Jul 13, 2017

पढ़ें, अमरनाथ हमले के पीछे आतंकियों और कांग्रेस पार्टी का उद्देश्य क्या था, ये है असल वजह


why-terrorists-attack-amarnath-yatri-what-is-congress-benefit
आतंकी हमले कांग्रेस सरकारों में भी होते थे और आतंकी हमले बीजेपी सरकारों में भी हो रहे हैं, फर्क सिर्फ इतना है कि कांग्रेस के समय में आतंकी हमले सरकार को डराने के लिए किये जाते थे जबकि बीजेपी सरकार में आतंकी हमले मोदी सरकार को उखाड़ने और कांग्रेस को फिर से वापस लाने के लिए किये जा रहे हैं, आतंकी लोग कांग्रेस को इसलिए वापस लाना चाहते हैं क्योंकि कांग्रेस सरकार में उन्हें बॉर्डर पर कश्मीर आने में छूट मिल जाती है, जिहाद करने की छूट मिलती है, कश्मीर में आतंकी कैम्प चलाने की छूट मिलती हैं, आतंकियों को भर्ती करने की छूट मिलती हैं, आतंकी फंडिंग को कोई रोकने वाला नहीं होता.

आतंकियों को पता है कि जब कांग्रेस सरकार होती है तो भारतीय सैनिकों के हाथ बाँध दिए जाते हैं, कांग्रेस सरकार में आतंकी भारत में कहीं भी आ जा सकते हैं, दिल्ली, मुंबई, कलकत्ता, जयपुर, वे कहीं भी बम धमाके कर सकते हैं और उन्होंने करके दिखाया है लेकिन मोदी सरकार में आतंकियों को बॉर्डर पर ही मार दिया जा रहा है, वे ना तो दिल्ली में धमाके कर पा रहे हैं, ना मुंबई में धमाके कर पा रहे हैं, ना 26-11 जैसा हमला कर पा रहे हैं और ना ही देश को धमाकों से दहला पा रहे हैं, पिछले तीन वर्षों में कम से कम 500 आतंकी बॉर्डर पर मार दिए गए हैं इसलिए मोदी सरकार उनके लिए सही नहीं है, उनके लिए तो कांग्रेस सरकार ही सही है.

आतंकी यह भी जानते हैं कि अगर कांग्रेस सरकार वापस आ गयी तो POK की तरह उन्हें पूरा कश्मीर दे देगी, कश्मीर पाकिस्तान में मिल जाएगा और पाकिस्तान भारत से भी ताकतवर हो जाएगा, अगर पाकिस्तान भारत से अधिक ताकतवर हो गया तो धीरे धीरे भारत के अन्य राज्यों पर कब्ज़ा करके पूरा भारत ही पकिस्तान बना दिया जाएगा, इसलिए उनके लिए कांग्रेस सरकार ही सही है.

इसलिए किया गया अमरनाथ आतंकी हमला

अब हम बताते हैं कि अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमला क्यों किया गया, आतंकियों और कांग्रेस का मकसद था पीडीपी और बीजेपी गठबंधन को तुड़वाकर जम्मू-कश्मीर की सरकार गिराना और उसके बाद राष्ट्रपति चुनाव में NDA उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को हराना. आप यह भी कह सकते हैं कि रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति चुनाव हरवाने के लिए आतंकियों ने अमरनाथ यात्री बस पर हमला किया था, उनका मकसद सभी 50 यात्रियों को मारने का था लेकिन बस मालिक हर्ष देसाई ने अपनी बहादुरी से अताकियों को बस के अन्दर जाने से रोक दिया और सभी यात्रियों की जान बचा ली. अगर सभी यात्री मारे जाते तो देश में बहुत बड़ा हंगामा खड़ा होता, BJP को PDP से गठबंधन तोड़ने और राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की जाती, दोनों पार्टियों में तकरार बढती, दोनों पार्टियों में गठबंधन टूट जाता और इसके बाद PDP रामनाथ कोविंद को समर्थन नहीं देती, वे चुनाव हार जाते, कांग्रेस उम्मीदवार मीरा कुमार राष्ट्रपति बनतीं और कांग्रेस की चाल कामयाब हो जाती.

PDP-BJP गठबंधन क्यों तुडवाना चाहती है कांग्रेस

आपने देखा होगा कि राहुल गाँधी ने क्या बयान दिया - मोदी अपने राजनीतिक फायदे के लिए निर्दोष लोगों को मरवा रहे हैं, राहुल ने ये बयान इसलिए दिया क्योंकि वो चाहते हैं कि बीजेपी वाले कश्मीर में आतंकी हमले का दोष महबूबा सरकार पर लगाकर PDP से रिश्ता तोड़ लें, अगर रिश्ता तोड़ लेंगे तो महबूबा सरकार गिर जाएगी और दोनों पार्टियों के बीच दुश्मनी हो जाएगी, अगर दोनों पार्टियों के बीच दुश्मनी हो जाएगी तो 20 तारीख को राष्ट्रपति चुनाव में PDP नेता BJP का समर्थन नहीं करेंगे और NDA के राष्ट्रपति उम्मीदवार रामनाथ कोविंद चुनाव हार जाएंगे.

राष्ट्रपति चुनाव में BJP को PDP पर पूरा भरोसा

आपको बता दें कि राष्ट्रपति चुनाव में NDA उम्मीदवार रामनाथ कोविंद की जीत PDP, शिवसेना और JDU के समर्थन पर निर्भर करेगी, शिवसेना और JDU ने भले ही रामनाथ कोविंद को समर्थन देने की घोषणा की है लेकिन बीजेपी को शिवसेना और JDU पर पूरा भरोसा नहीं है क्योंकि ये दोनों पीठ में छूरा भी भोंक सकते हैं, हो सकता है कि चुनाव के लिए ये लोग चुपचाप कांग्रेस उम्मीदवार मीरा कमर को वोट दे दें.

BJP को इस वक्त PDP पर पूरा भरोसा है, महबूबा ने रामनाथ कोविंद को समर्थन देने का भरोसा दिया है और वे देंगी भी लेकिन अगर इस वक्त BJP वाले PDP से गठबंधन तोड़ लेंगे तो PDP भी रामनाथ कोविंद को समर्थन नहीं देगी और वे चुनाव हार जाएंगे.

इस वक्त कुछ भी कर सकती है कांग्रेस

कांग्रेस मीरा कुमार को राष्ट्रपति बनवाने के लिए कुछ भी कर सकती है क्योंकि मीरा कुमार राष्ट्रपति बनने के बाद मोदी सरकार के हर काम और पालिसी पर नजर रख सकेंगी, मोदी सरकार पर नकेल लगा सकेंगी, उनपर लोकसभा स्पीकर रहते हुए भी पक्षपात के आरोप लगते थे, राष्ट्रपति बनने के बाद भी वे पक्षपात कर सकेंगी और कांग्रेस को सभी गुप्त सूचनाएं देती रहेंगी.

दूसरी तरफ बीजेपी भी अपनी पसंद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति बनाना चाहती है ताकि कोई उनके काम में बाधा ना डाले, उन्हें मीरा कुमार का इतिहास पता है, उन्हें पता है कि अगर मीरा कुमार राष्ट्रपति बन गयीं तो उनके काम में रोड़े डाले जाएंगे, उनके साथ पक्षपात किया जाएगा, महत्वपूर्ण बिल अटकाए जाएंगे.

इसलिए बीजेपी नेता गाते रहे कश्मीरियत का राग

इसीलिए अमरनाथ हमले के बाद बीजेपी ने महबूबा के खिलाफ नरम रूख बनाए रखा, किसी भी नेता ने उनके खिलाफ बयान नहीं दिया, बीजेपी नेता दिनभर कश्मीरियत जम्हूरियत की राग अलापते रहे और महबूबा से मिलकर रणनीति बनाते रहे, कश्मीर के लोगों को बार बार सलाम ठोंकते रहे. मजबूरी है करना पड़ेगा, अपनी पसंद का राष्ट्रपति जो चाहिए.
नीचे कमेन्ट बॉक्स में अपनी राय लिखें
पोस्ट शेयर करें और फेसबुक पेज LIKE करें
loading...

0 comments: