Aug 9, 2017

दुनिया समझती थी ताकतवर लेकिन बहुत कमजोर लीडर निकले अहमद पटेल, जीतकर भी हारे: पढ़ें क्यों


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अहमद पटेल को कांग्रेस का दूसरा सबसे ताकतवर नेता माना जाता है, पहले नंबर पर सोनिया गाँधी हैं और दूसरे नंबर पर अहमद पटेल, कांग्रेस की 10 साल की सरकार में उन्हें सुपर पीएम माना जाता था क्योंकि वे सोनिया गाँधी के सलाहकार हैं, मनमोहन सिंह का रिमोट सोनिया गाँधी के हाथों में था और सोनिया गाँधी का रिमोट अहमद पटेल के हाथों में था, वे सरकार को जैसे चाहते थे चलाते थे.

अब तक अहमद पटेल को बहुत ताकतवर नेता और रणनीतिकार माना जाता था लेकिन गुजरात राज्य सभा चुनाव ने उन्हें एक कमजोर नेता साबित कर दिया, यह भी साबित हो गया कि रणनीति बनाने के मामले में वे बहुत कमजोर हैं और उनकी इन्हीं रणनीतियों की वजह से देश ने कांग्रेस के 10 वर्षों का कुशासन देखा और लाखों करोड़ रुपये के घोटाले हुए.

अब आप खुद देखिये, गुजरात विधानसभा चुनाव से एक महीना पहले कांग्रेस के पास 59 विधायक थे, अहमद पटेल को राज्य सभा चुनाव जीतने एक लिए केवल 45 विधायकों के वोटों की जरूरत थी लेकिन चुनाव के दिन उन्हें सिर्फ 41 कांग्रेसी विधायकों ने वोट दिए. मतलब एक ही महीनें में उनके 18 विधायक भाग लिए. अब आप बताइये, जो नेता अपने विधायकों को ना रोक पाए, उनके भागने से रोकने के लिए होटल में बंद करना पड़े. क्या ऐसे नेता को पॉवरफुल नेता माना जाएगा, कत्तई नहीं. विधायकों को होटल में बंद करना गुंडागर्दी है और एक अच्छा नेता ऐसी हरकत करने की सोच भी नहीं सकता लेकिन अहमद पटेल ने ऐसा किया.

आप यह भी देखिये, अहमद पटेल ने 44 कांग्रेसी विधायकों को होटल में कैद किया लेकिन उसमें से भी उन्हें सिर्फ 41 वोट मिले, इतना सब कुछ करने के बाद भी वह अपने तीन विधायकों को बगावत करने से नहीं रोक पाए जो साबित करना है कि उनके अन्दर लीडरशिप के गुण नहीं हैं.

15 अतिरिक्त वोट होने के बाद भी अहमद पटेल को 44 वोट लेने के लिए पता नहीं क्या क्या करना पड़ा, अपने विधायकों को बैंगलोर भेजा, सुरक्षा में रखा, ऐश कराया, उन्हें वापस बुलाकर गुजरात में फिर से रिजोर्ट में बंद किया, वोट के वक्त एक एक हरकत की निगरानी किया, उन्होंने पता नहीं क्या क्या किया, अपना पूरा सिस्टम लगा दिया फिर भी उन्हें सिर्फ आधे वोट से जीत मिली. अगर एक बीजेपी नेता उन्हें वोट नहीं करता तो वे कदापि ना जीतते.

अगर अहमद पटेल वाकई में एक अच्छे लीडर होते तो 59 कांग्रेस विधायक उनपर विश्वास करते और हँसते हँसते उन्हें वोट दे देते, उन्हें इस तरह से विधायकों पर पहरा नहीं बिठाना पड़ता और 59 में से सिर्फ 41 वोट नहीं मिलते, लेकिन ऐसा नहीं हुआ इसलिए अहमद पटेल ने खुद को एक कमजोर नेता साबित कर दिया. पूरे देश में सन्देश गया है कि अहमद पटेल अपने विधायकों को कण्ट्रोल नहीं कर सकते.
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