Sep 30, 2017

विकास के लिए मोदी ने ले लिया बहुत बड़ा रिश्क, चाहे तो खजाना मुफ्त में बांटकर सबको कर दें खुश


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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल जैसे नेता बिजली पानी सस्ता करके जनता को खुश रखने की कोशिश करते हैं ताकि उन्हें अगली बार भी वोट मिल जाएं, केजरीवाल जनता के लिए मुफ्त योजनाओं के लिए सरकारी खजाने से पैसा खर्च करते हैं लेकिन आखिर केजरीवाल कब तक मुफ्त में बांटेंगे क्योंकि ये सरकारी खजाना कभी ना कभी तो ख़त्म होगा ही, जब खजाना ख़त्म हो जाएगा तो दिल्ली वालों से ही वसूल किया जाएगा, अब ये वसूली चाहें तो केजरीवाल दोबारा आने के बाद करें या कोई अन्य सरकार करे, वसूली होना निश्चित है.

इसी तरह से अगर प्रधानमंत्री मोदी चाहें तो पूरे देश को बिजली-पानी मुफ्त में बांटकर खजाना लुटा सकते हैं, मोदी चाहें तो पेट्रोल डीजल 40-50 रुपये में बेचकर मंहगाई को ख़त्म कर सकते हैं और सब को खुश कर सकते हैं, अगर वे चाहते तो GST को 15 फ़ीसदी के दायरे में रखकर सब कुछ सस्ता कर सकते हैं, लेकिन देशवासियों को मुफ्त में खिलाने पर कभी ना कभी तो खजाना ख़त्म होगा, क्योंकि देशवासी जब खरीदते हैं तो उसी से सरकारी खजाने में पैसा जाता है, जब देशवासियों को सब कुछ सस्ता हो जाएगा तो वे खर्च भी कम करेंगे, अगर वे खर्च कम करेंगे तो सरकारी खजाने में कम टैक्स जाएगा और विकास के लिए पैसे नहीं मिलेंगे. ऐसे में देश बर्बाद हो जाएगा लेकिन दूसरी बार मोदी सरकार जरूर सत्ता में आ जाएगी क्योंकि मंहगाई एकदम घटने से देशवासी कहेंगे कि मोदी ने अच्छे दिन ला दिए, सब कुछ सस्ता कर दिया.

अगर मोदी चाहें तो आसानी से दोबारा सरकार में आ सकते हैं, लेकिन मोदी ने देश के विकास के लिए बहुत बड़ा रिश्क ले लिया है क्योंकि उनका मानना है कि विकास ही सभी समस्याओं का समाधान है. यह बात एकदम सच है, भारत में बेईमान भरे पड़े हैं, अधिकतर लोग टैक्स देना ही नहीं चाहते या टैक्स के झमेलों से बचने की कोशिश करते हैं, वहीँ विकास हर कोई चाहता है, अच्छे रोड, अच्छे अस्पताल और अच्छे सरकारी स्कूल सभी को चाहिए. भारत की आबादी 1.30 अरब है लेकिन यहाँ पर सिर्फ 1 करोड़ लोग देते हैं और उसका 60 फ़ीसदी हिस्सा सिर्फ अमीर उद्योगपतियों से आता है. राहुल गाँधी जैसे नेता कहते हैं कि मोदी अमीरों के लिए काम करते हैं लेकिन आप सोचिये अमीर लोग ही युवाओं के लिए रोजगार पैदा करते हैं और सरकारी खजाने में 60 फ़ीसदी टैक्स भी देते हैं.

कहने का मतलब ये है कि नोटबंदी करके मोदी ने बहुत बड़ा रिस्क लिया था, उसके बाद GST लागू करके और भी बड़ा रिश्क ले लिया है क्योंकि भारत को टैक्स चोरों और ब्लैक इकॉनमी वाला देश कहा जाता था, यहाँ पर अधिकतर छोटे और माध्यम व्यापारी टैक्स देना ही नहीं चाहते या इसके फायदों के प्रति जागरूक नहीं हैं, अब उन्हें टैक्स देना पड़ रहा है तो पसीनें छूट रहे हैं, अब उन्हें मोदी सरकार खराब लग रही है, लेकिन जब ये लोग GST और टैक्स भरने के फायदे जानेंगे तो मोदी सरकार इन्हें पसंद आने लगेगी.

आपको बता दें कि नोटबंदी के बाद भी बेईमानों को परेशानी हुई थी, अब GST के बाद भी बेईमानों को ही परेशानी हो रही है लेकिन पांच-छः महीनों के बाद फिर से हालात सामान्य हो जाएंगे. तब तक मोदी को जितना कोसना है कोस लें, मोदी को सिर्फ विकास कराने से मतलब है और इसके लिए पैसे चाहियें, पैसे सिर्फ टैक्स से आयेंगे, लेकिन ये पैसे देशवासियों की सुविधाओं पर ही खर्च होंगे, इन्हीं पैसों से रोड बन रहे हैं, 24 घंटे बिजली का प्रबंध किया जा रहा है, गरीबों को फ्री सिलेंडर दिया जा रहा है, किसानों के लिए सस्ता लोन दिया जा रहा है और उनकी कर्ज माफी की जा रही है, बुजुर्गों को पेंसन दी जा रही है, मुद्रा योजना के जरिये रोजगार के लिए सस्ता लोन दिया जा रहा है. पैसे होंगे तभी मोदी गरीबों के लिए काम कर पाएंगे. कुछ लोगों को परेशानी हो रही है क्योंकि इन्हें टैक्स देना पड़ रहा है लेकिन जल्द ही इन्हें भी GST के फायदे मिलने लगेंगे.
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