Jan 10, 2018

केंद्रीय विद्यालयों में हिंदी में प्रार्थना क्यों, सिर्फ एक धर्म को बढ़ावा क्यों: सुप्रीम कोर्ट


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नई दिल्ली: देश में अंधेरगर्दी मची हुई है, सुप्रीम कोर्ट में एक के बाद एक हिन्दू-विरोधी याचिकाएं डाली जा रही हैं और सुप्रीम कोर्ट उन याचिकाओं पर हिन्दू धर्म के खिलाफ एक्शन ले रहा है. आजादी के बाद भारत हिन्दू देश था क्योंकि मुस्लिमों को अलग देश पाकिस्तान दे दिया गया था. हिन्दू देश होने की वजह से यहाँ पढ़ाई लिखाई, प्रार्थना, बोल चाल, सरकारी काम हिंदी भाषा में होते थे और अब तक वही चला आ रहा है. पिछले कुछ समय से भले ही अंग्रेजी भाषा को बढ़ावा दिया जा रहा है लेकिन अभी भी हमारे देश की अधिकतर लोगों की भाषा हिंदी ही है.

बता दें कि केंद्रीय विद्यालयों में भी हिंदी-संस्कृति भाषा में ही प्रार्थना होती आ रही है लेकिन अब कुछ लोगों ने इसको भी धर्म से जोड़ दिया है और सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी याचिका पर एक्शन लिया है.

याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और केंद्रीय विद्यालय संगठन को नोटिस जारी कर पूछा है कि रोजाना सुबह स्कूल में होने वाली इस हिंदी और संस्कृत की प्रार्थना से किसी धार्मिक मान्यता को बढ़ावा मिल रहा है? इसकी जगह कोई सर्वमान्य प्रार्थना क्यों नहीं कराई जा सकती? इन तमाम सवालों के जवाब कोर्ट ने 4 हफ्ते में तलब किये हैं.

सुप्रीम कोर्ट में विनायक शाह ने याचिका लगाई है, जिनके बच्चे केंद्रीय विद्यालय में पढ़े हैं. याचिका के मुताबिक देश भर में पिछले 50 सालों से 1125 केंद्रीय विद्यालयों की प्रार्थना में ये ऋचाएं शामिल हैं. इस प्रार्थना में और भी ऋचाएं शामिल हैं, जिनमें एकता और संगठित होने का संदेश है. 

कोर्ट इस याचिका पर अगली सुनवाई में केंद्र के जवाब पर विचार करेगा.
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