैं।

इसका कारण यह है कि तेज बहादुर यादव नामक जवान ने सोशल मीडिया पर VIDEO पोस्ट कर दिया जिसमें कहा था कि सेना और BSF में बढ़िया खाना नहीं मिलता, दाल में हल्दी नहीं डाली जाती, जीरा नहीं डाला जाता, रोटियां जली होती हैं। हो सकता है कि एक दो जगह भ्रष्टाचार हो, हो सकता है कि एक दो जगह एक दो दिन, या एक हफ्ते बढ़िया खाना ना मिला हो। क्या इसका मतलब है कि पूरी दुनिया में भारत को बदनाम कर दिया जाए। क्या इस वजह से जवानों को बहादुर से भुक्खड़ बना दिया जाए। 
पोल खुल रही है इसलिए बैंकों के कुछ अधिकारियों को पसंद नहीं है मोदी सरकार का RBI में दखल

पोल खुल रही है इसलिए बैंकों के कुछ अधिकारियों को पसंद नहीं है मोदी सरकार का RBI में दखल

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New Delhi, 14 January: आपने देखा होगा कि नोटबंदी के बाद यह भी पता चल गया कि बैंकों के कुछ अधिकारी, लाखों मैनेजर और हजारों लाखों कर्मचारी कितने भ्रष्ट हैं, जब भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है तो लोग बैंकों को चोर तो समझेंगे ही, अगर नोटबंदी ना हुई होती तो ये चोर अधिकारी बैंकों में ही बैठे रहते और देश को लूटते रहते। मोदी सरकार ने नोटबंदी के बाद बैंकों में भ्रष्टाचार का छेद बंद करने का काम किया है लेकिन कुछ बैंक अधिकारियों को RBI और केंद्रीय बैंकों के कामकाज में मोदी सरकार का दखल पसंद नहीं आ रहा है और ये लोग खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं।

इसलिए इन लोगों ने RBI गवर्नर उर्जित पटेल को चिट्ठी लिखकर कहा है कि नोटबंदी के बाद पैदा हुई स्थिति से वे खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं और यह चोट इतनी गहरी है कि इसकी भरपाई नहीं की जा सकती। 

ये अधिकारी चाहते हैं कि RBI में मोदी सरकार का दखल बंद हो और इनके काले कारनामे चलते रहें इसलिए इन्होने लिखा है कि नोटबंदी की प्रक्रिया के दौरान कुप्रबंधन और केंद्र सरकार द्वारा करेंसी संयोजन के लिए अधिकारी की नियुक्ति करके RBI की स्वायत्तता को चोट पहुंचाने की कोशिश की गयी है। अब आप बताइये, सवाल तो लोग मोदी सरकार से ही पूछते हैं और दोष भी मोदी सरकार को देते हैं, ऐसे में RBI की देख रेख के लिए एक अधिकारी की नियुक्ति करना क्या गलत है। 

चिट्ठी में लिखा गया है कि नोटबंदी के दौरान कुप्रबंधन से RBI की स्वायत्तता को नुकसान पहुंचा है, केंद्र सरकार द्वारा अधिकारी की नियुक्ति RBI में अतिक्रमण है। 

यह पत्र यूनाइटेड फोरम ऑफ रिजर्व बैंक ऑफिसर्स एंड इम्पलाइज की तरफ से दिया गया है, इस संगठन में केंद्रीय बैंकों के 18 हजार कर्मचारी शामिल हैं। 

इन कर्मचारियों को शायद पता नहीं है कि RBI भी सरकार के ही अंतर्गत आती है और अपने सस्थाओं की मोनिटरिंग करना सरकार की जिम्मेदारी है क्योंकि सरकार को जनता ने चुना है और जनता ही इस देश की मालिक है। 

इस चिट्ठी में ऑल इंडिया रिजर्व बैंक इम्पलाइज एसोसिएशन के समीर घोष, ऑल इंडिया रिजर्व बैंक वर्कर्स फेडरेशन के सूर्यकांत महादिक, ऑल इंडिया रिजर्व बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के सीएम पॉलसिल और आरबीआई ऑफिसर्स एसोसिएशन के आरएन वत्स के हस्ताक्षर हैं। 
अधिकारियों का काम पसंद नहीं आया तो प्रेजेंटेशन बीच में छोड़कर चले गए मोदी, बोले, और मेहनत करो

अधिकारियों का काम पसंद नहीं आया तो प्रेजेंटेशन बीच में छोड़कर चले गए मोदी, बोले, और मेहनत करो

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New Delhi, 14 January: दुनिया जानती है कि प्रधानमंत्री डूबकर काम करने के लिए जाने जाते हैं, वह दिन में 18 घंटे तक काम करने वाले नेता हैं, वह हर हप्ते कैबिनेट सेक्रेटरीज की प्रगति मीटिंग बुलाते हैं और उनसे काम काज का हिराब मांगते हैं, इस बैठक में सभी विभागों के सचिव आते हैं और प्रेजेंटेशन के माध्यम से अपने काम काज का हिसाब देते हैं। 

मोदी के पास अब केवल ढाई साल बचे हैं इसलिए उनके पास काम बहुत है लेकिन विभागों के सचिव उस स्पीड से नहीं चल रहे हैं जिस प्रकार से मोदी चाहते हैं, अभी भी कई विभागों के सचिवों को कांग्रेस सरकार की लत लगी हुई है जिसमें उनसे किसी भी काम का हिसाब नहीं माँगा जाता है, लेकिन अब सरकार बदल चुकी है तो वे मोदी सरकार में भी उसी तेजी से चल रहे हैं। 

अब मोदी को ऐसे सचिव पसंद नहीं आ रहे हैं इसी वजह से कल प्रेजेंटेशन के दौरान वह कई सचिवों के काम काज से खुश नहीं हुए और प्रेजेंटेशन बीच में ही छोड़कर चले गए, उन्होने ऐसे लोगों से कहा कि और मेहनत से काम करो। 

मोदी का इस तरह से उठकर चले जाना थोडा सा असामान्य था क्योंकि वह पूरा प्रेजेंटेशन बैठकर देखते हैं लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ और वे बीच में ही प्रेजेंटेशन छोड़कर चले गए जिसकी वजह से सचिवों में हडकंप फ़ैल गया, अगर आगे भी वे कांग्रेस सरकार की रफ़्तार से चले तो उनपर कार्यवाही भी हो सकती है।

Friday, January 13, 2017

महात्मा गांधी की जगह मोदी की तस्वीर पर तुषार गाँधी नाराज

महात्मा गांधी की जगह मोदी की तस्वीर पर तुषार गाँधी नाराज

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नई दिल्ली, 13 जनवरी: खादी ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) द्वारा महात्मा गांधी की जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर वाली डायरी व कैलेंडर के प्रकाशन पर महात्मा गांधी के परपौत्र तुषार गांधी ने शुक्रवार को नाराजगी जताई और आयोग को भंग करने की मांग की। गुरुवार को आईएएनएस ने अपनी एक खबर में बताया था कि केवीआईसी के कैलेंडर व डायरी के कवर पेज पर एक साधारण चरखे पर खादी बुनते महात्मा गांधी की चिर-परिचित तस्वीर की जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर ने ले ली है।

तुषार गांधी ने कहा कि यह कदम महात्मा की विरासत को छीनने का प्रयास है और उन्होंने केवीआईसी को भंग करने की मांग की।

उन्होंने आईएएनएस से कहा, "बात केवल तस्वीर की नहीं है। यह मायने नहीं रखता कि वे कितना बहाना बनाते हैं, वे गांधीवादी विचारधारा में यकीन ही नहीं करते। इसलिए सत्यनिष्ठा बरतने का सवाल ही पैदा नहीं होता। यह बस महात्मा गांधी की विरासत को छीनने का एक निराशाजनक प्रयास है।"

तुषार ने केवीआईसी पर खादी को एक बेबस कपड़े में तब्दील करने का आरोप लगाया।

उन्होंने इससे पहले ट्वीट कर कहा, "केवीआईसी के कैलेंडर व डायरी से बापू की तस्वीर को लाखों रुपये के सूट पसंद करने वाले प्रधानमंत्री से बदल देना मंत्रालय का एक कपटपूर्ण कृत्य है।"
मोदी सरकार में खादी के इस्तेमाल में 34 फ़ीसदी की वृद्धि, शायद इसलिए कांग्रेस को हो रही जलन

मोदी सरकार में खादी के इस्तेमाल में 34 फ़ीसदी की वृद्धि, शायद इसलिए कांग्रेस को हो रही जलन


नई दिल्ली, 13 जनवरी: खादी ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) द्वारा महात्मा गांधी की जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर वाली डायरी व कैलेंडर के प्रकाशन पर मचे सियासी घमासान में एक नया मोड़ आ गया है। सूत्रों का कहना है कि पहले भी आयोग ऐसी डायरी व कैलेंडर छाप चुका है, जिसमें महात्मा गांधी की तस्वीर नहीं थी। सूत्रों ने इस विवाद को 'अनावश्यक' करार दिया। केवीआईसी के कैलेंडर व डायरी में 'महात्मा गांधी की जगह' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर छापने को लेकर विपक्षी पार्टियों ने प्रधानमंत्री को आड़े हाथ लिया है।

सूत्रों ने शुक्रवार को कहा कि साल 1996, 2002, 2005, 2011, 2012, 2013 तथा 2016 में केवीआईसी द्वारा जारी कैंलेंडर व डायरी में महात्मा गांधी की तस्वीर नहीं थी, इसलिए इस मुद्दे पर विवाद का कोई कारण नहीं बनता। 

सूत्रों का कहना है कि केंद्र में कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान खादी की बिक्री में पांच से सात फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई, लेकिन बीते दो वर्षो में 'अप्रत्याशित' 34 फीसदी की वृद्धि हुई है।

उन्होंने कहा कि बिक्री में यह इजाफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोगों से खादी को अपनाने पर जोर देने के कारण हुआ।

सूत्रों का कहना है कि केवीआईसी में ऐसा कोई नियम नहीं है कि कैलेंडर या डायरी में महात्मा गांधी की तस्वीर होनी ही चाहिए। उनके मुताबिक, मोदी 'युवाओं के आदर्श' हैं और युवाओं के बीच खादी की बढ़ रही लोकप्रियता इसका सबूत है।

उन्होंने कहा कि केवीआईसी डायरी व कैलेंडर में मोदी की तस्वीर उस कार्यक्रम से ली गई थी, जिसमें उन्होंने निर्धन महिलाओं के बीच चरखे का वितरण किया था।

गुरुवार को आईएएनएस ने अपनी एक खबर में बताया था कि केवीआईसी के कैलेंडर व डायरी के कवर पेज पर एक साधारण चरखे पर खादी बुनते महात्मा गांधी की चिर-परिचित तस्वीर की जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर ने ले ली है।

कांग्रेस, वाम मोर्चा, तृणमूल कांग्रेस तथा आम आदमी पार्टी (आप) सहित विपक्षी पार्टियों ने एकजुट होकर इस घटना की निंदा की है और जोर देकर कहा है कि राष्ट्रपिता को 'बदला' नहीं जा सकता।
PAC ने कहा, हमारे पास PM MODI को समन भेजने का अधिकार नही

PAC ने कहा, हमारे पास PM MODI को समन भेजने का अधिकार नही

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New Delhi, 13 January: नोटबंदी पर कांग्रेस किसी भी हद तक जाने को तैयार है, अब उन्होंने PAC के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी को फंसाने की कोशिश की थी लेकिन उनकी यह कोशिश भी रंग नहीं लाई क्योंकि आज PAC ने भी अपनी औकात को समझते हुए कहा है कि हमारे पास प्रधानमंत्री को समन करने का अधिकार नहीं है। 

आपको बता दें की PAC जिसे संसदीय समिति या लोक लेखा समिति भी कहा जाता है, उसमें कांग्रेस की चलती है, राहुल गाँधी भी उसमें सदस्य हैं और कांग्रेस नेता केवी थॉमस चेयरमैन हैं। इससे पहले सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भी PAC ने इंडियन आर्मी को समन भेजा था और आर्मी को सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत देना पड़ा था।

PAC ने नोटबंदी पर RBI से जवाब माँगा था और संतुष्ट ना होने पर मोदी को समन भेजने की धमकी दी थी लेकिन अब PAC को अपना अधिकार पता चल गया है जिसके मुताबिक उन्हें प्रधानमंत्री को समन भेजने का अधिकार ही नहीं है। 

20 जनवरी को PAC की अहम बैठक है जिसमें RBI गवर्नर उर्जित पटेल, वित्त सचिव अशोक लवासा और आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास भी शामिल होंगे और नोटबंदी पर सफाई पेश करेंगे।
विपक्ष के लिए बुरी खबर, सुप्रीम कोर्ट बोला, ऐसा कोई कानून नहीं जो रोक सके मोदी सरकार का बजट

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नई दिल्ली, 13 जनवरी: कांग्रेसियों और विपक्षी पार्टियों के लिए बहुत बुरी खबर है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिससे केंद्र सरकार को वर्ष 2017-18 का आम बजट निर्धारित समय से पहले पेश करने से रोका जा सके। अदालत ने याचिकाकर्ता से पूछा कि वह कानून में इस तरह का कोई प्रावधान बताएं जिसके चलते सरकार को बजट समय से पहले पेश करने से रोका जा सके।

मुख्य न्यायाधीश जगदीश सिंह केहर और न्यायाधीश डी.वाई.चंद्रचूड़ की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता वकील एम.एल.श्मरा से कानून के उन प्रावधानों का उल्लेख करने को कहा जिससे केंद्र सरकार को एक फरवरी को बजट पेश करने से रोका जा सके।

खंडपीठ ने शर्मा को बताया, "हमने प्रावधान ढूढने की कोशिश की लेकिन हमें नहीं मिले।"

पीठ ने याचिकाकर्ता से यह भी कहा कि कानून या संविधान के कौन से प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है।

खंडपीठ ने प्रावधानों को ढूंढने के लिए शर्मा को 20 जनवरी तक का समय दिया ताकि एक फरवरी को बजट पेश करने से रोका जा सके।

गौरतलब है कि सरकार इस बार आम बजट को फरवरी के अंत में पेश करने के बजाए एक फरवरी को पेश करने जा रही है।

विपक्षी पार्टियों का आरोप था कि मोदी सरकार पांच राज्यों में होने वाले चुनावों में वोटरों को लुभाने एक लिए लोक लुभावन योजनाओं की घोषणा कर सकती है इसलिए चुनावों के बाद ही बजट पेश किया जाए लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेसियों की उम्मीद पर पानी फेर दिया। 
कांग्रेसियों को पच नहीं रही MODI की यह फोटो, मचाया बवाल

कांग्रेसियों को पच नहीं रही MODI की यह फोटो, मचाया बवाल

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नई दिल्ली, 13 जनवरी: खादी ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के कैलेंडर व डायरी पर महात्मा गांधी की तरह प्रधानमंत्री मोदी को चरखे पर सूत काटते हुए फोटो देखकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने बवाल मचा दिया है। 

कांग्रेस, वाम मोर्चा, तृणमूल कांग्रेस तथा आम आदमी पार्टी (आप) सहित विपक्षी पार्टियों ने एकजुट होकर इस घटना की निंदा की है और जोर देकर कहा है कि राष्ट्रपिता को 'बदला' नहीं जा सकता।

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव सीतराम येचुरी ने कहा, "इस तरह की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। महात्मा गांधी की जगह कोई नहीं ले सकता। इस तरह की बातें प्रधानमंत्री कार्यालय को शोभा नहीं देतीं।"

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेता गुरुदास दासगुप्ता ने कहा, "अपना आक्रोश व्यक्त करने के लिए मेरे पास एक ही शब्द है, यह 'घटिया' हरकत है।"

कांग्रेस ने इस कदम को पापकर्म करार दिया है। पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधा।

राहुल ने ट्विटर पर पोस्ट करते हुए लिखा, "मंगलयान का प्रभाव।"

कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, "खादी तथा गांधीजी हमारे इतिहास, आत्मनिर्भरता तथा संघर्ष के प्रतीक हैं। गांधीजी की तस्वीर हटाना पापकर्म है।"

उन्होंने कहा, "यह विडंबना ही है कि मोदी, महात्मा गांधी से अहिंसा का प्रतीक लेने का प्रयास कर रहे हैं।"

इस घटना की निंदा करते हुए जनता दल (युनाइटेड) ने मोदी के तस्वीर वाले कैलेंडर तथा डायरी को नष्ट करने की मांग की है।

जद (यू) के प्रवक्ता के.सी.त्यागी ने कहा, "हम फैसले की हम कड़ी निंदा करते हैं। यह हमारे महात्मा, राष्ट्रनायक व प्रेरणा का अपमान है। वह सबसे ऊपर हैं और मोदी उनके सामने कुछ नहीं हैं। केवीआईसी को कैलेंडर तथा डायरी को दोबारा जारी करना चाहिए, जिसमें महात्मा गांधी की तस्वीर हो।"

तृणमूल कांग्रेस से राज्यसभा सदस्य एस.एस.रॉय ने कहा, "महात्मा गांधी 20वीं सदी के सबसे महान नेता थे, वह भी केवल भारत में नहीं बल्कि पूरी दुनिया में। कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी महत्वपूर्ण क्यों न हो, किसी भी पद पर क्यों न हो, उनकी जगह नहीं ले सकता। महात्मा गांधी के साथ किसी भी तरह की तुलना पूरी तरह से पापकर्म है।"

प्रधानमंत्री पर चुटकी लेते हुए तृणमूल अध्यक्ष व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट किया, "गांधीजी देश के राष्ट्रपिता हैं। मोदी जी क्या हैं???"

आप नेता केजरीवाल ने ट्वीट किया, "गांधी बनने के लिए वर्षो तपस्या करनी पड़ती है। केवल चरखा चलाकर कोई गांधी नहीं बन सकता, लोग केवल इसकी हंसी उड़ाएंगे।"

उधर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने घटना को तूल नहीं देने की कोशिश की। केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र ने जोर दिया कि गांधीजी की जगह कोई नहीं ले सकता।

केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री मिश्र ने कहा, "ऐसा नहीं है कि मोदी ने गांधी की जगह ले ली है। कैलेंडर के पन्ने महीनों के आधार पर हैं और केवल एक पन्ने पर मोदी की तस्वीर है।"
पढ़ें: संसदीय समिति को नोटबंदी के फैसले पर RBI ने क्या दिया जवाब, आखिर किसने लिया था ये फैसला?

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New Delhi, 13, January: नोटबंदी के फैसले पर संसदीय समिति ने RBI से जवाब तलब किया है, संसदीय समिति जानना चाहती है कि नोटबंदी का फैसला किसने और क्यों लिया था, किस फायदे को देखते हुए लिया गया था, किसने सुझाव दिया था और क्या तैयारी की गयी थी। संसदीय समिति में कांग्रेस की तरफ से राहुल गाँधी भी एक सदस्य हैं। RBI ने अपनी तरफ से जवाब तैयार कर लिया है और 20 जनवरी तक अपना जवाब भेज देगी, अगर संसदीय समिति उसके जवाब दे संतुष्ट नहीं हुई तो प्रधानमंत्री मोदी को तलब करेगी। 

RBI ने क्या दिया जवाब

  • RBI और केंद्र सरकार ने मिलकर नोटबंदी का फैसला लिया था
  • देश में नकली नोटों के संचार को पूरी तरह से रोकने के लिए भी यह फैसला लिया गया था
  • पहले RBI चाहता था कि 500 और 1000 की जगह 5000 और 10000 के नोट शुरू किये जाएं, 2014 में इसका सुझाव भी दिया गया था लेकिन वर्तमान मोदी सरकार ने इसे मंजूर नहीं किया और इसकी जगह पर 2000 रूपया का नोट शुरू किया ताकि देश में कैश की कमी ना हो 
  • 2000 के नए नोटों को छापने का आदेश वर्ष 2016 के जून महीने में दिया गया
  • जून 2016 से 2000 के नोटों की प्रिंटिंग शुरू कर दी गयी और पहले अच्छा खासा स्टॉक तैयार किया गया 
  • जब 2000 के नोटों का स्टॉक तैयार कर लिया गया तो RBI ने 7 नवम्बर को केंद्र सरकार को इसकी सूचना दी
  • 8 नवम्बर को मोदी सरकार ने नोटबंदी की घोषणा कर दी
  • RBI ने कैश के दबाव को कम करने के लिए डिजिटल पेमेंट का सुझाव दिया और मोदी सरकार ने इसे आन्दोलन का रूप दिया
  • नोटबंदी की प्रक्रिया का RBI की बैलेंस सीट पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा
अब AMAZON ने तिरंगे वाली जूते चप्पल बेचने की गुस्ताखी की तो अच्छा नहीं होगा: विकास स्वरुप

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New Delhi, 13 January: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूक ने अमेज़न कंपनी को चेतावनी देते हुए कहा है कि उन्हें आशा है, अब AMAZON तिरंगे वाले जूते चप्पल बेचकर भारतीयों के स्वाभिमान और तिरंगे से सम्मान को ठेस नहीं पहुंचाएगा, अगर उन्होंने दोबारा ऐसा कुछ करने की गुस्ताखी की तो उनके लिए अच्छा नहीं होगा और कड़ी कार्यवाही की जाएगी। 

इससे पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अमेज़ॉन को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा था कि अगर उन्होने तुरंत माफी नहीं माँगी तो कंपनी के अधिकारियों को वीजा नहीं दिया जाएगा और जिन्हें वीजा दिया गया  उनका वीजा रद्द कर दिया जाएगा। 

कंपनी ने प्रोडक्ट को वापस लेते हुए कहा था कि आगे से ऐसा नहीं होगा। 
नोटबंदी के बाद दिखा प्रधानमंत्री मोदी का जादू, दो महीने में ट्विटर पर बढ़े 20 लाख फॉलोवर

नोटबंदी के बाद दिखा प्रधानमंत्री मोदी का जादू, दो महीने में ट्विटर पर बढ़े 20 लाख फॉलोवर

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New Delhi, 13 January: आपने खबर सुनी होगी कि नोटबंदी के बाद कुछ मीडिया चैनलों ने खबर चलाई थी कि ट्विटर पर लाखों लोगों ने मोदी को नोटबंदी के फैसले से नाराज होकर अन-फॉलो करना शुरू कर दिया है। इसका कारण यह था कि मोदी के कई समर्थकों को भी नोटबंदी की वजह से नुकसान हुआ था, मोदी के समर्थकों में कई कालेधन के चोर थे और ऐसे लोगों का कालाधन मोदी ने जब्त कर लिया था इसलिए उन्होंने भी मोदी को अन-फॉलो करना शुरू किया था। 

भारत में मीडिया चैनलों ने यह खबर चलाकर मोदी की छवि खराब करने की कोशिश की थी लेकिन उनकी कोशिश कामयाब नहीं हो पायी क्योंकि मोगी को अगर एक बेईमान में अन-फॉलो किया तो 10 इमानदार लोगों ने फॉलो किया। 

नोटबंदी के तीन दिन बाद हमने मोदी के ट्विटर अकाउंट का स्क्रीनशॉट लिया था, 11 नवम्बर 2016 को उनके फॉलोवर्स की संख्या 24.3 मिलियन थी, यानी 2 करोड़ 3 लाख। आप खुद फोटो में देखिये। 


आज हमने फिर से मोदी के ट्विटर अकाउंट पर नजर दौडाई तो उनके फॉलोवर्स की संख्या 2 मिलियन यानी 20 लाख बढ़ गयी, अब उनके फॉलोवर्स की संख्या 26.3 मिलियन है (आप खुद फोटो में देखिये)।


जानकारी के लिए बता दें कि इससे पहले भी मोदी के फॉलोवर्स की संख्या बढ़ रही थी लेकिन इतनी रफ़्तार नहीं आयी थी, महीने में पांच लाख फॉलोवर्स बढ़ते थे लेकिन अब एक महीने में 10 लाख फॉलोवर्स बढ़ रहे हैं, अगर यही रफ़्तार जारी रही तो अगले पांच वर्षों में वे ओबामा को पीछे छोड़ सकते हैं। इस वक्त ओबामा के फॉलोवर्स की संख्या 80.5 मिलियन है जो कि मोदी से बहुत ही अधिक है। लेकिन यह भी ध्यान देने लायक है कि बराक ओबामा 8 साल अमेरिका राष्ट्रपति रहे हैं और अब रिटायर हो चुके है। अब उनके फॉलोवर्स की रफ़्तार कम हो जाएगी। 

मोदी को प्रधानमंत्री बने केवल ढाई साल हुए हैं इसलिए अभी उनके फॉलोवर्स की रफ़्तार बढ़ती रहेगी और अगर उन्हें दूसरा कार्यकाल मिल गया तो वे बराक ओबामा को पीछे छोड़कर ट्विटर पर दुनिया के सबसे बड़े नेता बन जाएंगे। अभी मोदी दुनिया भर में दूसरे नम्बर पर हैं।