Sep 20, 2017

म्यांमार के सबसे नजदीक है चीन लेकिन रोहिंग्या वहां नहीं जा रहे, क्योंकि तुरंत ठोंकेगा चीन


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रोहिंग्या को म्यांमार से पिछले एक महीनें से भगाया जा रहा है. करीब 4 लाख रोहिंग्या मुस्लिम बांग्लादेश और भारत की तरफ भागकर आये हैं, करीब 3 लाख रोहिंग्या बांग्लादेश में शरण मांग रहे हैं जबकि 1 लाख भारत में घुस गए हैं जिनमें से 40 हजार लोगों का ही पता ठिकाना मालूम है, बाकी के रोहिंग्या भारत की भीड़ में शामिल हो गए है और अब इनका पता लगाना मुश्किल है.

रिपोर्ट से पता चल रहा है कि रोहिंग्या मुसलमान म्यांमार से पहले बंगलदेश आये, उसके बाद वहां के कुछ एजेंटों को पैसा देकर भारत में घुसपैठ कर ली, अब ये लोग भारत में झुग्गियां बनाकर सेटल हो गए हैं, यह भी खबर आ रही है कि भारत में रहने वाले स्लीपर सेल रोहिंग्या की मदद कर रहे हैं और इनके रहने, खाने का इंतजाम कर रहे हैं.

हैरानी की बात तो यह है कि रोहिंग्या लोग 2000 किलोमीटर चलकर भारत आ गए लेकिन 200 किलोमीटर चलकर चीन नहीं पहुंचे, कायदे से कहें तो इन्हें जान बचाने के लिए चीन की तरफ भागना था क्योंकि वहां का बॉर्डर काफी नजदीक है लेकिन इन लोगों ने ऐसा नहीं किया क्योंकि चीन जाते ही इन्हें ठोंक दिया जाता. चीन इन्हें शरण देने के बजाय गोली मार देता इसलिए ये लोग वहां नहीं गए बल्कि भारत आ गए.

ये लोग जानते थे कि भारत में इन्हें आसानी से मदद मिल जाएगी क्योंकि कट्टर मुस्लिम नेता और सेक्युलर लोग इन्हें अपना वोट-बैंक बनाने के लिए इन्हें जरूर अपने इलाकों में बसा देंगे और अगर इनके लिए लड़ना भी पड़ा तो वे लड़ेंगे, सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ेगा तो वहां जाएंगे. इनकी हर तरह से मदद करेंगे. रोहिंग्या का अनुमान सही था क्योंकि भारत में इन्हें मदद मिल रही है, इन्हें हर सुविधा मिल रही है. स्लीपर सेल एक्टिव हो गए हैं और इन्हें बिजली, पानी, खाना और अन्य चीजें पहुंचा रहे हैं, इनके लिए सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ा जा रहा है.
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