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मणिशंकर अय्यर थे राजीव गाँधी के सीनियर लेकिन नहीं बन पाए अध्यक्ष, इसलिए खायी है मिटाने की कसम

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मणिशंकर अय्यर के बारे में लोग बहुत कम जानते हैं, ये IAS रैंक के IFS (इंडियन फॉरेन सर्विस) ऑफिसर रह चुके हैं, भारत के दूत रहे हैं, भारत सरकार में मंत्री रहे हैं, कई बार कांग्रेस पार्टी से सांसद रहे हैं. यही नहीं मणिशंकर अय्यर और राजीव गाँधी कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में साथ साथ पढ़ते थे, मणिशंकर अय्यर कॉलेज के लीडर माने जाते थे और उन्होंने छात्र चुनाव भी लड़ा था, राजीव गाँधी ने उन्हें सपोर्ट भी किया था.

अब आप खुद समझ सकते हैं, जो राजीव गाँधी का सीनियर रहा हो, कॉलेज में राजीव गाँधी से अच्छा नेता रहा हो, इतना बड़ा अफसर रहा हो, वह कांग्रेस पार्टी में ना सचिव बन पाया, ना महासचिव बन पाया, ना उपाध्यक्ष बन पाया और ना ही अध्यक्ष बन पाया. अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद तो सिर्फ एक परिवार के लिए रिज़र्व था.

अब शायद मणिशंकर अय्यर इसी बात की खुंदक निकाल रहे हैं, कुछ लोग समझते हैं मणिशंकर अय्यर की जुबान फिसल गयी या वह मूर्ख आदमी हैं लेकिन ऐसा है नहीं, वह इतने बड़े अफसर रहे हैं, कई वर्षों तक दूत रहे हैं, पांच साल तक केंद्रीय पंचायती राज मंत्री रहे हैं, इतना सब कुछ होते हुए उनकी जुबान कैसे फिसल सकती है.

अगर मणिशंकर के दोनों बयानों को ध्यान से देखा जाए तो साफ़ साफ़ पता चल जाता है कि उन्होंने जान बूझकर और गुजरात में कांग्रेस को करारी हार दिलाने के लिए बयान दिया है और यह भी हो सकता है कि उनकी मोदी के साथ कुछ सेटिंग हो, ऐसा इसलिए क्योंकि जब उन्होंने बयान दिया तो मोदी दिल्ली से गुजरात के लिए उड़ान भर चुके थे, आसमान में नेटवर्क भी नहीं आता कि उन्हें मणिशंकर अय्यर के बयान की जानकारी मिल जाए, मोदी को सूरत में उतरकर रैली को संबोधित करना था लेकिन वह पूरी तैयारी के साथ गए और रैली में मणिशंकर अय्यर के बयान का हवाला देकर कांग्रेस पर धड़ाधड़ हमला शुरू कर दिया.

ऐसा लगता था कि मोदी को सब कुछ पता था, उन्हें पता था कि मणिशंकर अय्यर ऐसा बयान देने वाले हैं, वह अपने भाषण की पूरी तैयारी करके गए थे, हर चीज सोचकर गए थे कि उन्हें क्या क्या बोलना है, ऐसा लग रहा है कि मणिशंकर अय्यर बीजेपी के साथ फिक्स गेम खेल रहे हैं लेकिन कांग्रेस उनपर कोई कार्यवाही भी नहीं कर सकती क्योंकि मणिशंकर अय्यर को राजीव गाँधी और सोनिया गाँधी की पूरी पोल पट्टी पता है, वह ना सिर्फ राजीव गाँधी के सीनियर थे बल्कि विदेश में भारतीय दूत भी रह चुके हैं.

मणिशंकर अय्यर के नीच कहने के बाद मोदी विकराल रूम धारण कर चुके हैं, लोग उनके मुंह से ऐसी ही स्पीच सुनना पसंद करते हैं, मोदी जब तक कांग्रेस पर करारे प्रहार नहीं करते उनकी रैलियों में भीड़ नहीं आती लेकिन कल से उनकी रैलियों में लाखों की भीड़ आ रही है, गुजरात का चुनाव काफी दिलचस्प हो गया है और कांग्रेस का किया धरा बेकार होने लगा है. ऐसा लगता है कि मणिशंकर अय्यर राहुल गाँधी के अध्यक्ष बनने से नाराज हैं, उन्हें मौका ना दिए जाने से नाराज हैं, इसी बात की खुंदक वह कांग्रेस को ख़त्म करके निकालना चाहते हैं. इसीलिए उन्होंने 2014 लोकसभा चुनावों से पहले मोदी को चाय वाला बताकर गेम पलट दिया और अब गुजरात चुनाव से पहले मोदी को नीच बोलकर गेम पलट दिया.
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