Sep 16, 2017

कांग्रेसियों को क्यों नहीं हजम हो रही बुलेट ट्रेन, ये है वजह


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दो तीन दिनों से सोशल मीडिया पर कांग्रेसी नेता और उनके समर्थक बुलेट ट्रेन के बारे में कई तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं, सोशल मीडिया के अलावा बाहर भी कई तरह के भ्रम फैलाए जा रहे हैं. कई लोग कह रहे हैं कि ट्रेनें सुरक्षित नहीं हैं और मोदी बुलेट ट्रेन ला रहा है, कई लोग कह रहे हैं कि भारत 50 सालों के लिए जापान का गुलाम बन गया क्योंकि मोदी ने जापान से कर्ज ले लिया है. कई लोग कह रहे हैं कि भारत में बुलेट ट्रेन की जरूरत ही नहीं है पहले लोकल ट्रेनें सुधार लो. कहने का मतलब कांग्रेसियों को बुलेट ट्रेन हजम नहीं हो रही है, हम यहाँ पर यह बताने जा रहे हैं कि कांग्रेसियों को बुलेट ट्रेन क्यों नहीं हजम हो रही है.

सबसे पहले तो यह समझ लीजिये कि हाल ही में जो भी ट्रेन हादसे हुए वे सब अपने आप नहीं हुए बल्कि बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को रोकने के लिए करवाए गए थे, दुश्मनों से सोचा था कि ट्रेनें पलटेंगी तो जापान डर जाएगा और भारत को बुलेट ट्रेन देने से मना कर देगा. इसके अलावा मोदी सरकार के खिलाफ भी मुद्दा मिल जाएगा कि इनसे रेल तो संभल नहीं रही है और ये बुलेट ट्रेन ला रहे हैं. इसी वजह से देश के दुश्मनों से ट्रेन एक्सीडेंट करवाया लेकिन मोदी सरकार इनसे नहीं डरी और बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की शुरुआत कर दी.

इसके बाद कांग्रेसी भ्रम फैला रहे हैं कि मोदी ने भारत को 50 साल के लिए जापान का गुलाम बना दिया. अगर ऐसा है तो भारत में जो भी लोग बैंकों से लोन लेते हैं वे बैंकों के गुलाम बन जाते हैं, हम लोग विदेश से पेट्रोल, डीजल और गैस लेते हैं और अधिकतर सामान कर्ज पर या क्रेडिट पर लेते हैं इसलिए हम गुलाम हैं, हम लोग अगर बाहर की चीजें खाते हैं तो हम गुलाम हैं. कांग्रेसियों की यह बात अजीब है.

पहली बात तो यह समझ लीजिये कि बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट 1.10 लाख करोड़ रुपये का है जिसमें जापान ने हमें 88 हजार करोड़ रुपये (डॉलर के बराबर) कर्ज दिया है. यह कर्ज हमें 50 साल के लिए सिर्फ 0.1 फ़ीसदी व्याज पर दिया है. अगर यूँ कहें कि बुलेट ट्रेन हमें फ्री में मिल रही है तो गलत नहीं होगा क्योंकि पांच साल में बुलेट ट्रेन चलने लगेगी तो हमारे देश की कमाई भी होने लगेगी, इसके अलावा बुलेट ट्रेन से कम से कम 1 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा. 1 लाख लोगों में से कम से कम 50 हजार लोग भारत सरकार को टैक्स भी देंगे उससे भी भारत सरकार को आमदनी होगी. इसके अलावा स्टेशन पर दुकानें लगेंगी उससे भी आमदनी होगी, इसके अलावा बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के दोनों तरफ हजारों उद्योग लगेंगे, लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा, उद्योगों से सरकार की आमदनी अलग होगी.

सीधी भाषा में आप समझिये, भारत सरकार को बुलेट ट्रेन के किराया से भी आमदनी, दुकानों से भी आमदनी, टैक्स से भी आमदनी, उद्योगों से भी आमदनी, उद्योगों में काम करने वाले लोगों के टैक्स से भी आमदनी, वहां पर बाजार लगेंगे उससे भी आमदनी, भारत को टेक्नोलॉजी मिलेगी और वह खुद से बुलेट ट्रेन बनाकर बेच सकेगा उससे भी आमदनी, अन्य शहरों में भी बुलेट ट्रेन चलेंगी उससे भी आमदनी. हर तरफ से आमदनी ही आमदनी. मतलब भारत सरकार ने 50 साल के लिए 88 हजार करोड़ लोन लिया है लेकिन 50 साल में कम से कम 50 लाख करोड़ की आमदनी होगी और अगर 50 वर्षों के अन्दर बुलेट ट्रेन का विस्तार हो गया तो इससे भी अधिक कमाई हो सकती है. इन्हीं 50 लाख करोड़ में से भारत सरकार 88 हजार करोड़ रुपये उठाकर जापान को दे देगी और उसका कर्जा निपट जाएगा.

यह बात कांग्रेसी बहुत अच्छी तरह से समझ रहे हैं इसीलिए कांग्रेसियों को बुलेट ट्रेन पच नहीं रही है, ये लोग सोच रहे हैं कि मोदी ने बुलेट ट्रेन शुरू कैसे कर दी, इन्हें इतना सस्ता लोन कैसे मिल गया, अब तो बुलेट ट्रेन का क्रेडिट बीजेपी और मोदी ले जाएगा. अब तो गुजरात में चुनाव हार जाएंगे, अब तो 2019 में भी मोदी जीत जाएगा.

इन्हीं सब वजहों से सोशल मीडिया पर भ्रम फैलाए जा रहे हैं. कोई कह रहा है कि भारत जापान का गुलाम बन गया, कोई कह रहा है कि मोदी ने भारत को जापान के हाथों बेच दिया. कोई कह रहा है कि मोदी ने बुलेट ट्रेन अपने दम पर नहीं बल्कि कर्जे के दम पर शुरू की है.

अब आप बताओ, बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की शुरुआत से ही 20 हजार लोगों को रोजगार मिल जाएगा क्या उनका भला नहीं होगा, जैसे जैसे बुलेट ट्रेन का प्रोजेक्ट बढ़ता जाएगा लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा, क्या उनका भला नहीं होगा, जब 2022 में बुलेट ट्रेन शुरू होगी तो लाखों लोगों को स्टेशनों पर रोजगार मिलेगा, क्या उनका भला नहीं होगा. जब भारत के लोग बुलेट ट्रेन पर बैठेंगे तो हाई स्पीड सफ़र का आनंद ले सकेंगे तो क्या उन्हें ख़ुशी नहीं मिलेगी. जब बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के दोनों तरह लाखों उद्योग लगेंगे और उनमें करोड़ों लोगों को रोजगार मिलेगा तो क्या उनका भला नहीं होगा.

मेरी नजर में बुलेट ट्रेन की वजह से गुजरात और महाराष्ट्र में कम से कम 5 करोड़ लोगों को रोजगार मिलेगा. हर तरह के लोगों को रोजगार मिलेगा. इससे नौजवानों को रोजगार तो मिलेगा ही, भारत का तेज गति से विकास होगा, भारत की GDP बढ़ेगी, कैशलेस इकॉनमी को बढ़ावा मिलेगा. हर तरफ से देश को फायदा होगा.

ऐसा नहीं है कि कांग्रेसी बुलेट ट्रेन के खिलाफ है, यह सिर्फ इसलिए विरोध कर रहे हैं क्योंकि इन्हें बुलेट ट्रेन का क्रेडिट नहीं मिलेगा, यह मोदी और बीजेपी के खाते में चला जाएगा. कांग्रेसी भाई भी देशभक्त हैं, देश से प्रेम करते हैं लेकिन गुजरात चुनाव और 2019 में फिर से हार के डर से निराश हैं, इनके अन्दर मोदी सरकार का खौफ समा गया है इसलिए फायदेमंद सौदे को भी घाटे का सौदा बता रहे हैं.

अगर अब भी समझ में ना आये तो इस तरह से समझिये, एक छात्र IIT या IIM में पढने के लिए 10-20 लाख तक का लोन लेता है. जब वह पढ़ाई पूरी करता है तो उसे सालाना 10-20 लाख रुपये की सैलरी मिलती है और वह मात्र 2-3 साल में लोन चुकाकर पूरी जिन्दगी करोड़ों रुपये की कमाई करता है. छात्र ने अगर बैंक से लोन लिया है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह बैंक वालों का या सरकार का गुलाम हो गया. इसी प्रकार से भारत ने जापान से 50 साल के लिए 0.1 परसेंट ब्याज पर लोन लिया है. पांच साल बाद बुलेट ट्रेन चलने लगेगी तो उससे कमाई होने लगेगी और भारत सरकार 50 साल के बजाय 10 साल में ही लोन चुका देगी. 
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1 comment:

  1. कांग्रेस का दर्द कुछ और है, इतने बड़े प्रोजेक्ट में उसे कमिशन खाने को नहीं मिला. कांग्रेस का धंधा ही कमीशन का है, तालाब की खुदाई पर कमीशन, सड़क बनाने पर कमीशन, किसी को नौकरी दिलाने पर कमीशन, रक्षा सौदों पर कमीशन, बिना कमीशन कभी कोई काम किया ही नहीं.

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