Oct 1, 2017

राष्ट्रपति राम ने सुनाई भगवान राम और गिलहरी की प्रेरणादायक कहानी, हर देशवासी को पढना चाहिए


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कल दिल्ली के माधवदास पार्क में राम लीला कमेटी द्वारा दशहरा प्रोग्राम का आयोजन किया गया था जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी शामिल हुए.

इस अवसर पर लोगों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भगवान राम और गिलहरी की प्रेरणादायक कहानी सुनाई जिसे हर देशवासी को पढ़ना चाहिए और इससे प्रेरणा लेकर देश के निर्माण में योगदान देना चाहिए.

उन्होंने बताया - जिस समय रामसेतु का निर्माण कार्य चल रहा था, हनुमान जी के नेतृत्व में नल नील, जामवंत, वानर और उनके तमाम सहयोगी सब मिलकर पत्थरों को तोड़कर सेतु निर्माण के काम में लगे थे, उसी समय वहां पर कुछ गिलहरियाँ प्रभु राम के पास आती हैं और कहती हैं कि सेतु का निर्माण राष्ट्र का निर्माण है इसलिए हम सब गिलहरियाँ भी इसमें योगदान देना चाहती हैं.

गिलहरियों की बात सुनकर प्रभु राम बहुत प्रसन्न हुए और उन्होने सभी गिलहरियों को अनुमति दे दी. वे सभी गिलहरियाँ पत्थर के छोटे छोटे कणों को लेकर सेतु के निर्माण में अपना योगदान देने लगीं. लेकिन उसी समय हनुमान और उनके सभी सहयोगियों ने प्रभु राम से उनकी सहयोगियों की शिकायत करते हुए कहा कि प्रभु ये गिलहरियाँ सेतु निर्माण में सहायक नहीं बल्कि बाधक हैं, हमें हमेशा डर लगा रहता है कि कहीं ये हमारे पैरों के नीचे आकर कुचल ना जाँय, इनकी वजह से सेतु निर्माण के कार्य में विलम्ब हो रहा है.

इसके बाद प्रभु राम ने सभी गिलहरियों को पास बुलाकर कहा कि तुम लोग सेतु निर्माण के काम में क्यों लगे हो, इसके बाद गिलहरियों ने जवाब दिया, प्रभु, आपने ही सेतु निर्माण कार्य शुरू होने से पहले सभी वानरों को ये प्रेरणा दी थी कि ये सेतु का निर्माण राष्ट्र की अस्मिता और संरक्षण को बचाने का कार्य है इसीलिए ये सेतु का निर्माण भी राष्ट्र का निर्माण है, इसीलिए हम सभी ने निर्णय लिया कि हम भी इसमें छोटा सा योगदान देंगे. इसीलिए हम सब गिलहरियाँ अपनी जान को जोखिम में डालकर सेतु के निर्माण में हाथ बंटा रही हैं. ऐसा सटीक उत्तर सुनकर वहां खड़े सभी लोग स्तब्ध रह गए.

रामनाथ कोविंद ने कहा कि इस प्रंसग से हम सभी को यही सीख मिलती है कि कोई भी काम या कोई भी व्यक्ति छोटा नहीं होता है, यदि हम सभी लोग अपने हर काम और जिम्मेदारी को निष्ठा, ईमानदारी, प्रमाणिकता तथा इस बोध के साथ करें कि ये काम राष्ट्रहित के लिए है और प्रभु राम के जीवन आदर्शों के अनुरूप है तो मैं समझता हूँ कि हमारा हर काम राष्ट्र निर्माण में भूमिका अदा करेगा.

रामनाथ कोविंद ने अंत में कहा कि - आइये हम सब मिलकर राष्ट्र की प्रगति और विकास के लिए एकजुट होकर काम करें, तथा अस्वच्छता, भ्रष्टाचार, गरीबी, अशिक्षा और आतंकवाद जैसी बुराइयों पर विजय प्राप्त करें.
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