Jun 18, 2017

पत्थरबाजों और अलगाववादियों पर नरम हैं महबूबा क्योंकि PDP की जीत में उन्हीं लोगों का है योगदान


why-mehbooba-mufti-soft-on-separatists-and-stone-pelter-jihadis

Srinagar, 18 June: कल 6 शहीद पुलिसकर्मियों को श्रधांजलि देने के बाद महबूबा मुफ़्ती ने बयान दिया था कि बन्दूक और सेना से कश्मीर समस्या का समाधान नहीं हो सकता, कश्मीर समस्या के समाधान के लिए बातचीत करनी ही पड़ेगी. 6 पुलिसकर्मियों की हत्या आतंकवादियों ने की थी, कोई और मुख्यमंत्री होता तो गुस्से से लाल हो जाता और आतंकवादियों को कड़ा सन्देश देता लेकिन महबूबा मुफ़्ती सॉफ्ट बनीं रहीं, ऐसा लगा ही नहीं कि उन्हें पुलिसकर्मियों की मौत का दुःख है.

महबूबा मुफ़्ती के इस बर्ताव से पुलिसकर्मियों के अन्दर निराशा के साथ साथ गुस्सा भी है, एक पुलिस अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती 2014 चुनाव में जीत के लिए अलगाववादियों यानी जमात-ए-इस्लामी की अहसानमंद हैं, अलगाववादियों ने कश्मीर के अलगाव की आशा के साथ PDP को वोट दिया था, महबूबा मुफ़्ती उसी अहसान का बदला चुका रही हैं इसीलिए अलगाववादियों और पत्थरबाजों के साथ वे नरमी से पेश आ रही हैं.

अगर आपको याद ना हो तो बता दें, 2014 से पहले जम्मू कश्मीर में कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस की सरकार थी, उस वक्त महबूबा अलगाववादियों और पत्थरबाजों का समर्थन करती थीं, इसी वजह से 2014 चुनाव में अलगाववादियों और पत्थरबाजों ने महबूबा यानी PDP को अपना समझकर वोट दिया, PDP ने कश्मीर में 30 में से 26 सीटें मिलीं.

अब आप खुद सोचिये, जिन अलगाववादियों ने 2014 चुनाव में कश्मीर के मुसलमानों से महबूबा की पार्टी PDP को वोट देने की अपील की थी, महबूबा उनपर कठोर कैसे हो सकती हैं, इसीलिए महबूबा ने पुलिस के जवानों को भी आदेश दिया है कि आतंकवादियों से लड़ते वक्त नरमी से पेश आयें. यही वजह थी कि 6 पुलिसकर्मियों को आतंकवादियों ने ख़त्म कर दिया और इन बेचारों ने महबूबा के आदेश का पालन करने के चक्कर में अपनी जान गँवा दी.

महबूबा जानती हैं कि अलगाववादी ही कश्मीरी जिहादियों को पुलिसवालों के खिलाफ भड़काते हैं और ये जिहादी आतंकवादी बनकर पुलिसकर्मियों की जान ले रहे हैं इसके बावजूद भी वे अलगाववादियों पर सॉफ्ट हैं और उनसे बातचीत करने की सलाह दे रही हैं.
नीचे कमेन्ट बॉक्स में अपनी राय लिखें
पोस्ट शेयर करें और फेसबुक पेज LIKE करें
loading...

0 comments: