Sep 11, 2017

मोदी बोले, गलती हमारी है, अगर हमने 1893 का 26/11 ना भुलाया होता तो 2001 वाला 26/11 ना होता


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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज दिल्ली के विज्ञान भवन में युवाओं को संबोधित किया. प्रधानमंत्री मोदी स्वामी विवेकानंद के उस भाषण को याद कर रहे थे जो उन्होंने 1893 में 11 सितम्बर को शिकागो में दिया था. विवेकानंद का वह भाषण ऐतिहासिक था. आज तक दुनिया के किसी भी नेता के भाषण की इतनी चर्चा नहीं होती है जितनी विवेकानंद की हुई थी और आज भी हो रही है हालाँकि पूर्व सरकारों ने स्वामी विवेकानंद को भुलाने की कोशिश की, उनके सन्देश को भुलाने की कोशिश की, उन्होंने भारत को जो रास्ता दिखाया था उसे भुलाने की कोशिश की, क्योंकि हमारे देश में कांग्रेस ने ही सबसे लम्बे समय तक शासन किया है इसलिए इसकी गुनहगार भी कांग्रेस ही है इसलिए आजबिना नाम लिए इशारों इशारों में कांग्रेस को धो डाला.

मोदी ने कहा कि आज 11 सितम्बर है. विश्व को 2001 से पहले पता ही नहीं था की 9/11 का महात्मय क्या है. दोष दुनिया का नहीं था, दोष हमारा था क्योंकि हमने ही उसे भुला दिया था और अगर हम ना भुला देते तो शायद 21वीं शताब्दी का भयानक 9/11 ना होता.

मोदी ने कहा कि सवा सौ साल पहले एक 9/11 था जिस दिन इस देश के एक गेरुआ वस्त्र धारी नौजवान ने, दुनिया जिस कपडे से भी परिचित नहीं थी, विश्व जिसे गुलाम भारत के प्रतिनिधि के रूप में देख रहा था, लेकिन उस नौजवान के आत्म विश्वास में वह ताकत थी कि ना गुलामी की छाया उसके मन में थी और ना व्यवहार में थी, ना उसकी वाणी में थी. आप खुद सोचिये, उसनें अपने अन्दर कौन सी विरासत को संजोया होगा कि गुलामी के 1000 साल के बावजूद भी उसके भीतर वो ज्वाला धधक रही थी, वो विश्वास उमड़ रहा था कि उसनें दुनिया को समझा दिया कि विश्व को बहुत कुछ देने का सामर्थ्य हमारी धरती में है, यहाँ के चिंतन में है, यहाँ की जीवन शैली में है.

मोदी ने कहा कि यह असामान्य घटना थी, हम खुद सोचें कि जब हमारे चारों तरफ जब निगेटिव चलता हो, हमारी सोच के विपरीत चलता हो, चारों तरफ आवाज उठ रही हो, ऐसे में हमें अपनी बात बोलनी हो तो कितना डर लगता है, हम चार बार सोचते हैं कि पता नहीं कोई गलत अर्थ तो नहीं निकालेगा, ऐसा दबाव पैदा होता है, लेकिन इस महापुरुष विवेकानंद की वह कौन सी ताकत थी कि इस दबाव का उसनें कभी अनुभव ही नहीं किया, अपने भीतर की ज्वाला को महसूस करके उन्होंने विश्व को रास्ता दिखाने का प्रयास किया था.

मोदी ने कहा कि विश्व को पता भी नहीं था कि लेडीज और जेंटलमैन के अलावा भी कुछ बोल सकते हैं लेकिन जिस समय विवेकानंद के मुंह से ब्रदर्स एंड सिस्टर निकला, न्यूयार्क तक तालियों से गूँज उठा. केवल दो शब्दों में उन्होंने दुनिया को भारत की ताकत से परिचय करा दिया.

मोदी ने कहा कि वो एक 9/11 था जब उस महापुरुष ने माँ भारती की पद यात्रा करने के बाद, उन्होंने हर भाषा, हर बोली को आत्मसात किया था, उन्होंने एक प्रकार से भारत माँ की जागृत अवस्था को अपने भीतर पाया था, ऐसा एक महापुरुष पल दो पल में पूरे विश्व को अपना बना लेता है, पूरे विश्वा को अपने अन्दर सामाहित कर लेता है. पूरे विश्व को अपनत्व की पहचान देता है, पूरे विश्व को जीत लेता है, वह 9/11 विश्व विजयी दिवस था.

मोदी ने कहा कि 21वीं सदी के प्रारंभ का वो 9/11 जिसमें मानव जाति को एक विनाश का मार्ग, संघर्ष का मार्ग दिखाया, उसी अमेरिका की धरती पर एक 9/11 पर प्रेम और अपनत्व का सन्देश दिया जाता है उसी अमेरिका की धरती पर उस सन्देश को भुला देने का परिणाम था कि वहां पर आतंकवादी हमला हो गया. 9/11 को हमला होने के बाद दुनिया को समझ में आया कि भारत से निकली हुई आवाज को इतिहास में कितनी जगह मिलती है और आतंकवादी हमले को इतिहास में कितनी जगह मिलती है.
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