Dec 3, 2017

डॉक्टर और लैब वाले मिलकर मरीजों को लूट रहे थे, IT ने मारी रेड, 100 करोड़ की लूट का पर्दाफाश


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बेंगलुरु: डॉक्टरों को मरीज भगवान मानते हैं लेकिन डॉक्टर ही सबसे बड़े लुटेरे भी होते हैं, डॉक्टर लोग मरीजों को बीमारियों के टेस्ट के लिए अपनी सेटिंग वाली लैब में भेजते हैं और बदले में उनसे मोटा कमीशन लेते हैं, मान लीजिये कोई टेस्ट 100 रुपये का है, जब डॉक्टर के जरिये मरीज लैब में जाएगा तो उस टेस्ट का रेट 150 या 200 रुपये हो जाएगा और 50 से 100 रुपये डॉक्टर को कमीशन जाएगा जिसे रिफर फीस कहा जाता है, मतलब सिर्फ रिफर करने पर डॉक्टर मरीज को लूट लेता है.

बेंगलुरु में आयकर विभाग की छापेमारी में बड़ा खुलासा हुआ है। IT अधिकारीयों ने मेडिकल लैब और डॉक्टरों की मिलीभगत का भंडाफोड़ किया है। मामले में 100 करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति का पता चला है। विभाग ने कई आईवीएफ क्लीनिक्स और डायग्नोस्टिक सेंटरों पर छापा मारा था। 

बताया जा रहा है कि डॉक्टरों को मेडिकल टेस्ट के लिए लैब में रिफर करने पर मोटा कमीशन मिल रहा था। विभाग ने लगभग 1.4 करोड़ रुपये कैश और 3.5 किलो जेवर जब्त किए हैं। इसके लिए तीन दिन तक दो आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) सेंटरों और पांच डायग्नोस्टिक सेंटरों की जांच की गई थी। विभाग के अधिकारियों ने वदेशी मुद्रा भी बरामद की है। जांच में कई करोड़ रुपये विदेशी बैंकों में जमा होने की बात भी सामने आई है।

विभाग की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि डॉक्टरों को अलग-अलग लैब से अलग-अलग राशि मिलती थी। एमआरआई कराने पर लगभग 35 प्रतिशत कमीशन और सीटी स्कैन के लिए 20 प्रतिशत कमीशन डॉक्टरों की जेब में जाता था। इसी तरह दूसरे टेस्ट्स के लिए भी कमीशन उन्हें दिया जाता था।

 इन सभी का ब्यौरा मार्केटिंग के खर्च के नाम पर दिया जाता था। यहां तक कि चेक से भुगतान होने पर उसे ‘प्रफेशनल फी’ का नाम दे दिया जाता था। इन लैब्स और सेंटर्स ने डॉक्टरों तक रकम पहुंचाने के लिए एजेंट्स भी रखे हुए थे। ये एजेंट्स एक लिफाफे में पैसे पहुंचाते थे। इन लिफाफों के अंदर मरीजों की जानकारी, टेस्ट्स के नाम, बिल जैसी जानकारियां दी जाती थीं।
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