Jul 29, 2017

अपनी कविताओं से 10 मिनट में युवाओं को देशभक्त बना देते हैं कवि अमित शर्मा: जन्मदिन पर इंटरव्यू


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भारत की पहचान अगर ऋषियों मुनियों, योगा और विविधता से होती है तो भारत की पहचान कवियों से भी होती रही है, हमारे देश में रवींद्र नाथ टैगोर, बंकिम चंद्र चटर्जी, तुलसीदास, सुर्यकांत त्रिपाठी निराला, कबीर, रहीम, अशोक चक्रधर, गुलजार, जयशंकर प्रसाद, संदीप वशिष्ठ, यति नरसिंहानंद सरस्वती जी महाराज (अमित शर्मा के गुरु) जैसे असंख्य कवि हुए हैं जिन्होंने कविता के साथ साथ भारत को जगाने का भी काम किया है. 

भारत भले ही कवियों के देश के नाम से पहचाना जाता है लेकिन पिछले चार-पांच दशकों से जिस तरह से हिंदी भाषा को नजरंदाज किया गया और जिस तरह से लोग अंग्रेजी के पीछे भागने लगे उससे कवि लोग भी कविता छोड़कर अलग प्रोफेशन अपनाने लगे लेकिन पिछले पांच चार पांच से फिर से हिंदी का प्रचार प्रसार बढ़ा है और एक से एक कवि उभरकर सामने आ रहे हैं. इन्हीं कवियों में से आज हम आपका परिचय कराने जा रहे हैं युवा कवी अमित शर्मा से जिन्होंने छोटी सी उम्र में ही धमाल मचा रखा है.

अमित शर्मा किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं, वे उत्तर प्रदेश के नॉएडा के रहने वाले हैं. पिछले 2 -3 वर्षों से उन्होने कवि जगत में बहुत नाम कमाया है, हाल ही में उनकी असहिष्णुता पर एक कविता ने सोशल मीडिया पर धमाल मचा दिया। कुल मिलाकर कहें तो अगर कोई युवक अमित शर्मा की कविता को 5-10 मिनट भी सुन ले तो उसके अन्दर देशभक्ति जाग उठती है.

30 जुलाई को उनका अमित शर्मा का जन्मदिन है इसलिए हमने उनका विशेष इंटरव्यू लिया है ताकि उनके विचारों को देश के सामने लाया जा सके और हमारे देश के युवा उनके जीवन से प्रेरणा ले सकें.

युवा कवि अमित शर्मा, जन्मदिन पर विशेष साक्षात्कार

असहिष्णुता पर आपकी कविता ने धमाल मचा रखा है, कैसे ख्याल आया इस कविता का 

जवाब: देखिये, हम  तो युगों युगों से 'सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयः' की सोच रखने वाले, प्रत्येक जीव से प्रेम करने वाले, सत्य सनातन धर्म को मानने वाले लोग हैं. इंसान तो बहुत दूर की बात है, हमारा धर्म तो हमें पशु पक्षी और पेंड पौधों से भी प्रेम करना सिखाता है. इसीलिए हम प्रकृति का पूजन करते हैं, चाहे वृक्ष हों, नदी हों, पहाड़ हों या धरती माँ हो, अब ऐसे संस्कारों को जीने वाले और ऐसे संस्कारों को दुनिया में फ़ैलाने वाले महानतम धर्म के अनुयायियों को ही जब असहिष्णु बताया जाने लगे तो एक सच्चे कलमकार का खून कैसे नहीं खौलेगा? बल्कि मुझे तो मेरी माँ वाणी ने आदेशित किया कि सहिष्णुता की सही व्याख्या को दुनिया के सामने रखने के लिए ही मैंने कलम उठायी और माँ सरस्वती ने वो कविता दुनिया को आइना दिखाने के लिए मेरी वाणी से निकाल दी.

असहिष्णुता पर आपकी क्या राय है?

जवाब: मैं असहिष्णुता पर अब क्या राय दूँ ? मेरी कविता में मेरी पूरी राय है और वो भी तथ्यों सहित है जिसे मैंने विस्तारपूर्वक कहने की कोशिश की है.


देश में कहाँ है ज्यादा असहिष्णुता, मध्य भारत, बंगाल या कश्मीर
जवाब: विज्ञान की भाषा में अगर सच बोलूँ तो असहिष्णुता देश के उन हिस्सों में ज्यादा है जहाँ इस संक्रमण के खिलाफ वैक्सीन नहीं लगाई गयी. देश में यह संक्रमण काश्मीर से होते हुए केरल, बंगाल के रास्ते अन्य हिस्सों में फ़ैल रहा है. मुझे दुःख इस बात का होता है कि असहिष्णुता फैलाने वाले लोग ही चंद वामपंथियों की मदद से उन्हें असहिष्णु बताने का प्रयास कर रहे हैं जो वास्तव में सहिष्णु हैं. कश्मीर में हिन्दू जिस दौर से गुजरकर विस्थापित हो चुके हैं, बंगाल में भी वह दौर लगभग पूरा होने वाला है. यह सब हमारी सहिष्णुता के कारण ही है. कभी कभी लगता है कि काश हम असहिष्णु ही होते तो ...।

मोब लिंचिंग पर आपकी क्या राय है

जवाब: देखिये, कानून को हाँथ में लेना निश्चित तौर पर उचित नहीं है, लेकिन हमें सबकी भावनाओं का भी ख्याल रखना चाहिए। अब अगर खुले आम सड़कों पर चंद गुंडे गौ-हत्या करेंगे तो मोब लिंचिंग नहीं होगी तो क्या होगा? कानून का पालन हो इसके लिए यह भी आवश्यक है कि कानून धार्मिक भावनाओं को संरक्षण प्रदान करे.

क्या सच में बढ़ गयी है मोब लिंचिंग

जवाब: मुझे ऐसा इसलिए नहीं लगता क्योंकि पहले घटनाओं को गाँवों, कस्बों, शहरों में ही दबा दिया जाता था. क्योंकि उस समय इंटरनेट इतना सक्रिय नहीं था. अब घटना चाहे कम हों किन्तु उनको पेश करने के तरीकों में बदलाव आया है. अगर कहीं 1-2 घटनाएँ हुईं भी हैं तो ठीक उसी तरह हुईं हैं जैसे सौवीं गाली देते ही श्री कृष्ण भगवान ने शिशुपाल का सर काट दिया था.

गौ हत्या पर आपकी क्या राय है

जवाब: गौ हत्या पर मेरी क्या राय हो सकती है?  हमारे वेदों पुराणों के माध्यम से ऋषि मुनि पहले ही सब बता गये हैं. हमें उसका ही पालन करना है. गौ पूज्यनीय है. जैसे गाय की चर्बी से बने कारतूसों के प्रयोग से एक मंगल पाण्डेय ने मेरठ से 1857 की क्रांति ला दी थी. आज यदि प्रत्येक शहर मेरठ बन जाए और प्रत्येक मेरठ में एक मंगल पाण्डेय मिल जाए तो गौ हत्या तो दूर की बात है, गाय को देखकर सभी लोगों का मस्तक श्रद्धा से अपने आप झुक जाया करेगा।

गौरक्षक लोग गौतस्करों को पीटकर सही कर रहे हैं या गलत

जवाब: वैसे कानून को हाँथ में लेना उचित नहीं है किन्तु जब कानून अँधा और लंगड़ा हो जाता है तो विवश होकर 'सठे साठ्यम समाचरेत' की नीति अपनानी पड़ती है.

गौरक्षकों को क्या सन्देश देना चाहेंगे

जवाब: मैं गौ रक्षकों से मिला हूँ. देश के कई राज्यों के गौ रक्षकों को मैं बेहद करीब से इसलिए जानता हूँ क्योंकि हमने देश के कई हिस्सों में गौ-कवि सम्मेलन किये हैं. वो रात रात भर जागकर पहरा देते हैं, वे अपना घर परिवार छोड़कर इसलिए नाका देते हैं ताकि दुष्ट कसाई लोग गाय और बछड़ों को बूचड़खानों में न पहुँचा दें. कहीं उनके सो जाने से किसी गाय की जान न चली जाए. वे लोग जो बिना किसी लोभ के अपने घर का पेट्रोल-डीजल फूंककर, रात रात भर जागकर, घर परिवार से दूर रहकर गौ-रक्षा कर रहे हैं, वो नमन करने योग्य हैं. मैं उनसे यही कहना चाहूँगा कि वो विषम परिस्थितियों में गौ रक्षा करते हैं, स्वयं का भी ख्याल रखें।

आपने कहा कि देश का सही बंटवारा होना चाहिए था, सही बंटवारे का मतलब क्या है?

जवाब: सही बंटवारा का वही उद्देश्य है जिसके कारण देश बंटवारा हुआ था. बंटवारे की मांग करने वाले ने कहा था कि मुसलमानों को अलग देश दो. उनका रहन सहन, खान पान, रीति रिवाज अलग है इसलिए वो एक साथ नहीं रह सकते। इसलिए जिस आधार पर बंटवारा हुआ था, उस समय उसका पालन होना चाहिए था.

देश में आज जो भी समस्याएँ हैं उसका जिम्मेदार कौन है

जवाब: देश में आज जो भी समस्याएं हैं उनके जिम्मेदार वे लोग हैं जिन्होंने सबसे ज्यादा समय तक देश में राज्य किया है। जिन्होंने देश की शिक्षा की दिशा और दशा तय की थी. जिन्होंने यह निश्चित किया कि बच्चों को क्या पढाया जाये और क्या नहीं ? कौन सी किताब पढ़ाई जाएगी किस पर पाबंदी रहेगी? सिर्फ सत्ता और वोट बैंक के लालच में आरक्षण और जातिवाद का ऐसा जहर समाज में फैलाया गया है, जिसे समेटना मुश्किल हो रहा है. फिर भी समस्या है तो देर सबेर समाधान भी निकलेगा, क्योंकि 'शूरवीर तो बाधाओं से हँसकर हाँथ मिलाते हैं'. 

इस्लामिक कट्टरपंथ पर आप क्या कहना चाहेंगे

जवाब: इस्लामिक कट्टरपंथ युवाओं को गलत दिशा में ले जा रहा है. यह पूरी दुनिया सहित इस्लाम के लिए भी खतरा है |

मुस्लिमों को क्या सन्देश देना चाहेंगे

जवाब: हिन्दुस्तान में रहने वाले मुस्लिमों के पूर्वजों ने स्वेच्छा से जिन्ना की विचारधारा को नापसंद किया था. इसलिए अब उन्हें प्रेमपूर्वक सत्य सनातन विचारधारा को ही मानना चाहिए। जिन चंद लोगों को जिन्ना की विचारधारा से प्रेम हो गया है उनके लिए जाने के द्वारा खुले हैं.

देश के युवाओं को क्या सन्देश देना कहेंगे

जवाब: देश के युवाओं को मेरा स्पस्ट सन्देश है कि पूरे देश में राष्ट्रवादी विचारधारा का प्रसार हो. देश की अखंडता, प्रभुसत्ता, संप्रभुता अक्षुण रहे. अंत में देश बड़े शायर दादा मासूम गाजियाबादी जी के दो शेर और कहता हूँ - 

तुम्हारा दर्द हो महसूस हमको।
हमारे दर्द में तुम तिलमिलाओ।।
करें माहौल इक तैयार ऐसा।
ख़ुशी हमको मिले तुम मुस्कुराओ।।

आप के पसंदीदा कवि कौन हैं, जिनसे आप प्रेरणा लेते हों

जवाब: मैंने हमेशा अपने गुरु यति नरसिंहानंद सरस्वती जी महाराज के व्यक्तित्व से प्रेरणा ली है और उन्हें ही अपना गुरु मानता हूँ, इसके अलावा मुझे संदीप वशिष्ठ जी की भी कविताएँ पसंद हैं. उन्होंने साहित्य में मेरा तन, मन, धन से साथ दिया है.

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(इंटरव्यू समाप्त)
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