Jan 12, 2018

पढ़ें, बॉबी कटारिया के ऊपर क्यों दर्ज हो रहे है FIR पर FIR, क्या होगा आगे, कौन कर रहा है ये सब


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गुरुग्राम: अब पूरे देश को यह बात पता चल गयी है कि बॉबी कटारिया के साथ जो कुछ भी हो रहा है वह पुलिस और प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाने के लिए हो रहा है. बॉबी कटारिया ने दो-तीन साल पहले ही पुलिस प्रशासन के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी थी, दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद और आस पास के शहरों में किसी भी गरीब और जरूरतमंद के बुलाने पर बॉबी कटारिया पहुँच जाता था, अधिकतर मामलों में पुलिस प्रशासन की लापरवाही देखकर बॉबी कटारिया उनके ऊपर जमकर गुस्सा निकालता था और लाइव वीडियो बनाता था. पुलिस को भी शायद पता था बॉबी उनके रास्ते में रोड़ा जरूर बनेगा इसलिए उसके खिलाफ तीन चार महीनें पहले से ही (29.8.2012 को) एक FIR लिखकर रख ली थी. 


इस मामले में पंजाब के वकील बलकरण सिंह बल्ली ने बताया कि जब भी कोई आदमी पुलिस प्रशासन के खिलाफ लड़ता है तो पुलिस उसके खिलाफ पहले से ही FIR दर्ज करके रख लेती है. ऐसे आदमी पर प्रशासन की पहले से नजर रहती है, जब उनको लगता है कि कोई उनके खिलाफ ज्यादा बोल रहा है, उनकी पोल खोल रहा है तो उसका मुंह बंद करवाने के लिए उसे अरेस्ट करके ऐसे ही कार्यवाही की जाती है.

बॉबी कटारिया को 24 दिसम्बर को रात 11 बजे गिरफ्तार किया गया था. उसके बाद उसे 6 दिन पर रिमांड में लेकर कथित तौर पर थर्ड डिग्री दी गयी. यहीं पर बॉबी का घर वालों से गलती हो गयी. उन्हें तुरंत हाई कोर्ट पहुंचकर Writ Petition (आर्टिकल - 226 के अंतर्गत) दाखिल करनी चाहिए थी. अगर Writ Petition दाखिल हो गयी होती तो हाई कोर्ट की टीम आकर पुलिस थाने पर छापा मार देती और बॉबी कटारिया का टॉर्चर नहीं हो पाता लेकिन ऐसा नहीं किया गया.

वकील बलकरण सिंह ने यह भी बताया कि बॉबी कटारिया के खिलाफ कौन कौन सी धाराएं हैं और उनके उन्हें कितनी सजा मिलेगी. 

धारा 186: सरकारी काम में बाधा पहुंचाने की धारा है. इसमें तीन महीनें की सजा है लेकिन बैलेबल है, मतलब जमानत मिल सकती है.
धारा 323: पर्स चोरी का केस, इसमें एक साल की सजा है और यह भी बेलेबल है, जमानत मिल सकती है.
धारा 332: सरकारी मुलाजिम को दुःख पहुंचाने पर दर्ज होती है, इसमें तीन साल की सजा है और नॉन-बेलेबल है, मतलब तुरंत जमानत नहीं मिल सकती है.
धारा 353: ये भी सरकारी काम में बाधा डालने पर दर्ज होती है, जैसे किताब फाड़ देना, जन बूझकर तोड़ फोड़ करना. इसमें दो साल की सजा है और नॉन-बेलेबल है, मतलब तुरंत जमानत नहीं मिलती है.
धारा 379B: यह बहुत बड़ी धारा है, इसमें बॉबी कटारिया पर इल्जाम है कि वह एक बुजुर्ग की गाड़ी की चाभी छीनकर भाग गया था. पुलिस इस केस में खुद ही कहानी गढ़ लेती है, यह धारा पुलिस तब लगाती है जब आरोपी को लम्बे समय तक जेल में रखना होता है. इसमें 10 साल की सजा है और 25 हजार रुपये जुर्माना है. इसमें सेशन ट्रायल होता है. मतलब निचली कोर्ट में ही चलता है. हाई कोर्ट में इसकी पैरवी नहीं की जा सकती. इस केस में बॉबी को ज्यादा से ज्यादा समय तक रखा जा सकता है.
धारा 506: यह अपराध करने की कोशिश करने पर दर्ज होता है, इसमें 2 साल की सजा है लेकिन बेलेबल है, जमानत मिल सकती है.

अब क्या करना चाहिए बॉबी कटारिया केस में

वकील बलकरण सिंह सबसे पहले बॉबी कटारिया के पैरोकारों को हाई कोर्ट में जाकर यह अपील करनी चाहिए कि उन्हें यह बताया जाय कि बॉबी कटारिया पर कितनी FIR दर्ज हैं, क्योंकि पुलिस उस पर केस पर केस दर्ज कर रही है, अगर उसे जमानत दिलाई जाएगी तो पुलिस दूसरे मामले में गिरफ्तार कर लेगी. ऐसे में सबसे पहले सभी दर्ज FIR की जानकारी मांगनी चाहिए. हाई कोर्ट में पुलिस को पूरी जानकारी देनी पड़ेगी.

उसके बाद यह पता करना चाहिए कि पुलिस ने उसे किस मामले में अरेस्ट किया है. अगर पुलिस ने 379B में अरेस्ट किया है और उसे छोड़कर अन्य मामलों को खारिज कराने के लिए हाई कोर्ट में क्वेशिंग (Quash Application) डालनी चाहिए ताकि जो फर्जी FIR हैं उन्हें एक के बाद एक करके रद्द किया जा सके. उसके बाद जिस धारा में बॉबी कटारिया को अन्दर किया गया है उसके खिलाफ भी Quash Application डालकर या तो उसे खारिज करवानी चाहिए या हाई कोर्ट से बेल ले लेनी चाहिए. 

मतलब पहले FIR की लिस्ट निकलवाओ ताकि पुलिस आगे कोई FIR दर्ज ना कर सके. उसके बाद यह पता करो कि पुलिस ने किस मामले में जेल में डाला है, उसके बाद उस FIR को छोड़कर पहले अन्य FIR को हाई कोर्ट से Quash Application के जरिये खारिज करानी चाहिए. उसके बाद सभी फर्जी FIR खारिज करने के बाद जिस मामले में जेल में बंद हैं उसके खिलाफ हाई कोर्ट से बेल लेनी चाहिए.

वकील बलकरण सिंह ने बताया कि धारा 379B में 15 दिन के बाद सेशन कोर्ट से जमानत मिल जाती है इसलिए सेशन कोर्ट में जमनात लगा देनी चाहिए, अगर वहां से जमानत ना मिले तो हाई कोर्ट में जाना चाहिए. वीडियो.

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