Nov 10, 2017

शिक्षा खरीदने के लिए पागल हुए माँ-बाप, अंधी हुए सरकार, छात्र ने परीक्षा टलवाने के लिए किया क़त्ल


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भारत में पिछले 15-20 सालों ने शिक्षा का व्यापार होने लगा लेकिन किसी ने इस व्यापार पर ध्यान नहीं दिया, अब तो शिक्षा के नाम पर बहुत बड़ा धंधा हो रहा है, अब बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल नहीं खोले जाते बल्कि धंधा करने और छात्रों के माँ-बाप को लूटने के लिए स्कूल खोले जाते हैं.

अब स्कूल ही कॉपी बेचते हैं, स्कूल ही किताबें बेचते हैं और स्कूल ही ड्रेस बेचते हैं, अब स्कूल वाले इसलिए नहीं लिखवाते कि इससे बच्चों का ज्ञान बढेगा बल्कि इसलिए लिखवाते हैं ताकि बच्चों की जल्दी से कॉपी-नोटबुक भरे और छात्र हमारी ही दुकान से फिर से कॉपी खरीदे. अब छात्रों से इसलिए नहीं लिखवाया जाता कि इससे छात्रों की लिखने की कला बढ़ेगी बल्कि इसलिए लिखवाया जाता है कि पेन जल्दी ख़त्म होगा तो बच्चे हमारी ही दुकान से पेन खरीदेंगे और ऊपरी कमाई होगी. अब स्कूल छात्रों को लूटने का केंद्र बन गए हैं.

छात्रों को लूटने के चक्कर में प्राइवेट स्कूल उन पर पढने, लिखने और परीक्षा देने का इतना दबाव बना देते हैं कि बच्चे मानसिक संतुलन खो बैठते हैं और कुछ बच्चों का मानसिक संतुलन इतना खराब हो जाता है कि वे परीक्षा टलवाने या रद्द करवाने के लिए अन्य किसी छात्र का क़त्ल तक कर देते हैं, गुरुग्राम के रेयान स्कूल में भी ऐसा ही हुआ है.

रेयान स्कूल के 11वीं के छात्र ने प्रद्युम्न की इसलिए हत्या कर दी ताकि परीक्षा रद्द हो जाए और उसे परीक्षा की तैयारी ना करनी पड़े. यही सोचकर उसनें प्रद्युम्न की हत्या कर दी लेकिन इससे प्रद्युम्न की जान तो चली गयी लेकिन उस छात्र की जिन्दगी भी खराब हो गयी.

यहाँ पर सवाल यह है कि सरकारों की नाक के नीचे इतना बड़ा धंधा हो रहा है, छात्रों पर इतना प्रेशर डाला जा रहा है, अपनी कॉपी, किताब, पेन, ड्रेस बेचने के लिए छात्रों को इस प्रकार से रगड़ा जा रहा है, इतना सब कुछ होने के बाद भी सरकारें ऑंखें बंद करके बैठी हैं.

सरकारों को सोचना चाहिए कि जब सरकारी स्कूलों में 4-5 साल में दाखिला होता है तो प्राइवेट स्कूलों में 2-3 सालों में ही एडमिशन क्यों हो जाता है, सरकारों को सोचना चाहिए कि जब सरकारी स्कूलों में Pre, LKG, UKG, नर्सरी शिक्षा नहीं दी जाती तो प्राइवेट स्कूलों में ऐसा क्यों हो रहा है. यह कम्पटीशन किस चीज के लिए हो रहा है, शिक्षा में असमानता क्यों पैदा की जा रही है, इसी की वजह से आज छात्र इतना परेशान हो गया कि बिना कसूर दूसरे छात्र की हत्या कर दी.

मेरे ख्याल से प्राइवेट स्कूलों का यह धंधा किसी आतंकवाद से कम नहीं है, यह शिक्षा का आतंकवाद है जो ना सिर्फ माँ-बाप को परेशान कर रहा है बल्कि छात्रों को भी मानसिक रोगी बना रहा है. आज माँ-बाप शिक्षा को खरीदने के लिए इतने पागल होने लगे हैं कि 2 साल में ही प्ले स्कूलों में डाल देते हैं, तीन साल में ही प्राइवेट स्कूलों में डाल देते हैं, उसका बचपन भी पूरा नहीं होने देते और उसके सर पर बोझ रख देते हैं. यह सब क्यों और किसके लिए हो रहा है. यह आतंकवाद इतना बढ़ गया है कि अब छात्रों में हिंसक भावना पैदा हो रही है. 

सरकारों को तुरंत ही जागना चाहिए और शिक्षा में असमानता ख़त्म करनी चाहिए, सभी प्राइवेट स्कूलों और सरकारी स्कूलों का पाठ्यक्रम समान करना चाहिए, LKG, UKG, का सिस्टम बंद करवाना चाहिए, एक निश्चित उम्र में पहली कक्षा में दाखिला होना चाहिए ताकि बच्चों का दिमाग पूर्ण रूम से विकसित हो सके. अगर ऐसा नहीं हुआ तो प्राइवेट स्कूलों की लूट के चक्कर में हमारे आधे बच्चे 12वीं पास करते करते मानसिक रोगी हो जाएंगे.
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