Jul 18, 2017

जहाँ लग रहा है बीजेपी पर आवाज दबाने का आरोप, वहां चलती है कांग्रेस और विपक्ष की दादागिरी


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जिस राज्य सभा में भारतीय जनता पार्टी और मोदी सरकार पर मायावती की आवाज दबाने का आरोप लगाया जा रहा है उस राज्य सभा में कांग्रेस और विपक्ष का बहुमत है, वहां पर कांग्रेस की दादागिरी चलती है, कांग्रेस की मर्जी के वहां पर कुछ भी नहीं हो सकता क्योंकि राज्य सभा में इस वक्त चेयरमैन भी कांग्रेस के ही हैं और डिप्टी चेयरमैन भी कांग्रेस पार्टी के हैं, यही नहीं राष्ट्रपति प्रणब मुख़र्जी भी पूर्व में कांग्रेसी ही रहे हैं.

आज भारत के लिए बहुत ही शर्मनाक दिन रहा, मायावती को सिर्फ तीन मिनट बोलने की परमिशन थी क्योंकि यह शॉर्ट ऑवर डिस्कशन था, यहाँ पर बोलने के लिए 20 लोग लाइन में खड़े थे इसलिए डिप्टी चेयरमैन कुरियन ने सभी सदस्यों को 3-3 मिनट का समय दिया, लेकिन मायावती पहले से ही कुछ बड़ा सोचकर आयी थीं इसलिए उन्होने सहारनपुर दंगों पर भाषण देना शुरू कर दिया.

मायावती को बीजेपी नेताओं ने नहीं रोका था, उन्हें तो डिप्टी स्पीकर ने रोका था क्योंकि उनके तीन मिनट पूरे हो गए थे, यही नहीं उन्होंने 3 मिनट की जगह 5 मिनट बोल लिया था, मायावती आज शॉर्ट ऑवर डिस्कशन में ही भाषण देना चाहती थीं, आवाज तो वह उन लोगों की दबा रही थीं जिन्हें डिप्टी स्पीकर ने 3 मिनट बोलने के लिए दिए थे लेकिन मायावती उनका हक मारना चाहती थीं, वे अपना इन्तजार कर रहे थे लेकिन मायावती भाषण देती जा रही थीं और रुकने का नाम नहीं ले रही थीं, मजबूरी वश कुरियन ने घंटी बजा दी और उन्हें बोलने से रोक दिया. इसके बाद तो मायावती ने जैसे आपा ही खो दिया और इस्तीफ़ा देने की धमकी दे डाली. 

यहाँ पर ध्यान देने वाली बात यह है कि पीजे कुरियन कांग्रेसी नेता थे, उन्हें कांग्रेस ने डिप्टी चेयरमैन बनाया था, मायावती को उन्होंने ही बोलने से रोका था, इसलिए बोलने से रोका था क्योंकि उनका समय पूरा हो गया था लेकिन मायावती ने आवाज दबाने का आरोप मोदी सरकार और बीजेपी सदस्यों पर लगाया गया इसका मतलब है कि उन्होंने सहारनपुर का मुद्दा जान बूझकर उठाया, जान बूझकर बोलने में अधिक समय लिया, जान बूझकर बोलने से रोकने के लिए उकसाया और जान बूझकर बीजेपी पर आरोप लगाते हुए मायावती ने इस्तीफ़ा दे दिया.

इससे भी हैरानी की बात है कि राज्य सभा में कांग्रेस और विपक्ष की दादागिरी चलती है, आपने खुद देखा होगा कि विपक्ष ने 2 साल तक किस तरह से हंगामा, नारेबाजी और शोर शराबा करके GST और अन्य महत्वपूर्ण बिलों को लटकाए रखा, यह सब इसीलिए क्योंकि राज्य सभा में इनका बहुमत है, बहुमत होने की वजह से इनकी दादागिरी चलती है. अब सवाल यह है कि जहाँ कांग्रेस और विपक्ष ने तीन साल तक दादागिरी दिखाए, जमकर हंगामा किया और राज्य सभा की कार्यवाही को बाधित किया, खुद मायावती ने पता नहीं कितनी बार राज्य सभा में गुंडई दिखाई लेकिन आज उन्होने बीजेपी पर आवाज दबाने का आरोप लगाया दिया.
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