Jul 28, 2017

कांग्रेसी मुख्यमंत्री को हिंदी भाषा से इतनी नफरत, मोदी सरकार से कहा 'हिंदी नामों को मिटाओ'


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कर्नाटक से एक हैरान करने वाली खबर आयी है, कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है और वहां के मुख्यमंत्री ने मोदी सरकार को पत्र लिखा है कि मेट्रो स्टेशन पर हिंदी में लिखे सभी नाम मिटाए जाँय, ऐसा लगता है कि कर्नाटक में भाषा के नाम पर राजनीति की जा रही है और देशवासियों को भाषा के नाम पर बांटने का प्रयास किया जा रहा है.

आपको बता दें कि बैंगलोर मेट्रो स्टेशनों पर तीन भाषा में साइन बोर्ड लगे हैं - हिंदी, इंग्लिश और कन्नड़. कर्नाटक के मुख्यमंत्री चाहते हैं कि हिंदी को हटाकर सिर्फ इंग्लिश और कन्नड़ में ही साइन बोर्ड लगें, मतलब वहां पर हिंदी भाषा का अपमान करने की कोशिश की जा रही है जबकि यह देश को जोड़ने वाली भाषा बनती जा रही है, पूरी दुनिया में इंग्लिश और चीनी भाषा के बाद हिंदी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है लेकिन अब इस भाषा का हमारे ही देश में अपमान किया जा रहा है, ऐसा लगता है कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार हिंदी भाषा को ख़त्म करना चाहती है और वहां की जनता को भाषा के नाम पर बांटना चाहती है, एक दूसरे को लड़ाना चाहती है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कर्नाटक की एक कट्टर कन्नड़ संस्था 'कर्नाटक रक्षण वेदिके' ने हिंदी भाषा के खिलाफ अभियान चला रखा है, कुछ दिनों पहले इस संस्था के लोगों ने कई मेट्रो स्टेशनों पर लिखे हिंदी नामों को मिटा दिया था. इसी संस्था की मांग पर कांग्रेस सरकार हिंदी भाषा को कर्नाटक से ख़त्म करने जा रही है. आश्चर्य इस बात का है कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने बहुत आसानी से उनकी मांगें मान ली.

अब अगर केंद्र सकरार भी कांग्रेस सरकार की बात मान लेती है और कर्नाटक से हिंदी भाषा को ख़त्म किया जाता है तो करोड़ों हिंदी भाषी लोगों का क्या होगा, कर्नाटक के बड़े बड़े शहरों में करोड़ों हिंदी भाषी लोग नौकरी के लिए जाते हैं, वैसे भी हमारे देश के 70 फ़ीसदी लोग हिंदी भाषा बोलते हैं, ऐसे में हमारे ही किसी राज्य द्वारा हिंदी भाषा को ख़त्म करने की मांग करना हैरान करने वाला है. 

हो सकता है कि कर्नाटक के बाद बंगाल, तमिलनाडु, केरल और अन्य राज्य भी हिंदी भाषा को ख़त्म करने की मांग करना शुरू कर दें, अगर ऐसा हुआ तो भाषा के नाम पर नफरत शुरू हो जाएगी और इसकी जिम्मेदार कांग्रेस पार्टी होगी. आप अगर ध्यान दें तो खुद राहुल गाँधी हिंदी भाषा में भाषण देते हैं, अगर राहुल हिंदी भाषा में भाषण ना दें तो उनकी बात कोई ना समझ पाए, देश के अधिकांश लोग हिंदी पढ़ना और बोलना चाहते हैं, इन्टरनेट पर भी हिंदी का प्रचार प्रसार बढ़ा है, ऐसे में हिंदी भाषा से इतनी नफरत हैरान करने वाला है.
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