Aug 30, 2017

राम रहीम कांड की जांच करने वाले CBI अफसर ने किया बड़ा खुलासा, किया कांग्रेस का पर्दाफाश, शर्मनाक


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बाबा राम रहीम को दो रेप मामले में 20 साल ही सजा का हर तरफ से समर्थन मिल रहा है. हर कोई इस फैसले की तारीफ कर रहा है. हर कोई सजा सुनाने वाले जज जगदीप सिंह की तारीफ कर रहा है लेकिन अभी तक लोग यह नहीं जानते कि इस मामले की जांच किस CBI अफसर ने ही, उसकी राह में क्या मुश्किलें आयीं और वह जांच पूरी करने में कैसे कामयाब हुआ. आज इस सबका खुलासा होने जा रहा है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अटल सरकार ने CBI को यह मामला 2002 में दिया, उनकी सरकार 2004 तक रही, जब तक उनकी सरकार रही CBI ने थोड़ी जांच की लेकिन जैसे ही 2004 में अटल सरकार चली गयी, CBI ने तीन-चार साल तक कुछ नहीं किया. 2007 में हरियाण हाईकोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लिया और CBI को फटकार लगाते हुए किसी इमानदार अफसर को केस देने का आदेश दिया. हाईकोर्ट ने कई CBI अफसरों का बायोडेटा देखा और DIG मुलिंजा नारायण को इस केस की फाइल थमा दी.

जैसे ही बाबा राम रहीम रेप कांड की फाइल DIG मुलिंजा नारायण को मिली, उन्हें डेरा समर्थकों से धमकी मिलने लगी, लोग उनका एड्रेस ढूँढने लगे लेकिन उन्होंने इमानदारी से काम करना शुरू किया. उसके बाद CBI के सीनियर अफसर उनके पास आये और कहा - आपको यह फाइल बंद करने के लिए केस मिला है. मुलिंजा नारायण ने सीनियर अफसर की बात नहीं मानी और कहा कि मुझे हरियाणा हाईकोर्ट ने यह केस दिया है. उसके बाद CBI अफसर के पास कांग्रेस के बड़े बड़े नेताओं, सांसदों के फोन आने लगे, यहाँ तक की टॉप नेता ने उनके पास फोन किया और केस को बंद करने को कहा लेकिन मुलिंजा नारायण ने किसी की बात नहीं मानी और जांच जारी रखी.

मुलिंजा नारायण ने बताया कि राम रहीम मामले की जांच करना आसान नहीं था क्योंकि डेरा समर्थक मेरे और आरोपी महिलाओं की जान के पीछे पड़े थे. साध्वी चिट्ठी लिखने के बाद मारे जाने के डर से गायब हो गयी थी, मुझे उसे ढूंढकर उसका बयान लेना था साथ ही उसकी रक्षा का भरोसा भी देना था. मैंने उसे ढूँढने की बहुत कोशिश की और अंततः पंजाब के होशियारपुर में उसका पता मिला. उसका परिवार डरा हुआ था, बयान देने को तैयार नहीं था लेकिन जब मैंने उसे भरोसा दिया तो पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने सेक्शन 164 CrPC के तहत बयान दिया और उसका बयान रिकॉर्ड हुआ.

इसके बाद राम रहीम से पूछताछ की बारी आयी तो वह मिलने को तैयार नहीं थे, काफी प्रयासों के बाद राम रहीम ने आधे घंटे पूछताछ का समय दिया. हमने उनसे ढाई घंटे तक पूछताछ की. वे पूछताछ के वक्त दोनों हाथ पीछे करके खड़े रहे. उन्होंने सभ्य दिखने की कोशिश की लेकिन सभी आरोपों से इनकार कर दिया. हालाँकि उनके खिलाफ सबूत थे इसलिए अंततः उन्हें सजा मिली है.

मुलिंजा नारायण ने यह भी बताया कि अभी बाबा राम रहीम के खिलाफ दो हत्या के भी मामले हैं और दोनों मामलों की भी जांच हुई है. दोनों ही केस काफी मजबूत है इसलिए बाबा राम रहीम की सजा बढ़ जाएगी. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मारे गए लोगों में एक पत्रकार भी शामिल है जिसनें डेरा के पापों को दुनिया के सामने लाने का प्रयास किया था. पत्रकार के बेटे ने ही हाई कोर्ट में बाबा राम रहीम के खिलाफ याचिका दायर की थी और न्याय माँगा था.

आपको बता दें कि DIG मुलिंजा नारायण को यह केस 2007 में मिला. उन्होंने 2 साल में जांच पूरी की लेकिन जांच पूरी होने के बाद भी बाबा राम रहीम की फाइल दबा दी गयी क्योंकि केंद्र और राज्य में कांग्रेस की सरकार थी, ये लोग पहले ही बाबा राम रहीम की फाइल बंद करना चाहते थे.अगर 2014 में केंद्र में मोदी सरकार और राज्य में खट्टर सरकार ना आई होती तो बाबा राम रहीम की फाइल अभी भी डिब्बे में बंद पड़ी होती. (Input from Indian Express)
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1 comment:

  1. Mulinja NarayanaDIG-CBI was given the Investigation of the cases agaist Ram Rahim but the congress govt. in Center and in state did not allow the smooth conduct of the enquiry but on contarary Mr Narayana was asked to close the case.Taking risk of life of enquiry officer,the complainentSadhwi and many other witnesses the report was made entirely due to BJP in the Center and State and finally the Rapist is behind the bars.The moment political scenarion changes in the country Ram Raheem may escape from India.Such CULPRITS MUST BE HANGED.THE LAW NEEDS TO BE CHANGED.

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