Nov 18, 2017

श्रीश्री का विरोध करने में ओवैसी के सुर में सुर मिला रहे हैं महंत नरेन्द्र गिरी और वेदांती


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श्री श्री रवि शंकर के राम मंदिर मामले में कूदने से इतनी बात तो साफ़ हो गयी है कि हिन्दुओं में ही एकजुटता नहीं है, यह भी पता चला कि राम मंदिर की लड़ाई लड़ने के लिए विश्व हिन्दू परिषद और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरी ने कॉपीराईट ले रखा है, और किसी को इस मुद्दे पर बोलने का हक नहीं है, अगर कुछ लोग बातचीत करके समस्या का समाधान करने की कोशिश करते हैं तो उन्हें ये लोग नौटंकीबाज बताते हैं.

हिन्दुओं के लिए बहुत ही दुर्भाग्य की बात है कि श्री श्री का विरोध करने में विश्व हिन्दू परिषद के बड़े नेता, कट्टरपंथी ओवैसी जैसे नेताओं के सुर में सुर मिला रहे हैं, ओवैसी ने पहले से ही श्री श्री रवि शंकर को नौटंकीबाज बताना शुरू कर दिया था जिसका मतलब है कि श्री श्री रवि शंकर के अयोध्या जाने से वह दुखी था लेकिन उसके सुर में सुर मिलाते हुए राम विलास वेदांती और महंत नरेन्द्र गिरी ने भी श्री श्री को नौटंकीबाज बताना शुरू कर दिया, यहाँ पर विश्व हिन्दू परिषद के नेता ओवैसी के साथ हो गए.

ऐसा लगता है कि ये लोग राम मंदिर मुद्दे का समाधान ही नहीं चाहते, इसी आन्दोलन की वजह से ये लोग करोडपति बन गए, राम विलास वेदांती सांसद बन गए, महंत नरेन्द्र गिरी अखाड़ा परिषद् के अध्यक्ष बन गए, अब कहते हैं कि हमने लड़ाई लड़ी है, हमने कुर्बानी दी है, अरे भाई आपने कुर्बानी दी है तो आपको फायदा भी मिला है, अब अगर कोई बातचीत की पहल कर रहा है तो आप लोगों को उसका साथ देना चाहिए.

दुनिया जानती है कि श्री श्री रवि शंकर आर्ट ऑफ़ लिविंग के माध्यम से पूरी दुनिया में हिंदुत्व का परचम लहरा रहे हैं, हिंदुत्व का सन्देश दे रहे हैं, उनका योगदान कम नहीं माना जा सकता, लेकिन ये लोग उन्हें घोटालेबाज और भ्रष्टाचारी बता रहे हैं, जाँच से बचने का आरोप लगा रहे हैं.

वास्तव में विश्व हिन्दू परिषद् के नेता राम मंदिर मुद्दे का समाधान करने का क्रेडिट दूसरों को नहीं देना चाहते, इन्हें लग रहा है कि अगर श्री श्री की पहल के बाद मुस्लिम पक्ष मान गया तो उन्हें क्रेडिट मिल जाएगा, इसलिए ये लोग श्री श्री को नौटंकीबाज बता रहे हैं, लेकिन यहाँ पर सवाल यह है कि अगर आपको क्रेडिट लेना है तो 25 साल से इन्तजार क्यों कर रहे हो, अब तक तुम्हें राम मंदिर बना लेना चाहिए था, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इन्तजार क्यों कर रहे हो.

इन लोगों की राजनीति देखकर ऐसा लग रहा है कि ये लोग राम मंदिर बनाना ही नहीं चाहते, ऐसा इसलिए क्योंकि राम मंदिर बनने से इन लोगों का धंधा चौपट हो जाएगा, लाखों करोड़ों का चंदा आना बंद हो जाएगा, महंतगिरी समाप्त हो जाएगी. शायद इसी राजनीति की वजह से आज तक राम मंदिर नहीं बन सका और आगे भी नहीं बन पाएगा.
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