Oct 5, 2017

मोदी ने अर्थव्यवस्था पर ऐसा दिया जवाब, कुछ दिन नहीं आएगी कांग्रेसियों को नींद, मंहगा पड़ा


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पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस पार्टी के नेता अर्थव्यवस्था पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर जमकर निशाना साध रहे थे, आश्चर्य तो तब हुआ जब बीजेपी के भी दो नेता कांग्रेस के सुर में सुर मिलाने लगे और मीडिया में मोदी सरकार के खिलाफ बयान देने लगे. बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा ने मोदी सरकार पर देश की अर्थव्यवस्था तबाह करने और सबको गरीब बनाने का आरोप लगाया तो अरुण शौरी ने नोटबंदी को सबसे बड़ी मनी लौन्डरिंग स्कीम बता दिया और GST को फेल बता दिया.

आज प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ताकतवर पंच से विरोधियों और आलोचकों को करारा जवाब दिया और उन्हें महाभारत का शल्य बता दिया.

मोदी ने कांग्रेस को जवाब देते हुए कहा कि क्या ऐसा पहली बार हुआ है जब देश में GDP की ग्रोथ किसी तिमाही में 5.7 परसेंट तक पहुंची है, क्या ये पहली बार हुआ है. मोदी ने बताया कि पिछली (कांग्रेस) सरकार में 6 साल में 8 बार ऐसे मौके आये जब विकास दर 5.7 प्रतिशत या उससे नीचे गिरी थी. देश की अर्थव्यवस्था ने ऐसे क्वार्टर भी देखें हैं जब विकास दर 0.2 प्रतिशत, 1.5 प्रतिशत तक गिरी थी, ऐसी गिरावट अर्थव्यवस्था के लिए और ज्यादा खतरनाक होती है क्योंकि इन वर्षों में जब GDP नीचे गिरी थी भारत हायर इन्फ्लेशन, हायर करंट अकाउंट डेफिसिट और हायर फिस्कल डेफिसिट की समस्या से जूझ रहा था. ऐसी संकट की घड़ी में ये हाल हुआ था.

मोदी ने कहा कि अगर 2014 के पहले के दो वर्ष यानी वर्ष 2012-13 और 13-14 को देखें तो औसत वृद्धि 6 फ़ीसदी के आसपास है, अब कुछ लोग यह कह सकते हैं कि आपने दो ही साल क्यों लिए क्योंकि आजकल शांय वृत्ति कुछ भी कर सकती है, मैंने दो साल इसलिए लिया क्योंकि पिछले सरकार के दो साल और हमारी सरकार के दो वर्षों में GDP डाटा तय करने का तरीका एक ही रहा है. संस्था भी वही है, प्रोसेस भी वही है, इसलिए तुलना करना स्वाभाविक और सरल होगा.

मोदी ने बताया कि जब सेंट्रल स्टेटिस्टिक्स आर्गेनाईजेशन (CSO) ने इस सरकार के दौरान GDP में 7.4 परसेंट का डाटा रिलीज किया था तो इन्हीं लोगों ने इसे खारिज कर दिया था और क्या कहा था, इन्होने कहा था कि ग्राउंड रियलिटी में तो ऐसा लग नहीं रहा है, वही संस्था उस समय पसंद नहीं थी लेकिन जब उसी संस्था ने 5.7 फ़ीसदी का डाटा दिया तो इन लोगों को मजा आ गया. पहले ये लोग कहते थे कि उन्हें फील नहीं हो रहा है कि अर्थव्यवस्था इतनी तेजी से आगे बढ़ रही है ये हमारे गले ही नहीं उतर रहा है इसलिए इन चंद लोगों ने यह दुष्प्रचार शुरू कर दिया कि GDP तय करने के तरीके में ही कुछ गड़बड़ है.

मोदी ने कहा कि उस समय ये लोग डाटा के आधार पर नहीं बल्कि अपनी फीलिंग पर बातें कर रहे थे, इसलिए उन्हें अर्थव्यवस्था में विकास होता नहीं दिख रहा था लेकिन जैसे ही पिछले दो क्वार्टर में विकास दर 6.1 और 5.7 परसेंट हुई, इन्हीं शल्य वृत्ति को यह डाटा बहुत प्यारा लग रहा है. वे सोच रहे हैं कि कुछ उनके मन का हो गया है.

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मोदी ने कहा कि मैं ना तो अर्थशास्त्री हूँ और ना ही कभी अर्थशास्त्री होने का क्लेम किया है, लेकिन आज जब अर्थव्यवस्था पर इतनी चर्चा हो रहा रही है तो मैं आपको फ़्लैश बैक में ले जाना चाहता हूँ. एक वो दौर था जब अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के सम्बन्ध में भारत को एक नए ग्रुप का हिस्सा बनाया गया था, इस ग्रुप का नाम था Fragile 5, इसे ऐसा खतरनाक ग्रुप माना गया था जिसकी खुद की अर्थव्यवस्था तो एक समस्या थी लेकिन दुनिया को लग रहा था कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की रिकवरी में भी यह बाधा बन रही है. इस ग्रुप में भारत का नाम था.

मोदी ने कहा कि मेरे जैसे अर्थव्यवस्था के कम जानकार आदमी को अब भी यह समझ में नहीं आ रहा है कि उस समय बड़े बड़े अर्थशास्त्रियों के रहते ऐसा कैसे हो गया.


मोदी ने कहा कि आपको अच्छी तरह से याद होगा कि देश में उस समय GDP ग्रोथ से अधिक Inflation की ग्रोथ पर चर्चा होती थी, इससे भी अधिक चर्चा फिस्कल अकाउंट डेफिसिट और करंट अकाउंट डेफिसिट पर होती थी. रुपये के मुकाबले में डॉलर की ग्रोथ के बारे में अख़बारों में हैडलाइन बना करती थी, यहाँ तक कि इंटरेस्ट रेस्ट में ग्रोथ पर भी हमेशा चर्चा होती रहती थी. देश के विकास को रोकने वाले ये सभी पैरामीटर उस समय इन सभी लोगों को पसंद आते थे, अब जब वही पैरामीटर सुधरे हैं, विकास को गति मिली है तो इन लोगों ने अपनी आँखों पर पर्दा डाल लिया है. इस परदे के कारण उन्हें दीवार पर लिखी स्पष्ट चीजें भी नहीं दिखाई दे रही हैं.
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