Jul 16, 2017

कड़वा सवाल, क्या मोदी अब बदल रहे हैं, गौ-हत्यारों को नहीं गौ-रक्षकों को देंगे कड़ी सजा


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2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी को ऐसे ही जीत नहीं मिली थी, उन्हें हिन्दुओं ने इसलिए एकजुट होकर वोट दिया था क्योंकि उन्होंने हिन्दुओं के लिए जमकर वादे किये थे, 2014 से पहले मोदी कहते थे कि हम गौ-हत्या पर बैन करा देंगे, गौ-हत्यारों को कड़ी सजा देंगे, हिन्दुओं का पलायन रोक देंगे, धारा 360 लगा देंगे, यूनिफार्म सिविल कोड लागू कर देंगे, राम मंदिर बना देंगे आदि.

तुस्टीकरण की वजह से हिन्दू लोग कांग्रेस से पहले ही नाराज थे, इसलिए मोदी पर भरोसा करके उन्हें एकतरफा वोट दिया और बीजेपी की बम्पर जीत हो गयी.

अब मोदी सरकार के तीन साल पूरे हो गए हैं तो उन्हें गौ-रक्षकों से अधिक गौहत्यारों और गौ-तस्करों की चिंता हो रही है, वोटों के लिए लगभग सभी बीजेपी शासित राज्यों में गौ-हत्या और गौ-मांस पर बैन तो लगा दिया गया है लेकिन गौ-हत्यारों पर ना ही पुलिस एक्शन लेती है और ना ही सरकार कोई कड़ा कदम उठा रही है.

क्योंकि गौ-रक्षक बीजेपी सरकार पर भरोसा करते हैं लेकिन उन्हें पुलिस और प्रशासन पर भरोसा नहीं है क्योंकि गौरक्षक मेहनत करके गौ-हत्यारों को पकड़वाते हैं लेकिन पुलिस वाले घूस लेकर उन्हें छोड़ देते हैं, मोदी सरकार के तीन साल हो गए लेकिन आज तक किसी भी गौ-हत्यारे को कड़ी सजा नहीं मिली है.

जब गौ-रक्षकों ने देखा कि पुलिस और प्रशासन घूस लेकर गौ-हत्यारों को छोड़ देते हैं तो उन्होंने खुद ही गौ-हत्यारों को पीटना शुरू कर दिया. कानून अपने हाथ में लेना शुरू कर दिया. कई ऐसे मामले सामने आये हैं जब गौ-हत्यारों और गौ-तस्करों को जमकर पीटा और कई मामलों में उनकी हत्या भी कर दी गयी.

गाय की रक्षा के लिए किसी की जान लेना कानूनन जुर्म है और मोदी को ऐसे लोगों को सजा देनी चाहिए लेकिन हम से कम उन्हें 2014 वाला वादा भी तो याद रहना चाहिए, उनके ऐसा कहने में कोई बुराई नहीं है कि हम हिंसा करने वाले गौ-रक्षकों को कड़ी सजा देंगे लेकिन उन्हें ये भी तो कहना चाहिए कि हम गौ-तस्करों और गौ-हत्यारों को कड़ी सजा देंगे, उन्हें यह भी तो कहना चाहिए कि गौ-रक्षक खुद कानून हाथ में लेने के बजाय गौ-हत्यारों की शिकायत पुलिस में करें, गौ-हत्यारों को जरूर पकड़ें लेकिन उन्हें पीटने के बजाय पुलिस को सौंप दें. 

दुर्भाग्य से मोदी ऐसा नहीं बोल रहे हैं. अब वे एकतरफा कार्यवाही की बात कर रहे हैं. 2014 में एकतरफा गौहत्यारों पर कार्यवाही की बात करते थे तो 2017 में एकतरफा गौ-रक्षकों पर कार्यवाही की बात कर रहे हैं. अब सवाल उठता है कि क्या मोदी बदल रहे हैं.
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