Nov 10, 2017

विजय रुपानी को घोटालेबाज बताकर कांग्रेस जीतना चाहती है गुजरात चुनाव लेकिन 'सच ये है'



गुजरात चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत लगा दी है, साम दाम दंड भेद, हर चीज का इस्तेमाल किया जा रहा है, कांग्रेस अपने पुराने सिस्टम का भी जमकर इस्तेमाल कर रही है, तीन साल पहले देश के कांग्रेस की सरकार थी और उस समय बीजेपी नेताओं के खिलाफ जमकर सिस्टम का इस्तेमाल किया था, अब कांग्रेस ने फिर से गड़े मुर्दों को उखाड़कर बीजेपी के खिलाफ इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है.

विजय रुपानी पिछले एक साल से गुजरात के मुख्यमंत्री हैं, इसके पहले वह सरकार में थे लेकिन सुर्ख़ियों में नहीं रहते थे, कल उनके बारे में एक खबर छपी की SEBI ने हेरा-फेरी की वजह से उनकी कंपनी पर 15 लाख रुपये का जुरमाना लगाया है, राहुल गाँधी को तुरंत ही विजय रुपानी के खिलाफ मुद्दा मिल गया और उन्होने विजय रुपानी को चोर बताना शुरू कर दिया. उन्होंने ट्विटर पर लिखा - ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा की कहानी, शाह-जादा, शौर्य और अब विजय रुपानी.


क्या है मामला, क्या है सच्चाई

दरअसल यह मामला 2011 का है जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और कांग्रेस ने मोदी, अमित शाह और बीजेपी नेताओं के पीछे CBI, IB, इनकम टैक्स, ED सभी एजेंसियों को लगा दिया था. उसी समय विजय रुपानी की कंपनी हिन्दू यूनाइटेड फैमिली (HUF) के खिलाफ भी SEBI के एक अफसर ने बिना उनका पक्ष सुने 15 लाख रुपये का जुरमाना लगा दिया. अब आप समझ सकते हैं, कांग्रेस जिस हिसाब से मोदी अमित शाह के पीछे पड़ी थी, जिस तरह से सिस्टम का इस्तेमाल कर रही थी, विजय रुपानी की कंपनी पर 15 लाख का जुरमाना लगाना कौन सी बड़ी बात थी.

विजय रुपानी ने खुद बताया कि उनकी कंपनी HUF ने 2011 में सिर्फ एक ट्रांजैक्शन किया था जो अन्य लोगों की तुलना में कुछ भी नहीं था, 6 साल बाद 2016 में सिर्फ एक Transaction के आधार पर SEBI के एक अफसर ने बिना उनका पक्ष सुने उन पर 15 लाख रुपये का जुरमाना ठोंक दिया. 22 अन्य लोगों पर भी जुरमाना लगाया गया.

इस आदेश के खिलाफ SEBI ट्रिब्यूनल में मामला गया है और वहां पर SEBI अफसर के आदेश को रद्द करते हुए सभी लोगों को 3 हप्ते में अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया है, अगर वहां पर विजय रुपानी सफाई नहीं दे पाएंगे तभी उनपर जुरमाना जगाया जाएगा. अन्य 22 लोग भी अपना पक्ष रखेंगे जिन्हें पहले पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया था.

जहाँ तक विजय रुपानी पर जुर्माने का सवाल है, उनकी कंपनी ने सिर्फ एक Transaction किया है जिसका उनके पास हिसाब है. 

अब यहाँ पर यह सवाल उठता है कि SEBI के अफसर ने बिना पक्ष सुने ही सजा क्यों सुनायी, सिर्फ एक Transaction के आधार पर विजय रुपानी की कंपनी पर 15 लाख का जुरमाना क्यों लगाया, उस समय कांग्रेस की सरकार थी इसलिए हो सकता है कि विजय रुपानी को फंसाने की कोशिश की गयी हो.

दूसरा सवाल यह उठता है कि गुजरात चुनाव के वक्त ही यह मामला क्यों उठाया गया, फेक न्यूज़ क्यों छापी गयी जबकि SEBI अफसर ने जुरमाना 2016 में लगाया था, खबर आज छापी जा रही है. यह देखकर ही पता चल जाता है कि कांग्रेस मीडिया के साथ मिलकर गुजरात चुनाव जीतने के लिए साम दाम दंड भेद का इस्तेमाल कर रही है.
नीचे कमेन्ट बॉक्स में अपनी राय लिखें
पोस्ट शेयर करें और फेसबुक पेज LIKE करें
loading...

0 comments: