Jan 20, 2018

लगातार मोदी के खिलाफ और कांग्रेस के सुर में बोलने लगे गोगामेड़ी, इसलिए आधे राजपूतों ने छोड़ा साथ


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नई दिल्ली: पद्मावती फिल्म के खिलाफ आन्दोलन पूरी तरह से फेल हो चुका है, अब इस फिल्म को रिलीज होने से कोई ताकत नहीं रोक सकती, आन्दोलन को कमजोर किसी और ने नहीं, उनके नेताओं ने ही किया है, संजय लीला भंसाली के खिलाफ बोलते बोलते करणी सेना के अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी प्रधानमंत्री मोदी, बीजेपी खिलाफ बोलने लगे, नोटबंदी और GST के खिलाफ बोलने लगे, मतलब विल्कुल कांग्रेस के सुर में सुर मिलाकर बात करने लगे जिसकी वजह से आधे से ज्यादा राजपूत और ठोस हिन्दुओं ने अपने आप उनका, करणी सेना का साथ छोड़ दिया.

लोगों ने सोचा कि सुखदेव सिंह गोगामेडी उसी पार्टी का समर्थन कर रहे हैं जिसमें हिन्दुओं को हमेशा धोखा दिया है, एक धर्म का तुस्टीकरण किया है, जिहाद, आतंकवाद को बढ़ावा दिया है, भगवा और हिन्दू लोगों को आतंकवादी साबित करने की कोशिश की है. लोग गोगामेडी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को समझ गए और उनका साथ छोड़ दिया. 

सुखदेव सिंह गोगामेडी शायद भूल गए कि बीजेपी के समर्थकों की संख्या करणी सेना से हजारों गुना अधिक है, वैसे भी राजपूत करणी सेना के नाम से ही पता चलता है कि सिर्फ एक जाति की सेना है, अब देश के लोग जातिवाद पसंद नहीं करते, राजपूत खुद जातिवाद पसंद नहीं करते क्योंकि जातिवाद ने ही तो देश का नुकसान किया है, कल को राजपूत करणी सेना की नक़ल करके कोई ब्राह्मण करणी सेना, जाट करणी सेना, यादव करणी सेना, मौर्या करणी सेना, मिश्रा करणी सेना, पाण्डेय करणी सेना बना लेगा. इस तरह से तो भारत फिर से जातियों में बंट जाएगा.

कहने का मतलब ये है कि राजपूत करणी सेना पद्मावती फिल्म के खिलाफ आन्दोलन शुरू करके अपनी पहचान बना रही है, कई नेता निकलकर सामने आये हैं, गोगामेड़ी, सूरजपाल अमू, लोकेन्द्र सिंह कलवी, उपदेश राणा को पहले लोग जानते भी नहीं थे लेकिन अब पूरा देश जानता है, कल को इन्हें किसी ना किसी पार्टी से टिकट मिल जाएगा और ये नेता बन जाएंगे लेकिन मोदी के खिलाफ बोलकर कुछ नेताओं ने ठीक नहीं किया, अब आधे लोग आन्दोलन से खुद ही अलग हो गए हैं. दूसरी बात यह है कि पद्मावत फिल्म को लोग राजपूतों की महानता वाली फिल्म बता रहे हैं. कुछ लोग कह रहे हैं कि अगर फिल्म रिलीज हो गयी तो इन लोगों का राजनीतिक करियर अपने आप ख़त्म हो जाएगा क्योंकि लोग फिल्म देखने पर इनपर भरोसा करना छोड़ देंगे क्योंकि फिल्म देखने के बाद राजपूतों को खुद के राजपूत होने पर गर्व होगा.
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