Dec 12, 2017

भरत सिंह सोलंकी ने कर दिया खुलासा, अगर पाटीदारों ने पढ़ लिया तो कांग्रेस की हार निश्चित, पढ़ें


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कांग्रेस पार्टी ना सिर्फ बहुत चालाक है बल्कि बहुत बड़ी धूर्त है, कांग्रेस ने चुनाव से पहले पाटीदारों को आरक्षण देने का साफ़ साफ़ वादा किया है लेकिन पहले चरण का चुनाव ख़त्म होते ही कांग्रेस ने जाति के आधार पर पटेलों से किया आरक्षण का वादा तोड़ दिया और चौंकाने वाला बयान दिया है. पाटीदार समुदाय के लोग कांग्रेस का यह जवाब सुनकर हैरान हैं, उन्हें लग रहा था कि कांग्रेस पार्टी सत्ता में आने के तुरंत बाद पाटीदारों को आरक्षण दे देगी और उन्हें नौकरी मिलनी शुरू हो जाएगी लेकिन कांग्रेस ने आज उनका सपना तोड़ दिया.

कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद आज राहुल गाँधी ने अहमदाबाद में पहली बार प्रेस वार्ता को संबोधित किया, राहुल गाँधी के लिए आज का दिन बहुत ही शर्मनाक रहा क्योंकि राहुल गाँधी पटेलों को आरक्षण पर जवाब ही नहीं दे पाए, उन्हें शायद पता ही नहीं था कि पाटीदारों को आरक्षण कैसे देना है, उन्होंने खुद जवाब ना देकर कहा कि इसका जवाब तो भरत सिंह सोलंकी देंगे.

अब आप खुद सोचिये, राहुल गाँधी को पता ही नहीं था कि पटेलों को आरक्षण देने के सवाल का क्या जवाब देना है, जबकि वह दो महीनें से अपनी हर रैली में पाटीदारों को आरक्षण देने का वादा करते हैं.

भारत सिंह सोलंकी के जवाब से टूटा पाटीदारों का सपना

भारत सिंह सोलंकी से पाटीदारों को आरक्षण पर ऐसा गोल मोल जवाब दिया जिसे सुनकर पटेलों की नींद उड़ जाएगी. उन्होंने कहा - हमने क़ानून के दायरे में रहकर आर्टिकल 13C और आर्टिकल 406 के तहत SC, ST, OBC  के बाद जो भी जातियां रिजर्वेशन से बाहर हैं उनकी आर्थिक परिस्थिति को देखकर, उनकी शिक्षा की परिस्थिति को देखकर हम विधानसभा में एक बिल ले आयेंगे और उसे पारित किया जाएगा, राष्ट्रपति जी को दिया जाएगा, उसके बाद एक आयोग की रचना होगी. वो आयोग पर्यवेक्षण करके बाकी की बची जातियों के बारे में निर्णय करेगा और जो सुविधाएं OBC को मिल रही हैं उसी प्रकार की सुविधाएं देने का काम पहली बार देश में होगा. ये पोलिटिकल बिल की बात है जो अभी तक हुआ नहीं है लेकिन हम ये करने जा रहे हैं.

राहुल-हार्दिक मिलकर पाटीदारों को बना रहे हैं मूर्ख

यहाँ पर आप लोग देखिये, पाटीदारों के सवाल का जवाब राहुल गाँधी ने नहीं दिया ताकि वादा तोड़ने पर उनपर इल्जाम ना लगे. उन्होंने जवाब गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी से दिलवाया जिन्हें अध्यक्ष बने सिर्फ चार-पांच महीनें हुए हैं. कल को कांग्रेस वादा तोड़ देगी तो उसका इल्जाम भरत सिंह सोलंकी पर लगाकर उन्हें पार्टी से निकाल देंगे. 

भरत सिंह सोलंकी ने भी अपने जवाब में पाटीदार जाति का नाम नहीं लिया बल्कि अन्य जातियां बोला. हम उनके बयान का सही से मतलब बताते हैं.

SC, ST, OBC के बाद जो भी जातियां आरक्षण से बाहर हैं. पहले उनकी आर्थिक परिस्थिति और शिक्षा की परिस्थिति देखी जाएगी (इसका मतलब है कि पाटीदार समुदाय को 20 फ़ीसदी आरक्षण नहीं मिलेगा, बल्कि सभी जातियों की आर्थिक और शिक्षा की परिस्थिति देखी जाएगी)
उसके बाद विधानसभा में एक बिल लाया जाएगा
उसके बाद उसे विधानसभा में पारित किया जाएगा
उसके बाद उसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा
उसके बाद एक आयोग की रचना होगी'
आयोग आरक्षण से बाहर की सभी जातियों का पर्यवेक्षण करेगा 
अगर आयोग पर्यवेक्षण के बाद मुहर लगाएगा तभी आरक्षण दिया जाएगा

अब आप सोचिये, इन सब कामों में कितना समय लगेगा, आर्थिक परिस्थिति के आकलन में सालों लग जाएंगे, शिक्षा की परिस्थिति के आकलन में सालों लग जाएंगे, विधानसभा बिल तैयार करने में सालों लग जाएंगे, बिल पास करने में सालों लग जाएंगे, राष्ट्रपति के पास बिल पास कराने में सालों लग जाएंगे, उसके बाद आयोग बनाने में सालों लग जाएंगे, उसके बाद आयोग के रिजल्ट देने में 20-30 साल लग जाएंगे. मतलब कांग्रेस ने पाटीदारों को आरक्षण देने का मामला 30-40 सालों तक अटका दिया है.

मोदी कांग्रेस के बारे में सच ही कहते हैं, इसका काम है - अटकाना, लटकाना और भटकाना.
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