Aug 21, 2017

आखिर UP में ही क्यों हो रहे ट्रेन हादसे, क्या UP में ही चलती हैं ट्रेनें, मकसद क्या है: पढ़ें


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पिछले एक साल में उत्तर प्रदेश में तीन बड़े ट्रेन हादसे हुए, एक इटावा के पास हुआ, दूसरा कानपुर के पास हुआ और तीसरा मुजफ्फरनगर में हुआ, इटावा में करीब 50 लोगों की मौत हुई, कानपुर में करीब 150 लोगों की मौत हुई और मुजफ्फरनगर में करीब 24 लोगों की मौत हुई. तीनों जगह जान-माल का काफी नुकसान हुआ, रेलवे का भी काफी नुकसान हुआ और केंद्र की मोदी सरकार पर भी तीन बड़े कलंक लग गए.

तीनों जगह पर हुए ट्रेन हादसे में पाकिस्तानी आतंकवादी संगठनों, ISI और रेलवे अधिकारियों का नाम सामने आ रहा है. मुजफ्फरनगर ट्रेन हादसा तो ऐसा है कि जिस पर यकीन करना मुश्किल है. वहां पर बिना स्टेशन मास्टर की अनुमति के ट्रैक की मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया, पटरी काटकर अलग कर दी गयी, इसकी सूचना ना तो स्टेशन मास्टर को दी गयी और ना ही ट्रेन के ड्राईवर को दी गयी, जब ट्रेन आयी तो ट्रैक को कटा हुआ छोड़कर कर्मचारी भाग गए और इतना भयानक एक्सीडेंट हो गया. गहराई से सोचने पर समझ आता है कि यह एक्सीडेंट अपने आप नहीं हुआ बल्कि कराया गया है.

अब सोचने वाली बात ये है कि आखिर उत्तर प्रदेश में ही ट्रेन हादसे क्यों हो रहे हैं, इससे फायदा किसको हो रहा है और नुकसान किसको हो रहा है.

पहले सवाल का जवाब ये है कि उत्तर प्रदेश में ट्रेन हादसे इसलिए हो रहे हैं क्योंकि वहां पर 2014 लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 80 में से 71 सीटें मिली थीं और इन्हीं सीटों के दम पर मोदी सरकार बनी थी. 

दूसर सवाल का जवाब ये है कि ट्रेन हादसों से विपक्षी पार्टियों खासकर कांग्रेस, सपा और बसपा को फायदा हो रहा है क्योंकि इन्हें मोदी सरकार के खिलाफ मुद्दा मिल रहा है. उत्तर प्रदेश में बीजेपी के खिलाफ तीनों पार्टियाँ महागठबंधन बनाने वाली हैं, ऐसे में ट्रेन हादसों का आरोप लगाकर यूपी की जनता को मोदी सरकार के खिलाफ खड़ा किया जा सकता है, मतलब यूपी में जितना ट्रेन हादसे अधिक होंगे इन्हें बीजेपी के खिलाफ उतनी ही अधिक मुद्दे मिलेंगे.

तीसरा सवाल ये है कि इससे नुकसान किसका हो रहा है. जाहिर है बीजेपी और मोदी सरकार का नुकसान हो रहा है क्योंकि ट्रेन हादसे होते ही विपक्षी यही बोलते हैं कि - मोदी सरकार में ट्रेन हादसे बढ़ गए हैं, लोग असुरक्षित हैं, किसी की सुरक्षा की गारंटी नहीं है, मोदी सरकार सपने तो बुलेट ट्रेन के दिखा रही है लेकिन रेलवे संभालना इनके बस में नहीं है. मतलब हर ट्रेन हादसे के बाद विपक्षी नेता टीवी-डिबेट में सिर्फ यही बातें बोलते हैं. साफ़ शब्दों में कहें तो ट्रेन हादसों से विपक्षियों को मोदी सरकार के खिलाफ मुद्दा मिल रहा है और यूपी में ही ट्रेन हादसे इसलिए कराए जा रहे हैं क्योंकि वहां पर बीजेपी को सबसे अधिक 71 सीटें मिली थीं. अगर यहाँ पर बीजेपी को कमजोर कर दिया गया तो 2019 में मोदी सरकार की वापसी मुश्किल हो जाएगी.
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1 comment:

  1. let the truth come in front of people arrest the responsible culprit and question them aggressively so that they should tell the truth and bring the culprits out in jail they should never come out of jail further

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