Oct 23, 2017

मोदी के जाल में फंस रहे हैं विरोधी, समझ नहीं पाए गेम, UP की तरह आयेंगे गुजरात के नतीजे


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गुजरात की राजनीति दिलचस्प होती जा रही है, विकास से परे हटकर अब चुनाव जातिवाद पर आ गया है क्योंकि जातिवादी नेता धीरे धीरे अपना रंग बदल रहे हैं, अगर ये नेता अपना रंग ना बदलते तो बीजेपी का नुकसान कर सकते थे लेकिन इन्होने अपना रंग बदलकर बीजेपी का फायदा तय कर दिया है, अगर सब कुछ ठीक रहा तो बीजेपी के लिए गुजरात के चुनावी नतीजे विल्कुल यूपी की तरह आयेंगे.

बीजेपी ने जिस तरह से विरोधियों को यूपी में फंसाया था उसी तरह से गुजरात में फंसा दिया है, अब चुनाव ने जातिवाद का रंग ले लिया है, जातिवादी नेता कांग्रेस में आ गए हैं, अप्लेश ठाकोर जो OBC नेता थे वे भी कांग्रेस में आ गए, जिग्नेश मेवानी को दलित नेता थे वह भी कांग्रेस में आ गए, हार्दिक पटेल जो पटेलों के नेता थे वे भी कांग्रेस में आ रहे हैं.

अब गुजरात में यह सन्देश जा रहा है कि कांग्रेस जातिवाद की पॉलिटिक्स कर रही है क्योंकि इन नेताओं को लालच देकर पार्टी में शामिल किया जा रहा है, दलितों को भी आरक्षण चाहिए, OBC को भी आरक्षण चाहिए, पटेलों को भी आरक्षण चाहिए, सामान्य वर्ग में यह सन्देश जा रहा है कि उनके लिए सिर्फ एक पार्टी बची है और वह है BJP. अगर BJP पटेलों को आरक्षण देती तो सामान्य वर्ग का हक मारा जाता, अगर OBC कोटे में आरक्षण दिया जाता तो OBC का हक मारा जाता और ST, ST कोटे से आरक्षण दिया जाता तो उनका हक मारा जाता.

अब एक तरफ आरक्षण समर्थक पार्टी यानी कांग्रेस है और दूसरी तरफ सबके हितों के बारे में सोचने वाली बीजेपी. सामान्य वर्ग के लोगों के पास बीजेपी को वोट देने के अलावा कोई चारा नहीं है. अगर वे कांग्रेस को वोट देंगे तो उनका हक मारा जाएगा. 

यहाँ पर कांग्रेस और जातिवादी नेता मोदी के गेम प्लान में फंस गए हैं. सामान्य वर्ग तो उन्होंने बीजेपी के पास भेज दिया, अब बचे OBC, पटेल और दलित. पटेलों में अभी भी 80 फ़ीसदी लोग समृद्ध लोग हैं, जिन्होंने विकास का सुख चखा है, ऐसे लोग हार्दिक पटेल के झांसे में कतई नहीं आयेंगे. पिछली बार करीब 80 फ़ीसदी पटेलों ने बीजेपी को वोट दिया था, इस बार गरीब तबके के पटेल हार्दिक पटेल के झांसे में आ जाएंगे इसलिए 50 फ़ीसदी पटेल बीजेपी को वोट देंगे लेकिन सामान्य वर्ग के करीब 90 फ़ीसदी वोट बीजेपी के पास चले जाएंगे जिसकी वजह से पटेल वोटों के नुकसान की भरपाई हो जाएगी.

इसी तरह से OBC वोट भी बीजेपी के खाते में जाएगा क्योंकि OBC नेता अल्पेश ठाकोर ने कांग्रेस में शामिल होकर अपना असली रंग दिखा दिखा है, OBC लोग भी जानते हैं कि कांग्रेस ने 60 वर्षों में उनका कितना भला किया है, यहाँ भी 50-50 वोट बंट जाएंगे. 

दलित वोट भी बंटेंगे क्योंकि वहां पर मायावती जैसे कोई बड़ी नेता नहीं है तो दलितों का पूरा वोट खींच सके, इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी ने रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति बनाकर दलित वोट बैंक बढ़ाया है. 

अब आते हैं मुस्लिम वोटों पर, मुस्लिम वोट हमेशा कांग्रेस के पास जाते रहे हैं, वहां पर बीजेपी को सिर्फ 5 फ़ीसदी वोट मिलेंगे लेकिन बीजेपी सामान्य वर्ग के वोट से उसकी कम पूरी कर लेगी. 

अब चुनाव सिर्फ जातिवाद पर आ गया है, गुजरात के सभी जातिवाद विरोधी लोग सिर्फ बीजेपी को वोट देंगे, भले ही वे पटेल, OBC और दलित हों. 

कांग्रेस को इस बार पिछली बार से अधिक वोट मिलेंगे लेकिन वोट सीटों में नहीं बदल पाएंगे, शहरी क्षेत्रों में बीजेपी को हर तरफ से समर्थन मिलेगा क्योंकि शहरी क्षेत्र के लोग सिर्फ विकास के नाम पर वोट देंगे, जबकि ग्रामीण क्षेत्र जातिवाद पर वोट देंगे लेकिन सामान्य वर्ग के वोट हासिल करके बीजेपी सबसे आगे निकल सकती है. अगर यह चुनाव जातिवाद पर ना जाता तो कांग्रेस को फायदा हो सकता था लेकिन जातिवादी नेताओं ने अपनी जाति का भला करने के नाम पर कांग्रेस ज्वाइन किया है जिसकी वजह से कांग्रेस का सारा खेल खराब हो जाएगा. 

उत्तर प्रदेश में भी जातिवाद के नाम पर चुनाव लड़ा गया था, दलित मायावती के साथ थे, मुस्लिम सपा के साथ थे, यादव और OBC सपा के साथ थे लेकिन सामान्य वर्ग के लोगों ने बीजेपी को वोट दिया था, ऐसा ही वातावरण गुजरात में भी बन रहा है, जातिवादी नेताओं ने सामान्य वर्ग के लोगों के लिए बीजेपी के अलावा कोई रास्ता ही नहीं छोड़ा.
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