Sep 11, 2017

युवाओं से बोले मोदी, कॉलेज में खूब मनाओ रोज-डे, मेरी तरफ से पूरी आजादी लेकिन ‘ये भी करो’


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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज अलग ही मूंड में दिखे, उन्होंने विवेकानंद के शिकागो में दिए गए ऐतिहासिक भाषण के दिवस पर दिल्ली के विज्ञान भवन में युवाओं को संबोधित किया और उनका हौसला बढाया. मोदी युवाओं से कनेक्ट होना चाहते थे इसलिए उनके जैसी बातें करने लगे.

मोदी ने कहा कि हमारे देश के युवा कॉलेज में डे मनाते हैं, कभी रोज-डे मनाते हैं, कभी कोई और डे मनाते हैं. किसी को अच्छा लगता है, किसी को बुरा लगता है, कोई विरोध भी करता है, ऐसे लोग भी हैं हमारे देश में, ये लोग यहाँ भी बैठे होंगे लेकिन मैं इसका विरोधी नहीं हूँ.

मोदी ने युवाओं से कहा - देखिये हमें रोबोट तैयार नहीं करने हैं, हमें क्रिएटिविटी चाहिए, हमारे भीतर के इंसान की संवेदनाएं प्रकट करने के लिए यूनिवर्सिटी कैम्पस से बढ़िया कोई जगह नहीं है.

मोदी ने कहा कि - लेकिन क्या हमें कभी विचार आता है कि हरियाणा का कॉलेज हो और हम तय करें कि आज हम तमिल डे मनाएंगे. पंजाब का कॉलेज हो और तय करें कि हम आज केरल डे मनाएंगे, हम उनके दो गीत गाएंगे, उनके लिए दो गीत सुनेंगे, उनके जैसे कपडे पहनकर उस दिन कॉलेज आएँगे, हाथ से चावल खाने की आदत डालेंगे. कॉलेज में कोई मलयालम फिल्म देखेंगे, कोई तमिल फिल देखेंगे, कॉलेज के छात्रों से कहेंगे कि आओ भाई तमिल में खेल कैसे खेलते हैं, हम खेलते हैं.

मोदी ने कहा कि मुझे बताओ ये डे मानेगा कि नहीं मानेगा. वो डे प्रोडक्टिव होगा या नहीं होगा, एक भारत श्रेष्ठ भारत बनेगा या नहीं बनेगा. हम विविधता के बारे में बहुत बोलते हैं लेकिन क्या हम इसका गौरव कर सकते हैं. हम जब तक हिंदुस्तान में हमारे हर राज्य के प्रति गौरव नहीं करेंगे, हर भाषा के लिए गौरव नहीं करेंगे, हम एक भारत श्रेष्ठ भारत का सपना नहीं साकार कर पाएंगे.

मोदी ने कहा कि - क्या हमारा मन नहीं करता कि हम अपनी यूनिवर्सिटी में ऐसा माहौल बनाएं, ऐसे भी डे मनाएं, क्या हमारा मन नहीं करता कि हम सिख गुरुओं का डे मनाकर उनके त्याग, तपस्या और वलिदान को याद करें. हम करके देखें तो सही या सिर्फ भांगड़े में ही रह जाएंगे क्या. 

मोदी ने कहा कि क्रिएटिव इंडिया में क्रिएटिविटी के बिना जिंदगी नहीं है. हम रोबोट नहीं बन सकते. हमारे भीतर का इंसान हर पल उजागर होते रहना चाहिए, लेकिन हम वो काम करें जिससे देश की ताकत बढे, देश का सामर्थ्य बढे और देश की जो आवश्यकता है उसकी पूर्ती हो.
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