Oct 9, 2017

बड़ा फैसला, गोधरा में 59 हिन्दुओं को जिन्दा जलाने वालों को फांसी के बजाय अब मिलेगी उम्र कैद


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27 फ़रवरी 2002 को गोधरा रेलवे स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन को रोककर उसमें बैठे 59 हिन्दू कारसेवकों को जिन्दा जला दिया गया था. आज इस मामले में दोषियों के खिलाफ गुजरात हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है, इससे पहले विशेष कोर्ट ने 11 दोषियों को फांसी की सजा सुनायी थी लेकिन दोषियों ने उस फैसले के खिलाफ गुजरात हाई कोर्ट में याचिका डाली थी. आज उसी याचिका पर सुनवायी करते हुए गुजरात हाई कोर्ट ने 11 दोषियों की मौत की सजा को बदलकर उम्र कैद कर दिया. मतलब एक तरह से दोषियों को राहत मिली है.

आपको बता दें कि ट्रेन में जिन्दा जलाए गए लोग अयोध्या से लौट रहे कारसेवक थे, सैकड़ों मुस्लिमों पर इन्हें जिन्दा जलाने का आरोप लगा था जिसके बाद गुजरात में हिन्दू-मुस्लिम दंगे हुए थे जिसमें 1000 से अधिक लोगों की हत्या हुई थी.

गुजरात हाई कोर्ट ने ये सुनाया फैसला

  • गुजरात हाई कोर्ट ने आज फैसला सुनाते हुए 11 दोषियों की मौत की सजा को उम्र कैद कर दिया
  • 20 दोषियों की उम्र कैद की सजा बरकरार रखी गयी है
  • 63 आरोपियों को बरी कर दिया गया
  • बरी किये गए लोगों में मुख्य आरोपी मौलाना उमरजी, गोधरा म्युनिसिपैलिटी के तत्कालीन प्रेसिडेंट मोहम्मद हुसैन कलोता, मोहम्मद अंसारी और उत्तर प्रदेश के गंगापुर के रहने वाले नानूमियां चौधरी हैं.
इससे पहले 1 मार्च 2011 को विशेष कोर्ट ने भी यही फैसला सुनाया था लेकिन 11 लोगों को उम्र कैद की जगह फांसी की सजा सुनायी थी लेकिन आज गुजरात हाई कोर्ट ने फांसी को उम्र कैद में बदल दिया. बाकी का फैसला बरकरार रखा गया है.
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