Sep 21, 2017

भारत पर पहला ह्यूमन राईट भारतीयों का है, अवैध घुसपैठिये रोहिंग्या का नहीं: राजनाथ सिंह


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केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह रोहिंग्या पर फुल एक्शन में आ गए हैं. राजनाथ सिंह ने रोहिंग्या मसले पर बोलते हुए कहा है कि भारत के अन्दर जो रिसोर्सेज हैं, इन पर हर भारतीयों का पहला हक है, इसलिए हर भारतीय के ह्यूमन राईट का संरक्षण करना हमारा पहला कर्त्तव्य है.

उन्होंने कहा कि कई बार मानवाधिकारों के नाम पर ऐसी चीजों को बढ़ावा दिया जाता है जिससे भारतीय और भारतीयता दोनों ही खतरे में पड़ने का अंदेशा पैदा हो जाता है. दूसरों के मानवाधिकारों की चिंता करने से पहले हमें अपने हितों की चिंता करनी है और उनका संरक्षण करना है, इस ओर भी हमें विशेष ध्यान रखना पड़ेगा. 

राजनाथ सिंह ने कहा कि आज भारत वर्ष में भी ह्यूमन राईट की चर्चा फिर से तेज हो गयी है. कुछ लोग जो भारत के अन्दर अवैध तरीके से घुस आये हैं अब उनको लेकर मानवाधिकारों की बात हो रही है, 

राजनाथ सिंह ने कहा कि हमने सुप्रीम कोर्ट में जो एफिडेविट करना था कर दिया है. म्यांमार से भारत घुस आये ये रोहिंग्या रिफ्यूजी नहीं हैं इस सच्चाई को हमें समझना होगा. रिफ्यूजी स्टेट्स प्राप्त करने के लिए एक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है और हमारे यहाँ रह रहे अवैध प्रवासियों में से किसी ने भी उस प्रक्रिया को अपनाया नहीं है. उन्होंने कहा कि रोहिंग्या लोगों को भारत से डिपोर्ट करके भारत किसी भी अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का उल्लंघन नहीं करेगा क्योंकि वह 1951 के UN रिफ्यूजी कन्वेंशन का भी सिग्नेटरी नहीं है.

राजनाथ सिंह ने कहा कि कुछ लोग तर्क देते हैं कि हम इंटरनेशनल लॉ का उल्लंघन कर रहे हैं, ऐसा कुछ नहीं है, इंटरनेशनल लॉ का कहीं पर कोई उल्लंघन नहीं है, क्योंकि UN रिफ्यूजी कन्वेंशन के हम सिग्नेटरी नहीं हैं.

उन्होंने कहा कि किसी भी रोहिंग्या ने भारत में Asylum नहीं लिया है और ना ही किसी ने आज तक इसकी एप्लीकेशन दी है. इसलिए ह्यूमन राईट का हवाला लेकर अवैध अप्रवासी को रिफ्यूजी बताने की गलती नहीं करनी चाहिए. कोई भी स्वतंत्र देश इस बात के लिए स्वतंत्र है कि वह अवैध प्रवासियों पर एक्शन ले सकता है.

राजनाथ सिंह ने कहा कि रोहिंग्या समुदाय के घुसपैठ का एक पक्ष नेशनल सिक्यूरिटी से भी जुड़ा है, इस हकीकत को भी लोगों को समझना चाहिए. इन सारी बातो के बावजूद भी हम लोगों ने रोहिंग्या समुदाय के लोगों को बंगलादेश में मानवीय सहायता प्रदान की है. हमने मानवाधिकार को ध्यान में रखते हुए जितनी भी सहायता दी जा सकती है हमने दी है.

उन्होंने कहा कि अभी कुछ ही दिन पहले हमारे प्रधानमंत्री ने म्यांमार की राजनेता सू ची ने रोहिंग्या लोगों को वापस लेने का बयान दिया है इसलिए अगर भारत को डिपोर्ट करता है तो लोगों को क्या आपत्ति है, बर्मा लोगों को लेने के लिए तैयार है. मुझे पूरा विश्वास है कि बर्मा इस मामले में कोई ठोस कदम उठाएगा.
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