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Oct 22, 2017

मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने बनाया राहुल गाँधी का मजाक, इनकी तो लोकप्रियता भी फर्जी निकली

मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने बनाया राहुल गाँधी का मजाक, इनकी तो लोकप्रियता भी फर्जी निकली

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राहुल गाँधी एक बार फिर से मजाक का विषय बन गए हैं क्योंकि उनकी के और शर्मनाक चालाकी पकड़ी गयी है, इस बात के लिए केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने राहुल गाँधी का मजाक उड़ाते हुए कहा है कि इनकी ट्विटर पर लोकप्रियता भी फर्जी निकली, भारत से अधिक इनके चाहने वाले कजाकिस्तान में हैं और वो भी नकली, जिन्हें कंप्यूटर की भाषा में बोट्स कहा जाता है.

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बात दरअसल ये है कि राहुल गाँधी ट्विटर पर चालाकी से लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं, वह विदेशी कंपनी को पैसा देकर अपने ट्वीट को रि-ट्वीट करवाते हैं ताकि वजनदार नेता दिख सकें, उनके ट्वीट को रि-ट्वीट करने वाले अधिकतर लोग कजाकिस्तान, इंडोनेशिया और रूस के हैं. मतलब राहुल गाँधी के ट्वीट भारतीयों से अधिक कजाकिस्तान के लोग रि-ट्वीट करते हैं. उनकी चोरी बीजेपी वालों ने पकड़ ली और अब राहुल गाँधी का जमकर मजाक उड़ाया जा रहा है.

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Oct 21, 2017

मोदी सरकार का फायदा होगा यह सोचकर राहुल गाँधी कजाख्स्तान, रूस, इंडोनेशिया में उड़ा रहे हैं पैसा

मोदी सरकार का फायदा होगा यह सोचकर राहुल गाँधी कजाख्स्तान, रूस, इंडोनेशिया में उड़ा रहे हैं पैसा

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चुनावों का एक फायदा यह भी होता है कि राजनीतिक पार्टियाँ अथाह पैसा खर्च करती हैं, गड़ा हुआ कालाधन भी बाहर आ जाता है, हजारों लोगों को चुनाव प्रचार में पैसे मिलते हैं, बैनर, पोस्टर, ऑटो-रिक्शा, टेंट वालों की अथाह कमाई होती है, अर्थव्यवथा में पैसा बढ़ता है, सरकार का टैक्स कलेक्शन बढ़ता है, जीडीपी बढती है और सरकार को विकास के लिए पैसे मिलते हैं.

क्या आप सोच सकते हैं कि भारत का कोई नेता ऐसा भी सोच सकता है कि मैं भारत में पैसा खर्च करूँगा तो भारत सरकार का फायदा होगा, मोदी सरकार को टैक्स मिलेगा इससे अच्छा है कि मैं विदेशी देशों में पैसा खर्च करूँ, वहां की कंपनियों को पैसा दूं ताकि मेरे देश का फायदा ना हो सके. राहुल गाँधी ऐसा ही सोचते हैं.

राहुल गाँधी खुद को पॉपुलर नेता बनाने के लिए भारत में नहीं बल्कि कजाख्स्तान, इंडोनेशिया और रूस में पैसे खर्च कर रहे हैं, इन्होने विदेशी कंपनियों को पैसा दे रखा है और वहां से इनके ट्वीट को बोट (आटोमेटिक प्रोग्राम) द्वारा रि-ट्वीट किया जता है ताकि देश के लोगों को लगे कि राहुल गाँधी के ट्वीट को बहुत रि-ट्वीट किया जा रहा है, ये तो ग्लोबल लीडर बन गया, ये तो मोदी से भी बड़ा लीडर बन रहा है.

राहुल गाँधी पैसे खर्च करके ट्वीट को रि-ट्वीट कराएं, इससे किसी को कोई दिक्कत नहीं लेकिन अगर वह यही पैसा भारत के युवाओं को दे दें, युवाओं को नौकरी देकर, उन्हें पैसे देकर अपने ट्वीट-को रि-ट्वीट कराएं तो वे हजारों लोगों को रोजगार दे सकते हैं और भारत सरकार का भी फायदा होगा, देश की GDP बढ़ेगी लेकिन राहुल गाँधी पहले ऐसे नेता हैं जो चाहते हैं कि कहीं देश की GDP ना बढ़ जाए, इसलिए मैं विदेशों में पैसे खर्च करूँगा.

राहुल गाँधी ने 15 अक्टूबर को डोनाल्ड ट्रम्प को लेकर मोदी के खिलाफ ट्वीट किया था, जिसके बाद कजाख्स्तान, रूस और इंडोनेशिया ने रि-ट्वीट होने लगे, देखते ही देखते 30 हजार लोगों ने रि-ट्वीट कर दिया, लोग हैरान हो गए कि राहुल गाँधी को कब से लोग इतने सीरियसली लेने लगे, बाद में बता चला कि यह तो बोट यानी कंप्यूटर प्रोग्राम का कमाल है.


ये रहे राहुल गाँधी के ट्वीट को रि-ट्वीट करने वालों के लिंक, इस लिंक पर क्लिक करके आप स्वयं देख सकते हैं, कहावत है मान ना मान, मैं तेरा मेहमान, कजाख्स्तान वाले ना तो राहुल गाँधी की भाषा समझते हैं, ना बोली समझते हैं उसके बाद भी उनके ट्वीट को रि-ट्वीट किये जा रहे हैं जिसका मतलब है कि उन्हें रि-ट्वीट करने के लिए मोटा माल दिया गया है.

https://twitter.com/charlot34583589
https://twitter.com/pkbjdasjyesc557
https://twitter.com/lawannapuchajd9
https://twitter.com/yrlkamcsmc1507

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 2019 लोकसभा चुनाव जितवाने का ठेका भी राहुल गाँधी ने अमेरिका की बड़ी कंपनी Cambridge Analytica को दिया है, यह वही कंपनी है जिसनें डोनाल्ड ट्रम्प को चुनाव जितवाया था, राहुल गाँधी को उसी दिन यह कंपनी भा गयी थी जिस दिन उन्हें पता चला था कि डोनाल्ड ट्रम्प ने चुनाव जितवाने का ठेका इसी कंपनी को दिया था.

यह कंपनी सोशल मीडिया पर लोगों की प्रोफाइलिंग करती है, पता लगाती है कि लोगों को क्या पसंद है और क्या नहीं पसंद है, लोगों की पसंद का डेटा तैयार करती है और उसी के आधार पर उन्हें चीजें परोसी जाती हैं, मान लीजिये आप कल तक मोदी के प्रशंसक थे लेकिन अचानक GST की वजह से आपको नुकसान हो गया और आप मोदी के विरोधी बन गए, कंपनी समझ जाएगी कि आप क्यों मोदी के विरोधी बन गए, उसके बाद कंपनी वही तरीका अपनाकर अन्य लोगों को भी मोदी विरोधी बना देगी और धीरे धीरे मोदी लहर ख़त्म कर देगी.

राहुल गाँधी विदेशों में ऐसे ही नहीं घूम रहे हैं, कह 2019 चुनाव की पूरी तैयारी कर रहे हैं, छल, कपट, धन बल, कुछ भी खर्च करके वह 2019 में ही दिल्ली की सत्ता पर काबिज होना चाहते हैं, इसलिए उन्होंने अमेरिका की Cambridge Analytica को चुनाव जितवाने का ठेका दे दिया है.

Oct 20, 2017

वीरू से बोले बिजेंदर, तने खेलना छोड़ दिया हमने देखना छोड़ दिया, बैटरी धर के देखते थे तेरा मैच

वीरू से बोले बिजेंदर, तने खेलना छोड़ दिया हमने देखना छोड़ दिया, बैटरी धर के देखते थे तेरा मैच

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आज भारत के पूर्व विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग का जन्मदिन है, हर कोई उनके जन्मदिन की शुभकामनाएं व्यक्त कर रही है, उन्हें बधाई दे रहा है. भारत के बाक्सिंग चैम्पियन बिजेंदर सिंह ने भी उन्हें बधाई दी लेकिन उनका अंदाज विल्कुल अलग था.

उन्होंने कहा कि - तने खेलना छोड़ दिया हमने देखना छोड़ दिया ना तो वो भी जमाना था जिब भाई की बैटिंग ट्रैक्टर की बैटरी धर के देखा करते, हैप्पी बर्थडे बीरेंद्र सहवाग.


आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आज वीरेंद्र सहवाग का 39वां जन्मदिन है. उन्हने दोस्तों और प्रशसंकों की तरफ से बधाइयों का तांता लगा हुआ है.

वीरेंद्र सहवाग भारत के सबसे धाकड़ बल्लेबाज माने जाते हैं, उनकी बैटिंग से बड़े बड़े गेंदबाजों का पसीना छूट जाता था, जब वे अपने फॉर्म में बैटिंग करते थे तो सिर्फ चौके छक्कों से बात करते थे.

Oct 18, 2017

अनिल कुंबले के बर्थडे पर BCCI ने किया ऐसा ट्वीट कि करना पड़ा डिलीट, पढ़ें क्या लिख दिया

अनिल कुंबले के बर्थडे पर BCCI ने किया ऐसा ट्वीट कि करना पड़ा डिलीट, पढ़ें क्या लिख दिया

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अनिल कुंबले भले ही भारत के सबसे सफल गेंदबाज रहे हों लेकिन वे भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान भी रहे हैं, बल्लेबाज भी रहे हैं और एक साल तक हेड कोच भी रहे हैं. कल उनका हैप्पी बर्थडे था, उन्हें विश करने के लिए BCCI ने ट्वीट किया जिसमें अनिल कुंबले को सिर्फ गेंदबाज बताया गया, BCCI यह भूल गया कि अनिल कुंबले कप्तान और कोच भी रह चुके हैं.

BCCI के इस ट्वीट को देखते ही अनिल कुंबले के चाहने वालों ने BCCI को जमकर फटकार लगा दी. जब BCCI को अपनी गलती का अहसास हुआ तो उन्होने फटाफट ट्वीट को डिलीट कर दिया और फिर से ट्वीट किया. 

पुराना ट्वीट डिलीट करने के बाद BCCI ने दोबारा ट्वीट किया जिसमें कहा - टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और लीजेंड अनिल कुंबले को हैप्पी बर्थडे. #HappyBirthdayJumbo.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अनिल कुंबले ने बिना थके और बिना आराम किये 132 टेस्ट और 271 वनडे क्रिकेट मैच खेले हैं. उन्होंने 2008 में रिटायरमेंट लिया था. उन्होंने 619 टेस्ट विकेट लिए हैं, वे विश्व के दूसरे गेंदबाज हैं जिन्होंने टेस्ट में एक पारी के सभी 10 विकेट लिए हैं.

Oct 15, 2017

मोदी सरकार अब वैज्ञानिकों से बनवाएगी प्रदूषण मुक्त पटाखे, सुप्रीम कोर्ट भी नहीं कर पाएगा बैन

मोदी सरकार अब वैज्ञानिकों से बनवाएगी प्रदूषण मुक्त पटाखे, सुप्रीम कोर्ट भी नहीं कर पाएगा बैन

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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और एनसीआर में पटाखों की विक्री पर बैन लगा दिया है जिसकी वजह से बच्चों के मुंह लटक गए हैं, दीवाली को लेकर बच्चों का क्रेज ख़त्म हो रहा है जिसे लेकर मोदी सरकार भी परेशान है इसलिए कल मोदी सरकार ने भारतीय वैज्ञानिकों से आवाहन किया है कि वे प्रदूषण मुक्त पटाखे बनाएं जिसे सुप्रीम कोर्ट भी ना बैन कर पाए.

कल केंद्रीय साइंस एंड टेक्नोलॉजी मंत्री हर्षवर्धन सिंह ने सभी वैज्ञानिकों को प्रदूषण मुक्त पटाखा बनाने की चुनौती दी, उन्होने कहा कि प्रदूषण मुक्त पटाखों से प्रदूषण मुक्त आतिशबाजी होगी, केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा ने भी कहा कि प्रदूषण मुक्त पटाखे बनाकर हमारे वैज्ञानिक देश को प्रदूषण मुक्त बनाने में सहयोग जरूर करेंगे.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस दीवाली पर पटाखा बैन करके सुप्रीम कोर्ट यह देखना चाहता है कि इससे दिल्ली एनसीआर के प्रदूषण पर कितना असर पड़ता है. अगर प्रदूषण का स्तर ठीक रहा तो सुप्रीम कोर्ट हमेशा के लिए पटाखों पर बैन कर देगा, अगर प्रदूषण का स्तर बैन करने के बाद भी बढ़ा तो कुछ और रास्ता निकालना पड़ेगा.
लोगों को सुप्रीम कोर्ट के मी-लार्डों से होने लगी है नफरत, हर फैसला हिंदुस्तानियों के खिलाफ

लोगों को सुप्रीम कोर्ट के मी-लार्डों से होने लगी है नफरत, हर फैसला हिंदुस्तानियों के खिलाफ

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भारत के सुप्रीम कोर्ट के जजों द्वारा अजीब अजीब से फैसले दिए जा रहे हैं, कुछ दिन पहले दीवाली पर पटाखा बेचने पर रोक लगा दी गयी जिसकी वजह से हजारों व्यापारी बर्बाद होने वाले हैं, दो दिन पहले रोहिंग्या को भारत से भगाने पर रोक लगा दी, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक रोहिंग्या मामले की सुनवाई हो रही है तब तक रोहिंग्या को भारत से भगाया ना जाए, उनका ख्याल रखा जाए क्योंकि ये मानवता का सवाल है. उसके पहले दही हांडी पर 18 वर्ष से कम आयु के गोविन्दाओं के भाग लेने पर बैन लगा दिया था.

सुप्रीम कोर्ट के पास हर चीज के लिए समय है लेकिन इनके पास राम मंदिर मामले की सुनवाई के लिए समय नहीं है, जब भी कोर्ट में राम मंदिर मामले की फाइल जाती है उसे 2-4 महीनें के लिए आगे खिसका दिया जाता है. ऐसा लगता है कि सुप्रीम कोर्ट के जज किसी एजेंडे के तहत काम कर रहे हैं.

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर सुप्रीम कोर्ट के जजों के खिलाफ रोष प्रकट किया जा रहा है, लोगों को मीलार्ड शब्द से ही नफरत होने लगी है क्योंकि लोगों को लगने लगा है कि सुप्रीम कोर्ट हिन्दुओं के खिलाफ फैसले सुना रहा है और जान बूझकर उनके सब्र का इम्तिहान ले रहा है. कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट के जज कांग्रेसी मानसिकता वाले हैं और उन्हें कांग्रेस ने ही नियुक्त किया था इसलिए मी-लार्ड लोग कांग्रेस के इशारे पर काम कर रहे हैं.

Oct 14, 2017

रोहिंग्या जिहादियों को भगाकर म्यांमार बना कम भूखा देश, भारत बना सबसे अधिक भूखा देश, भुगतो अब

रोहिंग्या जिहादियों को भगाकर म्यांमार बना कम भूखा देश, भारत बना सबसे अधिक भूखा देश, भुगतो अब

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एक धर्म के लोग जिहाद करते हैं, जिस भी देश में रहते हैं वहां पर खूब आबादी बढ़ाते हैं, 10-10, 20-20 बच्चे पैदा कर लेते हैं ताकि उनकी जनसँख्या जल्दी से बढ़ जाए और उस देश पर उनका कब्ज़ा हो जाय, वर्मा यानी म्यांमार में रोहिंग्या भी यही काम कर रहे थे, ये लोग खूब आबादी बढ़ा रहे थे, जिहाद कर रहे थे, दूसरे धर्म के लोगों को मार मार कर जेमीन में दफना देते थे, ये लोग रखाइन राज्य को इस्लामिक स्टेट बनाना चाहते थे, ये लोग कई कई बच्चे पैदा कर रहे थे इसलिए म्यांमार में कुपोषण भी बढ़ रहा था जिसकी वजह से म्यांमार भूखा देश कहा जाता था लेकिन म्यांमार ने इन्हें भगाना शुरू कर दिया तो भूखों की लिस्ट में सुधार भी होता गया.

वर्तमान में भूखों की लिस्ट में म्यांमार ने काफी सुधार किया है, भूख कम करने में म्यांमार भारत से भी आगे निकल गया लेकिन भारत को इसका नुकसान भी उठाना पड़ा है, रोहिंग्या आकर भारत में बस गए तो भारत भी भूखा बन गया, इस वर्ष भारत भूखों की लिस्ट में 3 अंक और आगे हो गया है. सबसे अधिक भूखे देशों में भारत 100वें नंबर पर आ गया है.

कुछ लोग भारत को धर्मशाला बनाना चाहते हैं, कुछ राजनीतिक पार्टियाँ भी घुसपैठ को बढ़ावा दे रही हैं ताकि विदेश से घुसपैठिये भारत में आकर बस जाँय, जब ये घुसपैठिये भारत में भूखे प्यासे घूमेंगे, भीख मांगेंगे तो इससे भारत की दुनिया भारत में बदनामी भी होगी और दूसरे देश भारत को भूखा देश बताकर हमारे देश की हंसी भी उडाएंगे.

कांग्रेस पार्टी मोदी सरकार पर भूख बढ़ाने का आरोप भी लगा रही है और यह भी चाहती है कि रोहिंग्या भारत में ही रहें ताकि विदेशी संस्थाएं आकर उनके फोटो खींच खींच कर अपने देश में ले जाएं, भूखों की लिस्ट तैयार करें और उसमें भारत को सबसे पीछे कर दें ताकि कांग्रेस मोदी सरकार के खिलाफ भूख को मुद्दा बनाए जैसा कि राहुल गाँधी अभी भूख को मुद्दा बना रहे हैं.

भारत में कोई भी आदमी भूखा नहीं सोता, सबको अनाज मिल रहा है, सबको खाना भी मिल रहा है, हमारे देश में तो लाखों मंदिर और गुरुद्वारों में भी फ्री में खाना मिलता है, सबको खाना मिल रहा है लेकिन विदेशी संस्थाएं आकर शरणार्थियों के फोटो खींचकर ले जाती हैं और भारत को भूखा देश बता दिया जाता है. अब सरकार क्या करे, क्या दुनिया के सभी शरणार्थियों को भारत में रहें दिया जाए और उन्हें भोजन, पानी, शिक्षा और नौकरी देकर भारत के लोगों का हक उन्हें दे दिया जाए.

राहुल गाँधी ने किया भूख का जिक्र तो स्मृति ईरानी ने कहा - सब्र करो अभी तीन ही साल तो हुआ

राहुल गाँधी ने किया भूख का जिक्र तो स्मृति ईरानी ने कहा - सब्र करो अभी तीन ही साल तो हुआ

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ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत तीन स्थान नीचे चला गया है जिसे लेकर राहुल गाँधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने एक शेर के माध्यम से कहा - 'भूख है तो सब्र कर, रोटी नहीं तो क्या हुआ.. आजकल दिल्ली में है जेरे-बहस ये मुद्दआ।'
केंद्रीय दूर संचार मंत्री स्मृति ईरानी ने तुरंत राहुल गाँधी को जवाब दिया. उन्होंने कहा - ऐ सत्ता की भूख -सब्र कर, आँकड़े साथ नहीं तो क्या, खुदगर्जों को जमा कर, मुल्क की बदनामी का शोर तो मचा ही लेंगे.
आपको बता दें कि ग्लोबल हंगर इंडेक्स की रिपोर्ट जारी करने वाली संस्था IFPRI ने 2015 से भूख के आकलन का तरीका बदल दिया है जिसकी वजह से भारत इस लिस्ट में पीछे हो गया. 2014 में भारत 55वें स्थान पर था, 2015 में भारत 100 वें स्थान पर आ गया है हालाँकि वर्तमान समय में भारत में कुपोषण कम हुआ है. पहले वजन के आधार पर कुपोषण की रिपोर्ट तैयार की जाती थी लेकिन मोदी सरकार के आने के बाद थकान और शारीरिक उंचाई के आधार पर कुपोषण की रिपोर्ट तैयार की जाने लगी जिसकी वजह से भारत लिस्ट में पीछे होता गया.

वैसे अगर आंकड़ों पर ध्यान दिया जाए तो भात में वजन के आधार पर कुपोषण कम हुआ है, पहले जहाँ 16 फ़ीसदी बच्चे कुपोषण के शिकार थे वहीँ अब 14.5 फ़ीसदी बच्चे कुपोषण का शिकार हैं. खैर कांग्रेस को तो मुद्दा चाहिए, उन्हें रिपोर्ट और उसकी एनालिसिस के तरीके से क्या लेना.

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Source and Credit: http://www.business-standard.com, IFPRI Report 2017
मैं प्रधानमंत्री पद के लिए बढ़िया उम्मीदवार नहीं था लेकिन मैडम को मना नहीं कर सका: मनमोहन सिंह

मैं प्रधानमंत्री पद के लिए बढ़िया उम्मीदवार नहीं था लेकिन मैडम को मना नहीं कर सका: मनमोहन सिंह

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पूरा देश यह मानता है कि मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री पद के काबिल नहीं थे, उनके अन्दर प्रधानमंत्री वाला दम नहीं था, निर्णय लेने की ताकत नहीं थी, वे रिमोट कण्ट्रोल से ऑपरेट होते थे और रिमोट कण्ट्रोल सोनिया गाँधी के हाथों में था, कल मनमोहन सिंह ने खुद ही स्वीकार कर लिया कि मैं प्रधानमंत्री पद के लिए सही उम्मीदवार नहीं थे क्योंकि मुझसे भी बेहतर उम्मीदवार प्रणब मुख़र्जी थे, लेकिन मेरे पास कोई विकल्प नहीं थी, मैडम सोनिया ने मेरा नाम प्रधानमंत्री पद के लिए आगे बढाया, मैं उन्हें मना नहीं कर सकता था.

मनमोहन सिंह ने कहा कि 2004 में प्रणब मुख़र्जी प्रधानमंत्री पद के लिए बेहतर उम्मीदवार थे, उन्होंने अपनी सुपीरियरिटी का अनुभव भी किया होगा लेकिन उन्हें यह भी पता है कि मेरे पास हाँ करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था क्योंकि मैडम का निर्णय कोई टाल नहीं सकता था.

मनमोहन सिंह ने जैसे ही यह बात बोली, सभी कांग्रेसी नेता हंसने लगी, सोनिया गाँधी भी हंसने लगीं. इससे पहले प्रणब मुख़र्जी ने मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाने को सोनिया गाँधी की बढ़िया पसंद बताया था.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कल प्रणब मुख़र्जी की किताब 'Coalition Years' के तीसरे एडिशन के रिलीज कार्यक्रम में कई कांग्रेसी नेता और साथी दलों के नेता इकठ्ठे हुए थे. कार्यक्रम में सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी, बीएसपी नेता सतीश चन्द्र मिश्र भी पहुंचे थे.
तोप, मिसाइल, राइफल पर भी बैन लगा सकता है सुप्रीम कोर्ट, बॉर्डर पर चलेंगी प्लास्टिक की गोलियां

तोप, मिसाइल, राइफल पर भी बैन लगा सकता है सुप्रीम कोर्ट, बॉर्डर पर चलेंगी प्लास्टिक की गोलियां

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अगर पटाखों की वजह से प्रदूषण होता है तो बंदूकों से निकलने वाली गोलियों, तोप से निकलने वाले गोले और बारूद, मिसाइल और रॉकेट से निकलने वाले धुंवे से भी प्रदूषण फैलता है. अक्सर देखा जाता है कि बॉर्डर पर भारत और पाकिस्तान की गोलाबारी से पूरा क्षेत्र धुंवा धुंवा हो जाता है. भारत का सुप्रीम कोर्ट प्रदूषण को लेकर बहुत सख्त है इसलिए हो सकता है कि पटाखों की तरह ही बन्दूकों, गोलियों, आंसू गैस के गोलों, तोप के गोले, बारूद, मिसाइल, रॉकेट और अन्य हथियारों पर भी बैन लगा सकता है.

सुप्रीम कोर्ट के जज तर्क दे सकते हैं कि बन्दूकों, गोलियों, आंसू गैस के गोलों, तोप, गोले, बारूद, मिसाइल, रॉकेट से धुंवा और प्रदूषण फैलता है, इससे कश्मीर के लोगों को परेशान होती है, बच्चों का जीना मुश्किल हो जाता है, फेफड़ों की बीमारियाँ हो जाती हैं इसलिए अब बॉर्डर पर पाकिस्तानी सैनिकों पर प्लास्टिक की गोलियां दागी जाँय.

सुप्रीम कोर्ट कह सकता है कि अगर प्लास्टिक की गोलियां चलायी जाएंगी तो प्रदूषण कम होगा, बीमारियों से बचा जा सकेगा. इसलिए आगे से पाकिस्तानी सैनिकों पर प्लास्टिक या रबर की गोलियां चलायी जानी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह का तर्क देकर पटाखों पर बैन लगाया है उसी तरह से हथियारों पर भी बैन लगाया जा सकता है.

यही नहीं, कश्मीर में पत्थरबाजों को कण्ट्रोल करने के लिए उनपर आंसू गैस के गोले दागे जाते हैं जिसकी वजह से पूरे इलाके में धुंवा फ़ैल जाता है, इससे भी प्रदूषण होता है इसलिए सुप्रीम कोर्ट आदेश दे सकता है कि पत्थरबाजों पर आंसू गैस के गोले ना छोड़े जाँय, वर्ना प्रदूषण फ़ैल जाएगा.
इससे फैलता है पटाखों से भी 100 गुना प्रदूषण और बीमारियाँ, सुप्रीम कोर्ट इसे बैन करके दिखाए

इससे फैलता है पटाखों से भी 100 गुना प्रदूषण और बीमारियाँ, सुप्रीम कोर्ट इसे बैन करके दिखाए

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सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों की विक्री पर यह कहते हुए बैन लगा दिया कि इससे प्रदूषण फैलता है, बच्चों को सांस की बीमारियाँ हो जाती हैं और उनका जीना मुश्किल हो जाता है, सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला करते हुए थोड़ी सी भी समझदारी का इस्तेमाल नहीं किया क्योंकि प्रदूषण सिर्फ पटाखों से ही नहीं फैलता, सांस की बीमारियाँ सिर्फ पटाखों से नहीं होतीं, कई और चीजें हैं जिनकी वजह से बीमारियाँ फैलती हैं.

आप खुद देखिये, मच्छरों को भगाने वाली Coil और Liquid जैसे मोर्टीन, गुड नाईट, आल आउट आदि में पटाखों से भी ज्यादा जहर होता है, ये पटाखों से भी 100 गुना अधिक बीमारियाँ फैलाते हैं, ये पटाखों से भी हजारों गुना अधिक प्रदूषण फैलाते हैं लेकिन इनका इस्तेमाल सभी घरों में होता है.

अगर सुप्रीम कोर्ट वाकई में प्रदूषण के लिए गंभीर है तो उसे पहले इन चीजों को बंद करना चाहिए क्योंकि जब दीवाली पर पटाखे जलते हैं तो उसके धुंवे में सभी मच्छर ख़त्म हो जाते हैं, आप देखते होंगे कि दीवाली के बाद एक भी मच्छर नहीं दिखते, पटाखों के धुंवे में सभी मच्छर मर जाते हैं, जैसा Coil के धुंवे से मरते हैं.

Coil का धुंवा मच्छरों को तो भगाता है लेकिन साथ में सांस और अन्य बीमारियाँ भी दे जाता है, लोग मच्छरों से बचने के लिए सांस की बीमारियाँ लेने को मजबूर हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट को इनपर बैन लगाना चाहिए. अन्यथा पटाखों को बैन करना हिन्दू धर्म का अपमान ही माना जाएगा.

Oct 13, 2017

लोग बोले, जब सुप्रीम कोर्ट ही चला रहा है देश तो केंद्र सरकार की क्या जरूरत, इस्तीफ़ा दो, घर बैठो

लोग बोले, जब सुप्रीम कोर्ट ही चला रहा है देश तो केंद्र सरकार की क्या जरूरत, इस्तीफ़ा दो, घर बैठो

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भारत के अधिकतर लोगों का सुप्रीम कोर्ट पर से भरोसा ख़त्म होता जा रहा है, सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार के हर फैसले में दखल दे रहा है, आज अवैध रोहिंग्या घुसपैठियों को भारत से भगाने पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी, एक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया कि जब तक सुनवाई पूरी ना हो जाए, किसी भी रोहिंग्या घुसपैठिये को भारत से भगाया ना जाए क्योंकि ये इन्सान हैं और इन्हें भगाना मानव अधिकारों के विपरीत है.

इस फैसले से देश के लोगों का भरोसा सुप्रीम कोर्ट पर से हट रहा है, ऐसा लग रहा है कि देश केंद्र सरकार नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट चला रहा है, केंद्र सरकार खुद से कोई निर्णय नहीं कर पा रही है.

अब लोगों कह कहना है कि जब इस देश में सारे फैसले कोर्ट को ही करने है जैसे के रोहिंग्या मुसलमान हिंदुस्तान में रहेंगे या नहीं रहेंगे, कश्मीर में सेना पैलेट गन चलाएगी या कोई और गन चलाएगी, दिवाली पर पटाखे चलाएंगे या नहीं चलाएंगे, मूर्ति विसर्जन होगा कि नहीं होगा, दही हांडी की ऊंचाई कितनी होगी, राम मंदिर बनेगा या नहीं बनेगा. अगर ये सभी फैसले सुप्रीम कोर्ट को ही करने हैं तो चुनाव कराने की क्या जरूरत है, सुप्रीम कोर्ट से ही पूछ लेना चाहिए कि देश का प्रधानमंत्री किसे बनाना चाहिए. 

लोग कह रहे हैं कि जब हर फैसला सुप्रीम कोर्ट को ही करना है तो  चुनी हुई सरकार की फिर क्या जरुरत है, सुप्रीम कोर्ट के जजों को ही यह देश भी चलाना चाहिए, प्रधानमंत्री सहित सभी मंत्री और राष्ट्रपति को अपने पद से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.
राम मंदिर पर रोक, रोहिंग्या को भगाने पर रोक, पटाखा जलाने पर रोक, सुप्रीम कोर्ट है या पाकिस्तान

राम मंदिर पर रोक, रोहिंग्या को भगाने पर रोक, पटाखा जलाने पर रोक, सुप्रीम कोर्ट है या पाकिस्तान

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कांग्रेस की 10 साल लगातार सरकार थी लेकिन उस समय सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस के किसी भी फैसल में चूं तक नहीं की, ऐसा इसलिए क्योंकि कांग्रेस ने अपनी पसंद के लोगों को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया था इसलिए वे चुपचाप पड़े रहते थे लेकिन जैसे ही देश में मोदी सरकार आयी, सुप्रीम कोर्ट के जज जाग उठे, मोदी सरकार के सभी फैसले में हस्तक्षेप करने लगे, वर्तमान में ऐसा लग रहा है कि देश मोदी सरकार नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट के जज चला रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट मोदी सरकार के हर फैसले में दखल दे रहा है, हर फैसले पर रोक लगा रहा है, हिन्दू समाज के सभी त्योहारों पर बैन लगा रहा है, पहले सुप्रीम कोर्ट ने जन्माष्टमी पर गोविंदा पर बैन लगाया और अब दीवाली पर पटाखा जलाने पर बैन लगा दिया.

आप खुद देखिये, भारत सरकार राम मंदिर बनाना चाहती है, देश के 80 फ़ीसदी हिन्दू भी अयोध्या में राम मंदिर चाहते हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट बार बार तारीख बढाकर सुनवाई टाल रहा है.

इसके बाद रोहिंग्या का मामला सामने आया, केंद्र सरकार ने साफ़ साफ़ कह दिया कि रोहिंग्या देश की शांति के लिए खतरा हैं, इनके आतंकियों से संबंध रहे हैं. ये लोग म्यांमार में भी आतंकी गतिविधियों में शामिल हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की बात नहीं मानी और आज तुगलकी फरमान देते हुए उन्हें भगाने पर रोक लगा दी. 

सुप्रीम कोर्ट ने आज के आदेश में केंद्र सरकार से कहा कि जब तक इस मामले की सुनवाई हो रही है तब तब उन्हें जबरजस्ती भगाया ना जाए क्योंकि अगर देश की सुरक्षा महत्वपूर्ण है तो मानव अधिकार भी महत्वपूर्ण हैं.

आपको पता ही है कि राम मंदिर मामले की 30 वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है लेकिन आज तक सुनवाई ही चल रही है, इसी तरह से रोहिंग्या मामले की सुनवाई होती तो आराम से 40-50 साल लग जाएंगे, मतलब अब रोहिंग्या 40-50 वर्षों तक भारत में रहेंगे, बच्चे पैदा करेंगे, जिहाद करेंगे, हिंसा और आतंकवाद करेंगे और सुप्रीम कोर्ट में तारीख पर तारीख चलती रहेगी.

अब आप देखिये, सुप्रीम कोर्ट ना तो राम मंदिर बनाने दे रहा है, ना रोहिंग्या को भगाने दे रहा है, ना हिन्दुओं को पटाखा जलाने दे रहा है, एक तरह से सुप्रीम कोर्ट भारत के लिए पाकिस्तान बन गया है, भारत की सरकार और हिंदुस्तान के नागरिकों को अपने हक के लिए सुप्रीम कोर्ट से ही लड़ना पड़ रहा है. यह बहुत ही खतरनाक ट्रेंड है देश के लिए.
रोहिंग्या के आने से हुआ भारत का बेड़ा गर्क, भूखों की लिस्ट में बांग्लादेश से भी पीछे हो गया

रोहिंग्या के आने से हुआ भारत का बेड़ा गर्क, भूखों की लिस्ट में बांग्लादेश से भी पीछे हो गया

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घुसपैठिये लोगों ने भारत में घुसकर भारत के बड़ा गर्क कर दिया है, भारत में हमेशा बांग्लादेश से घुसपैठिये आते रहते हैं, अब लाखों रोहिंग्या भी भारत में घुस आयें हैं और यहाँ पर भूखे प्यासे घूम रहे हैं. इन लोगों की वजह से भारत पूरे विश्व में बदनाम हो रहा है क्योंकि ग्लोबल हंगर इंडेक्स यानी भूखों की लिस्ट में भारत बांग्लादेश से भी पीछे हो गया है.

पिछले साल भूखों की लिस्ट में भारत 97वें स्थान पर था लेकिन इस वर्ष तीन स्थान पीछे खिसककर 100वें स्थान पर पहुँच गया. भारत इस लिस्ट में उत्तर कोरिया, बांग्लादेश और म्यांमार से भी पीछे हैं हालाँकि पाकिस्तान से आगे हैं जो भारत के लिए राहत की खबर है.

भूखों की लिस्ट जारी करने वाली संस्था इंटरनेशनल फ़ूड रिसर्च इंस्टिट्यूट (IFPRI) की रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत में भूख की वजह से कुपोषण बढ़ रहा है और इसकी दर इतनी गंभीर है कि सामाजिक क्षेत्र को इसपर ध्यान देना होगा.

आपको बता दें कि भूखे लोगों के 119 देशों में भारत का स्थान 100वां है, पाकिस्तान भारत से पीछे है. इस सूची में चीन 29वें, नेपाल 72वें, म्यांमार 77वें, श्रीलंका 84वें, बांग्लादेश 88वें, पाकिस्तान 106वें और अफ़ग़ानिस्तान 107वें स्थान पर हैं, भारत अपने पड़ोसी देशों में पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान को छोड़कर सबसे पीछे है.
रियल स्टेट को GST में लाकर सबसे बड़े भ्रष्टाचार पर MODI की नजर, कांग्रेस ने बताया 'डिजास्टर'

रियल स्टेट को GST में लाकर सबसे बड़े भ्रष्टाचार पर MODI की नजर, कांग्रेस ने बताया 'डिजास्टर'

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आज भारत का कोई भी आम घर खरीदने का सपना भी नहीं देख सकता क्योंकि किसी बड़े शहर में घर खरीदना उसके लिए असंभव है. साधारण सैलरी में कोई भी आदमी घर नहीं खरीद सकता, इसके लिए या तो भ्रष्टाचार करना पड़ेगा या घोटाले करने पड़ेंगे.

ऐसा क्यों है कि आम आदमी घर खरीदने का सपना भी नहीं देख पा रहा है जबकि बड़े आदमी कई घरों के मालिक बन जाते हैं. इसका कारण है रियल स्टेट सेक्टर में कालाबाजारी, कमीशनखोरी और दलाली.

जब कोई व्यक्ति घर खरीदता है तो घर बेचने वाले मालिक, प्रॉपर्टी डीलर, रियल स्टेट एजेंट से मिलकर सौदा फिक्स करते हैं, घर का मार्किट प्राइस 10 लाख होता है तो खरीदारों से 20-30 लाख माँगा जाता है. जब खरीदार राजी हो जाता है तो उससे 10 लाख का चेक मांगते हैं और बाकी के 10-20 लाख रूपया कैश में मांगते हैं. सरकार को सिर्फ 10 लाख दिखाया जाता है जबकि 20-30 लाख रुपये कालेधन की दुनिया में चले जाते हैं, इनपर ना तो सरकार को टैक्स दिया जाता है और ना ही इन रुपयों को अर्थतंत्र में गिना जाता है, अगर सबसे बड़ा कालाधन कहीं है तो रियल स्टेट में.

अब मोदी सरकार रियल स्टेट सेक्टर को भी GST के दायरे में लाना चाहती है ताकि यहाँ पर भी कमीशनखोरी, दलाली और कालाधन का बाजार ख़त्म हो जाए. अगर ऐसा हो गया तो सभी प्रॉपर्टी डीलरों, कमीशन एजेंटों को GST नंबर लेना पड़ेगा और हर लेन-देन सरकार को दिखाना पड़ेगा. अभी तक प्रॉपर्टी एजेंट पैसा कमाकर छिपा देते हैं, कई प्रॉपर्टी डीलर हर महीना करोड़ों रुपये कमाते हैं लेकिन सरकार को टैक्स नहीं देते, कालाधन कमाते हैं, कालेधन से घर खरीदते हैं और बड़ी बड़ी गाड़ियों में घुमते हैं. गलत तरीके से कमाया हुआ कालाधन तिजोरी में छिपा देते हैं जिसकी वजह से सरकार को बहुत नुकसान होता है लेकिन अब मोदी सरकार की नजर इनकी काली कमाई पर पड़ चुकी है. 

वास्तव में मोदी सरकार 2022 तक सभी गरीबों को आवास देता चाहती है लेकिन यह तब तक नहीं होता जब तक रियल स्टेट को GST में लाकर यहाँ पर भ्रष्टाचार ख़त्म नहीं किया जाएगा. रियल स्टेट में आने के बाद प्रॉपर्टी के दाम कम होने लगेंगे, आम आदमी को सस्ते घर मिलेंगे, कुछ अपने आप घर खरीद लेंगे और कुछ मोदी सरकार बनाकर देगी, इस तरह गरीबों का सपना पूरा हो जाएगा.

कांग्रेस ने बताया डिजास्टर

मोदी सरकार के इस फैसले को कांग्रेस पार्टी ने डिजास्टर बताया है. ANI से बात करते हुए कांग्रेस नेता राजू बाघमारे ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और अरुण जेटली ने देश को गड्ढे में ढकेलने का पूरा प्रबंध कर दिया है. रियल स्टेट सेक्टर में पहले से ही मंदी चल रही है, अगर उसे GST में लाया गया तो डिजास्टर होगा.

Oct 12, 2017

इस वकीलों ने साबित किया, CBI कोर्ट के फैसले पर आँख मूंदकर भरोसा ना करें, गलत भी हो सकता है

इस वकीलों ने साबित किया, CBI कोर्ट के फैसले पर आँख मूंदकर भरोसा ना करें, गलत भी हो सकता है

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भारत के लोग CBI पर भरोसा करते हैं क्योंकि यह देश की सबसे बड़ी केंद्रीय जांच एजेंसी है, CBI द्वारा जांच किये गए केस के फैसले CBI कोर्ट सुनाती है इसलिए उन पर लोग आँख मूँद कर विश्वास करते हैं लेकिन आज दो वकीलों ने साबित कर दिया है कि CBI जांच भी गलत हो सकती है और CBI कोर्ट के फैसले भी गलत हो सकते हैं. ये वकील हैं तनवीर अहमद मेरे और दिलीप.

कुछ लोग यह भी मानते हैं कि CBI कोर्ट द्वारा सुनाये गए फैसले फाइनल होते हैं और इन्हें हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने से कोई फायदा नहीं होता, आज यह भी पता चल गया है कि CBI कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज दिया जा सकता है और उसमें फायदा भी होता है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले महीनें CBI कोर्ट ने सिर्फ दो महिलाओं की चिट्ठियों के आधार पर गुरमीत राम रहीम को रेप के दोष में 20 साल की सजा सुना दी, ना कोई पक्का गवाह है, ना महिलायें सामने आ रही हैं, ना उनका मेडिकल हुआ है और ना ही कोई ठोस सबूत है. सिर्फ दो चिट्ठियां हैं.

देश के लोगों ने CBI कोर्ट के फैसले पर आँख मूंदकर भरोसा कर लिया, लेकिन आज यूपी में भी ऐसा मामला सामने आया है जिससे साबित हो गया है कि CBI जांच भी गलत हो सकती है और CBI कोर्ट के फैसले भी गलत हो सकते हैं और उसके फैसले को चुनौती दी जा सकती है.

आपको बता दें कि अरुषी-हेमराज मर्डर केस' में आज इलाहबाद हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अरुषी के पिता राजेश तलवार और माता नुपुर तलवार को दोहरे हत्याकांड के दोष में गाजियाबाद की CBI कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जांच भी CBI ने की थी और चार्जशीट भी CBI ने दायर की थी लेकिन आज इलाहबाद हाई कोर्ट ने CBI कोर्ट के फैसले को बदलकर राजेश तलवार और नुपुर तलवार को बरी कर दिया. तलवार के वकीलों तनवीर अहमद मेरे और दिलीप ने CBI कोर्ट के फैसले और CBI की दलीलों को गलत आबित कर दिया और दोनों को बाइज्जत बरी करा दिया.

अगर राम रहीम भी आरुषी-हेमराज मर्डर केस को आधार बनाकर हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर करें तो उन्हें भी सभी आरोपों से बरी किया जा सकता है क्योंकि उनके खिलाफ भी कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं, उन्हें सिर्फ दो महिलाओं की चिट्ठियों के आधार पर 20 साल की सजा सुनाई गयी है. आज भी दोनों महिलायें छुपी हुई हैं.

आरुषी-हेमराज का कब हुआ था मर्डर

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 16 मई 2008 को 14 वर्षीय आरुषी तलवार की उसके बेडरूम में हत्या कर दी गयी थी. उसका गला रेत दिया गया था और सर पर गहरे घाव के निशान थे, पुलिस ने पहले उसके दोस्त हेमराज पर शक जताया था लेकिन दूसरे ही दिन उसकी लाश भी छत से बरामद हुई थी. 

पुलिस पहले से ही यह मानकर चल रही थी कि अरुषी के माता पिता ने ही उसकी हत्या की होगी, उन्होंने अपनी जांच में यही लिखा, बाद यह सीबीआई को इस केस जांच करने का आदेश दिया, उन्होंने भी अपनी जांच रिपोर्ट में दोनों को दोषी माना जिसके बाद गाजियाबाद की CBI कोर्ट ने दोनों को आजीवन कारवार की सजा सुना दी, दोनों को डासना जेल भेज दिया गया.

जेल में रहते हुए उन्होंने फिर से हाई कोर्ट में याचिका डाली, आज इस पर सुनवाई करते हुए दोनों को इस केस से बरी कर दिया गया.
फेसबुक पर मोदी की ताकत ख़त्म करने के लिए हैक कर लिए गए BJP के 2 बड़े ग्रुप, चीनी हैकरों पर शक

फेसबुक पर मोदी की ताकत ख़त्म करने के लिए हैक कर लिए गए BJP के 2 बड़े ग्रुप, चीनी हैकरों पर शक

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सोशल मीडिया (फेसबुक और ट्विटर) 2014 चुनावों में मोदी और बीजेपी की सबसे बड़ी ताकत थी. सोशल मीडिया पर मोदी के नाम का डंका बजता था लेकिन 2019 चुनाव से पहले मोदी की ताकत को ख़त्म करने का प्रयास किया जा था है. यह काम शुरू भी हो गया है.

फेसबुक पर बीजेपी समर्थकों के हजारों ग्रुप हैं, कई ग्रुपों में लाखों मेंबर हैं जो बीजेपी की लहर बनाए रखते हैं लेकिन अब इन ग्रुपों को एजेंडे के तहत या तो रिपोर्ट करके बैन कराया जा रहा है या इन्हें हैक करके इन्हें बंद कर दिया जा रहा है.

पिछले एक महीनें में बीजेपी के कई ग्रुप बंद हो चुके हैं और कई हैक हो चुके हैं. Vote 4 BJP और I HATE AAP PARTY बीजेपी समर्थकों के बड़े ग्रुप थे लेकिन दोनों ग्रुप को हैक करके एडमिन को हटा दिया गया. अब दोनों ग्रुप की सेटिंग बदलकर हैकर्स फरार हो गए हैं, अब ये ग्रुप किसी काम के नहीं रहे.

बीजेपी ग्रुपों को हैक करने का शक चीनी हैकरों पर जताया जा रहा है क्योंकि इनमें ऐसे लोगों को मॉडरेटर बनाया गया है जिनके नाम चीनी भाषा में हैं. आप खुद देखिये - 

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इसी तरह I HATE AAP PARTY को हैक कर लिया गया और ग्रुप के सभी एडमिन को निकालकर सेटिंग में चेंज कर दिया गया. अब दोनों ग्रुपों पर ना पोस्ट हो रही है और ना ही मेंबर जोड़े जा सकते हैं. जिस व्यक्ति ने ग्रुप को बनाया था उसे भी हटाकर उसकी कई वर्षों की मेहनत पर पानी फेर दिया गया.

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ग्रुप एडमिन ध्यान रखें ये बातें

जब ग्रुप बड़े हो जाते हैं तो उन्हें मैनेज करने के लिए कई लोगों को एडमिन बना दिया जाता है, इनमें हैकर भी घुस जाते हैं और एडमिन बनाने की मांग करते हैं, एडमिन बनाए जाने के बाद ये सबको हटाकर खुद एडमिन बन जाते हैं. एडमिन बनाने से पहले उनका बायोडाटा जरूर देखना चाहिए.

Oct 11, 2017

सावधान, 18 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं के साथ SEX पर लगा बैन, लगेगी धारा 376, होगी सीधा जेल

सावधान, 18 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं के साथ SEX पर लगा बैन, लगेगी धारा 376, होगी सीधा जेल

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सेक्स रिलेशन पर आज सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा फैसला सुनाया है, अब से अगर किसी भी व्यक्ति ने 18 वर्ष से कम उम्र की किसी भी युवती के साथ सेक्स किया तो उसे रेप माना जाएगा और धारा 376 IPC के तहत जेल भेज दिया जाएगा. यह फैसला उन लोगों पर भी लागू होगा होगा जो 18 वर्ष से कम उम्र की पत्नी के साथ रिलेशन बनायेंगे. मतलब सुप्रीम कोर्ट ने 18 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं के साथ SEX को बैन कर दिया है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में बाल विवाह पर बैन है, बैन के मुताबिक़ 18 वर्ष से पहले ना तो शादी हो सकती है और ना ही SEX लेकिन कुछ धर्मों में अभी भी बाल विवाह की प्रथा चल रही है जिसे लेकर सुप्रीम कोर्ट गंभीर है, अब किसी भी धर्म के लोग हों, अगर 18 वर्ष से कम उम्र की महिला के साथ मर्जी से या जबरजस्ती SEX किया तो उसे रेप ही माना जाएगा.

आज सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में सुनवाई के बाद स्पष्ट निर्देश दिए कि 18 वर्ष से पहले किसी भी महिला के साथ शादी होती है तो उसे अवैध माना जाएगा और अगर शादी करके उसके साथ SEX किया गया तो उसे रेप माना जाएगा.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अब तक भारत में बाल विवाह पर तो बैन था लेकिन 18 वर्ष से पहले सेक्स पर बैन नहीं था लेकिन अब सेक्स पर भी बैन लगा दिया गया है. अब 18 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं को नाबालिक माना जाएगा और उनके साथ अगर किसी ने भी कुछ किया तो उसे रेप माना जाएगा.
आरएसएस के बारे में अज्ञान हैं राहुल गाँधी, बिना जानकारी के कुछ भी बोल देते हैं, पढ़ें सच

आरएसएस के बारे में अज्ञान हैं राहुल गाँधी, बिना जानकारी के कुछ भी बोल देते हैं, पढ़ें सच

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राहुल गाँधी भले ही भारत में रहते हैं और खुद को भारतीय बताते हैं लेकिन उन्हें भारत के बारे में बहुत कम ज्ञान है, जिसको कम ज्ञान होता है वह आजकल यूट्यूब पर वीडियो देखकर अपना ज्ञान बढ़ाता है लेकिन राहुल गाँधी शायद यूट्यूब पर वीडियो भी नहीं देखते. कल अगर वे यूट्यूब पर आरएसएस के बारे में वीडियो देख लेते तो शायद उनकी आज इतनी फजीहत ना होती.

कल राहुल गाँधी ने अपनी अज्ञानता का परिचय देते हुए कहा कि आरएसएस की शाखाओं में महिलाऐं नहीं जातीं, मैंने किसी भी महिला को शॉर्ट्स यानी छोटे कपड़े में संघ की शाखाओं में नहीं देखा है. उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों से पूछा - मैंने तो नहीं देखा लेकिन क्या आपने देखा है.

राहुल गाँधी ने आगे कहा कि महिलाओं ने पता नहीं क्या अपराध किया है जिसकी वजह से आरएसएस वाले उन्हें अपनी शाखाओं में नहीं आने देते. कल राहुल गाँधी ने अज्ञानता की वजह से विल्कुल झूठ बोला इसलिए हमें सोचा कि उन्हें, उनके कांग्रेसी कार्यकर्ताओं और पूरे देशवासियों को बता दें कि महिलायें आरएसएस की शाखाओं में जाती हैं और पुरुषों के साथ युद्ध कला भी सीखती हैं, यही नहीं इन्हें इतना ट्रेंड कर दिया जाता है कि ये किसी भी बदमाश को ढेर कर सकती हैं.

राहुल गाँधी और समस्त कांग्रेसी ये दोनों वीडियो जरूर देखें और अपनी जानकारी बढाएं.


अगर पटाखों, रंगों पर बैन हो जाएगा तो त्योहारों को लेकर बच्चों का क्रेज ख़त्म हो जाएगा: चेतन भगत

अगर पटाखों, रंगों पर बैन हो जाएगा तो त्योहारों को लेकर बच्चों का क्रेज ख़त्म हो जाएगा: चेतन भगत

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चेतन भगत ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पटाखों के बैन को पूरी तरह से गलत बताया है और अपनी बात को साबित करने का प्रयास भी किया है. कल से ही उनके बयान पर बवाल मचा हुआ है, उन्होंने कल कहा था कि पटाखों पर बैन ठीक वैसा ही है जैसा बकरा-ईद पर बकरा काटने और क्रिसमस ट्री पर बैन लगाना. सुप्रीम कोर्ट को किसी भी त्यौहार पर बैन नहीं लगाना चाहिए क्योंकि बैन की प्रथा बहुत बुरी होती है. एक बार बैन लगना शुरू हो गया तो धीरे धीरे सभी चीजों पर बैन लगा दिया जाएगा और हमारे बच्चों का त्योहारों को लेकर क्रेज ख़त्म हो जाएगा.

चेतन भगत ने आज अपने बयान पर कायम रहते हुए बताया कि उनकी बात क्यों सही है, उन्होंने कहा कि मैं ना तो पटाखा उद्योग से हूँ और ना ही मुझे पटाखों को प्रमोट करने पर कोई पैसा मिल रहा है. मैंने सिर्फ अपना पक्ष रखा है, मैंने अपने विचार रखे हैं.

चेतन भगत ने कहा कि अगर कोई पटाखा मुक्त दीवाली मनाना चाहता है तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है उल्टा मैं उसका भी समर्थन करता हूँ और मैंने इसके लिए कैम्पेन भी किया है. 

चेतन भगत ने कहा कि यहाँ पर सिर्फ पटाखों का मुद्दा नहीं है, यहाँ पर मुदद है कि हम कई मुद्दों को कैसे डील करते हैं. 

पहली बात तो यह कि अगर हमें या आपको कुछ पसंद नहीं है तो उसे न्यायिक सिस्टम द्वारा बैन नहीं करना चाहिए. मेरे ख्याल से यह बहुत खतरनाक ट्रेंड होगा क्योंकि हो सकता है आज का बैन आपके फेवर में हो इसलिए आप बैन को सपोर्ट कर रहे होगे लेकिन अगर आप हमारी परम्पराओं, संस्कृति को बैन करने की प्रथा का समर्थन करोगे तो यह बहुत खतरनाक होगा, खासकर भारत के लिए. इसलिए मेरा मानना है कि किसी भी चीज पर बैन नहीं लगना चाहिए.

मुझे कोई आपत्ति नहीं है कि आप अपने पड़ोस की दीवारों पर पटाखा ना जलाने का पोस्टर लगा दो. लेकिन अगर पटाखों पर बैन लगता है तो इस पर डिबेट होना चाहिए. हमारी आपकी पसंद के आधार पर बैन नहीं लगना चाहिए. 

चेतन भगत ने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि पटाखों से प्रदुषण होता है, दिल्ली इसलिए प्रदूषित है, मेरा कहना है कि दिल्ली पटाखों की वजह से प्रदूषित नहीं है, दिल्ली बुरी नीतियों, बुरे प्रशासन, अन-चेक ग्रोथ, फक्ट्रियों के लाइसेंस के चेक ना होने, प्रदूषण को मॉनिटर ना करने और अन्य चीजों से है. दिल्ली इन सब वजहों से प्रदूषित है. इसके लिए दीवाली पर दोष देने के बजाय सरकारों को दोष क्यों नहीं दिया जाता है.

हम यह क्यों नहीं कहते कि हमने दिल्ली को ऐसा क्यों बनाया कि हमारे बच्चे सिर्फ दो घंटे पटाखे नहीं फोड़ सकते. दीवाली पर पटाखे फोड़ने से सिर्फ 0.2 परसेंट प्रदूषण बढ़ता है लेकिन साल भर 99.7 परसेंट प्रदूषण फैलाने वालों से क्यों सवाल नहीं पूछ जाता. पहले 99.7 प्रदूषण को रोकने का काम करो, पहले उस समस्या को रोको, पहले उन लोगों से सवाल पूछो. उनकी वजह से समस्या हो रही है. पटाखों की वजह से कोई समस्या नहीं होती क्योंकि उससे सिर्फ .2 फ़ीसदी प्रदूषण बढ़ता है, पटाखे जलाने वालों को हम गिल्टी क्यों फील कराते हैं.

उन्होने कहा कि कुछ लोग मुझे साम्प्रदाईक बता रहे हैं लेकिन अगर वे मेरी पुस्तकों को पढेंगे तो उनकी ग़लतफ़हमी दूर हो जाएगी, लेकिन मुझे लगता है कि इस तरह का बैन सिर्फ हिन्दू धर्म पर लग रहा है, जब दिवाली आती है तो पानी-रहित होली का कैम्पेन शुरू हो जाता है, जब जन्माष्टमी आती है तो गोविंदा पर बैन लगा दिया जाता है. कुछ लोग करवा चौथ पर भी बैन की मांग कर रहे हैं. मतलब सब कुछ हिन्दू त्योहारों पर ही बैन की बात हो रही है.

चेतन भगत ने कहा कि दिवाली भारतीय त्यौहार है, हिन्दुओं का सबसे बड़ा त्यौहार है. अगर भारत के लोग दीवाली नहीं मनाएंगे, त्यौहार को कौन सहेजेगा. आप खुद सोचिये जब बच्चों को दिवाली पर पटाखे नहीं मिलेंगे तो वे बोर हो जाएंगे, बच्चे आजकल वैसे भी फोन, एप, ऑनलाइन गेम्स में बिजी रहते हैं, वे साल भर पटाखे जलाने के लिए इन्तजार करते रहते हैं लेकिन जब उन्हें पटाखे नहीं मिलेंगे तो त्योहारों को लेकर उनका क्रेज ख़त्म हो जाएगा. 

बच्चों को होली पर रंगों से प्रेम होता है, पिचकारी से होली खेलते हैं, अगर होली पर रंगों पर बैन लग जाएगा और दिवाली पर पटाखों पर बैन लग जाएगा तो उनका क्रेज ख़त्म हो जाएगा, क्या आप अपने बच्चों की खुशियाँ छीनना चाहते हैं, त्योहारों को लेकर उनका उत्साह ख़त्म करना चाहते हैं, अगर वे यह सब नहीं करेंगे तो दिवाली से कैसे जुड़ेंगे. अगर हमारी यह पीढ़ी बड़ी होगी तो दिवाली से जुड़ नहीं पाएगी. क्या आप ऐसा चाहते हो. 99.7 परसेंट प्रदूषण सरकार की बुरी नीतियों की वजह से बढ़ रहा है लेकिन हम उन्हें दोष देने की हिम्मत नहीं जुटा पाते लेकिन सिर्फ 0.2 फ़ीसदी प्रदूषण के लिए हम अपने बच्चों की खुशियाँ छीनने के लिए तैयार हैं.

चेतन भगत ने कहा कि हमें हमारी संकृति और विरासत को सहेजे रखना है, कुछ लोग बहुत सिंपल दिखना चाहते हैं, बहुत कूल रहते हैं, पश्चिमी संस्कृति को फॉलो करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम उनकी बात मानने के लिए अपनी विरासत को ख़त्म कर दें. अगर हम अपने कल्चर को खो लेंगे तो पैसे बचाकर क्या करेंगे, जब खुशियाँ ही नहीं रहेंगी तो पैसे किस काम आएँगे. 

अगर मैं आपको कहूँ कि आप बहुत अमीर बन सकते हो लेकिन माँ से दूर होना पड़ेगा तो आप मेरी बात नहीं मानोगे. 

दोस्तों दिवाली मेरा सबसे पसंदीदा त्यौहार है और मुझे लगता है कि आपका भी होगा. प्रदूषण बड़ी समस्या है अगर आप पटाखे नहीं जलाना चाहते तो मत जलाइये, अगर आप प्रदूषण ख़त्म ही करना चाहते हो तो AC का इस्तेमाल बंद करो, कार का इस्तेमाल छोड़ दो इससे आप प्रदूषण कम करने में अधिक योगदान दे सकते हैं क्योंकि इन्हें आप साल भर इस्तेमाल करते हैं. 

मुझे लगता है कि दिवाली पर पटाखों पर बैन लगाकर सुप्रीम कोर्ट ने हद पार की है, ऐसा नहीं होना चाहिए था, सरकार अन्य उपाय कर सकती थी, सरकार अगर चाहती तो पांच जगह आतिशबाजी कार्यक्रम करती और लाखों लोग पटाखे जलाना छोड़कर उसे देखने जाते. लोगों को पटाखे देखने को भी मिल जाता और प्रदूषण भी कम फैलता. हम ऐसा क्यों नहीं करते, हम किसी को त्यौहार मनाने का दोष क्यों देते हैं. बैन लगाना गलत है, यह मेरा त्यौहार है, इसे मैं अपने ढंग से माना चाहता हूँ. किसी को दखल देने का कोई हक नहीं है.