Sep 25, 2017

अगर गोडसे गाँधी को ना मारता तो आज ‘हर हिन्दू पढ़ता नमाज मक्का और मदीने में’: कमल आग्नेय


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युवा और उत्साह से भरे कवि कमल आग्नेय ने अपनी कविताओं से कवि जगत में तहलका मचा दिया है, हाल ही में उनकी एक कविता बहुत पॉपुलर हो रही है जिसमें उन्होंने गाँधी पर भी कटाक्ष किया है. कमल ने अपनी कविता में गोडसे द्वारा गाँधी की हत्या को जायज ठहराया है क्योंकि अगर गाँधी को ख़त्म ना किया जाता तो सभी हिन्दू आज मक्का-मदीने में नमाज पढ़ रहे होते क्योंकि गाँधी होते तो भारत में एक भी हिन्दू ना बचता, क्योंकि गांधीजी ने भारत के टुकड़े करवाए, अगर वे जिन्दा होते तो कई और टुकड़े हो जाते. यह बातें कमल ने अपनी इस कविता में कही हैं, आप भी पढ़ें - 

कमल आग्नेय की कविता

जिस धरती ने विश्व गुरु बन वशुधा का उद्धार किया
कालांतर में कुछ यवनों ने उसपर ही अधिकार किया
ब्रह्म सूत्र फेंके जाते थे लाल लाल अंगारों पर
जिसनें तिलक लगायी उसकी गर्दन थी तलवारों पर
यवनों से मुक्ति पायी तो यवनों पर अटक गए
जैसे आसमान से टपके और खजूर पर लटक गए
कारतूस में अंग्रेजों के द्वारा चर्बी भरने पर
भारत का सोया पौरुष जागा गौ-माता के मरने पर
महासमर का विगुल बजा, मंगल पाण्डेय की फांसी से
रणचंडी बनकर निकली लक्ष्मी बाई भी झाँसी से
मातृभूमि पर पुनः गुलामी का जब संकट गहराया
तब भारत का का बेटा अफ्रीका से घर वापस आया
सत्य अहिंसा का व्रत धारी, तीव्र वेग की आंधी था
आजादी का सपना पाले वह व्यक्ति महात्मा गाँधी था
गांधीजी तो गोरों से आजादी का दम भरते थे
इसीलिए शेखर, सुभाष भी उनका आदर करते थे
माना गांधीजी ने कष्ट सहे थे अपनी पूरी निष्ठा से
और भारत प्रख्यात हुआ है उनकी अमर प्रतिष्ठा से

सत्य अहिंसा कभी कभी अपनों पर ही ठन जाता है
घी और शहद अमृत हैं लेकिन मिलकर विष बन जाता है
गांधीजी को विश्वास नहीं था कभी क्रांति की पीढ़ी पर
धीरे धीरे बापू चढ़ गए अहंकार की सीढ़ी पर
तुष्टिकरण के खूनी खंजर घोंप रहे थे गांधीजी
अपने सारे निर्णय हमपर थोप रहे थे गांधीजी
महाक्रान्ति का हर नायक तो उनके लिए खिलौना था
उनके हठ के आगे जम्मू द्वीप हमारा बौना था
निरपेक्ष धर्म के प्याले ने विष पीना हमको सिखा दिया
दो चांटे खाकर बेशर्मी से जीना सिखा दिया
इसीलिए भारत अखंड, भारत अखंड का दौर गया
भारत से पंजाब, सिंध, रावलपिंडी, लाहौर गया

तब जाकर सफल हुए जालिम जिन्ना के मंसूबे
गांधीजी अपनी जिद में पूरे भारत को ले डूबे
भारत के इतिहासकार थे, चाटुकार दरबारों में
अपना सबकुछ बेच चुके थे नेहरु के परिवारों में
जब भारत को टुकड़े टुकड़े करने की तैयारी थी
तब नाथू ने गाँधी के सीने पर गोली मारी थी

ये स्वराज परिणाम नहीं है, गाँधी के आन्दोलन का
इन यज्ञों का हव्य बनाया शेखर ने पिस्टल गन का
लाल लहू से अमर फसल ये तब जाकर लहरायी है
7 लाख के प्राण गए तब जाकर आजादी पायी है
हिन्दू अरमानों की जलती एक चिता थे गांधीजी
कौरव का साथ निभाने वाले भीष्मपिता थे गाँधी जी

आप चाहते तो इरविन तक को झुका सकते थे,
भगत सिंह की फांसी दो पल में रुकवा सकते थे
इस माटी के तीन लाडले, लटक गए तब फंदों से
भारत माता हार गयी अपने घर के जयचंदों से

मंदिर में पढ़कर कुरान तुम विश्व विजेता बने रहे
ऐसा करके तुम मुस्लिम जन मानस के नेता बने रहे
एक नवल गौरव गढ़ने के हिम्मत तो करते बापू
मस्जिद में गीता पढने की हिम्मत करते बापूजी
गांधीजी का प्रेम अमर था, केवल चाँद सितारे से
उसका फल हम सबने पाया भारत के बंटवारे से
गाँधी जी ने नहरू को दे दी चाभी सत्ता की
लेकिन पीड़ा देख ना पाए, श्रीनगर कलकत्ता की,
रेलों में हिन्दू काट काटकर भेज रहे पाकिस्तानी
टोपी के लिए दुखी थे पर चोटी की एक नहीं मानी
सत्य अहिंसा का ये नाटक बस केवल हिन्दू पर था
उस दिन नाथू के महाक्रोध का पानी सर से ऊपर था
गया प्रार्थना सभा में गाँधी को करने अंतिम प्रणाम
ऐसी गोली मारी उनको याद आ गए श्री राम
जिनकी भूलों के कारण भारत के हिन्दू छले गए
वो बापू 'हे राम' बोलकर देवलोक को चले गए
नाथूराम ने अपनी मातृभूमि को सब कुछ अर्पण कर डाला
गाँधी का वध करके अपना आत्मसमर्पण कर डाला

आजादी के बंद रहस्यों का उद्यापन करना है
नाथू के इस अमर सत्य का अब सत्यापन करना है
मूक अहिंसा के कारण भारत का आँचल फट जाता
गाँधी जीवित होते तो फिर देश दोबारा बंट जाता

अरे अहिंसा के कारण सेना को विष चखवा दें क्या
या सीमा से सस्त्र हटाकर चरखें रखवा दें क्या
थक गये हैं हम प्रखर तथ्य की अर्थी को ढोते ढोते
कितना अच्छा होता जो नेताजी राष्ट्रपिता होते

धर्म परायणता का सिंधु घोर चरम पर आएगा
जन गण मन से अधिक प्रेम जब वंदे मातरम पर आएगा
उसी समय ये दुनिया हमको संप्रदायी बतलाती है
राष्ट्रभक्त की पराकाष्ठा राष्ट्रद्रोह हो जाती है
नाथू को फांसी पर लटकाकर गांधीजी को न्याय मिला
और मेरी भारत माँ को बंटवारे का अध्याय मिला
लेकिन जब जब कोई भीष्म कौरव का साथ निभाएगा
तब तब कोई अर्जुन उन पर रण में तीर चलाएगा

जिन्ना ने रेलों में भेजा था अंश हमारी बोटी का
नाथू ने सम्मान बचाया सबकी चन्दन चोटी का
अगर गोडसे की गोली उतरी ना होती सीने में 
हर हिन्दू पढ़ता नमाज फिर मक्का और मदीने में 


भारत की बिखरी भूमि अब तलक समाहित नहीं हुई

नाथू की रखी अस्थि अब तलक प्रवाहित नहीं हुई
उनकी अस्थि प्रतीक्षा करती सिंधु के पावन जल की
उसके लिए जरूरत हमको श्री राम के तन बल की
इससे पहले अस्थि कलश को सिंधु की लहरें सीचें
पूरा पाक समाहित कर लो भगवा झंडे के नीचे

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