Jul 15, 2017

पढ़ें, राजनाथ की ऐसी क्या मजबूरी थी कि उन्हें बोलना पड़ा 'कश्मीरियत आज भी जिन्दा है' जबकि


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अमरनाथ आतंकी हमले के बाद आतंकियों से भी अधिक भला बुरा राजनाथ सिंह में कहा जा रहा है, यहाँ तक कि कट्टर बीजेपी समर्थन भी राजनाथ सिंह की बहुत आलोचना कर रहे हैं, कोई उन्हें निंदा मंत्री कह रहा है तो कोई उनका इस्तीफा मांग रहा है, कोई उन्हें सबसे खराब गृह मंत्री बता रहा है तो कोई उन्हें मोदी सरकार का सबसे फेल मंत्री बता रहा है हालाँकि राजनाथ सिंह की मजबूरी कोई नहीं समझ रहा है, कोई नहीं समझ रहा है कि राजनाथ सिंह ने ऐसा एक मजबूरी के तहत कहा था.

क्या कहा राजनाथ सिंह ने
राजनाथ सिंह ने कहा था कि अमरनाथ यात्रियों के ऊपर अनंतनाग में जो आतंकी हमला हुआ है उससे हमें बहुत दुःख पहुंचा है, पूरा देश उस घटना के बाद सदमें में है, यह घटना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद रही है लेकिन मैं अपने कश्मीर के भाइयों और बहनों का अभिनंदन करना चाहता हूँ और उन्हें सोल्युट करना चाहता हूँ, कश्मीर के समाज के हर सेक्शन ने इस घटना की निंदा की है, मैं बार बार कश्मीर की जनता का सलाम करना चाहता हूँ. मैं कह सकता हूँ कि कश्मीरियत की तरो ताजगी आज भी कश्मीर के लोगों में जिन्दा है, अभी तक किसी ने भी इस आतंकवादी हमले की तारीफ नहीं की है. कश्मीर के लोगों ने मेरा हौसला बढ़ाया है और मैं पूरी कश्मीर की जनता को सोल्युट करता हूँ.

क्या सच में कश्मीरियत जिन्दा है
अगर कश्मीरी लोगों ने सच में कश्मीरियत को जिन्दा रखा होता तो अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा के लिए 50 हजार जवानों की जरूरत ही नहीं पड़ती, अगर कश्मीरी लोगों ने सच में कश्मीरियत को जिन्दा रखा होता तो
कश्मीरी हिन्दू पंडितों को कश्मीर से भगाया ही नहीं जाता, उनकी महिलाओं के साथ बलात्कार ना किया जाता, उन्हें शरणार्थी शिविरों में रहने के लिए मजबूर ही नहीं किया जाता.

अगर सच में कश्मीरियत जिन्दा होती तो स्थानीय लोग इस हमले में आतंकियों की मदद ही ना करते और 7 लोग मारे ही ना जाते, इसके अलावा बुरहान वानी जैसे आतंकवादी पैदा ही नहीं हो पाते, अगर कश्मीर के लोगों ने सच में कश्मीरियत को जिन्दा रखा होता तो हजारों पत्थरबाज पैसों के लालच में भारतीय सैनिकों पर पत्थरबाजी ना करते, अगर कश्मीरी लोगों ने सच में कश्मीरियत को जिन्दा रखा होता तो कांग्रेसी नेता सैफुद्दीन सोज कभी नहीं कहते कि वे आतंकवादी बुरहान वानी को जिन्दा रखना चाहते हैं, अगर कश्मीर के लोगों की कश्मीरियत जिन्दा होती तो पूर्व मुख्यमंत्री फारूख अब्दुल्ला और उनके बेटे उमर अब्दुल्ला खुलकर पत्थरबाजों, अलगाववादियों और आतंकवादियों का समर्थन ना करते लेकिन ये लोग खुलकर ऐसा करते हैं.

राजनाथ ने क्यों कहा 'कश्मीरियत आज भी जिन्दा है'
राजनाथ सिंह भी जानते हैं कि कश्मीरियत उसी दिन मर गयी थी जब वहां से लाखों हिन्दू पंडितों को भगा दिया गया था, दरअसल कश्मीर के हिन्दू ही कश्मीरियत थे लेकिन जैसे ही वहां पर मुस्लिम बहुसंख्यक होते गए कश्मीरियत ख़त्म होती गयी और हिन्दुओं को भगाया जाने लगा, 1990 में सभी हिन्दू पंडितों को एक साथ भगा दिया गया.

क्या मजबूरी थी राजनाथ सिंह की
दरअसल NDA उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए बीजेपी को PDP विधायकों के समर्थन की जरूरत है, इसीलिए आतंकी हमले के बाद महबूबा मुफ़्ती पर सुरक्षा चूक के लिए ना ही आरोप लगाया गया और ना ही उनसे कोई सवाल पूछा गया. अगर राजनाथ सिंह कश्मीरियत का राग ना अलापते और महबूबा मुफ़्ती के खिलाफ कड़ा रूख अपनाते तो PDP के साथ गठबंधन टूटने का डर होता और PDP विधायक रामनाथ कोविंद को समर्थन ना देते, यही मजबूरी थी जिसकी वजह से राजनाथ सिंह ने कहा 'कश्मीरियत आज भी जिन्दा है, मैं कश्मीर के लोगों को बार बार सलाम करता हूँ.

राजनाथ सिंह ने जो भी बोला है अपनी पार्टी के हित के लिए बोला है, रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद पर बैठाने के लिए बोला है, देश के भले के लिए बोला है, हालाँकि उनकी मजबूरी कुछ लोग समझ नहीं पाए और उनकी आलोचना करने लगे.
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1 comment:

  1. सच नही बोल सकते तो छोड़ दो कुर्सी।सबसे कमजोर गृहमंत्री है जो सच भी नही बोल सकता।

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