Sep 27, 2017

GST में लाकर मोदी बेच सकते हैं 39 रुपये में पेट्रोल, लेकिन तबाह और बर्बाद हो जाएंगे सभी राज्य


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पेट्रोल और डीजल के दामों को लेकर फिर से हाय तौबा मच रही है, मोदी सरकार में भी पेट्रोल और डीजल के दाम सबसे ऊंचाई पर हैं, पेट्रोल के दामों में मोदी कांग्रेस सरकार से सिर्फ तीन रुपये पीछे हैं. कांग्रेस के समय में दिल्ली में पेट्रोल की ऊपरी कीमत 73.37 रुपये थी तो मोदी सरकार में भी पेट्रोल की कीमत 70.40 के आसपास पहुँच चुकी है.

काफी लोग मांग कर रहे हैं कि पेट्रोल और डीजल के दामों पर लगाम लगाने और जनता को मंहगाई से राहत दिलाने के लिए इसे गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के अंतर्गत लाया जाए. ऐसा करने से पेट्रोल की कीमत 39 रुपये हो जाएगी और जनता को मंहगाई से राहत मिल जाएगी.

क्या है मौजूदा टैक्स नीति

अभी ग्राहकों को पेट्रोल पर तीन तरह के टैक्स चुकाने पड़ते हैं एक्साइज ड्यूटी, वैट और डीलर कमीशन. मान लीजिये दिल्ली का कोई ग्राहक पेट्रोल खरीदता है तो उसे 70.38 रुपये प्रति लीटर चुकाने होंगे जिसमें से 36 रूपया टैक्स और कमीशन में जाएगा. इस 36 रुपये में से करीब 24 रूपया राज्य के खाते में जाएगा जबकि 12 रुपये केंद्र के खाते में जाएंगे. 

अब मान लीजिये पेट्रोल GST में लाया जाता है तो इस पर सबसे ऊपरी स्लैब 28 परसेंट टैक्स लगाया जाता है तो 30 रुपये के पेट्रोल पर सिर्फ 9 रुपये के आसपास टैक्स देना होगा. मतलब GST में आने के बाद ग्राहकों को सिर्फ 39-40 रुपये में पेट्रोल मिलेगा.

राज्यों को क्या होगा नुकसान

वर्तमान में राज्यों को पेट्रोल से 24 रुपये प्रति लीटर की कमाई होती है. अगर GST लागू कर दिया गया तो एक रुपये पर 36 रुपये की जगह सिर्फ 9 रुपये टैक्स देना पड़ेगा जिसमें से राज्यों को 28 परसेंट में से 14 परसेंट SGST के रूप में हिस्सा जाएगा. मतलब प्रति लीटर सिर्फ 4.5 रुपये की कमाई होगी. बाकी का 4.5 रूपया केंद्र के हिस्से में जाएगा.

बर्बाद हो जाएगी दिल्ली, बर्बाद होंगे सभी राज्य

अब आप सोचिये, दिल्ली के केजरीवाल सरकार प्रति लीटर 24 रूपया कमा रही है, उसी 24 रुपये में से जनता की मुफ्तखोरी वाली योजनायें चला रहे हैं, जैसे सस्ती बिजली, सस्ता पानी, मोहल्ला क्लिनिक आदि. जब इन्हें 24 रुपये में से सिर्फ 4 रुपये मिलेंगे तो इनकी कमाई बंद हो जाएगी तो इन्हें ये सब योजनायें बंद करनी पड़ेंगी, वरना दिल्ली कर्ज में डूब जाएगी, यही नहीं दिल्ली का विकास भी पूरी तरह से रुक जाएगा क्योंकि पेट्रोल और डीजल से जो टैक्स आता है सरकार उसे विकास के कामों में लगाती हैं. दिल्ली की तरह देश के सभी राज्य बर्बाद हो जाएंगे, उन्हें बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान होगा. सबकी कमाई बंद हो जाएगी तो किसानों का कर्जा माफ़ नहीं कर पाएंगे, सस्ती बिजली नहीं दे पाएंगे, रोड नहीं बना पाएंगे. शिक्षकों को सैलरी नहीं दे पाएंगे.

या तो बंद करनी पड़ेगी मुफ्तखोरी

अगर GST में लाकर पेट्रोल और डीजल सस्ता किया जाता है तो सरकार को हर तरह की मुफ्तखोरी वाली योजनायें बंद करनी पड़ेंगी, जैसे मनरेगा, पेंशन, फ्री होम, टॉयलेट, कर्जा माफी, फ्री अकाउंट खोलना, किसानों की मदद, छात्रों को स्कॉलरशिप, कई तरह के अवार्ड, सस्ता लोन, सिलेंडर पर सब्सिडी, फ्री राशन, सस्ता केरोसीन, सस्ती बिजली आदि.

अगर ये सब मुफ्तखोरी वाली योजनायें बंद कर दी गयीं तो पेट्रोल से होने वाले नुकसान की भरपाई हो जाएगी क्योंकि पेट्रोल और डीजल पर टैक्स लगाकर सरकारें वोट बैंक बढ़ाने वाली योजनायें, जनता को मुफ्तखोर बनाने वाली योजनायें चलाती हैं.
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