Oct 12, 2017

इस वकीलों ने साबित किया, CBI कोर्ट के फैसले पर आँख मूंदकर भरोसा ना करें, गलत भी हो सकता है


cbi-court-order-prove-false-by-talwars-laywer-tanveer-ahmed-meer

भारत के लोग CBI पर भरोसा करते हैं क्योंकि यह देश की सबसे बड़ी केंद्रीय जांच एजेंसी है, CBI द्वारा जांच किये गए केस के फैसले CBI कोर्ट सुनाती है इसलिए उन पर लोग आँख मूँद कर विश्वास करते हैं लेकिन आज दो वकीलों ने साबित कर दिया है कि CBI जांच भी गलत हो सकती है और CBI कोर्ट के फैसले भी गलत हो सकते हैं. ये वकील हैं तनवीर अहमद मेरे और दिलीप.

कुछ लोग यह भी मानते हैं कि CBI कोर्ट द्वारा सुनाये गए फैसले फाइनल होते हैं और इन्हें हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने से कोई फायदा नहीं होता, आज यह भी पता चल गया है कि CBI कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज दिया जा सकता है और उसमें फायदा भी होता है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले महीनें CBI कोर्ट ने सिर्फ दो महिलाओं की चिट्ठियों के आधार पर गुरमीत राम रहीम को रेप के दोष में 20 साल की सजा सुना दी, ना कोई पक्का गवाह है, ना महिलायें सामने आ रही हैं, ना उनका मेडिकल हुआ है और ना ही कोई ठोस सबूत है. सिर्फ दो चिट्ठियां हैं.

देश के लोगों ने CBI कोर्ट के फैसले पर आँख मूंदकर भरोसा कर लिया, लेकिन आज यूपी में भी ऐसा मामला सामने आया है जिससे साबित हो गया है कि CBI जांच भी गलत हो सकती है और CBI कोर्ट के फैसले भी गलत हो सकते हैं और उसके फैसले को चुनौती दी जा सकती है.

आपको बता दें कि अरुषी-हेमराज मर्डर केस' में आज इलाहबाद हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अरुषी के पिता राजेश तलवार और माता नुपुर तलवार को दोहरे हत्याकांड के दोष में गाजियाबाद की CBI कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जांच भी CBI ने की थी और चार्जशीट भी CBI ने दायर की थी लेकिन आज इलाहबाद हाई कोर्ट ने CBI कोर्ट के फैसले को बदलकर राजेश तलवार और नुपुर तलवार को बरी कर दिया. तलवार के वकीलों तनवीर अहमद मेरे और दिलीप ने CBI कोर्ट के फैसले और CBI की दलीलों को गलत आबित कर दिया और दोनों को बाइज्जत बरी करा दिया.

अगर राम रहीम भी आरुषी-हेमराज मर्डर केस को आधार बनाकर हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर करें तो उन्हें भी सभी आरोपों से बरी किया जा सकता है क्योंकि उनके खिलाफ भी कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं, उन्हें सिर्फ दो महिलाओं की चिट्ठियों के आधार पर 20 साल की सजा सुनाई गयी है. आज भी दोनों महिलायें छुपी हुई हैं.

आरुषी-हेमराज का कब हुआ था मर्डर

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 16 मई 2008 को 14 वर्षीय आरुषी तलवार की उसके बेडरूम में हत्या कर दी गयी थी. उसका गला रेत दिया गया था और सर पर गहरे घाव के निशान थे, पुलिस ने पहले उसके दोस्त हेमराज पर शक जताया था लेकिन दूसरे ही दिन उसकी लाश भी छत से बरामद हुई थी. 

पुलिस पहले से ही यह मानकर चल रही थी कि अरुषी के माता पिता ने ही उसकी हत्या की होगी, उन्होंने अपनी जांच में यही लिखा, बाद यह सीबीआई को इस केस जांच करने का आदेश दिया, उन्होंने भी अपनी जांच रिपोर्ट में दोनों को दोषी माना जिसके बाद गाजियाबाद की CBI कोर्ट ने दोनों को आजीवन कारवार की सजा सुना दी, दोनों को डासना जेल भेज दिया गया.

जेल में रहते हुए उन्होंने फिर से हाई कोर्ट में याचिका डाली, आज इस पर सुनवाई करते हुए दोनों को इस केस से बरी कर दिया गया.
नीचे कमेन्ट बॉक्स में अपनी राय लिखें
पोस्ट शेयर करें और फेसबुक पेज LIKE करें
loading...

0 comments: