Oct 11, 2017

अगर पटाखों, रंगों पर बैन हो जाएगा तो त्योहारों को लेकर बच्चों का क्रेज ख़त्म हो जाएगा: चेतन भगत


chetan-bhagat-said-why-supreme-court-should-not-ban-fire-crackers

चेतन भगत ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा पटाखों के बैन को पूरी तरह से गलत बताया है और अपनी बात को साबित करने का प्रयास भी किया है. कल से ही उनके बयान पर बवाल मचा हुआ है, उन्होंने कल कहा था कि पटाखों पर बैन ठीक वैसा ही है जैसा बकरा-ईद पर बकरा काटने और क्रिसमस ट्री पर बैन लगाना. सुप्रीम कोर्ट को किसी भी त्यौहार पर बैन नहीं लगाना चाहिए क्योंकि बैन की प्रथा बहुत बुरी होती है. एक बार बैन लगना शुरू हो गया तो धीरे धीरे सभी चीजों पर बैन लगा दिया जाएगा और हमारे बच्चों का त्योहारों को लेकर क्रेज ख़त्म हो जाएगा.

चेतन भगत ने आज अपने बयान पर कायम रहते हुए बताया कि उनकी बात क्यों सही है, उन्होंने कहा कि मैं ना तो पटाखा उद्योग से हूँ और ना ही मुझे पटाखों को प्रमोट करने पर कोई पैसा मिल रहा है. मैंने सिर्फ अपना पक्ष रखा है, मैंने अपने विचार रखे हैं.

चेतन भगत ने कहा कि अगर कोई पटाखा मुक्त दीवाली मनाना चाहता है तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है उल्टा मैं उसका भी समर्थन करता हूँ और मैंने इसके लिए कैम्पेन भी किया है. 

चेतन भगत ने कहा कि यहाँ पर सिर्फ पटाखों का मुद्दा नहीं है, यहाँ पर मुदद है कि हम कई मुद्दों को कैसे डील करते हैं. 

पहली बात तो यह कि अगर हमें या आपको कुछ पसंद नहीं है तो उसे न्यायिक सिस्टम द्वारा बैन नहीं करना चाहिए. मेरे ख्याल से यह बहुत खतरनाक ट्रेंड होगा क्योंकि हो सकता है आज का बैन आपके फेवर में हो इसलिए आप बैन को सपोर्ट कर रहे होगे लेकिन अगर आप हमारी परम्पराओं, संस्कृति को बैन करने की प्रथा का समर्थन करोगे तो यह बहुत खतरनाक होगा, खासकर भारत के लिए. इसलिए मेरा मानना है कि किसी भी चीज पर बैन नहीं लगना चाहिए.

मुझे कोई आपत्ति नहीं है कि आप अपने पड़ोस की दीवारों पर पटाखा ना जलाने का पोस्टर लगा दो. लेकिन अगर पटाखों पर बैन लगता है तो इस पर डिबेट होना चाहिए. हमारी आपकी पसंद के आधार पर बैन नहीं लगना चाहिए. 

चेतन भगत ने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि पटाखों से प्रदुषण होता है, दिल्ली इसलिए प्रदूषित है, मेरा कहना है कि दिल्ली पटाखों की वजह से प्रदूषित नहीं है, दिल्ली बुरी नीतियों, बुरे प्रशासन, अन-चेक ग्रोथ, फक्ट्रियों के लाइसेंस के चेक ना होने, प्रदूषण को मॉनिटर ना करने और अन्य चीजों से है. दिल्ली इन सब वजहों से प्रदूषित है. इसके लिए दीवाली पर दोष देने के बजाय सरकारों को दोष क्यों नहीं दिया जाता है.

हम यह क्यों नहीं कहते कि हमने दिल्ली को ऐसा क्यों बनाया कि हमारे बच्चे सिर्फ दो घंटे पटाखे नहीं फोड़ सकते. दीवाली पर पटाखे फोड़ने से सिर्फ 0.2 परसेंट प्रदूषण बढ़ता है लेकिन साल भर 99.7 परसेंट प्रदूषण फैलाने वालों से क्यों सवाल नहीं पूछ जाता. पहले 99.7 प्रदूषण को रोकने का काम करो, पहले उस समस्या को रोको, पहले उन लोगों से सवाल पूछो. उनकी वजह से समस्या हो रही है. पटाखों की वजह से कोई समस्या नहीं होती क्योंकि उससे सिर्फ .2 फ़ीसदी प्रदूषण बढ़ता है, पटाखे जलाने वालों को हम गिल्टी क्यों फील कराते हैं.

उन्होने कहा कि कुछ लोग मुझे साम्प्रदाईक बता रहे हैं लेकिन अगर वे मेरी पुस्तकों को पढेंगे तो उनकी ग़लतफ़हमी दूर हो जाएगी, लेकिन मुझे लगता है कि इस तरह का बैन सिर्फ हिन्दू धर्म पर लग रहा है, जब दिवाली आती है तो पानी-रहित होली का कैम्पेन शुरू हो जाता है, जब जन्माष्टमी आती है तो गोविंदा पर बैन लगा दिया जाता है. कुछ लोग करवा चौथ पर भी बैन की मांग कर रहे हैं. मतलब सब कुछ हिन्दू त्योहारों पर ही बैन की बात हो रही है.

चेतन भगत ने कहा कि दिवाली भारतीय त्यौहार है, हिन्दुओं का सबसे बड़ा त्यौहार है. अगर भारत के लोग दीवाली नहीं मनाएंगे, त्यौहार को कौन सहेजेगा. आप खुद सोचिये जब बच्चों को दिवाली पर पटाखे नहीं मिलेंगे तो वे बोर हो जाएंगे, बच्चे आजकल वैसे भी फोन, एप, ऑनलाइन गेम्स में बिजी रहते हैं, वे साल भर पटाखे जलाने के लिए इन्तजार करते रहते हैं लेकिन जब उन्हें पटाखे नहीं मिलेंगे तो त्योहारों को लेकर उनका क्रेज ख़त्म हो जाएगा. 

बच्चों को होली पर रंगों से प्रेम होता है, पिचकारी से होली खेलते हैं, अगर होली पर रंगों पर बैन लग जाएगा और दिवाली पर पटाखों पर बैन लग जाएगा तो उनका क्रेज ख़त्म हो जाएगा, क्या आप अपने बच्चों की खुशियाँ छीनना चाहते हैं, त्योहारों को लेकर उनका उत्साह ख़त्म करना चाहते हैं, अगर वे यह सब नहीं करेंगे तो दिवाली से कैसे जुड़ेंगे. अगर हमारी यह पीढ़ी बड़ी होगी तो दिवाली से जुड़ नहीं पाएगी. क्या आप ऐसा चाहते हो. 99.7 परसेंट प्रदूषण सरकार की बुरी नीतियों की वजह से बढ़ रहा है लेकिन हम उन्हें दोष देने की हिम्मत नहीं जुटा पाते लेकिन सिर्फ 0.2 फ़ीसदी प्रदूषण के लिए हम अपने बच्चों की खुशियाँ छीनने के लिए तैयार हैं.

चेतन भगत ने कहा कि हमें हमारी संकृति और विरासत को सहेजे रखना है, कुछ लोग बहुत सिंपल दिखना चाहते हैं, बहुत कूल रहते हैं, पश्चिमी संस्कृति को फॉलो करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम उनकी बात मानने के लिए अपनी विरासत को ख़त्म कर दें. अगर हम अपने कल्चर को खो लेंगे तो पैसे बचाकर क्या करेंगे, जब खुशियाँ ही नहीं रहेंगी तो पैसे किस काम आएँगे. 

अगर मैं आपको कहूँ कि आप बहुत अमीर बन सकते हो लेकिन माँ से दूर होना पड़ेगा तो आप मेरी बात नहीं मानोगे. 

दोस्तों दिवाली मेरा सबसे पसंदीदा त्यौहार है और मुझे लगता है कि आपका भी होगा. प्रदूषण बड़ी समस्या है अगर आप पटाखे नहीं जलाना चाहते तो मत जलाइये, अगर आप प्रदूषण ख़त्म ही करना चाहते हो तो AC का इस्तेमाल बंद करो, कार का इस्तेमाल छोड़ दो इससे आप प्रदूषण कम करने में अधिक योगदान दे सकते हैं क्योंकि इन्हें आप साल भर इस्तेमाल करते हैं. 

मुझे लगता है कि दिवाली पर पटाखों पर बैन लगाकर सुप्रीम कोर्ट ने हद पार की है, ऐसा नहीं होना चाहिए था, सरकार अन्य उपाय कर सकती थी, सरकार अगर चाहती तो पांच जगह आतिशबाजी कार्यक्रम करती और लाखों लोग पटाखे जलाना छोड़कर उसे देखने जाते. लोगों को पटाखे देखने को भी मिल जाता और प्रदूषण भी कम फैलता. हम ऐसा क्यों नहीं करते, हम किसी को त्यौहार मनाने का दोष क्यों देते हैं. बैन लगाना गलत है, यह मेरा त्यौहार है, इसे मैं अपने ढंग से माना चाहता हूँ. किसी को दखल देने का कोई हक नहीं है.

नीचे कमेन्ट बॉक्स में अपनी राय लिखें
पोस्ट शेयर करें और फेसबुक पेज LIKE करें
loading...

0 comments: