Jul 28, 2017

हारकर भी जीत गए तेजस्वी यादव, बेटे की तरक्की से लालू खुश हैं


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पटना: कहावत हैं जो होता है अच्छे के लिए होता है, बिहार में जो कुछ भी हो रहा वह अच्छे के लिए ही हो रहा है। 8 नवम्बर 1989 में जन्मे तेजस्वी प्रसाद यादव जो एक क्रिकेटर भी थे अचानक वे बिहार के राघोपुर विधानसभा से चुनाव जीतकर विधायक बन गए और उन्हें एक ही झटके में बिहार का उप मुख्यमंत्री बना दिया गया. अब उनपर भ्रष्टाचार का मामला चल रहा है लेकिन अगर वे दोषी साबित नहीं हो पाए तो यह राजनीतिक विवाद तेजस्वी यादव के लिए बहुत बढ़िया साबित होगा और वे बिहार के बड़े नेता बन जाएंगे.

आपको बता दें कि अब तक तेजस्वी यादव अपने पिता लालू यादव की पहचान से जाने जाते थे लेकिन अब उनकी खुद की पहचान है भले ही यह पहचान भ्रष्टाचार और होटल टेंडर घोटाले में नाम आने से मिली है.

अब जब बिहार में महागठबंधन ख़त्म हो गया है और तेजस्वी यादव की उप मुख्यमंत्री की कुर्सी भी जा चुकी है, ऐसे में कहा जा रहा है कि लालू के परिवार का राजनीतिक भविष्य खतरे में है। सिक्के के दो पहलू होते हैं, वर्तमान समय में सिक्के का उछाल नीतीश की तरफ है लेकिन ये सिक्का कभी भी तेजस्वी के पक्ष में भी हो सकता है। लालू यादव उम्र दराज हो चले हैं इसलिए बिहार को लालू का विकल्प चाहिए था जो अब तेजस्वी के रूप में मिलता नजर आ रहा है। ताजा राजनीतिक घटनाक्रम की वजह से तेजस्वी को अपने आप पहचान मिल गयी है। 

इससे पहले जब वो अचानक उप मुख्यमंत्री बने थे तो उन्हें राजनीतिक दांव-पेंच की अधिक जानकारी नहीं थी। वे ना तो कभी किसी धरना प्रदर्शन में शामिल हुए थे और ना ही उन्हें आरोप-प्रत्यारोप की जानकारी थी। शुक्रवार जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार विधानसभा में बहुमत जुटा रहे थे तो तेजस्वी यादव की स्पीच एक मंझे हुए नेता की तरह थी। लगता है ताजा वर्तमान घटनाक्रम से उन्हें बड़ी सीख मिली है। विधानसभा में  तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार को बॉस कहकर संबोधित किया। उन्होंने नीतीश को चुनौती देने वाले लहजे में कहा कि अगर हिम्मत थी तो मुझे मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर देते। तेजस्वी ने कहा कि आपका राजनीतिक वजूद खत्म हो रहा था तब आरजेडी ने आपका साथ दिया। उन्होंने कहा कि आप चंपारन यात्रा निकालते हैं, और बापू के हत्यारे की गोद में जाकर बैठ जाते हैं, सीएम जी रणछोड़ हो गए हैं। तेजस्वी ने कहा कि 28 साल की उम्र में मैं क्या नहीं झेल रहा हूं, पहले बीजेपी ने बिहार की बोली लगाई थी, इस बार सीएम की बोली लगाई है। 

तेजस्वी एक एक शब्द कुछ ऐसा बोल रहे थे जिसे देखकर लगा कि वाकई में तेजस्वी अब नेता बन गए हैं। महागठबंधन टूटने से लालू यादव दुखी तो होंगे लेकिन उन्हें खुशी भी होगी कि उनका तेजस्वी अब असली नेता बन गया है। कल एक टीवी चैनल के पत्रकार से बात करते हुए लालू यादव ने कहा था कि ताजा घटनाक्रम से मेरा तेजस्वी और मजबूत होगा। लालू का कथन सच सा साबित होता है। आने वाले समय में तेजस्वी बिहार विधानसभा में मजबूत विपक्षी नेता की भूमिका में दिख सकते हैं। आज विधानसभा में उन्होंने नीतीश पर आरोप लगाया कि उन्होंने भाजपा से मिलकर दलित, अल्पसंख्यक और पिछड़े वर्ग के लोगों को धोखा दिया है। बिहार की राजनीति उन्ही तीन वर्गों पर टिकी है। तेजस्वी आने वाले समय में इन्ही वर्गों को एक सूत्र में बांधते दिख सकते हैं। अगर वे भ्रष्टाचार के मामले से बच निकले तो उन्हें लालू की पहचान की जरूरत नहीं पड़ेगी, तेजस्वी यादव खुद एक बड़े नेता बन जाएंगे और नीतीश कुमार को कड़ी टक्कर देंगे.
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