Jul 11, 2017

रक्षा विशेषज्ञों ने कहा, अगर इस पत्थरबाज को दिए गए 10 लाख तो JK सरकार में कोई पॉवर नहीं


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आपने सुना होगा कि पिछले महीनें भारतीय सेना ने हिंसा से बचने के लिए एक पत्थरबाज फारूख अहमद डार को जीप की बोनट पर बाँध लिया था, ऐसा करने से पत्थरबाजों ने भारतीय सेना पर पत्थरबाजी रोक दी थी, अगर सेना फारूख अहमद डार को जीप के आगे नहीं बांधती तो पत्थरबाज सेना पर पत्थरबाजी करते और सेना को भी मजबूरन पत्थरबाजों पर फायरिंग करनी पड़ती, अगर ऐसा होता तो कई पत्थरबाज मारे जाते.

अब कश्मीर के ह्यूमन राईट कमीशन ने उस पत्थरबाज फारूक अहमद डार को 10 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया है जबकि ये पत्थरबाज आतंकियों की मदद करते हैं, सेना पर पत्थरबाजी करते हैं और जिहाद करते हैं. ऐसे में एक पत्थरबाज को 10 लाख का मुआवजा देना रक्षा विशेषज्ञों को समझ में नहीं आ रहा है.

रक्षा विशेषज्ञों ने कहा है कि स्टेट ह्यूमन राईट कमीशन का यह फरमान साबित करता है कि जम्मू और कश्मीर सरकार में कोई ताकत नहीं है. रक्षा विशेषज्ञ पीके सहगल ने कहा कि यह बहुत ही सीरियस और गलत आदेश है, अगर राज्य सरकार SHRC का आदेश स्वीकार करके पत्थरबाज को 10 लाख रुपये देती है तो पत्थरबाजों का हौसला बढेगा और यह भी साबित हो जाएगा कि महबूबा सरकार में कोई पॉवर नहीं है.

पीके सहगल ने यह भी कहा कि SHRC ने अपने आप यह आदेश नहीं दिया है बल्कि अलगाववादियों और आतंकवादियों ने उनपर ऐसा आदेश देने का दबाव बनाया होगा, ऐसे में अगर महबूबा सरकार SHRC का आदेश मानती है तो ऐसा समझा जाएगा कि वह अलगाववादियों और आतंकवादियों का आदेश मान रही है और उसे पॉवर लेस माना जाएगा.

उन्होंने कहा कि आतंकी संगठन लश्करे-तैयबा और जैश-ऐ-मुहम्मद पत्थरबाजों और अलगाववादियों के साथ मिलकर काम करते हैं, यह बहुत बड़ी साजिश है, अगर पत्थरबाज फारूक अहमद डार के मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ है तो क्या सैनिकों का कोई मानव अधिकार ही नहीं है, जब ये पत्थरबाज उनपर पत्थरबाजी करते हैं तो क्या उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं होता.
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1 comment:

  1. If stone pelter is given 10 lakhs on advise of the Human Rights Commission, then what about the Human Rights of the Pandits of the Kashmir Valley, who were persecuted ? What compensation did HR Commission recommend for the Pandits ? Human Rights Commission has no right to give such selective recommendations. If they recommend for one, then must recommend for all victims of human rights violation.

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