Sep 23, 2017

पेट्रोल डीजल सस्ता करके बंद कर देना चाहिए फ्री में राशन बांटना, भ्रष्टाचार भी हो जाएगा ख़त्म


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कांग्रेस के लोग मोदी सरकार और बीजेपी पर उनके ही हथियार से वार कर रहे हैं. 2014 से पहले जब केंद्र में कांग्रेस सरकार थी तब भी पेट्रोल मंहगा था और उस वक्त तो 73.37 रुपये तक जा पहुंचा था. उस वक्त बीजेपी के लोग भी मंहगे पेट्रोल का मुद्दा उठाते थे, बीजेपी के लोग भी कहते थे कि पेट्रोल की लागत में सिर्फ 30 रुपये का खर्च आता है जबकि कांग्रेस सरकार 73 रुपये में बेचकर 40-45 रुपये का मुनाफा कमा रही है, कांग्रेस के समय में भी गरीबों को सस्ता राशन देने के लिए पैसे की जरूरत होती थी और उस पैसे की व्यावस्था पेट्रोल बेचकर ही की जाती थी, कांग्रेस के समय में भी बुजुर्गों को पेंशन, छात्रों को स्कॉलरशिप दी जाती थी लेकिन यह सब पेट्रोल मंहगे दामों में बेचकर ही किया जाता था, कोई भी सरकार को, अगर एक हाथ से किसी को दे रही है तो दूसरे हाथ से लेती भी है, एक की जेब काटकर दूसरे की जेब में डालती है.

फिलहाल अब कांग्रेस भी बीजेपी पर उनके ही हथियार से हमला कर रही है, कांग्रेस ने मंहगे पेट्रोल और डीजल का मुद्दा उठाकर आज ट्विटर पर 'बीजेपी का मंहगा विकास' ट्रेंड कर दिया है. कांग्रेस का कहना है कि मोदी सरकार पेट्रोल और डीजल पर खूब पैसा कमा रही है. खैर कमाती तो कांग्रेस सरकार भी थी लेकिन अब कांग्रेस की सरकार नहीं है इसलिए उन्होंने यह जानते हुए भी कि गरीबों को सस्ता राशन, बुजुर्गों को पेंशन और किसानों का लोन माफ़ करने के लिए पेट्रोल मंहगा बेचना ही पड़ता है, लेकिन कांग्रेस को अब इससे मतलब नहीं है क्योंकि उसे पेट्रोल का मुद्दा उठाने में राजनीतिक फायदा नजर आ रहा है.

मोदी सरकार आसानी से पेट्रोल और डीजल के दाम 50 के आसपास कर सकती है लेकिन इसके लिए गरीबों को 2 रुपये किलो में गेंहू और 1 रुपये किलो में चावल की योजना बंद करनी पड़ेगी क्योंकि पेट्रोल से कमाकर ही मोदी सरकार गरीबो को 20 रुपये वाला गेंहू सिर्फ 2 रुपये में जबकि 30-40 रुपये वाला चावल सिर्फ 1 रुपये में देती है. वैसे भी अगर पेट्रोल-डीजल के दाम कम कर दिए जाँय तो लोग उसी पैसे से अनाज खरीद सकेंगे.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हर लीटर पेट्रोल पर 35 रुपये की बचत होती है, लेकिन पूरा 35 रूपया केंद्र सरकार के खाते में नहीं जाता, उसमें से 24 रूपया राज्य सरकार के खाते में जाता है जबकि केंद्र सरकार सिर्फ 12.46 रुपये कमाती है, लेकिन इस 12 रुपये में ही केंद्र सरकार सभी राज्यों में गरीबों को 2 रुपये में गेंहू और 1 रुपये में चावल देती है. 


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