Aug 15, 2017

गोरखपुर कांड में चौंकाने वाला खुलासा, सामने आया तीसरा नाम, जो ला सकता है भूचाल: पढ़ें


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गोरखपुर कांड में एक और आरोपी का खुलासा हुआ है जो आधिकारिक आरोपी तो नहीं है लेकिन परदे के पीछे सारा खेल उसी का है. इस आरोपी का नाम है पूर्णिमा शुक्ला जो मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल राजीव मिश्रा की बीवी हैं, राजीव मिश्रा भले ही कॉलेज के प्रिंसिपल और हॉस्पिटल के इंचार्ज हैं लेकिन हॉस्पिटल की चाबी पूर्णिमा शुक्ला के हाथों में रहती थी और पूर्णिमा शुल्क्ला के ऊपर बड़े सपाई नेता का हाथ था. अस्पताल में पूर्णिमा शुक्ला के नाम की इतनी दहशत है कि कोई भी स्टाफ उनके आगे चूं तक नहीं कर सकता. मतलब पूर्णिमा शुक्ला ही राजीव शुक्ला और डॉ कफील अहमद के साथ सबकुछ डील करती थीं.

हादसे में पूर्णिमा शुक्ला का क्या हाथ

अब तो सब कुछ साफ़ हो गया है कि योगी सरकार ने 5 अगस्त को ही हॉस्पिटल के बैंक अकाउंट में पैसे जारी कर दिए थे, इसके अलावा हॉस्पिटल के अकाउंट में 1.86 करोड़ रुपये पहले से ही थे. 2 करोड़ रुपये योगी सरकार ने भेजे तो यह रकम 3.86 करोड़ रुपये से ऊपर हो गयी. अगर राजीव मिश्रा चाहते तो यह पैसे ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली फर्म पुष्पा लिमिटेड को पहले ही दिए जा सकते थे लेकिन ऐसा जान बूझकर नहीं किया गया.

सप्लायर को पैसे ना देने की क्या वजह थी?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पुष्पा फर्म के ही BRD मेडिकल कॉलेज में 66 लाख रुपये बकाया थे जिसकी वजह से ऑक्सीजन सप्लाई रोकी गयी थी. अस्पताल के भ्रष्टाचारियों ने कंपनी को यह पैसे जान बूझकर नहीं दिए क्योंकि ये लोग कंपनी से पैसे देने के बदले मोटा कमीशन मांग रहे थे, ये कमीशन राजीव मिश्रा, पूर्णिमा शुक्ला और डॉ कफील खान मिलकर खाते थे. अगर ये लोग चाहते तो कंपनी को कम से कम इतना बता देते कि भाई आपके पैसे हमारे पास आ गए हैं, एक दो दिन बिल बनाने में लगेंगे और आपको पैसे पहुँच जाएंगे. आप ऑक्सीजन सप्लाई मत रोकना वरना बच्चे मर जाएंगे. लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया. ये लोग कमीशन मांगते रहे और उन लोगों ने कमीशन देने से इनकार कर दिया. ना ये मान रहे थे और ना ही वो लोग मान रहे थे, जब इधर के कमीशनखोरों ने अपनी जिद नहीं छोड़ी तो कंपनी वालों ने ऑक्सीजन की सप्लाई रोक दी.

डॉक्टर पूर्णिमा शुक्ला निकली महा कमिशनखोर

डॉ पूर्णिमा शुक्ला के बारे में खबर मिल रही है कि वे अस्पताल के बाहर सभी दुकानों से कमीशन और हप्ता लेती थीं, हर मेडिकल स्टोर से उन्हें कमीशन मिलता था, हर चाय वाला, हर समोसे वाला यहाँ अक की मूंगफली वाला भी उन्हें कमीशन देने को मजबूर था. उनकी इसी कमीशनखोरी ने 65 बच्चों की जान ले ली. 

तीनों मिलकर लूट रहे थे सरकार को

यह भी खबर मिल रही है कि अस्पताल में सरकार फ्री इलाज का दावा करती थी लेकिन ये लोग सरकारी सामानों को बेचकर खा जाते थे और मरीजों को अपने आप से बिस्तर, चद्दर, दस्ताने और अन्य सामान खरीदकर लाना पड़ता था. यही नहीं जहाँ से मरीज ये सब सामान खरीदते थे वहां से भी मैडम को कमीशन मिलता था.

लिक्विड ऑक्सीजन खरीद में भी जमकर कमीशनखोरी

आपको बता दें कि गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में लिक्विड आक्सीजन की उपलब्धता काफी आसान है और सिलेंडर के मुकाबले ये आक्सीजन काफी सस्ती भी होती है. यह भी खुलासा हो रहा है कि लिक्विड आक्सीजन सप्लाई के लिए टेंडर देने में जमकर कमीशनखोरी होती थी, मतलब जो अधिक कमीशन देता था उसे ही टेंडर मिलता था. 

10 अगस्त को तीनों खलनायक गायब थे 

आपको पता चल गया ना कि अस्पताल के खाते में 1.86 करोड़ रुपये पहले से ही मौजूद थे, योगी सरकार ने भी 5 अगस्त को 2 करोड़ रुपये भेज दिए, इस तरह से 5 अगस्त को ही अस्पताल के बैंक खाते में 3.86 करोड़ रुपये हो गए इसके बावजूद भी पुष्पा फर्म को 66 लाख रुपये बकाया राशि नहीं दी गयी क्योंकि कमीशन नहीं मिल रहा था. इन कमीशनखोरों की हरकत तो देखिये, ना तो इन लोगों ने पुष्पा फर्म को पैसे दिए और जब उसनें ऑक्सीजन सप्लाई रोक दी तो तीनों लोग वहां से भाग निकले. 10 जुलाई को ना तो डॉ कफील खान हॉस्पिटल में थे और ना ही डॉ राजीव मिश्रा हॉस्पिटल में थे. सब के सब अपनी जिम्मेदारी से भाग निकले और बच्चे तड़प तड़प कर मर गए. 

होनी चाहिए CBI जांच

अगर इस मामले की CBI जांच हो जाए तो और भी बहुत बड़े खुलासे हो सकते हैं और यह कांड पूरे देश की ऑंखें खोलने का काम कर सकता है. यह भी खुलासा हो सकता है कि इन लोगों ने अब तक कितना सरकारी खजाना लूटा है और कितने बच्चों की जान इनकी वजह से गयी है. यह भी खुलासा हो सकता है कि किस नेता की शह पर ये लोग इतने बड़े बड़े कांड करते थे और किस सपा नेता से इनके सम्बन्ध थे.
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3 comments:

  1. sahb har kaam CBI karegi to nia aur baki sansthan kaha jayenge agar koi neta mila hua niklega to kya hoga salo tak jaach chalegi mukdama hoga uske baad bhi wo lalu saza yafta hone ke baad bhi bahar hi ghum raha hai kya aisa koi kanun in netao ke liye nahi hai jo desh se gadhari karke khule me na ghum sake kabhi khuli sans na le sake aur janta unke pariwar walo ka samajik bahiskar kare

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  2. tv channel ne morning mai , kafeel khaan ko bada hero banaya tha , aur shaam ko uun kee asliyat khul gayee.ITS ALSO A MATTER OF ENQUIRY?.WHY CHANNEL MADE HIM HERO.

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  3. इन लोगों कि सजा तो इनकी पूरी सम्पति कुर्क करके सिर्फ फांसी बनती है !

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