Aug 19, 2017

प्रतापगढ़ के DM ने CM योगी के आदेश का किया उल्लंघन, खबर लिखने वाले पत्रकार को दी धमकी: पढ़ें


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Pratapgarh: उत्तर प्रदेश में भले ही सरकार बदल गयी हो लेकिन बड़े बाबू लोग अभी भी बदलने को तैयार नहीं हैं, पूर्व सरकारों में इन बाबूओं की दबंगई इतनी बढ़ गयी थी कि इनके खिलाफ लिखने वाले पत्रकारों को धमकाया जाता था, पत्रकरों के पीछे गुंडे लगा दिए जाते थे. अब योगी सरकार में भी कुछ बाबू ऐसा ही कर रहे हैं.

ऐसे ही एक बाबू हैं प्रतापगढ़ के जिलाधिकारी शरद कुमार सिंह. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता में आने के बाद सभी जिलाधिकारियों को दफ्तर में बैठकर जनता की समस्याएँ सुनने का आदेश दिया था साथ ही यह भी कहा था कि हप्ते में एक दो दिन बाहर भी निकलें और क्षेत्र की समस्याओं और जनता की पीड़ा का अनुभव भी करें.

लेकिन प्रतापगढ़ के DM शरद कुमार सिंह नहीं सुधरे और सिर्फ दो घंटे ही दफ्तर में बैठते हैं बाकी का समय अपने आवास पर रहते हैं, उन्होंने अपने ऑफिस में बोर्ड भी लगवाया है जिसमें सिर्फ दो घंटे 9-11 बही ही जनता की समस्याएँ सुनने का समय लिखा है. जब हमने उनके ऑफिस के बाहर पहुंचकर तस्वीर खींची और उनके नाम की खबर बनाई तो अब वे हमें धमकी दे रहे हैं और एड्रेस पूछ रहे हैं ताकि अपने गुंडों को भेजकर प्रताड़ित कर सकें.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रतापगढ़ जाकर खुद देखना चाहिए कि जिलाधिकारी शरद कुमार सिंह के शासन में कितना भ्रष्टाचार, कितना दुराचार और गन्दगी फैली है. हर अधिकारी भ्रष्ट है, हर कोई घूस मांग रहा है, हम उनके पास गैस एजेंसी द्वारा गैस चोरी की शिकायत लेकर गए थे लेकिन वे ना तो दफ्तर में मिले और ना ही शिकायत पर कोई एक्शन लिया उल्टा धमकी और दे दी. उनका कहना है कि वे हमारे खिलाफ प्रेस काउंसिल में शिकायत कर देंगे. यही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि आपके नाम से प्रतापगढ़ में कई लोग ब्लैकमैलिंग कर रहे हैं, मतलब वे हम पर व्लैकमैलिंग का आरोप भी लगाने वाले हैं, वो तो गनीमत है कि हम फरीदाबाद में रहते हैं वरना वे अपनी पॉवर का इस्तेमाल करके हमारी आवाज दबाने की भी कोशिश करते और हो सकता है कि हमारे परिवार के पीछे गुंडे भी लगा देते जैसा कि उत्तर प्रदेश में पहले से होता रहा है और कई पत्रकारों को जान से मार दिया गया है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस मामले पर तुरंत एक्शन लेना चाहिए, पहले तो उन्हें खुद प्रतापगढ़ जिले में जाकर जिलाधिकारी शरद कुमार सिंह के काम का सर्वे करना चाहिए और उसके बाद एक पत्रकार को धमकाने का जवाब मानना चाहिए. भारत में अभिव्यक्ति की आजादी है और पत्रकारों को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा जाता है और चौथे स्तम्भ को इसलिए धमकाया जा रहा है क्योंकि पत्रकार ने जिलाधिकारी शरद कुमार सिंह की पोल खोली है.
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