Aug 30, 2017

राष्ट्रीय मुस्लिम मंच ने की अपील, अबकी बार ना काटो बकरे की गर्दन, केक काटकर मनाओ बकरीद


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2 सितम्बर को ईद-उल-जुहा यानी बकरीद का त्यौहार है. बकरों और भैंसों की बिक्री शुरू हो गयी है. लाखों बकरे और भैंसे कटने को तैयार हैं. गलियां, नाले खून के रंग से रंगने को तैयार हैं. हर तरफ खून-खराबा, गन्दगी होने वाली है, प्रदुषण फैलेगा और पर्यावरण को बहुत नुकसान होगा. इस बीच राष्ट्रीय मुस्लिम मंच ने सभी मुस्लिमों से अपील की है कि वे बकरीद पर बकरा और गाय-भैंस काटने के बजाय केक काटकर खुशियाँ मनाएं.

आपको बता दें कि राष्ट्रीय मुस्लिम मंच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा मुस्लिमों का संगठन है. कल इस मंच ने लखनऊ में एक प्रेस कांफ्रेंस करके उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुसलमानों को जानवरों को ना काटने की अपील की. उन्होंने कहा कि अगर खुशियाँ मनाना चाहते हैं तो केक काटकर सांकेतिक तौर पर बकरीद मनाएं.

आपको बता दें कि राजा रईस खान राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के यूपी और उत्तराखंड के प्रमुख हैं. राजा रईस ने मुस्लिमों को कुरान और हदीस का हवाला देते हुए कहा कि हमारे पैगम्बर कभी बेजुबान जानवरों की कुर्बानी के पक्ष में नहीं थे, उन्होंने हमेशा बेजुबान जानवरों पर रहमत बरतने को कहा था.

राजा रईस ने कहा कि जानवरों की कुर्बानी बकरीद पर जायज ही नहीं है क्योंकि जब खुद रसूल ने अपने बेटे की कुर्बानी देनी चाहिए थी तो अल्लाह ने उन्हें जिन्दगी बख्शी थी. जब अल्लाह किसी की जान नहीं लेना चाहते तो जानवर क्यों काटे जाते हैं. बकरीद पर कुर्बानी देने की प्रथा है लेकिन कुर्बानी देने वाले की जब अल्लाह ने जिन्दगी बख्श दी तो हम जानवरों की जिन्दगी क्यों नहीं बख्शते.

राजा रईस ने कहा कि कुरान में गाय की कुर्बानी भी इस्लाम के खिलाफ है क्योंकि कुरान में भी गाय काटने की पाबन्दी है. जब खुद हमारे पैगम्बर ने गायों की हत्या पर पाबन्दी लगाई थी तो मुस्लिमों को भी उनकी बात जरूर माननी चाहिए. उन्होंने कहा कि हमने पिछले वर्ष भी केक काटकर बकरीद मनाई थी और इस वर्ष भी ऐसा ही करेंगे.
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