Nov 3, 2017

जातिवाद का जहर, साम्प्रदाईक रंग, अलगाववाद, ये कांग्रेस पार्टी सड़ी हुई सोच का नमूना है: मोदी


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मोदी ने आज हिमाचल प्रदेश में एक रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस पार्टी पर जमकर हमला बोला, उन्होंने कहा कि कांग्रेस वाले पहले क्या कहा करते थे, उनकी पार्टी के मुखिया पहले क्या कहा करते थे, अब वो भूल रहे हैं, आजकल दुनिया भर को नए नए उपदेश सिखाने में लगे हैं. अब ये कश्मीर में अलगाववाद की भाषा बोलने लगे हैं.

मोदी ने कहा कि जब हम कहते हैं - कांग्रेस मुक्त भारत तो उन्हें गुस्सा आता है. कांग्रेस अब कोई संस्था नहीं रही, कांग्रेस महात्मा गाँधी वाली नहीं रही, कांग्रेस आजादी के दीवानों वाली नहीं रही, ये भ्रष्टाचार में लिप्त, परिवारवाद में डूबी हुई, जातिवाद का जहर फैलाने वाली, साम्प्रदाईक रंग से रंगी हुई, ये संस्था नहीं, विचार नहीं, व्यवस्था नहीं, ये सड़ी हुई सोच का नमूना है.

मोदी ने कहा कि जब हम कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते हैं तो हिंदुस्तान में इस सड़ी हुई सोच से मुक्ति दिलाने की बात करते हैं. मोदी ने कहा कि जब हम कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते हैं तो आपको बुरा लगता है, मैं आपको याद दिलाना चाहता हूँ, पंडित नेहरु देश के प्रधानमंत्री हुआ करते थे और उस समय उनका ही बोलबाला था, विरोधी दल का तो नामो निशान ही नहीं था. मीडिया भी उनके साथ था, पंचायत से पार्लियामेंट तक उनका ही राज था, उस वक्त जनसंघ का जन्म हुआ, उसके बाद बीजेपी पार्टी बनी.

पंडित नेहरु उस ज़माने में कहा करते थे, हम जनसंघ को जड़ से उखाड़कर फेंक देंगे, धरती में उसकी जड़ों को उखाड़कर फेंक देंगे, उस समय जनसंघ बच्चे जैसा था, पालने से पैर नहीं निकाले थे, उस समय नेहरु ने हमें उखाड़ने की कसम खाई थी लेकिन हमें कीचड में भी कमल खिलाकर दिखा दिया.

मोदी ने कहा कि कांग्रेसी नेताओं को भारत सरकार और भारतीय सैनिकों पर भरोसा नहीं है, डोकलाम मुद्दे पर हमारे जवान सीना तानकर खड़े थे, पूरा देश चिंतित था, कुछ भी हो सकता था, लोग हमें डरा रहे थे, लेकिन हमें सेना की सूझ बूझ पर भरोसा था, हम 72 दिन तक डटे रहे, उसके बाद बहुत दुखभरी खबर आयी, भारत की संसद में 15 सालों से बैठा हुआ व्यक्ति, जिसके बाप, दादा, दादी, माँ, ने राज किया है, वह भारतीय सेना पर भरोसा ना करे और चुपचाप चीन के राजदूत से मिलकर कहे, डोकलाम मुद्दे पर क्या चल रहा है. इनको देश की सरकार पर ही भरोसा नहीं है, सेना पर ही भरोसा नहीं है, इनको प्राइमरी ज्ञान ही नहीं है, ऐसे लोगों को क्या देश भरोसा कर सकता है.
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