Aug 10, 2017

मोदी ने पूरी दुनिया के सामने खोल दिया हामिद अंसारी की जिहादी और साम्प्रदाईक सोच का राज: पढ़ें


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आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूरी दुनिया के सामने उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी की जिहादी और मुस्लिम कट्टरपंथी सोच का राज खोल दिया, आज मोदी ने भरी सभा में हामिद अंसारी की असलियत खोलकर रख दी, मोदी जब हामिद अंसारी की पोल खोल रहे थे तो वे हंस रहे थे और हामिद अंसारी को भी हंसा रहे थे लेकिन वे अपनी बातों से दो दो काम कर रहे थे, एक तो उनके आरोपों के जवाब दे रहे थे और दूसरी दुनिया के सामने उनकी असलियत बता रहे थे.

हामिद अंसारी ने मुस्लिमों की असुरक्षा की बात कहकर भारत का राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है. कल उन्होंने राज्य सभा टीवी को इंटरव्यू देते हुए कहा था कि मौजूद समय में देश के मुस्लिम खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, मुस्लिमों में निराशा और घबराहट का माहौल है. भीड़ की हिंसा मुस्लिमों में डर पैदा कर रही है.

आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें अपने ही ढंग से जवाब दिया. उन्होने हँसते हँसते बड़ी चतुराई से हामिद अंसारी को जवाब दे दिया, हामिद अंसारी भी उनके जवाब को समझ गए और सर झुकाकर हंसने लगे.

उन्होंने कहा कि आपके जीवन का बहुत बड़ा हिस्सा वेस्ट एशिया से जुड़ा रहा है. उसी दायरे में जिन्दगी के बहुत सारे वर्ष आपके गए, उसी माहौल में, उसी सोच में, उसी डिबेट में, आप ऐसे ही लोगों के बीच में रहे. वहां से रिटायर होने के बाद भी आपका ज्यादातर काम उसी तरह का रहा, आप हमेशा माइनॉरिटी कमीशन में रहे, अलीगढ यूनिवर्सिटी में काम करते रहे इसलिए आपका दायरा वही रहा.

मोदी ने कहा कि पिछले 10 तक आपके ऊपर एक अलग जिम्मा रहा और पूरी तरह से एक एक पल संविधान के ही दायरे में आप बंधे रहे, आपने अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाने का प्रयास भी किया, हो सकता है आपके भीतर कुछ छटपटाहट रही हो लेकिन आज के बाद आप मुक्त हो जाएंगे तो आपको बोलने से कोई नहीं रोक पाएगा. अब आपको अपनी मुक्ति का आनंद भी रहेगा और आप अपनी मूलभूत सोच के मुताबिक़ काम कर पाएंगे.

मोदी के कहने का मतलब था कि हामिद अंसारी अपने जीवन में बहुत समय तक मुस्लिम संगठनों और मुस्लिम देशों में राजनयिक के रूप में काम करते रहे, उन्होंने अलीगढ यूनिवर्सिटी में भी काम किया जिसकी विचारधारा ही साम्प्रदाईक है. ऐसे माहौल में काम करते हुए हामिद अंसारी की सोच भी साम्प्रदाईक हो गयी लेकिन वे 10 साल तक यह बातें अपने सीने में रखकर छटपटाते रहे. अब वे मुक्त हो रहे हैं तो अपने विचारधारा के अनुसार सोच सकते हैं और मुक्त होकर फिर से जिहादी मिशन में लग सकते हैं.
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