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07 April, 2017

गलत खान-पान और अंधाधुंध दवाइयाँ खाने से आम हो गयी किडनी फेल की बीमारी, बचना है तो पढ़ें

गलत खान-पान और अंधाधुंध दवाइयाँ खाने से आम हो गयी किडनी फेल की बीमारी, बचना है तो पढ़ें

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नई दिल्ली, 7 अप्रैल: हमारे देश में गुर्दे फेल होने की बीमारी आम हो गयी है, हर अस्पताल में गुर्दे के मरीजों की भीड़ लग रही है, देखते ही देखते गुर्दे फ़ैल हो रहे हैं, एक बार गुर्दे फेल होने के बाद उनके इलाज में घर तक बेचना पड़ता है क्योंकि गुर्दे का इलाज बहुत मंहगा है, गुर्दे फेल होने के बाद मंहगी महंगी दवाइयों और इंजेक्शन के अलावा हप्ते में दो या तीन बार डायलिसिस करानी पड़ती है और देखते ही देखते आदमी कंगाल हो जाता है.

हमारे शरीर में दो गुर्दे होते हैं। गुर्दो में खराबी किसी भी उम्र हो सकती है। इसके दो प्रमुख कारण- डायबिटीज और हाईब्लड प्रेशर हैं। इसके अलावा दिल का रोग भी एक कारण होता है। ये सभी बीमारियाँ गलत खानपान की वजह से होती है, फ़ास्ट फ़ूड का चलन बढ़ रहा है, लोग खा खा कर मोटे हो रहे हैं जिसकी वजह से हाई ब्लड प्रेशर, लाइव, गैस की समस्या होती है, लोग अंधाधुंध दवाइयाँ खाने लगते हैं और ये दवाइयाँ गुर्दे को फेल कर देगी हैं.

गुर्दे को फेल होने से बचाने के लिए 9 ऐसे नियम हैं, जिन्हें अपनाकर गुर्दे की बीमारी से बचा जा सकता है। एक ताजा अनुमान है कि 17 प्रतिशत शहरी भारतीय गुर्दो के रोग से पीड़ित हैं। 

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा कि गुर्दो के क्षतिग्रस्त होने का पता लगाने के लिए पेशाब की जांच और गुर्दे कैसे काम कर रहे हैं, इसके लिए रक्त की जांच की जाती है। पेशाब की जांच से एल्बुमिन (Albumin) नामक प्रोटीन का पता चलता है, जो सेहतमंद गुर्दो में मौजूद नहीं होता।

उन्होंने बताया कि रक्त जांच ग्लूमेरुलर फिल्ट्रशन रेट (Glomerular Filtration Rate) की जांच करता है। यह गुर्दो की फिल्टर करने की क्षमता होती है। 60 से कम GFR गुर्दो के गंभीर रोग का संकेत होता है। 15 से कम GFR गुर्दो के फेल होने का प्रमाण होता है।

डॉ. अग्रवाल बताते हैं कि गुर्दे की सेहत अच्छी बनाए रखने के लिए शरीर में पानी की उचित मात्रा रखनी होती है। इससे गुर्दो की लंबी बीमारी का खतरा बेहद कम हो जाता है। गुर्दो के रोग पाचनतंत्र के विकार और हड्डियों के रोग से जुड़े होते हैं और यह पेरिफेरल वस्कुलर रोगों, दिल के रोगों और स्ट्रोक जैसी बीमारियों के लिए बड़े खतरे का कारण होते हैं।

गुर्दे को फेल होने से बचाने के 9 नियम :
  • तंदुरुस्त और सक्रिय रहें। इससे आपका रक्तचाप कम रहता है, जो गुर्दो की सेहत बनाए रखता है।
  • फ़ास्ट फ़ूड खाने से बचें, जीभ को कंट्रोल में रखें
  • ब्लड शूगर को नियमित रूप से नियंत्रित रखें, क्योंकि डायबिटीज वाले लोगों के गुर्दे क्षतिग्रस्त होने का खतरा रहता है। 
  • ब्लड प्रेशर की निगरानी रखें। यह गुर्दो की क्षति का आम कारण होते हैं। सामान्य ब्लड प्रेशर 120/80 होता है। 128 से 89 को प्रि-हाईपरटेंशन माना जाता है और इसमें जीवनशैली और खानपान में बदलाव करना होता है। 140/90 से अधिक होने पर अपने डॉक्टर से खतरों के बारे में बात करें। 
  • सेहतमंद खाएं और वजन नियंत्रित रखें। नमक का सेवन घटाएं, प्रतिदिन केवल 5 से 6 ग्राम नमक ही लेना चाहिए। इसके लिए प्रोसेस्ड और रेस्तरां से खाना कम से कम खाएं और खाने में ऊपर से नमक न डालें। अगर आप ताजा चीजों के साथ खुद खाना बनाएं, तो इससे बचा जा सकता है।
  • उचित तरल आहार लें : पारंपरिक ज्ञान प्रतिदिन डेढ़ से दो लीटर यानी तीन से चार बड़े गिलास पानी पीने की सलाह देता है। काफी मात्रा में तरल लेने से गुर्दो से सोडियम, यूरिया और जहरीले तत्व साफ हो जाते हैं, जिससे गुर्दो के लंबे रोग पैदा होने का खतरा काफी कम हो जाता है। लेकिन जरूरत से ज्यादा तरल भी न लें, क्योंकि इसके प्रतिकूल प्रभाव हो सकते हैं।
  • धूम्रपान न करें, इससे रक्त का बहाव कम होता है और इससे गुर्दो के कैंसर का खतरा भी 50 प्रतिशत बढ़ जाता है।
  • अपनी मर्जी से दवाएं न खाएं। आईब्रूफेन जैसी दवाएं अगर नियमित तौर पर ली जाएं तो यह गुर्दो को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
  • अगर आपको एक या ज्यादा हाई रिस्क फैक्टर हैं, तो गुर्दो की कार्यप्रणाली की जांच जरूर करवाएं।

03 April, 2017

दाग हटाने और शरीर को गोरा बनाने के देशी नुख्शे

दाग हटाने और शरीर को गोरा बनाने के देशी नुख्शे

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Health Desk: गोरी त्वचा सभी को पसंद आती है चाहे वो मर्द हो या स्त्री। अपनी त्वचा को गोरा दिखने के लिए लोग क्या क्या नहीं करते, हर तरीक अपनाते हैं। आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स बता रहे हैं जो आपके शरीर के काले पड़ चुके हिस्से की रंगत में सुधार ला सकते है। 
  • बेसन में हल्दी मिलाकर घुटनो पर लगाना चाहिए।  बेसन से त्वचा मुलायम और हल्दी से निखार आता है। 
  • दही में सिरका मिलाकर अंडरआर्म्स या काँखों पर लगाना चाहिए इससे  स्किन काफी गोरी हो जाती है।
  • हाथो की सुंदरता बढ़ाने के लिए आलू के पेस्ट में शहद और कच्चा दूध मिलाकर लगाना चाहिए। इससे हाथो के रंग में निखार आता है। 
  • गर्दन का कालापन दूर करने के लिए आटे के चोकर में दही और नीबू का रस मिलाकर गर्दन पर लगाएं।
  • आलू का पेस्ट और गुलाबजल मिलाकर पीठ पर लगाना चाहिए इससे पीठ का कालापन दूर हो जाता है  

29 March, 2017

महालूट का पर्दाफाश, मेडिकल स्टोर पर अगर आप पक्का बिल नहीं मांगते तो समझ लो खुद को लुटवा रहे हैं

महालूट का पर्दाफाश, मेडिकल स्टोर पर अगर आप पक्का बिल नहीं मांगते तो समझ लो खुद को लुटवा रहे हैं

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New Delhi, 29 March: अगर आप Medical Store या Chemist Shop पर दवा खरीदने के बाद पक्का बिल नहीं मांगते तो समझ लो मेडिकल स्टोर वाला आपको लूट रहा है और आप खुद को लुटवा रहे हैं, अक्सर देखने में आता है कि ज्यादातर लोग मेडिकल स्टोर पर दवा खरीदने के बाद जब दवा के पैसे पूछते हैं तो मेडिकल स्टोर वाला दवा के पीछे जितना लिखा होता है उतने ही पैसे मांगता है, मान लोग दवा के पीछे 100 रुपये लिखे हैं तो मेडिकल स्टोर वाला 100 रुपये बता देता है और लोग जेब से 100 रुपये का नोट निकालकर दे देते हैं और घर चले जाते हैं। 

लेकिन कभी आप पहले दवा के पैसे पूछें और बाद में पक्का बिल मांगें तो मेडिकल स्टोर वाला अपने आप बिल में दवा का रेट कम कर देता है, अगर आप कैशलेस पेमेंट करें और पक्का बिल मांगें तो मेडिकल स्टोर वाला पहले आपने 100 रुपये मांग रहा होगा तो बिल मांगने पर 75 रूपए ही मांगेगा, और आपने 25 रुपये लुटने से बच जाते हैं, अब 25 रुपये गरीबों के लिए बड़ी बात होती है, एक टाइम की सब्जी खरीद सकते हैं, अमीर लोगों को लूटा जाए तो चल जाता है, बईमानी से पैसे कमाने वालों को भी लूटा जाए तो चल जाता है लेकिन मेडिकल स्टोर वाले ज्यादातर गरीबों को लूटते हैं जो कि बहुत गलत बात है। 

हम आज की बात बता रहे हैं, हमने मेडिकल स्टोर पर दवा खरीदी, हमें तो पता है कि मेडिकल स्टोर वाले लूटते हैं इसीलिए हम उनकी पोल खोलने के लिए अपनी पहचान छुपाकर दवा खरीदते हैं। हमने मेडिकल स्टोर पर दवा खरीदने के बाद दाम पूछा, हमने दो तरह की दवा खरीदी - पहले 1 पत्ता Atten 25 जिसके पत्ते पर 30 रूपया लिखा था और दूसरी Amlopin 5 की 30 गोलियां माँगी, जिसके पत्ते पर 24 रुपये लिखा था, 3 पत्ता खरीदने पर उसका दाम हुआ 72 रुपये, दोनों का दाम जोड़कर हुआ 102 रुपये। 

जब हमने मेडिकल स्टोर वाले से दोनों दवाओं का दाम पूछा तो उसने बताये 102 रुपये, उसके बाद हमने उसे कहा कि इसका पक्का बिल बना दो मुझे कहीं पर जमा करना है, उसके बाद उसनें दवा का दाम अपने आप कम कर दिया, पहले 102 रूपया मांग रहा था लेकिन उसके बाद 79 रुपये बताया। 

उसके बाद मैंने Dabit Card/ ATM कार्ड से पेमेंट किया तो दवा के दाम में 7 रुपये और कम हो गए, शायद मोदी सरकार डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए दवा के दाम में कुछ छूट दे रही है। 

अब आप खुद सोचिये, अगर मैं मेडिकल स्टोर वाले को 102 रुपये देकर घर चला आता और पक्का बिल ना मांगता तो मेरे 30 रुपये लुट जाते, अगर मैं कैश पेमेंट करता तो मुझे 79 रुपये देने पड़ते लेकिन मैंने कैशलेस पेमेंट किया और पक्का बिल माँगा तो मुझे 102 की जगह केवल 72 रुपये देने पड़े। ऊपर फोटो में साफ़ साफ़ देखा जा सकता है। 

इससे कुछ दिन पहले हमने Ketosteril Tablet का एक पत्ता खरीदा था और पक्का बिल माँगा था, पत्ते पर दवा का दाम 698 रुपये लिखा था लेकिन बिल मांगने के बाद यही दावा केवल 550 रूपए में मिली, मतलब दवा के दाम में 148 रुपये बच गए। देखिये फोटो। 
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अभी भी 80 फ़ीसदी लोग मेडिकल स्टोर पर दवा का बिल नहीं मांगते, कई लोग पक्का बिल मांगने में शर्माते हैं और मेडिकल स्टोर वाला पत्ते पर जितना लिखा होता है उतना मांग लेता है, लोग पूरा पैसा देकर चले आते हैं लेकिन आप सोचिये, अगर Ketosteril खरीदने के बाद उसका पक्का बिल माँगा जाए तो 148 रुपये बच जाते हैं, गरीबों के लिए 148 रुपये बहुत बड़ी रकम होती है, अमीर और बेईमान अगर लुटते हैं तो उनको टेंशन नहीं होती है क्योंकि वे बेईमानी करके फिर से पैसा कमा लेते हैं लेकिन मेडिकल स्टोर वाले ज्यादातर गरीबों को ही लूटते हैं क्योंकि गरीब लोग ही पक्का बिल मांगने में शर्म करते हैं और कैशलेस पेमेंट का मजाक उड़ाते हैं। 

दवाओं पर MRP अधिक क्यों लिखा होता है

बहुत कम लोगों को जानकारी होगी कि 80 फ़ीसदी दवाओं के पत्ते पर MRP कई गुना अधिक लिखा होता है, मतलब अगर दवा के पत्ते पर 100 रुपये लिखा होता है तो मेडिकल स्टोर वालों को वही दवा 10, 20 या 50 रुपये में मिलती है, मेडिकल स्टोर वालों को दवा के दाम में केवल 10% कमाने का अधिकार है, मतलब अगर वे दवा 10 रुपये में खरीदते हैं और पत्ते पर 100 रुपये लिखा है तो मेडिकल स्टोर वालों को 10 रुपये वाली दवा केवल 11 रुपये में बेचने का अधिकार है, अगर वे 80 रुपये का पत्ता खरीद रहे हैं तो उन्हें केवल 88 रुपये में बेचकर 8 रुपये कमाने का अधिकार है लेकिन अगर आप मेडिकल स्टोर वालों से बिल नहीं मांगोगे तो 10 रुपये की दवा के 100 रुपये ले लेंगे, जितना लिखा है उतना लेंगे और आप लुट जाओगे। 

10, 20 या 30 रुपये की दवा में अगर मेडिकल स्टोर वाले दो चार रुपये लूट लेते हैं तो कोई फर्क नहीं पड़ता और लोग इतना ध्यान भी नहीं देते, दिक्कत तो तब आती है जब हजारों रुपये की दवा खरीदनी पड़ती है, ऐसे में अगर 1000 की दवा 5000 हजार में बेचकर आपसे मेडिकल स्टोर वाले 4000 रुपये लूट लेते हैं तो बहुत पीड़ा होती है। इसलिए हमारी बात मानकर आप आज से ही मेडिकल स्टोर वालों से पक्का बिल माँगना शुरू कर दीजिये, इसके अलावा आप हमेशा कैशलेस पेमेंट कीजिये और लुटने से खुद को बचाइये क्योंकि ये रुपये बहुत मेहनत से कमाए जाते हैं. अगर आप इमानदार हैं तो जरूर हमारी बात मानिए। 

80 फ़ीसदी डॉक्टर भी लूट में शामिल 

भारत के 80 फ़ीसदी डॉक्टर भी इस बेईमानी और लूट के खेल में शामिल हैं क्योंकि प्राइवेट डॉक्टर अपने मरीजों को ज्यादातर वही दवाएं लिखते हैं जिसपर MRP अधिक लिखा होता है, मतलब 10 वाली दवा के पत्ते पर 100 रुपये लिखे होते हैं, मेडिकल स्टोर वाला मरीज से 100 रुपये मांगता है और मेडिकल स्टोर वाला डॉक्टर को 70-80 रुपये कमीशन देता है, इसी तरफ से हर डॉक्टर की रोजाना हजारों रुपये की कमाई होती है और यह कालेधन के खाते में जाता है क्योंकि डॉक्टर इस कमाई पर टैक्स नहीं देते और ना ही सरकार को यह कमाई दिखाते हैं लेकिन अगर आप मेडिकल स्टोर वालों से पक्का बिल माँगना शुरू कर दोगे तो डॉक्टरों का यह खेल भी बंद हो जाएगा। 

17 January, 2017

Soaked Badam Health Benefits, भीगे बादाम खाने से एक नहीं कई फायदे: पढ़ें

Soaked Badam Health Benefits, भीगे बादाम खाने से एक नहीं कई फायदे: पढ़ें

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बदाम के बारे में सभी लोगों ने सुन रखा होगा लेकिन हम जब तक इसके फायदे के बारे में कहीं पर पढ़ते नहीं हम बादाम खाने की सुध ही नहीं होती और हम इसके फायदे उठाने से भी चूक जाते हैं। याद रखिये हमारे शरीर को नियमित अंतरात पर पोषक तत्वों की जरूरत होती है, साधारण खाने से हमारे शरीर की सभी जरूरतें पूरी नहीं हो सकती इसलिए हमें अपने भोजन में ऐसी चीजों को शामिल करना चाहिए जिसे खाने से एक नहीं बल्कि कई फायदे हों। 

याद रखिये बादाम खाने से वैसे तो कई फायदे होते हैं लेकिन जब हम इसे भिगोकर खाते हैं तो इसके फायदे बढ़ जाते हैं। इसलिए आज से ही रात को सोते समय पांच-दस बादाम भिगोकर रख दीजिये और सुबह इसे खाली पेट या दूध के साथ खा लीजिये। 

स्वास्थय लाभ: अगर बादाम के लुक पर ध्यान दें तो यह दिमाग के आकार का होता है, यह दिमाग के आकर का इसलिए होता है क्योंकि गुदरत ने इसे दिमागी स्वास्थय के लिए बनाया है, बदाल हमारी याद्दास्त बढाने के लिए जाना जाता है। 

बादाम कई विटामिन्स और मिनरल्स जैसे विटामिन ई, जिंक, कैल्शियम, मैग्नीशियम और ओमेगा - 3 फैटी एसिड से भरपूर होता है। 

बादाम के भूरे रंग के छिलके में टनीन होता है जो पोषक तत्वों को अवशोषित करने से रोकता है, जब हम बादाम को भिगोते हैं तो छिलका नरम हो जाता है और नट्स के अन्दर मौजूद विटामिन्स और मिनरल्स को अवशोषित कर लेता है। 

साधारण भाषण में ऐसे भी समझ सकते हैं, सूखे बादाम में पोषक तत्त्व तो होते हैं लेकिन ये छुपे रहते हैं, सख्त छिलके की वजह से इनका अवशोषण नहीं हो पाता, ये पोशक तत्त्व बाहर तभी आते हैं जब हम बदाल को पानी में भिगो देते हैं। भिगोने के बाद छिलका नरम हो जाता है और बादाम के अन्दर के पोषक तत्वों को अवशोषित कर लेता है। 

याद रखिये, भिगोने के बाद छिलका ना उतारें, छिलका सहित खाने से ही पूरा लाभ मिलता है। अगर छिलका उतार दिए तो समझ लीजिये भिगोने का कोई फायदा नहीं होगा। 

ध्यान दीजिये, ऐसा नहीं है कि सूखे बादाम खाने से आपको कोई लाभ नहीं होगा, लाभ होगा लेकिन इसके अन्दर के सभी पोषक तत्त्व आपको तभी मिल पायेंगे जब आप बादाम को भिगोकर छिलका सहित खाएंगे।

वजन भी घटाने में मदद करते हैं बादाम

बादाम के अन्दर मोनोअनसेचुरेटेड फैट्स होते हैं जो शरीर में पोषक तत्वों की कमी दूर करके भूख को रोकने में भी मदद करते हैं, भूख रोकने की वजह से हमें अधिक खाने की जरूरत नहीं पड़ती जिसकी वजह से शरीर की चरबी घट जाती है।

रुकता है बुढापा

हमारा शरीर रोजाना बुढापे की तरफ बढ़ता है लेकिन बादाम खाने से बुढापे की तरफ बढ़ने की स्पीड कम हो जाती है, एक तरह से उम्र बढ़ जाती है। बादाम में एंटी-ओक्सिडेंट होता है लेकिन भिगोने के बाद एंटी-ओक्सिडेंट की मात्रा काफी बढ़ जाती है जिसे लगातार खाने से उम्र बढ़ जाती है। इसके अन्दर मौजूद विटामिन B17 और फोलिक एसिड कैंसर से भी लड़ने में मदद करते हैं।

और भी हैं फायदे

इन सब के अलावा कोलेस्ट्रोल की मात्रा को नियंत्रित करके बादाम दिल की बीमारियों को दूर भगाता है और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता है। एक तरह से ये भी कह सकते हैं कि बादाम दिन और दिमाग दोनों के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

29 October, 2016

गर्भधारण रोकने का इंजेक्शन तैयार, एक लगाते ही एक साल के लिए बाँझ बन जाएंगे पुरुष, फिर नॉन स्टॉप

गर्भधारण रोकने का इंजेक्शन तैयार, एक लगाते ही एक साल के लिए बाँझ बन जाएंगे पुरुष, फिर नॉन स्टॉप

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लंदन, 29 अक्टूबर: गर्भनिरोधन गोलियां और कंडोम का इस्तेमाल करने वालों के लिए अच्छी खबर है, वैज्ञानिकों ने पुरुषों के लिए एक ऐसा इंजेक्शन तैयार किया है जिसे लगाते ही पुरुष एक साल के लिए बाँझ बन जाएंगे और उस दौरान महिला साथी के साथ 'काम' करने पर महिलाओं का गर्भधारण का झंझट ख़त्म हो जाएगा। 

शोधकर्ताओं ने एक हार्मोन आधारित इंजेक्शन तैयार किया है, जिसका इस्तेमाल कर पुरुष अपनी महिला साथी का गर्भधारण रोक सकेंगे। महिलाएं गर्भधारण रोकने के कई उपाय चुन सकती हैं, जबकि पुरुषों के पास प्रजनन क्षमता नियंत्रण के कुछ ही विकल्प हैं। पुरुषों के लिए उपलब्ध तरीकों में कंडोम और दूसरे तरीके हैं जो हार्मोन की तुलना में कम प्रभावी हैं। 

जेनेवा में विश्व स्वास्थ्य संगठन के मारियो फिलिप रेयेस फेस्टिन ने कहा, "अध्ययन में पाया गया कि पुरुषों के लिए अपने हार्मोन को गर्भनिरोधक बनाना संभव है। इसके लिए सिर्फ एक इंजेक्शन लेना होगा।"

निष्कर्षो से पता चलता है कि प्रोजेस्ट्रॉन और टेस्टोस्टेरोन का एक सटीक मिश्रण शुक्राणुओं की संख्या को नियंत्रित करता है और कोई पुरुष अस्थायी रूप से बांझ बन सकता है।

इस अध्ययन के लिए दल ने 18 से 45 वर्ष के 320 स्वस्थ पुरुषों में इंजेक्शन गर्भनिरोधक की प्रभावशीलता का परीक्षण किया।

पुरुषों को 200 मिलीग्राम के नार्थिस्टेरोन एनथेट (एनईटी-इन) और 1000 मिलीग्राम के टेस्टोस्टेरोन अनडिकेनोएट (टीयू) का इंजेक्शन 26 सप्ताह तक उनके शुक्राणुओं की संख्या रोकने के लिए दिया गया।

यह हार्मोन 274 प्रतिभागियों में शुक्राणुओं की संख्या दस लाख/मिलीलीटर या उससे कम करने में 24 सप्ताह में प्रभावी रहा। यह गर्भनिरोधक तरीका करीब 96 प्रतिशत प्रयोगकर्ताओं में प्रभावी रहा।

फेस्टिन ने कहा, "हमारे निष्कर्षो ने पहले के छोटे प्रयोगों में देखे गए गर्भनिरोधक विधि के प्रभाव की पुष्टि की है।"

यह अध्ययन पत्रिका 'जर्नल ऑफ क्लिनिकल एंडोक्राइनोलोजी एंड मेटाबोलिज्म' में प्रकाशित हुआ है।

14 October, 2016

'विश्व अंडा दिवस' पर बोले कृषि मंत्री राधामोहन सिंह 'देश को तीन गुना अंडे और चाहिए'

'विश्व अंडा दिवस' पर बोले कृषि मंत्री राधामोहन सिंह 'देश को तीन गुना अंडे और चाहिए'

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नई दिल्ली, 14 अक्टूबर: केंद्रीय कृषिमंत्री राधा मोहन सिंह ने शुक्रवार को पोषण पर चर्चा करते हुए कहा कि मौजूदा समय में देश में प्रतिवर्ष प्रतिव्यक्ति के लिए 63 अंडे उपलब्ध हैं, लेकिन प्रतिवर्ष प्रतिव्यक्ति मानक जरूरत पूरी करने के लिए 180 अंडे चाहिए। मंत्री ने यह बात नेशनल न्यूट्रीशन इंस्टीट्यूट के मानकों का हवाला देते हुए 'वर्ल्ड एग डे' के मौके पर मंत्रालय के एक कार्यक्रम में कही।

सिंह ने कहा, "भारत दुनिया के शीर्ष अंडा उत्पादक देशों में है और देश में अंडों का उत्पादन करीब 83 अरब है।" उन्होंने कहा कि सरकार राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत मुर्गीपालन को बढ़ावा दे रही है।

मंत्री ने कहा कि तिगुना अंडा उत्पादन के क्रम में सरकार गरीबी रेखा के नीचे के परिवारों को मुर्गी पालन के लिए वित्तीय मदद देने सहित कई कदम उठा रही है।

उन्होंने कहा कि मुर्गी पालन को उद्यमिता विकास और रोजगार के घटक के तौर पर प्रोत्साहित किया जा रहा है।

सिंह ने अरहर दाल की एक नई किस्म पूसा-16 का भी निरीक्षण किया। इसे भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली ने विकसित किया है।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया, "अरहर की यह किस्म 120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है, इसकी दूसरी किस्में को तैयार होने में 165-180 दिन लगते हैं।"

06 October, 2016

सहजन खाओ सेहत बनाओ, 300 रोगों को दूर भगाओ

सहजन खाओ सेहत बनाओ, 300 रोगों को दूर भगाओ

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भारत में एक से बढ़कर एक सेहत का खजाना मौजूद है। चाहे वो सब्जी के रूप में हो, चाहे फलों के रूप में और चाहे आयुर्वेदिक औषधियों के रूप में। सहजन (Drumstick) एक ऐसी की रोगनाशक शक्ति है जिसे सब्जी के रूप में भारत के विभिन्न राज्यों में उपयोग किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार सहजन 300 से भी अधिक रोगों को दूर भगाने वाली प्राकृतिक औषधि है जिसे हफ्ते में 1-2 दिन खाते रहने से कई बीमारियाँ दूर हो जाती है।
सहजन या मुनगा जड़ से लेकर फूल-पत्तियों तक सेहत का खजाना है। इसके ताजे फूल से हर्बल टॉनिक बनाया जाता है और इसकी पट्टी में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। सहजन का वनस्पति नाम मोरिंगा ओलिफेरा है। फिलीपीन्स, मैक्सिको, श्रीलंका, मलेशिया आदि देशों में सहजन का उपयोग बहुत अधिक किया जाता है।
भारत में खासकर दक्षिण भारत में इसका उपयोग विभिन्न ब्यंजनो में खूब किया जाता है। इसका तेल भी निकाला जाता है और इसकी छाल पत्ती गोंद, जड़ आदि से आयुर्वेदिक दवाएं तैयार की जाती हैं। आयुर्वेद में 300 रोगों का सहजन से उपचार बताया गया है। इसलिए इसके खाने से लाभों के बारे में बताया जा रहा है –
1. सहजन में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन-ए, सी और बी कॉम्पलैक्स प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। एक अध्ययन के अनुसार इसमें दूध की तुलना में 4 गुना कैल्शियम और दुगना प्रोटीन पाया जाता है। प्राकृतिक गुणों से भरपूर सहजन इतने औषधीय गुणों से भरपूर है कि इसकी फली के अचार और चटनी कई बीमारियों से मुक्ति दिलाने में सहायक हैं। यह सिर्फ खाने वाले के लिए ही नहीं, बल्कि जिस जमीन पर यह लगाया जाता है, उसके लिए भी लाभप्रद है।
2. सहजन पाचन से जुड़ी समस्याओं को खत्म कर देता है। हैजा, दस्त, पेचिश, पीलिया और कोलाइटिस होने पर इसके पत्ते का ताजा रस, एक चम्मच शहद, और नारियल पानी मिलाकर लें, यह एक उत्कृष्ट हर्बल दवाई है।
3. कुपोषण पीड़ित लोगों के आहार के रूप में सहजन का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। एक से तीन साल के बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह वरदान माना गया है। सहजन की जड़ का अजवाइन, हींग और सौंठ के साथ काढ़ा बनाकर पीने का प्रचलन है। इसका काढ़ा साइटिका रोग के साथ ही, पैरों के दर्द व सूजन में भी बहुत लाभकारी है।
4. इसका जूस प्रसूता स्त्री को देने की सलाह दी जाती है। इससे डिलवरी में होने वाली समस्या से राहत मिलती है और डिलवरी के बाद भी मां को तकलीफ कम होती है।
5. इसमें कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है, जिससे हड्डियां मजबूत बनती है। इसके अलावा इसमें आयरन, मैग्नीशियम और सीलियम होता है। इसीलिए महिलाओं व बच्चों को इसका सेवन जरूर करना चाहिए। इसमें जिंक भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो कि पुरुषों की कमजोरी दूर करने में अचूक दवा का काम करता है। इसकी छाल का काढ़ा और शहद के प्रयोग से शीघ्र पतन की बीमारी ठीक हो जाती है और यौन दुर्बलता भी समाप्त हो जाती है।
6. सहजन में ओलिक एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है। यह एक तरह का मोनोसैच्युरेटेड फैट है और यह शरीर के लिए अति आवश्यक है। साथ ही सहजन में विटामिन सी बहुत मात्रा में होता है। यह कफ की समस्या में भी रामबाण दवा की तरह काम करता है। जुकाम में सहजन को पानी में उबाल कर उस पानी का भाप लें।
आप लोगों ने पढ़ा हमें अच्छा लगा। अब आपसे अनुरोध है की आप आज से ही सहजन खाना शुरू कर दीजिये और खूब बढ़िया सेहत बनाइये। सब्जियों की रेसेपी के लिए drumstick reciep लिख दीजिये। विडियो में सब्जी बनाने के तरीके के बारे में बताया गया है।
हर बीमारी पेट की गैस से शुरू होती है, गैस को जानें बीमारी से बचें

हर बीमारी पेट की गैस से शुरू होती है, गैस को जानें बीमारी से बचें

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New Delhi, 6 October: अगर आज के समय में कहा जाए की गैस ही सबसे बड़ी बीमारी और घर घर की बीमारी है तो कहना गलत नहीं होगा। यह भी कह सकते हैं की सभी बड़ी बीमारियाँ गैस से ही शुरू होती हैं। कुछ विशेषज्ञ यह भी कह सकते हैं कि अगर पेट में गैस ना हो तो सभी बीमारियों पर आसानी से विजय पायी जा सकती है। सीधा सा फार्मूला है; पेट में गैस का मतलब है लीवर में कमी, लीवर में कमी का मतलब है खून की कमी, खून की कमी का मतलब है बीमारियों से लड़ने की क्षमता में कमी, बीमारियों से लड़ने की क्षमता में कमी का मतलब है बड़ी बीमारियों को दावत देना और यह सब होता है सिर्फ पेट में गैस के कारण।

क्या है गैस?
गैस प्रत्येक व्यक्ति के शरीर में बनती है। यह शरीर से बाहर डकार द्वारा या गूदा मार्ग के द्वारा निकलती है। अधिकतर लोगों के शरीर में 1-4 पिंट्स गैस उत्पन्न होती है और एक दिन में कम से कम 14-23 बार गैस पास करते हैं। ऐसे लोग जिनकी पाचन शक्ति अक्सर खराब रहती है और जो प्रायः कब्ज के शिकार रहते हैं, उनमे गैस की समस्या अधिक होती है।

क्यूँ बढ़ रही है गैस की समस्या?
अक्सर देखा जाता है कि चलते फिरते और हार्ड वर्क करने वालों के शरीर में गैस कम बनती है लेकिन ऐसे लोग जिनकी सक्रियता कम रहती है या जो अधिक समय तक बैठे रहते हैं उनके पेट में गैस अधिक मात्रा में बनती है। दूसरा कारण यह भी है कि आजकल लोगों की खान पान की आदतें बिगडती जा रही हैं। आजकल के लोगों में चबा चबा कर पोषक भोजन करने के बजाय जल्दी जल्दी से खाया जाने वाला जंक फूड या फ़ास्ट फूड अधिक पसंद है। यही वजह है कि आजकल बच्चे से लेकर बूढ़े, सभी लोग गैस की समस्या से अधिक परेशान रहते हैं। ज्यादा समय तक रहने वाली गैस की समस्या अल्सर में भी बदल सकती है।

क्यूँ बनती है गैस?
हमारे शरीर के पाचनतंत्र में गैस दो तरीके से आती है।

1. निगली गयी हवा द्वारा: कभी कभी कुछ लोग अंजाने में हवा निगल लेते हैं जिसे चिकित्सा की भाषा में एरोफैगिया कहते हैं। यह भी पेट में गैस का प्रमुख कारण है। हर कोई थोड़ी मात्रा में कुछ खाते और कुछ पीते समय हवा निगल लेता है। हालाँकि जल्दी जल्दी खाने या पीने, च्युंगम चबाने, धूम्रपान करने से कुछ लोग ज्यादा हवा अन्दर ले लेते हैं, जिसमें नाइट्रोजन, ऑक्सीजन और कार्बन डाई ऑक्साइड होती है। कुछ हवा तो डकार के द्वारा बाहर निकल जाती है। बची हुई हवा आंत में चली जाती है जहाँ इसकी कुछ मात्रा अवशोषित हो जाती है। बची हुई थोड़ी सी गैस यहाँ से बड़ी आंत में चली जाती है जो गूदा मार्ग द्वारा बाहर निकलती है। पेट में थोड़ी मात्रा में कार्बन डाई ऑक्साइड भी बनती है, लेकिन यह अवशोषित हो जाती है और बड़ी आंत में प्रवेश नहीं करती है।

2. अनपचे भोजन का टूटना: हमारा शरीर कुछ कार्बोहाइड्रेट को ना तो पचा पाटा है और ना ही अवशोषित कर पाता है। छोटी आंत में कुछ निश्चित एंजाइमों की कमी या अनुपस्थिति से इनका पाचन नहीं हो पाता। यह अनपचा भोजन जब छोटी आंत से बड़ी आंत में आता है तो बैक्टीरिया के द्वारा किण्वन की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है जिसमे गैस बनती है। उम्र बढ़ने के साथ शरीर में एंजाइमों का स्तर कम हो जाता है इसलिए बढती उम्र के साथ साथ गैस की समस्या भी बढ़ती जाती है।
गैस के लक्षण और समस्याएँ: पेट में गैस बनने के सबसे आम लक्षण हैं:
  1. पेट फूल जाना
  2. पेट में दर्द होना
  3. डकार आना और गैस पास करना
  4. अत्यधिक गैस पास होना
  5. गूदा मार्ग से बदबूदार गैस निकलना
  6. जीभ पर सफ़ेद परत जमा हो जाना
  7. सांस में बदबू आना
  8. मल में बदबू आना
  9. दस्त लगना
  10. कब्ज होना
भोजन जिससे अधिक गैस बनती है
  1. सब्जियां जैसे ब्रोकली, पत्तागोभी, फूलगोभी और प्याज
  2. मैदे से बने खाद्य पदार्थ, दूध और दूध से बने उत्पाद
  3. मीट और अंडा
  4. डिब्बाबंद भोजन
  5. फ़ास्ट फूड, सॉफ्ट ड्रिंक
  6. बाजार की खुली चीजें
  7. अधिक तली, भुनी चीजें
  8. अधिक प्रोटीन और हार्ड कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थ
गैस से बचने के उपाय
  1. कार्बोनेटेड ड्रिंक और वाइन ना पियें, क्यूंकि यह कार्बन डाई ऑक्साइड रिलीज करते हैं।
  2. पाइप के द्वारा कोई चीज ना पियें, सीधे गिलास से पियें।
  3. अधिक तले भुने और मसालेदार भोजन से बचें या कम खाएं।
  4. तनाव भी गैस बनने का मुख्य कारण है इसलिए तनाव से बचें।
  5. कब्ज भी गैस बनने का एक प्रमुख कारण है इसलिए जितने लम्बे समय तक भोजन बड़ी आंत में रहेगा, उतनी अधिक मात्रा में गैस बनेगी।
  6. भोजन को धीरे धीरे चबाकर खाएं, दिन में तीन बार पूरा भोजन करने के बजाय, कुछ घंटों के अंतराल पर थोडा थोडा खाएं।
  7. खाने के तुरंत बाद ना सोयें, थोड़ी देर टहलें। इससे पाचन भी सही रहेगा और पेट भी नहीं फूलेगा।
  8. खाने पीने के समय को निर्धारित करें, एक निश्चित समय पर ही भोजन खाएं।
  9. अगर मेहनत कम करते हों तो अधिक कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन कम खाएं और प्रोटीन वाले भोजन अधिक लें।
  10. अपने शरीर को समझें, अगर दूध से एलर्जी होती हो तो दूध और दूध से बने पदार्थ ना लें।
  11. मौसमी फल और सब्जियों का सेवन अधिक से अधिक मात्रा में करें।
  12. खाना पकाते समय मसालों जैसे, सरसों, इलाइची, जीरा और हल्दी का उपयोग अधिक करें, इससे गैस कम मात्रा में बनती है।
  13. संतुलित और घर का भोजन करें, जंक फूड, फ़ास्ट फूड और खुले में बने फूड से बचें।
  14. शरीर को शक्रिय रखें, कसरत और योगा करें, पैदल चलने की आदत डालें।
  15. धूम्रपान और शराब से दूर रहें।
  16. अपने भोजन में अधिक से अधिक रेशेदार भोजन को शामिल करें।
  17. सर्वांगसन, उत्तानपादासन, भुजंगासन, प्राणायाम आदि योगासन करने से गैस की समस्या ख़त्म हो जाती है।
सबसे काम की बात:
अगर कर सकते हों तो सुबह उठने के बाद तीन चार गिलास पानी पियें और उसे उल्टी करके वापस निकाल दें। हो सकता है कुछ दिन परेशानी हो लेकिन एक बार आदत पड़ने के बाद रोज करने से ताउम्र गैस से छुटकारा पाया जा सकता है।

जीवनशैली में लायें बदलाव
  1. ज्यादा देर तक कुर्सी पर बैठकर काम करने वालों को गैस की समस्या अधिक होती है ऐसे लोगों को हर घंटे के बाद कुर्सी से उठकर थोडा टहलना चाहिए।
  2. दोपहर का खाना खाने के बाद कुछ देर टहल लें।
  3. लिफ्ट के बजाय सीढ़ियों का उपयोग करें।
  4. खाने के बाद नींबू पानी या फल खासकर पपीता जरूर खाएं।
  5. खाने के तुरंत बाद ज्यादा पानी ना पीयें, आधे या एक घंटे बाद ही पानी पीयें। भोजन के दौरान प्यास से बचने के लिए एक आधे घंटे बाद ही पानी पी लें।
  6. ग्रीन टी का जरूर इस्तेमाल करें।
रोकथाम और घरेलु उपचार
  1. लहसुन पाचन की प्रक्रिया को बढाता है और गैस की समस्या को कम करता है।
  2. अपने भोजन में दही को शामिल करें।
  3. नारियल पानी भी गैस की समस्या में काफी प्रभावशाली है।
  4. अदरक में पाचक एंजाइम होते हैं। खाने के बाद अदरक के टुकड़ों को नीबू के रस में डुबोकर खाएं।
  5. अगर आप लम्बे समस्य तक गैस की बीमारी से पीड़ित है तो लहसुन की तीन कलियाँ और अदरक के कुछ टुकडें सुबह खाली पेट खाएं।
  6. प्रतिदिन खाने के समय टमाटर या सलाद खाएं, टमाटर में सेंधा नमक मिलाकर खाने से अधिक लाभ मिलता है।
  7. पोदीना भी पाचन तंत्र में अधिक लाभकारी है।
  8. इलाइची के पाउडर को एक गिलास पानी में उबाल लें। इसको खाना खाने के बाद गुनगुने रूप में पी लें, गैस से लाभ मिलेगा।

02 October, 2016

स्वच्छता रोजाना के जीवन का हिस्सा होना चाहिए: जेपी नड्डा

स्वच्छता रोजाना के जीवन का हिस्सा होना चाहिए: जेपी नड्डा

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नई दिल्ली, 2 अक्टूबर: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा ने रविवार को गांधी जयंती के अवसर पर स्वच्छता पर जोर दिया और कहा कि इसे 'एक बार की गतिविधि' नहीं बल्कि हमारे 'दैनिक जीवन का हिस्सा होना चाहिए'। 

स्वास्थ्य मंत्री नड्डा स्वच्छ भारत अभियान के तहत दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में बोल रहे थे। 

अस्पताल के सफाईकर्मियों के योगदान की सराहना करते हुए नड्डा ने कहा, "स्वच्छता एक सामाजिक आंदोलन होना चाहिए। स्वच्छता एवं सफाई व्यवस्था के बारे में जागरूकता इस देश के हर गांव तक पहुंचनी चाहिए।" 

"स्वच्छता एवं सफाई एक बार की गतिविधि नहीं बल्कि हमारे रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा होना चाहिए। सभी अस्पतालों एवं सरकारी स्वास्थ्य सुविधाएं पूरे वर्ष स्वच्छता एवं स्वास्थ्य को बरकरार रखने के प्रयत्न के रूप में होनी चाहिए"। 

नड्डा ने श्रमदान किया और पिछले साल शुरू की गई स्वास्थ्य मंत्रालय की पहल 'कायाकल्प' की याद दिलाई। उन्होंने कहा, "यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए 'स्वच्छ भारत अभियान' के पीछे के नजरिया और दर्शन को लागू करने के अलावा सरकारी स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों में स्वास्थ्य विज्ञान और स्वच्छता के प्रोटोकॉल को तय करता है।"

उन्होंने कहा, " कायाकल्प सिर्फ शारीरिक स्वच्छता पर लागू नहीं होता बल्कि जैविक कचरे के निस्तारण या मूल मसविदा तैयार करने जैसी गतिविधियों के लिए एक व्यवस्था एवं प्रक्रिया विकसित करने व लागू करने के लिए है।" 

मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि इस वर्ष केंद्र सरकार और 26 राज्यों के जिला अस्पतालों को कायाकल्प पुरस्कार दिया जाएगा। 

केंद्र सरकार के अस्पताल की श्रेणी में पहला पुरस्कार चंडीगढ़ स्थित पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एवं रिसर्च (पीजीआईएमईआर) को दिया जाएगा। दूसरा पुरस्कार दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को और तीसरा पुरस्कार शिलांग स्थित नॉर्थ ईस्टर्न इंदिरा गांधी रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मेडिकल साइंसेज (एनईआईजीआरआईएचएमएस) को दिया जाएगा। 
नवरात्रों के दौरान ऐसे अपनाएं सेहतमंद व्रत के तरीके

नवरात्रों के दौरान ऐसे अपनाएं सेहतमंद व्रत के तरीके

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नई दिल्ली, 2 अक्टूबर: नवरात्र में 9 दिनों तक व्रत के दौरान कुछ लोग अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन जो लोग हृदय रोग, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी समस्या से पीड़ित हैं, उन्हें और गर्भवती महिलाओं को ऐसा नहीं करना चाहिए। ऐसे मरीजों में दिन में केवल एक बार भोजन करना समस्याएं पैदा कर सकती हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) मनोनीत अध्यक्ष डॉ के.के.अग्रवाल ने बताया, "अगर पोषण की उचित गुणवत्ता शरीर को मिलती रहे, तो व्रत रखने से शरीर पर बेहद सकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। जिन मरीजों को दिल की समस्या हैं, उन्हें आलू के पकौड़े और आलू के प्रोसैस्ड चिप्स जैसी तली हुई चीजें नहीं खानी चाहिए। मधुमेह के मरीजों को उसी वक्त अपना व्रत खोल देना चाहिए जब उनके रक्त शर्करा का स्तर 60 एमजी से नीचे चला जाए। उन्हें दिन में काफी मात्रा में तरल आहार भी लेते रहना चाहिए, क्योंकि शरीर में डिहाइड्रेशन होने से लकवा या दिल का दौरा पड़ सकता है।"

उन्होंने कहा कि टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित मरीजों में व्रत रखने से खतरा कम होता है, लेकिन टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों को व्रत बिल्कुल नहीं रखना चाहिए। लंबी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को व्रत रखते समय डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए, क्योंकि नियमित तौर पर चल रही दवाओं की खुराक व्रत की वजह से 40 से 50 प्रतिशत तक कम करने की जरूरत हो सकती है।

कुछ सेहतमंद सुझाव :-

-सादा दही की बजाए लौकी का रायता खाएं।
-बीच में बादाम खाए जा सकते हैं।
-कुटृटू के आटे की रोटी कद्दू के साथ खाएं।
-थोड़ी थोड़ी देर बाद उचित मात्रा में फल खाते रहें ताकि शरीर में पोषक तत्व बने रहें।
-सिंघाड़े और कट्टू का आटा मिला कर पकाएं।
-सिंघाड़ा अनाज नहीं बल्कि फल है, इसलिए इसे अनाज की जगह प्रयोग किया जा सकता है।
-सिंघाड़े के आटे में ग्लूटन नहीं होता इसलिए सीलियक बीमारी से पीड़ित या ग्लूटन से एलर्जी वाले मरीज इसका प्रयोग कर सकते हैं।

28 September, 2016

केला है दुनिया का सबसे बड़ा डॉक्टर, केले के पास हर बीमारी का इलाज

केला है दुनिया का सबसे बड़ा डॉक्टर, केले के पास हर बीमारी का इलाज

banana health benefit

Health Desk: हमने कभी सोचा भी नही होगा कि आखिर केला खाने वाले बन्दर लम्बी लम्बी छलाँगें कैसे लगा लेते हैं। हमने कभी सोचा भी नही होगा कि आखिर ताकत बन्दर में होती है या केले के अंदर। हमने कभी सोचा भी नही होगा कि केला आखिर बंदरों का सबसे पसंदीदा भोजन क्यों है। कभी कभी आप यह भी देखते होंगे कि कुछ लोग बंदरों को ढूंढ ढूंढ कर केले खिलते हैं लेकिन खुद केले के गुणों से अंजान रहते है। हम अक्सर यह भी देखते हैं की कुछ लोग गैस, अपच, कब्ज होने पर डॉक्टर के पास जाकर हजारों रुपये खर्च कर देते हैं लेकिन सबसे सस्ती दवा केले के पास जाने की सोच ही नहीं पाते। आइये पढ़ते हैं केला खाने से क्या क्या फायदे होते हैं और किन किस बीमारियों से बचा जा सकता है।
केला: इलाज से रोकथाम अधिक अच्छा

सबसे पहले हमें यह जानना चाहिए कि बीमारियों के इलाज से बीमारियों का रोकथाम अधिक अच्छा है। हमें चाहिए की बीमारियां हमारे शरीर में लगने ही ना पाएं। अगर हम केले को अपनी भोजन में नियमित रूप से शामिल कर लें तो सभी बीमारियों से बचा जा सकता है।

बीमारियां केवल दो ही कारणों से होती हैं।
1. शरीर में खून की कमी
2. पेट में गैस, अपच, कब्ज

ध्यान दीजिये, अगर हमारे शरीर में खून की कमी है तो पेट में गैस और कब्ज की समस्या जरूर होती है और अगर पेट में गैस और कब्ज की समस्या है तो शरीर में खून की कमी होने लगती है। केला खून में हीमोग्लोबिन बढ़ाने का सबसे बढ़िया श्रोत है।नियमित रूप से केले का सेवन करते रहने पर पेट में गैस और कब्ज की समस्या से छुटकारा मिलता है। ध्यान दीजिये, शरीर की सभी बीमारियां पेट से ही शुरू होती हैं। चाहे फेफड़े और सांस की बीमारी हों, चाहे दिल और दिमाग की बीमारी हों, चाहे किडनी और आहारनाल की बीमारी हों और चाहे हड्डियों और गठिया की बीमारी हों। पेट में कब्ज और गैस से शरीर में खून बनना कम हो जाता है और हमारे खून में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। इसका नतीजा यह होता है कि हमारी साँसों, फेफड़ों, ह्रदय, किडनी आदि में कमी आनी शुरू हो जाती है। इन अंगों के ढीले पड़ने से और सही ढंग से काम ना करने से हमें धीरे धीरे डायबिटीज या कैंसर की बीमारी होनी शुरू हो जाती है। इसके बाद ही टेंशन, तनाव, रक्तचाप आदि की समस्या शुरू होती है और हम डॉक्टरों के पास भागते रहते हैं।

याद रखिये, पक्के केले के सेवन से अधिक फायदे होते हैं। केला जितना अधिक पका होगा आपके खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा उतनी अधिक बढ़ाएगा। कच्चे या अधपके खेले के सेवन से भी फायदा होता है लेकिन इन्हें खाने से पेट में गैस और कब्ज में आराम मिलता है। कच्चे केले की सब्जी भी खायी जा सकती है। याद रखिये अगली बार आपको गैस और कब्ज की शिकायत हो तो गैस की दवा खाने के बजाय चार पांच केले जरूर खाएं। इससे भूख तो शांत होगी ही, आपके शरीर में ब्लड बनेगा और पेट की गैस और कब्ज से छुटकारा मिलेगा। यह भी याद रखें, यह मत सोचिये कि केवल एक दो केले खाने से आप हमेशा के लिए स्वस्थ हो जाएंगे, नियमित रूप से या हफ्ते में तीन बार केले का सेवन जरूर करें।

याद रखिये, अगर आपका पेट सही है, खाना सही ढंग से पच रहा है, गैस और कब्ज की समस्या नहीं है तो आपके शरीर में खून की मात्रा सामान्य बनी रहेगी। अगर आपके शरीर में खून की मात्रा सामान्य रहेगी तो खून में उपस्थित हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन को आपके शरीर की हर सेल में बराबर मात्रा में पहुंचाते रहेंगे और आपके फेफड़े स्वस्थ बने रहेंगे रहेंगे। फेफड़ों के स्वस्थ रहने से आप सांस की बीमारियों से दूर रहेंगे। शरीर में खून की मात्रा सामान्य रहेगी तो आपके ह्रदय और किडनी जैसे अंग भी सही ढंग से काम करते रहेंगे और खून में पाए जाने वाले अवशिष्ट पदार्थों को फ़िल्टर करते रहेंगे शरीर में खून की मात्रा सामान्य रहेगी तो आपकी सेल और हड्डियों को कैल्शियम, सोडियम, पोटैशियम और आयरन बराबर मात्रा में मिलता रहेगा।

यह सब केवल केले को नियमित रूप से आहार में शामिल करने से हो सकता है। याद रखिये केला सिर्फ बंदरों का भोजन नहीं है बल्कि हमारे लिए भी कुदरत का वरदान है। केला ना सिर्फ सस्ता होता है बल्कि यह गुणों की खान होता है। केला अमीर भी खा सकते हैं और गरीब भी इसलिए केला खाइए और सभी बीमारियों को दूर भगाइए।

याद रखिये कुछ लोग हमारी बातों से असहमत होकर कह सकते हैं कि केला खाने से डायबिटीज हो सकता है, या डायबिटीज वालों को केला खाने से नुकसान हो सकता है। बता दें कि डायबिटीज बीमारी पेट में लम्बे समय तक गैस और कब्ज की समस्या रहने के बाद होती है और इस बीमारी में लीवर के बगल में पाया जाने वाला अंग पैंक्रियाज काम करना बंद कर देता है। अगर नियमित रूप से केले का सेवन किया जाए तो ना तो पेट में गैस और कब्ज होगी और ना ही डायबिटीज जैसे जानलेवा बीमारी होगी।