Jul 17, 2017

लालू यादव परिवार पर सबसे बड़े संकट को देखकर सबसे अधिक खुश रहते हैं नीतीश कुमार: पढ़ें क्यों


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लालू यादव परिवार के तोते उड़े हुए हैं, लालू यादव का पूरा कुनबा ही सबसे बड़ी मुसीबत में फंसा हुआ है, पत्नी, दोनों बेटे, बेटी, दामाद, सभी पर FIR दर्ज हो चुकी है, कहा जा रहा है कि सभी के खिलाफ पक्के सबूत हैं क्योंकि लालू यादव के परिवार की अथाह बेनामी संपत्ति चीख चीख कर कह रही है कि भ्रष्टाचार के आरोपों में सच्चाई है. बिहार में महागठबंधन की सरकार है, लालू, नीतीश और कांग्रेस की साझा सरकार है, कहने तो को नीतीश कुमार बिहार सरकार में लालू यादव के साथी हैं लेकिन लालू यदव को सबसे बड़े संकट में देखकर उनकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं है. ऐसा लगता है कि लालू यदव नीतीश कुमार के दोस्त नहीं बल्कि सबसे बड़े विरोधी हैं और विरोधी का सपरिवार सफाया होते देखकर नीतीश कुमार खुश हैं.

आप किसी भी प्रेस कांफ्रेंस में देख लीजिये, लालू यादव और तेजस्वी यादव के तोते उड़े हुए दिख जाएंगे, ये दोनों कई बार मीडिया को भी भला-बुरा कह देते हैं, कई बार भड़क जाते हैं, कई बार अपना आपा खो देने हैं लेकिन आप जब नीतीश कुमार को प्रेस कांफ्रेंस में देखेंगे तो वे हमेशा मुस्कराते रहते हैं, खुश दिखाई देते हैं, मीडिया को भले ही वे कोई बयान ना दें लेकिन हमेशा स्माइल देते हुए निकल जाते हैं. जब मीडिया उनसे लालू के परिवार के बारे में प्रश्न पूछती हैं तो नीतीश कुमार विल्कुल हँसते हुए जवाब देते हैं. नीतीश कुमार को कोई चिंता नहीं है, माथे पर कोई शिकन नहीं है. उनका एक साथी सबसे अधिक परेशान है जबकि नीतीश कुमार सबसे अधिक खुश दिखाई देते हैं.

क्यों खुश रहते हैं नीतीश कुमार

आपको बता दें कि नीतीश कुमार भले ही महागठबंधन में साझीदार हों, भले ही वे लालू यादव के साथ मिलकर बिहार में सरकार चला रहे हों लेकिन दोनों के बीच में स्वार्थ का गठबंधन है. मतलब लालू यादव अपने बेटे तेजस्वी यादव को प्रमोट कर रहे हैं, वे तेजस्वी यादव को अगला मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं और नीतीश कुमार यह बात भली भाँती समझते हैं. अब आप खुद सोचिये, कौन मुख्यमंत्री अपनी कुर्सी पर दूसरे नेता को देखना चाहेगा और वो भी जिसको अनुभव नहीं है. नीतीश कुमार बिहार से प्रेम करते हैं, अपने राज्य को आगे बढ़ते हुए देखना चाहते हैं और काम भी कर रहे हैं लेकिन वे यह भी जानते हैं कि अगर लालू यादव के परिवार का दोबारा बिहार पर कब्ज़ा हो गया तो बिहार फिर से बर्बादी के रास्ते पर चल पड़ेगा और खुलेआम लूट शुरू हो जाएगी क्योंकि लालू यादव खुलेआम स्वीकार करते हैं कि उनके बाहुबली शहाबुद्दीन के साथ सम्बन्ध हैं, बाहुबली को ही बिहार में गुंडाराज का जनक माना जाता है.

आपको बता दें कि 2014 लोकसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार ने घमंड में आकर NDA से नाता तोड़ा था, ऐसा करके उन्होंने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली थी. अगर वे NDA के साथ चुनाव लडे होते भी बिहार में बीजेपी-जेडीयू की ही सरकार होती और नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री होते लेकिन मोदी से जलन की वजह से उन्होंने NDA का साथ छोड़ दिया लेकिन अब उन्हें पता चल चुका है कि NDA में ही उनका भविष्य है, उन्हें पता है कि लालू यादव अपने बेटे को आगे बढाकर उनका पत्ता काट रहे हैं, उन्हें पता है कि लालू यादव कभी ना कभी उनकी पीठ में छूरा जरूर भोंकेंगे क्योंकि लालू ज्यादा दिनों तक अपने परिवार को सत्ता से दूर नहीं रख सकते इसीलिए उन्होंने अनुभव ना होते हुए भी अपने बेटे तेजस्वी को उप-मुख्यमंत्री बना दिया जबकि छोटे बेटे को स्वास्थय मंत्री बना दिया.

अब आप खुद सोचिये तेजस्वी को उप-मुख्यमंत्री बनाने के बाद लालू उन्हें क्या बनाने चाहेंगे, जाहिर है मुख्यमंत्री बनाना चाहेंगे. अगर लालू यादव तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं तो वे किसको हटाना चाहेंगे, जाहिर है नीतीश कुमार को हटाना चाहेंगे. नीतीश कुमार जानते हैं कि 2019 में वापस मोदी की सरकार बनेगी. इधर तेजस्वी यादव उनकी जगह लेना चाहते हैं, ऐसे में नीतीश कहाँ जाएंगे. वे ना तो प्रधानमंत्री बन पाएंगे और ना ही मुख्यमंत्री.

तो इसलिए खुश हैं नीतीश कुमार

अब आपने समझ लिया होगा कि नीतीश कुमार की ख़ुशी का राज क्या है, नीतीश कुमार सोच रहे हैं कि अगर लालू यादव का पूरा कुनबा जेल चला जाएगा तो उनके रास्ते का कोई काँटा ही नहीं बचेगा. अगर तेजस्वी यादव पर आरोप सिद्ध हो गया तो बिहार में लालू परिवार की बहुत बदनामी हो जाएगी. यह भी हो सकता है कि जिस प्रकार से सुप्रीम कोर्ट ने लालू यादव के चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी है उसी तरह से तेजस्वी यादव के चुनाव लड़ने पर रोक लगा दे. अगर ऐसा हो गया तो नीतीश कुमार के रास्ते का काँटा हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा और वे कम से कम 10 साल और मुख्यमंत्री बने रह पाएंगे.

नीतीश कुमार जानते हैं, गिरफ्तार होंगे तेजस्वी

नीतीश कुमार यह भी जानते हैं कि तेजस्वी यादव किसी भी कीमत पर बचने वाले नहीं हैं, जल्द ही लालू यादव के परिवार के कई सदस्य गिरफ्तार किये जाएंगे. आपको शायद यह भी जानकार आश्चर्य होगा कि नीतीश कुमार ने ही नोटबंदी के बाद बेनामी संपत्ति का मुद्दा उठाया था और उनकी ही मांग पर मोदी सरकार ने तुरंत ही 1988 में पास बेनामी संपत्ति के कानून को लागू भी कर दिया था. अब यह भी सवाल उठता है कि क्या लालू परिवार को जेल भेजने के लिए नीतीश कुमार ने बेनामी संपत्ति का मुद्दा उठाया था. क्या नीतीश कुमार को पहले से पता था कि लालू परिवार के पास अथाह बेनामी संपत्ति है, पता क्यों नहीं रहा होगा, आखिर 15 साल से मुख्यमंत्री जो हैं. अगर कोई मुख्यमंत्री अपने राज्य के लुटेरों को नहीं पहचानेगा तो वो कैसा मुख्यमंत्री. अब आप समझ गए होंगे कि नीतीश कुमार की ख़ुशी का राज क्या है.
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